“The Story of A Toilet”

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Hello friends….This is The Story of A Toilet
Set करेगा जो, आज हम सबका एक Clean Mindset.

तो लीजिये जनाब, पेश-ए-ख़िदमत है सुपरस्टार संडास की कहानी
उम्मीद है यह आपको ज़रूर पसंद आयेगी, खुद उसी की जुबानी।

अब अगली आवाज़ आपको, Technically Toilet की सुनाई देगी
Welcome to Flashback, जहाँ Flush की Photo दिखाई देगी।

पहले तो तुम्हे मेरा नाम लेने में भी बहुत शर्म आती थी
जहाँ देखो जिधर देखो, Public मुझे गंदा कर जाती।

किसी C-grade Picture की तरह था हाल मेरा
सिर्फ एक Sweeper ही समझता था हाल मेरा।

सवेरे-सवेरे उठते ही, तुम लोग मेरे पास दौड़े चले आते
Motion और Emotion, दोनों से ही Free होकर जाते।

बरसों की वो मेहनत मेरी, समझ आ रही तुमको अभी
फिर भी गर न समझे तो, समझ जाओगे कभी न कभी।

संसद में उठने लगा है, अब तो सवाल मेरा
बदल रहा है आजकल, सूरत-ए-हाल मेरा।

किसी Celebrity की तरह चर्चित हूँ मैं
नहीं वो अब, पहले की तरह वर्जित हूँ मैं।

किसी खुशबूदार Toilet Cleaner से नहीं
बल्कि बदलती हुयी सोच से परिमार्जित हूँ मैं।

मुझको लेकर बड़े-बड़े सितारें
आजकल बड़ी-बड़ी फिल्में बना रहे।

नेता अभिनेता Comedian खिलाड़ी
मुझको अपना Twitter Trend बना रहे।

पहले जो लोटा लेकर खेतों में जाते थे
अब वो मुझको अपने घर में बनवा रहे।

खुले में शौच से ऐ लोगों, तुम नफ़रत क्यों नहीं करते हो
एक आवाज़ में इस कुरीति को गलत क्यों नहीं कहते हो।

जब तरक्की के नाम पर, हर बदलाव मंजूर हैं तुम्हे
तो फिर अपनी सोच को, तुम क्यों नहीं बदलते हो।

चलो अब तुम लोग सब ज़रा मेरी भी सुन लो
एक Toilet की आज यह खरी-खरी सुन लो।

मुझसे ज्यादा गंदे हो तुम
मेरे नाम पर करते धंधे हो तुम।

कितना भी Drama कर लो चाहे
मेरे सामने तो सब नंगे हो तुम।

एक ओर तो तुम लोगों ने शारीरिक स्वच्छता पर, बड़े-बड़े अभियान चला रखे हैं
वहीं दूसरी ओर मानसिक मैले के पिटारे, दकियानूसी सोच के नीचे दबा रखे हैं।

अभी भी वक़्त है, वक़्त रहते सब संभल जाओ
Nature की कद्र करो, इंसानों अब सुधर जाओ।

अपने आस-पास सफाई रखना, और सफाई करना अच्छी बात है
लेकिन, साथ में अपने दिमाग की सफाई करना भी तो सच्ची बात है।

So My friends….This is The Story of A Toilet
कोशिश यह उसकी, कि वो बदल पाये हमारा Mindset.

© RockShayar Irfan Ali Khan

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#ObjectOrientedPoems(OOPs)⁠⁠⁠⁠

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“The Scissor Sound Unisex Saloon”

अपने मन के साथ-साथ अपने तन को भी खूबसूरत बनाइए
आइए हुज़ूर The Scissor Sound Unisex Saloon चले आइए।

Pink City Jaipur के देवीनगर Area में Situated है यह
Metro के नज़दीक, New Technology से Lessed है यह।

किफायती दरों पर Body Massage व Polishing का मज़ा उठाइए
किसी भी Beauty Service पर एक अच्छा सा Discount पाइए।

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फुल Threading कराए, चाहे Forehead हो या Upperlip.

Manicure Pedicure के साथ Full Body Waxing करवाइए
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उम्मीद की वो किरण तो हर जगह मौजूद है
खूबसूरती में ही तो इस ज़िंदगी का वज़ूद है।

अपने ज़मीर के साथ-साथ अपने शरीर को भी खूबसूरत बनाइए
आइए मेहरबां The Scissor Sound Unisex Saloon चले आइए।।

© RockShayar

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#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“Songs”

Without song, this life is तो एकदम ही wrong
No मज़ा bore होने की सज़ा, ज़िन्दगी का सफ़र भी long

Reel हो या real, हमेशा हर film की जान होते हैं गाने
मौसिकी के सुर ताल, rhythm की पहचान होते हैं गाने

सुनने वालों के style बदल गए, पर गाने अब भी वहीं हैं
ज़िन्दगी के vocals पर, गूँज रहे तराने अब भी वहीं हैं

Auto रिक्शा bus कैब metro ट्रेन ship या हो aeroplane
यात्रा तभी सुखद होगी, जब play list में हो गाने top ten

Tv tape fm radio, cd dvd Mp3 और I-pod
गाने के अख़बार हैं ये, कम करते हैं काम का load

Earphone से ज्यादा ज़रूरी चीज, सफ़र में कुछ भी नहीं
ज्योंही कान में लगाओ इसे, मूड होगा खुद-ब-खुद सही

एक count down है ज़िन्दगी, हमेशा सबकी बजाती है
जैसे हालात होते हैं हमारे, ठीक वैसे ही गाने सुनाती हैं

Without song, this life is तो एकदम ही ढ़ोंग
No dance No romance, लाइफ की journey भी long.

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“Diploma की वो Dynamic यादें”

Dedicated to all Ajmer Polytechnic Alumni…

Polytechnic Diploma की वो Dynamic यादें
बहुत याद आती हैं, College Time की वो बातें।

Schooling के बाद शुरु हुआ, Life का Brand New एक सफ़र
राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय, माखूपुरा अजमेर शहर।

शुरु-शुरु में तो Ragging के नाम से ही डर लगता था
और बाद में तो फिर Hostel ही अपना घर लगता था।

बात जब Hostel की आ जाए तो उसे याद करते हैं हम
अपने उस कोहिनूर Hostel को कैसे भूल सकते हैं हम।

Advocate अय्यूब भाई साहब का था वो
Students के ख़्वाबों का आशियाँ था वो।

हर शनिवार शाम को ही हम, TV अपने कब्जे में ले लेते थे
और फिर पूरा Sunday, Hollywood Movies देखा करते थे।

सभी शाखाओं के अपने-अपने अलग भवन होते थे
6 के 6 Semester हम फाइलों का वज़न ढ़ोते थे।

क़रीब ही Canteen में चाय-समोसा मिलता था
एक इतवार को ही तो सबका चेहरा खिलता था।

अगर किसी के किसी Subject में Back आ जाती थी
तो ये ज़िंदगी कई दिनों तक उसका मातम मनाती थी।

College में सबकी अपनी, कोई न कोई Setting थी
हम जैसे कुछ तन्हा भी थे, Poor जिनकी Rating थी।

NCC Camp में तो भय्या, हालत ही खराब हो जाती थी
Valentines Day पर ज़िंदगी मानो गुलाब हो जाती थी।

सात Number Tempo हो या साड्डे यार दी Bike
कितनी हसीन थी वो दोस्तों, अपनी College Life.

