“आओ चलें फिर इरफ़ान की गली”

 

लफ़्ज़ों को हँसते मुस्कुराते ग़मगीन हो आंसू बहाते 
किसी ने देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

समंदर से वसीह दिल में लहरों की तरह जज़्बात उठते 
उन लहरों से उठते जज़्बातों को] लफ़्ज़ों में तब्दील करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

रूहानियत की क़लम में स्याही शिद्दत की भरकर
इक कोरे काग़ज़ को अनमोल बनाते 
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

एक शख़्स में छुपी हज़ार शख्सियतें
एक इंसां को एलियन में तब्दील होते
उम्र गुज़ार खुद में अंदाज़ अलहदा पाते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

गर्दिशों के सियाह अंधेरों में चश्मा-ए-नूर बहाते 
हादसों में खुद ही को खुद का हौसला बढ़ाते
हर ग़म की खुशी मनाकर ग़म को कन्फ्यूज करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।।

“डायरी से निकलकर, बाहर आ गई वो नज़्म”

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पढ़ रहा था कल
मैं जब
अपनी इक नज़्म को
दिलवालों के शहर की
सब्ज़ हसीन वादियों में
टाईटल था जिसका
“एक ज़िंदा नज़्म है वो”
उसे पढ़ते हुए, मैने वहाँ
एक नज़्म और देखी
ठीक सामने बैठी हुई
मद्धम हल्की मुस्कान
निगाहें मयक़दा जाम
लब यूँ ख़ामोश पैग़ाम
ज़ुल्फ़ें वो लहराती शाम
ना जाने क्यूँ
मेरी नज़्म की
वो सारी खूबियां
मैच हो रही थी
उसमें एकदम
यूँ लग रहा था
मानो
डायरी से निकलकर
बाहर आ गई वो नज़्म
कुछ देर धूप सेंकने
बड़े दिनों से
जो क़ैद थी
कागज़ की पनाहों में
इसीलिए शायद
जगह जगह से
सिकुड़ गए है
पन्नें सभी

मुख़्तलिफ़ चेहरे बैठे थे
हुजूम बना कर यहाँ वहाँ
मगर, ज़हन में मेरे
बस, वो ही एक चेहरा
तैर रहा था यूँ
जैसे, आसमां में
तैरता है चाँद
और, रोशनी में जिसकी
ओझल हो जाते है
सब सितारें

नज़्म पूरी हुई
तो ख़्याल आया
अरे, ये तो वही नज़्म है
अक्सर
ख़्वाबों में आकर
हर रोज मुझसे
जो बातें करती है
बाद उसके
एक ग़ज़ल, और पढ़ी मैंने
जिक्र था जिसमे
अपनी तन्हा रातों का

सब कुछ वैसे ही हुआ
जैसा सोचा था मैंने
बस, एक करिश्मा
पहली दफ़ा देखा
अपनी नज़्म को
यूँ, अपने से ही
नज़रें चुराते देखा
दिल मेरा
फिसल गया
उस वक़्त
वही पर कहीं
जब डायरी से निकलकर
बाहर आ गई वो नज़्म
और मैं यूँही
टकटकी बाँधे
बस
देखता ही जा रहा था उसे
तकता ही जा रहा था उसे

© RockShayar
(Irfan Ali Khan)