“कुछ बातें अनकही”

तेरे-मेरे दरमियान कुछ बातें अनकही रह गयी
आँखों में छुपी वो ख़ामोशी बहुत कुछ कह गयी

बहुत कुछ कहकर भी, कुछ नहीं कहा हमने
जो कुछ कहा हमने, वो सब कहीं था दिल में

जो आवाज़ हमने सुनी, वो आवाज़ हमारे दिल की थी
वो आवाज़ हमारे दिल की, अपनी आँखों से हमने सुनी

एक-दूसरे को चाहकर भी ना भुला पाये हम
एक-दूसरे को चाहकर भी ना बता पाये हम

के एक-दूसरे को कितना चाहते हैं हम
एक-दूजे से कितना झूठ बोलते हैं हम

झूठ भी ऐसा, के जो झट से पकड़ में आ जाये वैसा
प्यार भी ऐसा, के ना किया हो कभी किसी ने जैसा

तेरे-मेरे बीच कुछ अल्फ़ाज़ अनकहे रह गये
आँखों में छुपे वो जज़्बात बहुत कुछ कह गये

जो अल्फ़ाज़ हमने पढ़े, वो अल्फ़ाज़ हमारे दिल के थे
वो अल्फ़ाज़ हमारे दिल के, अपनी आँखों से हमने पढ़े।

RockShayar⁠⁠⁠⁠

Advertisements

“जीवन है तो संघर्ष है”

1541_327891570657475_1514043508_n.jpg

जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है।

राग-द्वेष प्रेम-घृणा, मनोस्थिति हो चाहे जैसी भी
भूत भविष्य वर्तमान, परिस्थिति हो चाहे कैसी भी
उस परिस्थिति के अनुसार ढ़ल जाना ही तो हर्ष है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है।

वृद्ध हो या समृद्ध, यह जीवन हो चाहे जैसा भी
धावक हो या पावक, यह मन हो चाहे कैसा भी
इस मन को छू लेना ही तो आत्मा का स्पर्श है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है।

पृथ्वीलोक मृत्युलोक, संसार हो चाहे कोई भी
वीर रस षोडश श्रृंगार, विचार हो चाहे कोई भी
उन विचारों को गति देना ही तो जीवन का अर्थ है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है।।

RockShayar

“समय ने फिर हुंकार भरी है, रणभूमि तुझे पुकार रही है”

समय ने फिर हुंकार भरी है, रणभूमि तुझे पुकार रही है
रक्त की लाल बूँदें नहीं, अब हृदय में तेरे ज्वाला भरी है।

तू स्वयं अपनी सृष्टि का, एक नया सृजन आरंभ कर
तू स्वयं मन की दृष्टि से, एक नया जीवन प्रारंभ कर।

आहुतियाँ जितनी भी दी तूने, वो व्यर्थ नहीं जायेगी
वो आहुतियाँ सब तेरे संग, तेरी जीत के गीत गायेगी।

काल के विशाल चक्र का, तू मात्र एक अंश है
सदियों से सोया हुआ, स्वाभिमान का वंश है।

बुराई के असुर से, तुझे हर समय लड़ना होगा
भयरूपी लहर से, तुझे हर समय भिड़ना होगा।

संकल्प जितने भी लिये तूने, वो संपूर्ण होंगे एक दिन
स्वप्न जितने भी देखे तूने, वो सब पूर्ण होंगे एक दिन।

तमस के घोर विनाश का, कारण बनेगा तू एक दिन 
सूर्य के जैसी प्रचंड आभा, धारण करेगा तू एक दिन।

समय ने फिर बिगुल बजाया, समर में वो ध्वज लहराया
रक्त का कोई कण नहीं, अब हृदय में प्रतिशोध को पाया।

RockShayar

“मेघ की तरह हैं केश तुम्हारे, मृग की तरह हैं नयन”

मेघ की तरह हैं केश तुम्हारे, मृग की तरह हैं नयन
जब भी तुम चलती हो, बस तब ही चलती है पवन।

मौन के अनंत अंतरिक्ष में, गूँज रही है तुम्हारी वाणी
तारों की तरणी है तू, मन-मरुस्थल की हरित ढ़ाणी।

नेत्र तुम्हारे हैं अचूक धनुर्धर, हृदयभेदी बाण चलाते हैं
अधर तुम्हारे हैं मधु-सरोवर, नीर की प्यास बुझाते हैं।

मुखमंडल की आभा, अहर्निश सूर्य के जैसी लगती है
कंठ में एक स्वरमाला, सदैव संगीत बनकर बहती है।

आभूषण तुम्हारे नक्षत्र, यह वसुंधरा है वस्त्र
गगन तुम्हारा शस्त्र, एवं पवन अमोघ अस्त्र।

स्वप्नलोक में प्रतिदिन तुमसे भेंट होती है
प्रतीत होता है मानो स्वयं से भेंट होती है।

मन-कानन में बरसती हुई, प्रेम की पावन पावस हो तुम
निर्बल को जो बल देता है, मन में छुपा वो साहस हो तुम।

चपला कहूँ कि चंचला, या फिर कहूँ तुम्हें मैं कादंबिनी
दामिनी के सौदामिनी, या फिर चंद्रसुशोभित यामिनी।

कौन हो तुम, कोरी कल्पना हो, या हो कोई सुंदरी
अनामिका में धारण की मैंने, तुम्हारे नाम की मुँदरी।।⁠⁠⁠⁠

“चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम”

चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।

वैसे भी क़दमों को रुकने की आदत कहाँ
ये तो वहीँ चले जाये, रास्ते ले जाये जहाँ।

जहाँ रास्तेभर रास्तों का सफ़र हो
और मंज़िल से दिल ये बेख़बर हो।

चलते-चलते इतनी दूर आ गये हैं हम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।