College के Gate के उस तरफ, ज़िंदगी हमें हँसाती थी
College के Gate के इस तरफ, ज़िंदगी हमें नचाती है।

Engineering Diploma की वो धाकड़ यादें
बहुत याद आती हैं, Campus वाली वो बातें।।

© RockShayar

rockshayar.wordpress.com

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“My Mission Institute Jaipur”

प्रतियोगी इस दौर में, कोचिंग सेंटर्स के शोर में
माय मिशन इंस्टीट्यूट की बात ही कुछ और है।

ज्ञान की धरोहर सदा सुरक्षित रहती है जहाँ पर
परिश्रम की पावन पूंजी रक्षित रहती है यहाँ पर।

आदरणीय कुँवर कनक सिंह जी राव के दिशा निर्देशन में
मिशन सदैव सफल रहा, प्रबुद्ध गुरूजनों के मार्गदर्शन में।

आरएएस शिक्षक भर्ती जूनियर अकाउंटेंट सब इंस्पेक्टर पटवार एलडीसी
कॉम्पीटिशन की ऐसी तैयारी कराए, जैसी होनी चाहिए बिल्कुल वैसी।

प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यहाँ, हजारों विद्यार्थी आते हैं
कड़ी मेहनत और रणनीति से, मंज़िल वो अपनी पाते हैं।

क्लास रूम के साथ-साथ, स्टडी मैटेरियल भी स्मार्ट है
कम टाइम में अधिकतम नाॅलेज गेन करना भी एक आर्ट है।

प्रतिस्पर्धा हो चाहे बहुत कठिन, या बह रही हो उल्टी धारा
कर्ण अर्जुन और एकलव्य की तरह, लक्ष्यभेदी है बाण हमारा।

पिछले सोलह वर्षो से सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाला संस्थान है ये
निराशा से ग्रस्त कमजोर स्टूडेंट्स के लिए तो जैसे वरदान है ये।

आपकी सफलता सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है
कोई झूठा दावा नहीं, सिर्फ सच्चाई और ईमानदारी है।।

Irfan Ali
LDC Batch – 02

“कीर्ति स्तम्भ चित्तौड़गढ़” (Victory Tower Chittorgarh)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

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राजस्थान की आन बान और शान का प्रतीक है कीर्ति स्तम्भ
विभिन्न मूर्तियों से अलंकृत यह, भारतवर्ष का शक्ति स्तम्भ।

जब सारंगपुर युद्ध में महाराणा कुम्भा ने महमूद खिलजी को हराया
तब उस जीत के उपलक्ष्य में,1448 ई. में यह विजय स्तम्भ बनवाया।

वास्तुशिल्पी मंडन व जैता नाथा पोमा पूंजा थे शिल्पकार
अत्रि भट्ट और महेश भट्ट, दोनों ही कमाल के प्रशस्तिकार।

अपने आस-पास के मैदान से, 122 फीट है ऊँचाई इसकी 
इष्टदेव विष्णु को समर्पित, बड़ी अनोखी है गाथा इसकी।

ऊपर जाने के लिए 157 सीढ़ियाँ, तथा आकृति इसकी वृत्ताकार है 
ऊपर-नीचे से चौड़ा, बीच में से संकरा, इसका डमरू जैसा आकार है।

तीसरी मंजिल पर नौ बार, अल्लाह ही अल्लाह लिखा हुआ है
उकेरी गई प्रशस्ति असल में, कुम्भा की विजय यात्रा का बयां है।

सबसे ऊपरी मंजिल एक बार, बिजली गिरने से टूट गई थी
महाराणा स्वरूप सिंह ने तब उसकी, मरम्मत करवाई थी।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं राजस्थान पुलिस का यह प्रतीक चिह्न है
ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ, अद्भुत स्थापत्य कला का प्रतिबिंब है।

इतिहासकार फर्ग्यूसन ने इसको, रोम के टार्जन के समान बताया है
गाट्ज के अनुसार इसमें, भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष समाया है।

चित्तौड़गढ़ में स्थित यह स्मारक, जिसे विक्ट्री टाॅवर भी कहते है
बनाने वाले ने क्या चीज बनाई है, देखने वाले हमेशा यही कहते हैं।।

© RockShayar

“स्मार्टफोन (SmartPhone)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)
 
कभी नहीं सोता है जो, रहता चौबीसों घंटे ऑन
उँगली पर सबको नचाए जो, वो है जी स्मार्टफोन।
 
एमेजिंग एंड्रॉयड हो या विशिष्ट विंडोज, इन्हीं से तो पहचान है
विदाउट एन ऑपरेटिंग सिस्टम, ये सिस्टम स्टुपिड समान है।
 
सूचनाएं वो सब अब जेब में रहती हैं, ज़िन्दगी आजकल ऐप में रहती है
फरमाइशों का रेडियो खुद ऑन करके, ये माइक्रोवेव सितम सहती है।
 
बिन इंटरनेट के कुछ ऐसे तड़पता है, जैसे बिन पानी के मछली
फेसबुक व्हाट्स अप ट्विटर, यही सब तो इसकी मित्र मंडली।
 
सोशल मीडिया के संगठित द्वार, इसी के ज़रिए खुलते हैं
न्यू जेनरेशन के पाप जहाँ पर, कंफेशन के ज़रिए धुलते हैं।
 
सेल्फी लेना और सेल्फिश बनना, इसी ने तो सिखाया सब
इस डिजिटल नशे की लत से, खुद को आज़ाद करे हम अब।
 
टच स्क्रीन के कारण, फिंगर्स की सेंसिटिविटी कम हो जाती है
हाई डेफिनेशन ख़्वाब देखते-देखते, वो नींद कहीं खो जाती है।
 
चाहे वो अलार्म हो या कि कलाई घड़ी, या हो वो टेलीफोन डायरी
काग़ज़-क़लम बेरोज़गार हुए, लिखी जाती हैं इसी में अब शायरी।
 
चाहे कुछ भी हो जाए मगर, तकनीक तकनीक ही रहती है
हावी मत होने दो इसे खुद पर, नेचर हमेशा सही कहती है।
 
कभी नहीं रेस्ट करता वो, बताओ ऐसा है कौन?
फोन से कहीं बढ़कर है जो, वो है जी स्मार्टफोन।।
 
:-RockShayar

“The Kapil Sharma Show”

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“The Kapil Sharma Show”
 
उदास चेहरों पर, पलभर में मुस्कान ले आए जो
वन एंड ओनली, दी कपिल शर्मा शो।
 
कॉमेडी किंग कपिल की तो, बात ही सबसे निराली है
सोनी साब के साथ इनकी तो, रब ने जोड़ी बना दी है।
 
शांतिवन हाउसिंग सोसाइटी में, घर है इनका बेहद लाजवाब
बीरबल के बाद दुनिया में, एक यहीं तो सबसे हाजिर जवाब।
 
प्रोग्राम के परमानेंट जज, जिन्हें हम सिद्धू पाजी कहते है
खटाक से शेर खड़का कर, सब का दिल वह जीत लेते है।
 
50-50 अस्पताल के, बड़े ही फ़र्ज़ी डॉक्टर मशहुर गुलाटी
गेस्ट का करते है विचित्र टेस्ट, डाॅक्टरी नहीं इनको आती।
 
एज ए डॉक्टर ऑलवेज, इनके कुछ फर्ज़ बनते हैं
व्हाट ए बिजी डे, हर बार सबको यही सब कहते है।
 
साथ में पंक्चर की दुकान, ऐसे कौन चलाता है भाई
बड़ी विनम्रता से कहते है, ऐसे कौन बिठाता है भाई।
 
फैशनेबल पुष्पा नानी को तो, फटाक से एक पोता चाहिए
और इतना ही नहीं साथ में, एक ब्रांड न्यू नाना भी चाहिए।
 
