दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक
उसकी इक मुस्कान साथ है अब तक

उसने तो पलभर में दूूरियों का दामन थाम लिया
दूर होकर भी मेरे वो पास है अब तक

उसका चेहरा किसी की याद दिलाता है मुझे
वो चेहरा मेरे लिए ख़ास है अब तक

क़िस्मत ने मिलवाया, ज़रूरत उसे बनाया
उसका मिलना एक राज़ है अब तक

सागर भी सारा पी लिया, नदियां भी समेट ली
फिर भी लबों पे इक प्यास है अब तक

जिस रोज़ उसे देखा था, देखता ही रह गया
उसकी आँखों का नूर याद है अब तक

कई बरस हो गए हैं, मनाते हुए रोते हुए
न जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ है अब तक।

Toh Baat Bane

कहती है तन्हाई अक्सर ये मुझसे के तुम आओ तो बात बने
थक गई निगाहें राह तकते-तकते तुम आओ तो बात बने

तेरी परछाई का नामोनिशां नज़र तक नहीं आता कहीं अब
इंतज़ार में है इंतज़ार जो मिलने तुम आओ तो बात बने

रुख़्सत के वक़्त भले ही अपना सब कुछ वापस ले जाना
पर अलविदा से पहले इक़रार करने तुम आओ तो बात बने

मेरे नसीब में क्या है ये तो मैं नहीं जानता
मगर हबीब मेरे गर नसीब में मेरे तुम आओ तो बात बने

एक अर्से से दिल ये मेरा टूटा हुआ आईना है
गर इस आईने में अक्स देखने तुम आओ तो बात बने

दूरियों ने बहुत कोशिश की हैं हमें दूर-दूर करने की
जो अब दिल से दूरियां मिटाने तुम आओ तो बात बने

ये ज़िंदगी तो ख़ैर यूँही तन्हा गुज़र गई इरफ़ान
गर फ़िरदौस में मेरा साथ देने तुम आओ तो बात बने।

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा
अपनी ज़िंदगी में हमें कभी शामिल ना समझा

कैसे चलते भला ज़िंदगी की अजनबी राहों पर
जब ज़िंदगी ने ही हमको मुसाफ़िर ना समझा

“प्यारे नबी”

जिनके सदक़े में बनी है ये पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता है जिनका सदा ख़ुदा के साथ

अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी

सुन्नते जो सिखलाती बेहतरीन अख़लाक़
अमल करे जो उनपे, सँवरते है दोनों जहाँ

सादगी से अपनी जीता है दिलो को उन्होंने
ज़िंदगी से पेश की इंसां के लिए इक मिसाल

बुलंद ये मर्तबा ज़मीन-ओ-आसमाँ भी झुकते
सरकार-ऐ-मदीना का जलवा यूँ आफ़ताबी है

मगफिरत होगी कर ले हुजूर से जो मुहब्बत
दिल में जिसके रवां हो हसरत बस रसूल की

लिखना तो बहुत है लफ्ज़ो में वो क़ुव्वत कहा
सरवर-ऐ-आलम की तारीफ जो कर पाये बयां

जिनके लिए ही कायम है यह पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता रहेगा उनका सदा ख़ुदा के साथ

ऐसी अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
इक मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी ………इरफ़ान

“यादें”

       

 

  ………यादें……..

आज फिर पुरानी यादें सामने आई है
दिल कह रहा ये तो बस इक तन्हाई है

वो लम्हा जिसे यूँही भूल आया था
बरसो पहले तू कही छोड़ आया था

यादें लहरों की तरह होती है
कब तक इनसे दूर भागेगा
इक दिन तो वो भी आयेगा
हक़ीक़त से जब रूबरू हो जायेगा

दिल कहता है काश वो दिन वापस आ जाये
मगर यादे समंदर किनारे रेत की मानिंद है
जो वक़्त के दरिया में बस घुलती जा रही है……इरफ़ान