बेबीनाज़ दादू मामा, या हो चाहे फिर बेगम लुच्ची
जितने भी यह रोल निभाए, लेना चाहे उतनी पुच्ची।
 
थाउजेंड एक्स एल लार्ज एक नर्स, नाम है जिसका बम्पर
ब्लू व्हेल जैसी फिज़िक है, रहती है फिर भी अपने दम पर।
 
रिंकू देवी और संतोष, मेहमानों को खूब सताए
भई अरोड़ा साहब…आप हमें बहोत पसंद आए।
 
हमरा तो ज़िन्दगी बर्बाद हो गीया, रिंकू भौजी का यही रोना है
उस पर बिना गर्दन वाली ननद, संतोष का वाह क्या कहना है।
 
सीटी केबल में मिलकर यहाँ सब, बाल की खाल निकालते हैं
कौन भईल करोड़पति में, घत्रुघन घिन्हा नॉलेज खंगालते है।
 
दुबई टी-स्टाल खोलकर, चंदू चायवाला कहलाता है
ये शरारती खजूर, इसी पतीले से मुँह वाले का बेटा है।
 
खजूर की क्लास टीचर, कहते है जिन्हें मिस विद्यावती
कोयल को भी डायबिटीज हो जाए, इतना मीठा यह गाती।
 
गुलाटी की बेटी सरला, जो कि बचपन से ही कप्पू की दीवानी है
नर्स हो अगर लाटरी जैसी तो, मरीजों की तो लाइन लग जानी हैं।
 
घर के बगल में ही यहाँ, मोहन टॉयलेट सेवा उपलब्ध है
इस गिटार वाले दिनेश को तो देखो, ज़रूर इसे कब्ज़ है।
 
हँसते रहिए, मुस्कुराते रहिए, और अपने आस-पास सफाई रखिए
हर शनिवार और रविवार, The Kapil Sharma Show देखते रहिए।।
 
-RockShayar Irfan Ali Khan
 
#ObjectOrientedPoems(OOPs)
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All rights reserved.
 
 
 
 
 
 

“इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (IGNP)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

सदियों से मरुभूमि की, प्यास बुझा रही हर पहर
राजस्थान की जीवनरेखा, ये है इंदिरा गाँधी नहर

विश्व की सबसे बड़ी, यह बहुउद्देशीय परियोजना है
आठ जिलों में सिंचाई एवं, पेयजल की यह योजना है

इंजीनियर कँवरसेन ने, सर्वप्रथम रूपरेखा बनाई
1961 में उद्घाटन हुआ, शुरू हुई आखिर सिंचाई

सतलज और व्यास के संगम पर, हरिके बैराज से निकली है
राजस्थान फीडर से होती हुई, यह बाड़मेर तक जा पहुंची है

मसीतावाली हैड से लेकर, गडरा रोड़ तक फैली हुई है
नौ शाखाएं 1 उपशाखा, 7 लिफ्ट नहरें निकाली गई हैं

प्रथम फेज में 204, द्वितीय में 445 किमी बनी है
कुल मिलाकर लंबाई इसकी, 649 किमी हुई है

सर्वाधिक कमांड क्षेत्र, जैसलमेर व बीकानेर का है
रेगिस्तान में खुशहाली लाने में, योगदान इसका है

रावी जल विवाद पर, इराडी आयोग गठित हुआ
88 % जल उपयोग, इसी के द्वारा आदेशित हुआ

बरसों से थार की ज़मीन को, तर कर रही हर पहर
राजस्थान की मरुगंगा, कहलाए इंदिरा गाँधी नहर।

©RockShayar

“इंजीनियरिंग (Engineering)”

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करने के बाद जिसको, घूमती है मन की स्टीयरिंग
ज़िंदगी का फाउंडेशन कोर्स, देट इज इंजीनियरिंग

प्रौद्योगिकी में स्नातक डिग्री, कहते जिसे हम सब बी.टेक.
और कुछ हो न हो भय्या, सुनने में तो एकदम नंबर एक

हाई पैकेज सेलेरी का वादा, प्रैक्टिकल कम थ्योरी हैं ज्यादा
रियलिटी से कोसों दूर, असल में फिल्मी स्टोरी हैं ज्यादा

प्रवेश लेते ही जिसमें स्वयं, होने लगता है सत्य का ज्ञान
प्रति वर्ष प्रति सेमेस्टर, रहने लगता हैं बैकलॉग का ध्यान

यारों के वो यार साड्डे दिलदार सब यहीं मिलते हैं
लाइफ के तजुर्बे रफ़ एन टफ़ गुलज़ार सब यहीं मिलते हैं

हर फील्ड में इंजीनियर्स आगे, फिर भी जग को अनाड़ी लागे
लक्ष्य के पीछे भागे यूँ, जैसे कोई ओलिंपिक खिलाड़ी भागे

क्वालिटी शिक्षा नहीं होने से, लोग आजकल हँसते हैं इस पर
बी.ए. से ईजी बताकर, मनचाही फब्तियां कसते हैं इस पर

जिसका जिसमें इंट्रेस्ट हो, उसे वहीं बनने दिया जाए
जिसको जो पसंद हो, काम उसे वहीं करने दिया जाए

आओ हम सब अभियंतागण, मिलकर एक प्रयास करे
फील्ड में अपने मास्टरी के लिए, बेइंतहा अभ्यास करे

आफ्टर ऑल बदली जिसने, यूथ के मन की गियरिंग
लाइफ का लोचा ऑफकोर्स, देट इज इंजीनियरिंग

@RockShayar

“Boyfriend”

छोरियां जिन छोरों से, दिल को अपने बहलाती है
एक्चुअल में वहीं प्रजाति तो, बॉयफ्रेंड कहलाती है

लड़की के सामने खुद को हमेशा, ये शाहरुख ख़ान समझते हैं
पिक्चर दिखाते हैं, शाॅपिंग कराते हैं, और गुंडों से भी उलझते हैं

यारों से लेकर उधार, पूरी करे जानू की हर फरमाइश
उसी के लिए जीते हैं अब, भुला चुके अपनी हर ख़्वाहिश

खुद का तो पता नहीं है, पर फंटी का मोबाइल रिचार्ज करवाएंगे
सिक्स पैक एब्स बनाकर, फिर टैटू उसके नाम का ही गुदवाएंगे

वाहियात बातें सुनकर भी, ये लाॅजिक नहीं लगाते कभी
बेबी की हाँ में हाँ मिलाते हैं बस, बहाने नहीं बनाते कभी

सबसे तुम क्यूट बोलकर ये झूठ, चुटकी में कर लेती है काबू
ऐसी गर्लफ्रेंड के लिए सब कुर्बान, कहती है वो शोना बाबू

दोस्त जो जिगरी थे पहले, वहीं अब जंगली लगते हैं
हर बात पर आजकल वो, इतनी क्यों उंगली करते हैं

ब्रेकअप के बाद कुछ रोज तो, अश्क़ों का दरिया बहता है
और थोड़े दिनों के बाद, खुद को वह माचोमैन कहता है

बुराई नहीं ये किसी की, ना कोई शुभकामनाएं है
ये तो बस एक युवक के, दिल में दबी भावनाएं है

गर्ल एंड फ्रेंड, बोथ आर लाइफ के दो महत्वपूर्ण पार्ट
जब दोनों सही मिल जाए तो, जीने लगता है यह हार्ट।

@RockShayar

“RockStar (Bollywood Movie 2011)”

11.11.11
Five years of RockStar Movie…
Thanks Imtiaz Sir for making RockStar…
Sadda emotional attachment hai…

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ऐंवई कोई फिल्म नहीं, हर रूह की पुकार है वो
ऑलटाइम सबकी फेवरेट मूवी, राॅकस्टार है वो

डायरेक्टर इम्तियाज़ अली का एंटीक ये कमाल है
रिलीज हुए जिसको आज, हो गए पूरे पाँच साल है

राॅकिंग रनबीर कपूर ने, रोल में फिर ऐसी जान डाली
के कंट्री के हर यूथ ने, साड्डा हक़ की तान लगा ली

हीर के किरदार में, नरगिस भी कुछ कम नहीं थी
जॉर्डन से मिलने के बाद ही, ज़िन्दगी उसने जी थी

खटाना भाई का भी यहां, किरदार बहुत अहम था
जनार्दन के साथ हमेशा, एक वहीं तो हर कदम था
लिरिसिस्ट इरशाद कामिल ने, काग़ज़ के हवाले जुनून किया
लिखकर वो रूहानी गीत, सुनने वालों को सुकून दिया

म्यूजिक के बिना यहां मगर, हर अल्फ़ाज़ अधूरा है
रहमान साहब की ताल पर तो, मौसिकी खुद जवां है

मैजिकल मोहित चौहान ने, जब अपनी आवाज़ का जादू चलाया
तुम हो..पास मेरे साथ मेरे, गुनगुनाते हुए हर लम्हें को पाया

उस्ताद साहब ने हीरो को, जब शिद्दत से गाते हुए देखा
अपने मैनेजर ढ़ींगरा को, उस पर दांव लगाने को बोला

यंग सी एक रिपोर्टर ने, लास्ट में कहानी उसकी सबको सुनाई
माॅरल ऑफ द स्टोरी है कि, यहीं राॅकस्टार मूवी कहलाई।

-RockShayar Irfan Ali Khan

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“डॉ. शौकत अली देशवाली” My Brother…

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तरक्की पर जिनकी सदा, बजाएं ये दुनिया ताली
शख़्सियत जुदा है वो, डॉ. शौकत अली देशवाली

यूँ तो बङे भय्या है पर, दोस्त की तरह समझते है
ज़िंदगी के रोङ पर हमेशा, साये की तरह चलते है

अल्पभाषायी एसटीसी में, भूगोल के यह लेक्चरर
छात्रों को दिखाते हमेशा ज्ञान का प्रेक्टिकल मिरर

काम है जिनकी पहचान, अहले खानदान की यह शान
घर में श्रीमतीजी प्यार से इन्हें, कहती है सुनते हो शान

ज्योग्राफी के एक्सपर्ट शानदार टीचर माने जाते है
अपने फील्ड के यह मास्टर ब्लास्टर जाने जाते है

एमए बीएड एमफिल पीएचडी, हाइली क्वालिफाइड है
जीवन पथ पर सतत् अग्रसर, आशाओं के यह गाइड है

स्वीट से इस परिवार का, क्यूट सदस्य है छोटा शान
नाम है मिस्टर ज़ौहेर कामिल, मम्मी पापा की वो जान

पैरेंट्स को यह मन ही मन, बेपनाह प्यार करते है
पापा की तरह पर कभी नहीं, खुद इक़रार करते है

मेहनत से जिन्होंने यहाँ अपनी हर मंज़िल हैं पाली
पर्सनैलिटी यूनीक है वो डॉ.शौकत अली देशवाली

Copyright © 2016
RockShayar Irfan Ali Khan
All rights reserved.
‪#‎विषयवस्तुआधारितकविताएं‬(विआक)
राॅकशायर.वर्डप्रेस.काॅम

“राजस्थान पत्रिका (Rajasthan Patrika)”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)
(Since 7th March 1956…..60 years journey)

ख़बरों ने जिसकी बदला है, लोगों के सोचने का तरीका
विश्वसनीयता का दूसरा नाम, यूँ तो है राजस्थान पत्रिका

कुलिश जी ने बोया था जो, बीज क़लम की ताकत का
बन गया हरा भरा पेङ वो अब, आवाम की ताकत का

पत्रकारिता और सच्चाई, हैं जिसके आधार सदा
आधुनिकता में भी अच्छाई, ये सबसे अख़बार ज़ुदा

परिवार को एक सूत्र में बांधे, परिवार परिशिष्ट यहाँ
युवाओं के दिल में पत्रिका प्लस का, स्थान है विशिष्ट यहाँ

सिटी का सम्पूर्ण हालचाल, सिटी पत्रिका के नाल
समस्याओं पर पैनी नज़र, ये तो जी पेपर कमाल

नेशनल ग्लोबल स्पोर्ट्स बिज़नेस, या हो चाहे राजनीति
पाठकों को सबसे रूबरू कराना, रही है सदा इसकी रीति

देश दुनिया स्पाॅटलाइट, सम्पादकीय और बात करामात
समाचार पत्र ये बयान करता हैं, समाज के बदलते हालात

कोठारी जी के नेतृत्व में, निरंतर आगे बढ़ रहा है
प्रिंट मीडिया में कीर्तिमान, नित नये ये गढ़ रहा है

शब्दों से सिखाया जिसने, ज़िंदगी जीने का तरीका
न्यूज पेपर विद सोल, वो है जी राजस्थान पत्रिका

Copyright © 2016
RockShayar Irfan Ali Khan

Tribute to Kalpana Chawla…

Tribute to Kalpana Chawla…
(July 1st,1961-February 1st, 2003)

तुम कभी मर नहीं सकती हो !
तुम तो खुद एक कल्पना हो

अनंत अंतरिक्ष में तैर रही हो तब से
आँखें खोली जिस रोज तुमने जब से

पैदाइश हुई एक जुलाई 1961 को, करनाल में
मन में दृढ संकल्प लिए, पाना था जिसे हर हाल में

हिंद को ही नहीं, समूचे विश्व को है नाज़ तुम पर
खो गए उस कोलंबिया को, गर्व है आज तुम पर

सात थे वो एस्ट्रोनॉट, हो जैसे कोई सात सितारें
बन गए हमेशा के लिए, दुनिया की आँखों के तारें

टेक्सास के ऊपर आज भी एसटीएस मंडरा रहा है
तुम्हारी बहादुरी के किस्से वो, सबको सुना रहा है

विदेश जाकर भी, नहीं भूली तुम अपनी संस्कृति
नासा ने आज भी, सहेज रखी है तुम्हारी संस्मृति

तुम कभी मर नहीं सकती हो !
तुम तो स्वयं एक कल्पना हो

इस अंतरिक्ष में बह रही हो जब से
आँखें मूंदी जिस रोज तुमने तब से।।

-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान
rockshayar.wordpress.com
‪#‎विषयवस्तुआधारितकविताएं‬(विआक)
‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

” म्हारो राजस्थान (My Rajasthan)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

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रंग रंगीलो राजस्थान, रंगीले सब रूप और भेस
मेहमान को हम कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस

पन्ना-मीरा की धरती यह, बलिदान से मांग भरती है
रणबाँकुरों की जननी यह, वीर रस स्वांग रचती है

मिसरी सी मीठी बोली, प्रेम की पावन परिभाषा
हर चार कोस के बाद जहाँ, बदल जाती हैं भाषा

रेतीले धोरों के दरमियां, ज़िन्दगी मुस्कुराती है
मिट्टी की खुशबू लिए, लोकगीत गुनगुनाती हैं

फौलादी किलों की तरह, मज़बूत हैं इरादे यहाँ
मासूम दिलों की तरह, लोग हैं सीधे सादे यहाँ

सहनशीलता और कर्मठता, मिट्टी में इसकी घुली
त्याग ओज़ वचनबद्धता, विरासत में इसको मिली