Happy birthday Ashif

Ashif
सबसे जिगरी वो मेरा, लाखों दिलों की है वो जान
बंदा एक बिंदास है, देट इज मिस्टर आशिफ़ ख़ान
एपिक एटीट्यूड और, राॅकस्टार सी पर्सनैलिटी है
यारों में दिलफरियाद सबसे, ये कूल डूड स्मार्टी है
घर में सबसे छोटा है, पर काम करता हैं बड़े बड़े
प्रॉब्लम का करे सॉल्यूशन, चुटकी में यूँ खड़े खड़े
बचपन से ही अव्वल दर्ज़ा, हाइली हरफ़नमौला है
हर रिश्ते को इसने हमेशा, इन्सानियत से तोला है

यूँ तो इंजीनियर है मगर हर फील्ड का बादशाह है
याद रखे कायनात जिसे ऐसा कर जाने की चाह है
परिवार में हमेशा मोहब्बत के रंग भरना चाहता है
पापा के हर ख़्वाब को ये मुक़म्मल करना चाहता है
अम्मी की आँखों का तारा, फैमिली का है ये सितारा
मुश्किल हो चाहे जितनी भी, यह कभी नहीं है हारा
डांस में यह एक्सपर्ट और म्यूजिक इसका पैशन है
इंटेलिजेंस एंड इमोशन का परफेक्ट काॅम्बिनेशन है
इल्ज़ाम लगाते हैं सब इस पर, तुनक मिजाजी का
खर्चीला होने का, और रिएक्शन में जल्दबाजी का
गर्लफ्रेंड हो या ज़िंदगी, सबने इसे जमकर लूटा है
भटको की मदद करने का, रब ने इसे हुनर बख़्शा है
जितना डिजर्व करता है, उतना प्यार नहीं मिला है
जुनून की तलाश है इसे, फ़क़त क़रार नहीं मिला है
सही मायने में दिल के आइने में, सच्चा दोस्त है ये
हर रिश्ते से बढ़कर सदा सबसे अच्छा दोस्त है ये
जब कभी मैं लड़खड़ाया, इसने मुझे हौसला दिया
बेघर किया जब लोगों ने, इसने मुझे घोंसला दिया
हर साल सात जून को इसका हैप्पी बर्थडे आता है
मस्ती फन व धमाल का एक्सट्रीम ऑफर लाता है
बेस्टेस्ट बड्डी वो मेरा, फ्रेंडशिप पर है जो कुर्बान
बंदा ये बिंदास है, हिज नेम मिस्टर आशिफ़ ख़ान

किसी ने न पूछी तबीयत हमारी

122  122   122  122
फ़साना   नहीं  है  अज़ीयत  हमारी
किसी  ने  न  पूछी  तबीयत  हमारी।

यूं’  तीमारदारी   वही   लोग  करते
कि प्यारी है’ जिनको वसीयत हमारी।।

©इरफ़ान अली ख़ान

यक़ीन मानिए कुछ लोग कभी भी सुधरते नहीं

हादसों के बाद भी, ख़ुद को वो बदलते नहीं
यक़ीन मानिए कुछ लोग कभी भी सुधरते नहीं


एहसास जब भी होता है, मालूम तब ये चलता है
के मरते तो इन्सान हैं, एहसास कभी मरते नहीं
Rockshayar Irfan Ali Khan
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https://youtu.be/nAgS0jox_T8