इतिहास के पन्नों पर, दर्ज़ हैं जितनी कहानियां
वीरों की वो अमर गाथाएं, शौर्य की निशानियां

राजपूताना की यह आन बान, रखे सदा सबका मान
रण हो चाहे कृषि विज्ञान, बढ़ाई हमेशा हिंद की शान

विकास विद हैरिटेज की, नई डगर पर चल निकला है
बीमारू स्टेट की इमेज से, अब जाकर यह निकला है

सतरंगी जय राजस्थान, अतरंगी अंचल परिवेश
मेहमान को सब कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस ।।

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राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान

गुलाबी नगरी जयपुर

#विषयआधारितकविताएं(विआक)

“गाँव मेरा है लोडियाना” (My Village: Lodiyana)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

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रंग रंगीले राजस्थान के बीचों बीच एक ठिकाना
जिला है अजमेर, और गाँव मेरा है लोडियाना

ग्राम पंचायत है ये, आबादी नही कोई इसकी ज्यादा
शोरगुल से कोसों दूर, जीते यहाँ सब जीवन सादा

पंचायत समिति मसूदा, तहसील है बिजयनगर
दोनों शहरों से जुङी हैं, प्रगति की एक नई डगर

कहने को तो बिजली यहाँ, चौबीसों घंटे आती है
यूँ कह दीजिए जैसे कोई, दुल्हन नई शर्माती है

चौराहे पर दो पीपल पुराने, याद दिलाये गुज़रे ज़माने
पास उन्ही के धर्मी तालाब, आती जहाँ रोज धूप नहाने

प्राथमिक और माध्यमिक, दोनों विद्यालय हैं आस पास
प्रांगण में जिनके सदा, खिलती आई साक्षरता की आस

गाँव से शहर को हाँ, अब भी जाती है वही सङक
मुहाने पर जिसके यहाँ, मिलती है वो चाय कङक

क़ब्रिस्तान के पास वाले मैदान में, साईकिल चलाना सीखी
उतर आई यूँ काग़ज़ पर आज, वो यादें बचपन सरीखी

कहने वाले यूँही तो नहीं, कहते इसे बम्बई का बच्चा
निकले यहाँ से सूरमा कई, पढ़कर लाइफ़ का पाठ सच्चा

खेतों में लहलहाती फसल, जैसे किसी शायर की ग़ज़ल
इस तरह गुनगुनाती है फिर, बरसे वो सावन की शक़ल

धङकता हुआ दिन, और तारों भरी रात यही मिलती है
कच्चे पक्के आँगन में, मुस्कुराहट भी तो यही खिलती है

खेतों में क्रिकेट खेलना, तालाब में पत्थर फेंकना
याद है सर्दी के मौसम में, तप करके हाथ सेंकना

शहर में रहता हूँ भले, पुरख़े तो आज भी वही रहते हैं
भूल ना जाना मिट्टी को, माँ बाबा हमेशा यही कहते हैं

मातृभूमि का ये मेरी, हैं बस इतना सा फ़साना
जिला है अजमेर, और गाँव मेरा है लोडियाना ।।

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“सोमवार (Monday)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

लाल तमतमाती आँखें, उस पर चेहरा रौबदार
हर प्राणी घबराये जिससे, दिन है वो सोमवार

बाद संडे के आता है जो, दिल में बेचैनी जगाता है वो
नींद की भी नींद उङ जाए, गीत ऐसे गुनगुनाता है वो

सुबह सुबह होङ मचती है, ओलम्पिक की दौङ मचती है
हर कोई भागता फिरता है, ज़िंदगी हर मोङ नचती है

हफ़्ते की शुरूआत इसी से, एनर्जेटिक जज़्बात इसी से
कामकाज़ का ये हमराज़, ऑफिशियल हर बात इसी से

सातों दिनों का ये सरदार, जैसे कोई तुग़लकी सरकार
मीठे मीठे झाँसे देकर, लगता और भी सनकी हर बार

स्कूल में जब हम पढ़ते थे, हाँ रोज बहाने गढ़ते थे
छुटकारा पाने के लिए इससे, झूठे फ़साने गढ़ते थे

हर रविवार की रात जो, डरावने सपने सा लगता है
बस एक अपनी ही रात वो, लुभावने अपने सा लगता है

कुसूर बस इतना, वार है ना कोई फ़ित्ना सा है
दिन होते हैं जैसे सब, ये भी कुछ उतना सा है

कूंदती फांदती साँसें, उस पर चेहरा रौबदार
हर मानव घबराये जिससे, दिन है वो सोमवार ।।

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“Comedy Nights with Kapil”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

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हँसी ठहाकों की बारिश में, झूमे नाचे गाए ये दिल
टीवी शोज में न. वन, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल

कलर्स पर हर संडे को, लगती है खुशियों की सेल
ज़िंदगी के रंज़ो ग़म को, कहते जहाँ सब गो टू हेल

जीतेंगे हम अपनी बाज़ी, कहते आए सिद्धू पाजी
रॉकिंग है शायरी इनकी, थोको गुरु ताली वाह जी

कभी बिट्टू, कभी सिट्टू, कभी बने जो शमशेर
ब्लॉकबस्टर बंदा कपिल, उसके आगे सब है ढ़ेर

एक्टर प्रोड्यूसर सिंगर क्रिकेटर, या हो बॉलीवुड ब्यूटीज
इस घर में सब आते है, विदाउट नख़रा फॉर्मल ड्यूटीज

पलक और गुत्थी की जोङी, जैसे भागे उल्टी घोङी
मेहमानों की टांग खींचे, डांस की तो कमर है तोङी

कहती है यूँ तो खुद को, ट्वेंटी टू यर ओल्ड बुआ
देखा ज्योंही चिकना मुंडा, दिल से उठता है धुआँ

बुनियाद है मजबूत जिसकी, वो है टल्ली डॉली दादी
शगुन की पप्पी लेकर, हाँ बनती है फिर भोली भाली

नेशनल हाईवे की तरह, होंठ है जिसके वर्ल्ड वाइड
शर्माजी की पत्नी मंजू, करती है हर रोज ही फाइट

पतीले सा मुँह है जिसका, वो है नौकर राजू इनका
दूध दे ना दे बकरी, पर खाती है लाखों का तिनका

कहानी में एक यू टर्न, नाम है उसका रामू दुबई रिटर्न
पैसों की कोई कमी नहीं हैं, भरता रोज आयकर रिटर्न

खटारा बस की तरह, वाइब्रेट करता है चड्डा ठाला
फोन आ रहा है मेरा, कहके कट लेता है बुड्ढा साला

हँसी ठहाकों की बारिश में, झूमे नाचे गाए ये दिल
टीवी शोज में न. वन, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल ।।

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“The College Days”

‪#‎ObjectOrientedPoems(OOPs)

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       “दी कॉलेज डेज”

ज़िंदगी में है गर कुछ रियल क्रेज़
तो वो है ऑनली दी कॉलेज डेज

ख़्वाबों ख़ाहिशों की ये दुनिया गज़ब
पलभर में जाने यूँ गुज़र जाती है कब

नये नये चेहरों से होता है इन्ट्रो यहाँ
कोई इक्का तो कोई छुपा मैस्ट्रो यहाँ

बर्थडे पार्टी मस्ती धमाल जब भी छाये
घर से ज्यादा मन को हॉस्टल ही भाये

क्लास में बैठना है हमेशा लास्ट रॉ में
ध्यान मगर अटका रहता है फर्स्ट रॉ में

सोचते रहते ऊफ्फ कब ऑवर होगा ये लेक्चर
लंच में आख़िर देखनी भी तो है वो अधूरी पिक्चर

कैन्टीन ही है यहाँ सबका फेवरेट अड्डा
तैयार मिलता जहाँ रोज एक नया फड्डा

फर्स्ट ईयर में सीनियर्स का ख़ौफ़ सताये
फ्रेशर्स में मगर वोही सब तो गले लगाये

एग्जाम्स के दिनों में नक्शा ही बदल जाता
एन्टी ग्रुप भी हर वक़्त तभी साथ नज़र आता

किताबें नोट्स हर तरफ रहता जिनका बोलबाला
पेपर ज्योंही खत्म हुए लग जायेगा इन पर ताला

मस्तियाँ शरारतें तूफ़ानिया अदावतें
शैतानियाँ हिमाकतें, लड़कपन वो चाहतें
कॉलेज लाइफ मिक्सचर है इन सबका

हो गर मेरी बात से आप सब जो एग्री
तो दिल से बोलो ना फिर एक बार ये भी

के ज़िंदगी में है गर कुछ रियल क्रेज़
तो वो है ऑनली दी कॉलेज डेज
तो वो है ऑनली दी कॉलेज डेज ।।
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  “सर्दियाँ दा लेज़ीपन (Laziness of Winters)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)
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किन्ना सोणा लगदा, ऐ सर्दियाँ दा लेज़ीपन
गुलाबी मौसम, होर नाळ क्रेज़ी मेरा मन

स्वेरे स्वेरे उठना, ऐंवे एवेरेस्ट दी चढ़ाई
नहान दी जब वी सोच्या, अक्खां भर आई

छात ते बरसदी रेंदी, गुनगुनी सुहानी धूप
जाड़ों विच्च अक्सर, छाँह लगदी है रूड

अदरक वाळी चाय, विद कुरकुरे समोसे
प्लेट हो चाहे फुल, लगदे फिर भी थोड़े से

दिन लगदे छोटे, ते रातां वे लम्बी लम्बी
रज़ाई विच्च होवें, ते बातां वे लम्बी लम्बी

जैकेट, मफ़लर, जर्सी, कोट, होर दस्ताने
इक इक करके लगदे, सबा नु याद आने

सहर दे रूख़ पे छाया, धुंध दा पहरा घणा  
बर्फ़ नु सांसें जमे, जे हर तरफ कोहरा घणा

किन्ना सोणा लगदा, ऐ सर्दियाँ दा लेज़ीपन
ठण्ड दा मौसम, होर नाळ स्नोवी मेरा मन ।।

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Audio Poem

Video Poem

ऐ सर्दियाँ दा लेज़ीपन – ये सर्दियों का आलस्य
किन्ना सोणा लगदा – कितना प्यारा लगता
होर – और
नाल – साथ में
स्वेरे स्वेरे – सुबह सुबह
ऐंवे  – यूँही
नहान दी जब वी सोच्या – नहाने की जब भी सोचू
अक्खां – आँखें
छात ते बरसदी – छत पर बरसती
जाड़ों विच्च – सर्दियों में
छाँह लगदी है रूड – छाँव लगती है रूखी 
दिन लगदे छोटे ते – दिन लगते छोटे से
रज़ाई विच्च होवें ते – रज़ाई में होवें फिर
सबा नु  – सब ही
सहर दे रूख़ पे- सुबह के चेहरें पे
स्नोवी – हिमाच्छादित

 

“कंजूस(Miser)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

बिना सालन के रोटी खाता है वो,
जाने किसके लिए इतना पैसा बचाता है वो ।

अपनी ज़रूरतों पर परदा डालकर,
हर रोज ज़रूरत से ज्यादा ही कमाता है वो ।

पैसा बचाना ही पैसा कमाना कहे जो,
रात हो या दिन राग बचत का गुनगुनाता है वो ।

ख़र्च करता है ज़िंदगी, ख़र्चो के चर्चो पर,
ख़र्चा हो जब औरों का तब ही मुस्कुराता है वो ।

हजम करके किफ़ायत का अचार, इस क़दर लेता है डकार,
बिना कुछ खाये ही सब कुछ पचाता है वो ।

जूस का भी जूस निकाले, ख़्यालों में अंडे उबाले,
तब जाकर कहीं यारों कंजूस कहलाता है वो ।।

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“Electronics and Communication”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬ (OOPs)

ज़िंदगी को स्मार्ट बनाये, हर रोज़ जिसके यूनिक क्रिएशन
ब्रांच है थोड़ी हट के ज़रा, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन

यूँ तो अध्ययन होता है इसमें, इलेक्ट्रॉन के प्रवाह का
सूक्ष्म तरंगे, सिलिकॉन चिप, और ऊर्जा के अपवाह का

डायोड, ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर, कहलाये बेसिक कॉम्पोनेन्ट
सर्किट की फुल एबीसीडी, इंडक्टैंस रियक्टेंस कैपेसिटेंस

अब आती हैं सब्जेक्ट्स की बारी, ईडीसी है सबसे भारी
सिग्नल सिस्टम की बात छोडो, डीएसपी ने सबकी मारी

ऐसी-डीसी का खेल खेले, इन्वर्टर और रेक्टिफायर यहाँ
अलादीन का चिराग आईसी, पूरी करे हर डिजायर यहाँ

हरे भरें खेतों की तरह, लगता हैं जो पीसीबी
डिवाइस की ज़मीं ये, सोल्डरिंग लाइक जेसीबी

टीवी टेलीफोन, रेडियो मोबाइल, कमाल है माइक्रोवेव के
एलईडी एलसीडी सोलर सिस्टम, पिलर है एनर्जी सेव के

सीआरओ, मल्टीमीटर, ब्रेड-बोर्ड, कनेक्टिंग केबल
लैब ही है वो प्लेटफार्म जो, छात्रों को बनाये ऐबल

एनालॉग हो या डिजिटल, सिस्टम यहाँ सब हाई-फाई
द्रुतगामी हुई डेटा सर्विस, थ्रू इंफ्रारेड ब्लूटूथ वाई-फाई

वीएलएसआई, माइक्रोप्रोसेसर, एंड ऑप्टिकल फाइबर
वायरलेस हो गई दुनिया अब, गूँज रहा है संगीत साइबर

बदल रहा हैं ज़माना, कहते जिसे हम इलेक्ट्रॉनिक क्रान्ति
ई युग की शुरुआत हैं यह तो, नहीं है इसमें कोई भ्रान्ति

लाइफ को ऑटोमैटिक बनाये, हर दिन जिसके न्यू अपग्रेडेशन
इंजीनियरिंग विद सोल हैं जी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन ।।

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“वो है दैनिक भास्कर”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

bhaskar poem

ख़बरें सुर्ख़ियां चर्चा, देश दुनिया की ख़ास कर
प्रिंट मीडिया का सरताज़, वो है दैनिक भास्कर

हफ़्ते की शुरुआत, नो निगेटिव न्यूज के साथ
रोज़मर्रा की हलचल, पॉजिटिव व्यूज के साथ

ज़िंदगी में मधुर रस घोले है, हर रविवार रसरंग यहाँ
चटपटे वो सब राज़ खोले है, हर शनिवार नवरंग यहाँ

गागर में सागर लिए है, सिटी भास्कर की दुनिया
शहर के हालात सब, और परदे के पीछे की दुनिया

मधुरिमा हो जैसे कोई, ज्ञान का सागर शब्दकोश
लाइफ को ईज़ी बना दे, बताये सब गुण और दोष

क्लासिफाइड सेक्शन मिलाये, आपको अपनी मंज़िल से
फंडा ऑनली देट यह कि, ज़िंदगी तुम जियो दिल से

मन की अभिव्यक्ति करता है, संपादकीय पृष्ठ यहाँ
उम्मीदों पर खरा उतरे है, पत्रकारिता उत्कृष्ट जहाँ