Naam Ali

शुक्र तेरा ऐ मौला मेरे
मेरे नाम में अली है

कहती ये क़लम मुझसे
मेहरबां तुझ पर नबी है

Irrfan Khan

नज़र नहीं आता अब वो इंसान यहां
पर बाक़ी है उसके कुछ निशान यहां

इक रोज़ जो इंतज़ार की कहके गया था
बाद उसके नहीं दिखा वो इरफ़ान यहां

Iftar Hone Ko Hai

अब्र की आँखों से दर्द टपकने को है
सब्र कर ऐ ज़मीं, बारिश होने को है

अभी प्यास लगना लाज़िम है तुझे
बस थोड़ी देर और, इफ़्तार होने को है

Ramzan Mubarak

Mahtab Ka Qissa by Ashif Khan

सुनिए इस चाँद रात में
चाँद की अनसुनी कहानी
ख़ुद चाँद की ही ज़ुबानी
कैसे एक शख़्स से मुखातिब होकर
महताब ने हज़ारों सालो से
अपने अंदर दबे दर्द को ज़ाहिर किया
या यूँ कहे के ख़ुद दर्द को ही मुतास्सिर किया
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https://youtu.be/0tkkgyGDTlw

GuZarish @instagram

Pahle Jaisa Zameer Ab Nazar Nahin Aata

बिक जाते हैं लोग आजकल कौड़ियों के भाव में
पहले जैसा ज़मीर अब नज़र नहीं आता…

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Poetspace Poetry Studio Jaipur

PoetSpace Poetry Studio

दिलों को जहाँ हर बार छुआ जाता है
जो आये एक बार, वो बार बार आता है

यक़ीन जानिए दोस्तों,
पोएटस्पेस आपका अपना परिवार है
जहाँ हर रविवार, हम सब फ़नकार,
जज़्बात से करते अश्कबार हैं

उम्दा शाइरी, बेहतरीन गायिकी, और लाजवाब लतीफ़े
यही वो महफ़िल है, जो सिखाये दिल जीतने के वज़ीफ़े

क्योंकि यहाँ ऑलवेज मोहब्बत ही मोहब्बत मिलती है
गर पास हो गूगल बाबा तो चुटकी में मंज़िल मिलती है

जहाँ एक ओर अमित नैनावत जी,
अपने दिव्य नैनो से मन मोह लेते है
तो वही दूसरी ओर गौरव लांबा जी,
राही बनके लंबा सफ़र तय करते है

लेकिन लेकिन लेकिन,
बिना प्रितेश के ये दास्तान अधूरी है
परिवार का ये लाडला,
जिसका होना हर तरह से ज़रूरी है

पिंकसिटी जयपुर में, अदब का ये उभरता मुकाम
शाइर बड़े ही शान से जहाँ, पढ़ते है उम्दा कलाम

गर अब भी है अनजान, तो होगा बड़ा नुकसान
क्योंकि इंटरवल में है, चाय-बिस्कुट का इंतजाम

दिलों को जहाँ बड़े प्यार से छुआ जाता है
ये एहसास एक बार नहीं, बार-बार होता है

और सौ बातों की एक बात,
ये आपका अपना परिवार है
जहाँ हर इतवार, वी ऑल कलाकार,
एहसास से होते सरोबार हैं।

@rockshayar

Basti mein kuch Insan abhi baqi hai

बस्ती में कुछ इंसान अभी बाक़ी है@rockshayar
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Insan abhi baaqi hai

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Zindagi

किसी ने इसे संभालने में सब कुछ खो दिया
किसी ने सब कुछ खोकर इसे संभाला है

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Iftar hone ko hai

अब्र की आँखों से दर्द टपकने को है
सब्र कर ऐ ज़मीं बारिश होने को है

Dard e Abr

सुनिए एक ऐसे अलहदा और शाइस्ता शाइर को
जो बड़ी ही मासूमियत से शेर पढ़ते हुए मुस्कुराते है
और दर्द की शिद्दत को सातवे आसमान तक ले जाते है
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https://youtu.be/F_fMblP5jo8

Ishq ke Nasib mein sabr nahin hai

इश्क़ के नसीब में सब्र नहीं है

रॉकशायर इरफ़ान अली ख़ान

सुनिए एक ऐसे नायाब शायर को
जो बड़ी ही मासूमियत से शेर पढ़ते हुए मुस्कुराते है
और दर्द की शिद्दत को सातवे आसमान तक ले जाते है
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