हो चाहे बिज़नेस की बातें, या हो खेलों की दुनिया
लेटेस्ट अपडेट्स से भरी, यह एक अनोखी दुनिया

आयाम नये स्थापित किये, हर बाधा को पार कर
करोड़ों पाठकों का विश्वास, वो है दैनिक भास्कर ।।

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“हिंदी”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

Hindi day poem

हिंद का रहने वाला हूँ, हिंदी से मुझे प्रीत है
निर्मलता की परिभाषा, मधुर एक संगीत है

शब्दों में प्रवाहित इसके, जीवन का रहस्य है
विचारों की अभिव्यक्ति, सरसता का दृश्य है

मातृभाषा की उन्नति में ही, राष्ट्र की उन्नति है
फिर क्यों आज दयनीय यह, हिंदी की स्थिति है

सुनो ऐ हिंद के कर्णधारों, निद्रा से अब उठ जाओ
हिंदी के मस्तक पर, फिर से स्वर्ण मुकुट सजाओ

गौरव से इसके तुम, साहित्य को पल्लवित करो
राष्ट्रभाषा है यह तो, सदैव इसका अभिनंदन करो

उर्दू में गर बयां करू तो, हिंदी से मुझे इश्क़ है
तहज़ीब की ज़बान यह, अदब जिसका मुश्क़ है

हिंद का रहने वाला हूँ, हिंदी से मुझे प्रीत है
सरलता की परिभाषा, मधुर एक संगीत है ।।

“मिसाइलमैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम साहब”

(Tribute to Bharat Ratna Dr. A. P. J. Abdul Kalaam Sahab)
————————————————

Poem on Kalam sahab

कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम है
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम है

जुनून है जिनकी पहचान, अग्निपंख से भरी उङान
विज्ञान और कला की मूरत, हिंद की निराली शान

सीखने का जज़्बा ऐसा, कि परिंदों से खुद उङना सीखा
समंदर की मचलती हुई, उन लहरों से खुद मुङना सीखा

ख़्वाब देखा ख़याल बुने, मेहनत से साकार किया उन्हें
विस्तृत वृहत् लक्ष्य चुने, हिम्मत से आकार दिया उन्हें

अग्नि त्रिशूल पृथ्वी नाग, आकाश उन्हें नाम दिया
रक्षा क्षेत्र में सबसे बङा, सबसे अनूठा काम किया

भारत को महाशक्ति बनाने की, उम्दा सोच रखते है
चेहरे पर हमेशा अपने, यह ज्ञान का ओज रखते है

छात्रों से जितना लगाव, आध्यात्म से उतना जुङाव
जीवन के रहस्यों से, आत्मा जैसा आत्मिक जुङाव

विकसित भारत के वो दृष्टा, दिया जिन्होंने एक विजन
दो हजार बीस तक हो पूरा, अपना आत्मनिर्भरता मिशन

कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम है
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम है ।।

#The RockShayar Irfan Ali Khan

“Woh PostGraduate Yaadein”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

Woh postgraduate yaadein poem

कॉलेज डेज की मस्तियाँ, कुछ मीठी नमकीन बातें
ज़िंदा हो रही है आज फिर, वो पोस्ट ग्रेजुएट यादें
मचता जो हर वीकेंड पर, असाइनमेंट्स का शोर
लास्ट डेट को ही लगाते, सब अपना अपना ज़ोर
एम. टेक. स्टूडेंट्स की, दास्तां ये सबसे निराली
सिर पर रहती हर वक़्त, प्रेशर की बन्दूक दुनाली
इक हाथ में जॉब थे पकड़े, दूजे में डिग्री की थाली
एग्जाम्स के दिनों में ही, करते थे वो सब रातें काली
थीसिस अप्रूव हो जाये बस, मने तभी अपनी दिवाली
गुस्से में अक्सर, लाल पीला हो जाता ये दिल
क्लासेज का शिड्यूल, जब भी करता संडे किल
बावज़ूद इनके मगर, लाजवाब था वो दौर अपना
ज़िंदगी के सफ़र का, है जो एक प्यारा सपना
खुशियाँ बिखेरते लम्हें, और कुछ खूबसूरत वादें
ज़िंदा हो रही आज फिर, वो पोस्ट ग्रेजुएट यादें
ज़िंदा हो रही आज फिर, वो पोस्ट ग्रेजुएट यादें ।।

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“Microprocessor”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

Microprocessor poem

कंप्यूटर का तेज़ दिमाग, जैसे कोई क्वालिफाइड प्रोफेसर
इंटेल इंकॉर्पोरेशन ने बनाया, वो कहलाता माइक्रोप्रोसेसर

दिखने में तो है बस यह, छोटी सी एक नन्ही आई.सी.
हैंडल पूरा सिस्टम करे, विद टेक्निक न्यू हाई-फाई सी

डिफरेंट टाइप ऑफ़ सर्किट को, सिंगल चिप पर इंटीग्रेट करे
अर्थमेटिक लॉजिकल डिसीजन, रजिस्टर्स में एक्युमुलेट करे

सी.पी.यू. की जान है जो, सूचना तकनीक की बैकबोन
डायोड रेसिस्टर ट्रांज़िस्टर्स को, करता है यह रॉक ऑन

भिन्न भिन्न तरह के यहाँ पर, पाये जाते है इंस्ट्रक्शन सेट
बिट साइज हो स्मॉल जितना, बढे उतनी एग्जीक्यूशन रेट

प्रोवाइड करे कम्युनिकेशन पाथ, एड्रेस और डाटा बस
इनपुट आउटपुट मेमोरी विद, डाटा ट्रांसफर कंट्रोल बस

फ्लैग इंटरप्ट एड्रेसिंग मोड, या हो पेरीफेरल इंटर्फेसिंग
असेंबली है प्रोग्रामिंग इसकी, सुपर्ब है डिसीजन मेकिंग

स्पीड में एवन, जैसे कोई फार्मूला वन सर्टिफाइड रेसर
इंटेल इंकॉर्पोरेशन ने बनाया, वो कहलाता माइक्रोप्रोसेसर ।।

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“LabVIEW”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬ (OOPs)

(Laboratory Virtual Instrument Engineering Workbench:
An Engineering Tool by National Instruments)
————————————

labview poem1

वर्चुअल सिस्टम का, देता है जो रियल टाइम व्यू
नेशनल इंस्ट्रूमेंट्स की नायाब खोज, वो है लैबव्यू

मल्टी कोर प्रोसेसिंग, एग्जीक्यूशन स्पीड बढ़ाये
मल्टी मोड प्रोग्रामिंग, वायर्स की सब भीड़ हटाये

हार्डवेयर इंटरफेसिंग, जो कनेक्ट करे हर एक को
नन्ही नन्ही डिवाइसेस, कॉम्पैक्ट करे हर लैब को

डेटा सैम्पल हो चाहे कोई, सेंस स्टोर सिमुलेट करो
अकॉर्डिंग टू अपने आइडियाज, ड्रीम्स खुद इनोवेट करो

इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल, हो चाहे इलैक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन
एवरी टाइप ऑफ़ इंडस्ट्रीज का, करता है ये ऑटोमेशन

सबसे बड़ी है खूबी इसकी, रियल टाइम डेटा एक्वीजीशन
हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन, बाक़ी नहीं फिर कोई क्वेश्चन

सिम्प्लिसिटी में कॉम्पलेक्सिटी, है इसकी यूटिलिटी
पावरफुल पैरेलल परफॉरमेंस, है इसकी कैपेबिलिटी

इंजीनियर की कल्पना को, करे है जो साकार यूँ
नेशनल इंस्ट्रूमेंट्स की स्मार्ट सोच, वो है लैबव्यू ।।

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“मैटलैब” (MATRIX LABORATORY)

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Matlab poem1
मैथवर्क्स ने बनाया एक लाजवाब ऐप
कहते है जिसको हम सब मैटलैब

वैरिएबल्स का करे एग्जेक्ट सिमुलेशन
टूल्स में इसकी अच्छी खासी रेप्युटेशन

हार्डवेयर सॉफ्टवेयर, गले सब को लगाये
एनालिसिस का ग्राफ, यूँ चुटकियों में बनाये

टूलबॉक्स तो सब लगते है जादुई पिटारे
इंजीनियर्स की आँखों के ये चहेते सितारें

प्लॉटिंग हो कैसी भी, पल भर में कर दे
लोडिंग वो डाटा की, मैट्रिक्स में भर दे

सिमुलिंक्स हो जैसे, अलादीन का चिराग
सिस्टम डिजाइन करो, गाओं अपना अपना राग

यूजर को देता है ये, सुपर्ब फ्लेक्सिबिलिटी
एज यू केन तुम, दिखाओ अपनी क्रियेटिविटी

मैथ्स-इंजीनियरिंग का कॉम्बो दी ग्रेट
कहते है जिसको हम सब मैटलैब ।।

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“वर्किंग वूमन” (Poetic Tribute to all Working Women’s)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

working womens poem1

मशीन नहीं हाँ कोई, वो भी है आख़िर एक ह्यूमन
ड्यूल किरदार निभाती है जो, वो है वर्किंग वूमन

एक तरफ है घर अपना, एक तरफ है जॉब अपना
अपनो की खातिर यहाँ जो, भूले बैठी हर सपना

अर्ली मॉर्निंग उठ जाती, चाय नाश्ता टिफिन बनाती
कामकाज सब निपटाकर, मन ही मन कुछ गुनगुनाती

ऑफिस में हो कितना भी, काम का प्रेशर ऑवरलोड
घर आते ही मगर वो, ऑन कर लेती है पावर मोड

बच्चों को होमवर्क कराये, सोते वक्त कहानी सुनाये
माँ पत्नी बहू और बेटी, रिश्तों में खुद को उलझाये

हो पतिदेव के नखरे, या के बॉस की फटकार
सब सहन करती है ये, विदाउट एनी तक़रार

सास ससुर के ताने सुनती, खुद अपनी राहें चुनती
लाख कहे दुनिया यहाँ, बस अपने दिल की सुनती

मशीन नहीं हाँ कोई, वो भी है आख़िर एक ह्यूमन
दोहरी ज़िंदगी जीती है जो, वो है वर्किंग वूमन ।।

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“वो है चैनल आज तक”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

aaj tak poem

पहुँच है जिसकी सदा, ज़मीं से आकाश तक
ख़बरें जरा हटके देता, वो है चैनल आज तक

देश दुनिया कारोबार, या हो क्रिकेट का बुखार
एक्सक्लूसिव न्यूज़ दे, जैसे सावन की फुहार

बेख़ौफ़ होकर बेनकाब करे, धार्मिक पाखंड को
स्पेशल रिपोर्ट में खुले है, वास्तविक आडम्ब वो

फिल्म समीक्षा गॉसिप, और छोटी सी मुलाकात
चर्चित शख़्सियतो से, प्रभु चावला की सीधी बात

वारदात क्राइम विशेष, या हो पुलिस की सांठगांठ
एक एक करके राज़ खोले, इंडिया तीन सौ साठ

हल्ला बोल पर फटाफट, सिके राजनैतिक रोटिया
टीवी सीरियल्स बन गई है, सास बहू और बेटियां

पहुँच है जिसकी सदा, महानगरो से गाँव तक
सबसे तेज़ सबसे आगे, वो है चैनल आज तक ।।

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“फार्मासिस्ट: (दवादार)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

Pharmacist poem

र मर्ज़ की दवा रखते है, नाम है जिनका केमिस्ट
डॉक्टर की भाषा जो समझे, नाम है उनका फार्मासिस्ट

टैबलेट कैप्सूल स्प्रे सीरप, हो चाहे कोई स्पेसिफिक सॉल्ट
कम्पोजिशन समझने की इनमें, कुदरत होती है बाइ-डिफॉल्ट

सिट्राजीन डाइक्लोफिनेक, ऐजीथ्रोमाइसिन या पेरासिटामोल
सिर्फ प्रेसक्रिप्शन ही नही, समझते है ये ज़िंदगी का मोल

क्वालिटी ड्रग की चैक करते है, एज पर नॉर्म्स उन्हें टैग करते है
मल्टी विटामिन एंटीबायोटिक, एज पर डिमांड उन्हें पैक करते है

इंजेक्शन इंफ्यूजन सस्पेंशन क्रीम, एंटी फंगल पेस्ट सभी
मेडिकल फील्ड की बेकबोन है ये, करते नही है रेस्ट कभी

औषधियों का ज्ञान रखते है, नाम है जिनका ड्रगिस्ट
डॉक्टर की भाषा जो समझे, नाम है उनका फार्मासिस्ट ।।

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Irfan Ali Khan
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“रेडियो सिटी 91.1 FM”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

Radio city 91.1 fm poem1

शहरो में हाँ शहर जैसे, अपना शहर पिंकसिटी
वैसे ही तुम बोलो ना जी, एफएम बोले तो रेडियो सिटी

सिटी का पूरा हालचाल, मस्त मॉर्निंग्स दे नाल
क्या सुबह क्या शाम जी, ये तो स्टेशन कमाल

सफ़र सुहाने संगीत का, और गपशप बेशुमार
बैक टू बैक बरसे है, गानों की रिमझिम फुहार

चलों चलें ना हम भी, रूबी के संग जॉय राइड पर
खप्ती जी जहाँ बजाये घंटा, बावळी पूंछ टाइड पर

वैसे तो जंगल का राजा, कहलाता है बब्बर शेर
हँसी ठहाकों की यहाँ पे, बाढ़ लाता है बब्बर शेर

सुनहरा वो इक दौर है ज़िंदा, कल भी आज भी
भूले बिसरे वो गीत है ज़िंदा, कल भी आज भी

रिश्तों की उलझी कहानी, सुलझाता है लव गुरु
ज़िदंगी के किस्से रूमानी, बतलाता है लव गुरु

शहरो में हाँ शहर जैसे, अपना शहर पिंकसिटी
वैसे ही तुम बोलो ना जी, एफएम बोले तो रेडियो सिटी ।।

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“टाटा स्काई”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

tata sky poem
घर बैठे जिसने हमको, पूरी दुनिया है दिखाई
लाइफ बना दे जिंगालाला, वो है टाटा स्काई

टाटा की टेक्निक विद, स्काई का सेटेलाइट जाल
मिले जब ये दोनों तो जी, डीटीएच हुआ बेमिसाल

टीवी के संग सेट इसका, डिजिटल सेट टॉप बॉक्स
म्यूजिक मस्ती मूवीज धमाल, गाये ज़िंदगी रॉक्स

जो चाहे वो पैकेज यहाँ, चैनल एज पर एज़ यहाँ
एक्टिव फन लर्निंग से भय्या, बनते बच्चे तेज यहाँ

कुकिंग दर्शन इंग्लिश गणित, या हो उम्दा शायरी
ज्ञान का एक्टिव पिटारा, जैसे कोई एंटीक डायरी

डायरेक्ट टू होम जिसने, खुशियों की बगिया सजाई
लाइफ बना दे जिंगालाला, वो है टाटा स्काई ।।

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