वैसे भी हमको अब लौटने की चाहत कहाँ
हम तो वहीँ बस जाये, ज़िंदगी रहती जहाँ।

जहाँ ज़िंदगीभर ज़िंदगी बस एक सफ़र हो
फिर चाहे सामने मौत हो या मंज़िल, ना कोई डर हो। 

चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।।

RockShayar.wordpress.com

“तो तस्वीर कुछ और ही होती”

हमारा मिलना-बिछुड़ना तो तक़दीर का लिखा है
जो हम साथ रह पाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

सालों से तुम्हारा इंतज़ार, और उस पर दिल ये बेक़रार
गर हम एक हो जाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

एक दूसरे को बहुत चाहते थे, हम कमियां और ख़ूबियां जानते थे
जो जज़्बात जताते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

अपने हिस्से का दर्द हमने, ना बताया कभी, ना जताया कभी
गर ग़म ना छुपाते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

बिन पूछे सब जान लेना, एक दूसरे को मान देना
जो नज़रें मिला लेते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

जमाने की दीवार खड़ी थी, और ज़िंदगी ज़िद पर अड़ी थी
गर बंदिशें तोड़ जाते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

अफ़साना अपनी मोहब्बत का, कुछ यूँ लिखा हमने इरफ़ान
जो हम पहले मिल जाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।।

RockShayar.wordpress.com

“ज़िद क्या होती है, ये ज़िद को अब तू बता दे”

हद क्या होती है, ये हद को अब तू समझा दे
ज़िद क्या होती है, ये ज़िद को अब तू बता दे।

खुद को हैरान करने का यही सही वक़्त है
बेचैनी खुद में छुपाने का नहीं अब वक़्त है।

अब और इंतज़ार करने का कोई मतलब नहीं
छू न सके जिसे तू, जहां में ऐसा कोई कद नहीं।

गर कद ही बढ़ाना है तो पहले अपने आप को जगा
ना किया हो किसी ने, ऐसा कोई काम करके दिखा।

पहले तो काम से नाम बनेगा, फिर नाम से काम चलेगा
काम से ही तू आगे बढ़ेगा, काम से ही तेरा काम चलेगा।

तलब क्या होती है, ये तलब को तू अब बता दे
तड़प क्या होती है, ये तड़प को तू अब समझा दे।

दुश्मन को हैरान करने का यही सही वक़्त है
अगन को मन में दबाने का नहीं अब वक़्त है।

अब और खुद से भागने का कोई मतलब नहीं
पा न सके जिसे तू, ऐसी तो कोई हसरत नहीं।।

RockShayar.wordpress.com

“मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली”

मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली
कल मैंने तुमसे थोड़ी नींद मांगी थी।

नींद तो नहीं दी तुमने
पर अपना तकिया दे दिया मुझे।

दिनभर मैं जिसका सिरहाना लगाता हूँ
और रात को उसी सिरहाने के नीचे तुम्हारी तस्वीर रखता हूँ।

वही तस्वीर जिस पर ग़ज़ल लिखने की ख़्वाहिश रखता हूँ
वही तस्वीर जिसकी आँखें पढ़ने की कोशिश करता हूँ।

वही गुज़ारिश जिसे सुनकर भी तुम नहीं सुनती हो
हाँ वही बारिश जिसमें भीगकर भी ख़ुश्क़ रहती हो।

इस तकिये से तुम्हारी खुशबू आती है
तुम्हारी खुशबू, जो मुझे दीवाना बनाती है।

दीवाना भी ऐसा, जो कभी किसी ने ना देखा
गर देखा भी हो तो कभी किसी ने ना जाना।

मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली
कल मैंने तुमसे थोड़ी नींद मांगी थी।

नींद तो नहीं दी तुमने
पर अपना तकिया दे दिया मुझे।

आज जब मैं उस तकिये से लिपटकर सोया
तो पता चला, के नींद क्या होती है, चैन क्या होता है।

शुक्रिया मुझे मेरी नींद से मिलवाने के लिये
शुक्रिया रोज़ाना मेरे ख़्वाबों में आने के लिये।।

RockShayar.wordpress.com

“फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी”

फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी
जहाँ ना आने की कसम थी खायी।

हालाँकि यह एहसास होने में बहुत वक़्त लगा
हर एक एहसास को खोने में बहुत वक़्त लगा।

एक शाम साहिल से बहुत दूर निकल गया समंदर
लौटा जब तक वो, ढ़ह चुका था उसका रेत का घर।

लहरों से कई दिनों तक नाराज़ रहा वो
गुमसुम सा महीनों बेआवाज़ रहा वो।

कितनी ही कश्तियाँ उसके ऊपर से गुज़र गयी 
वो फिर भी ख़ामोश सा एक जगह ठहरा रहा।

आखिरकार एक नदी ने अपना रुख़ मोड़ा
मुश्किल से दिल का रिश्ता जोड़ा।

फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी
जहाँ ना आने की कसम थी खायी।

हालाँकि यह समझने में बहुत वक़्त लगा
हर एक याद को मिटने में बहुत वक़्त लगा।।

#राॅकशायर

“तेरी परछाई संभाल कर रखी है मैंने”

तेरी परछाई संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि अंधेरा घना होने वाला है

तुम्हे ख़बर नहीं थी मेरे आने की
मगर मुझे ख़बर थी तेरे जाने की

वो पल, जो पल भर के लिए हम को मिले थे
न उनमें कोई शिकवे थे, न उनमें कोई गिले थे

तेरी आवाज़ सहेज कर रखी है मैंने
पता था कि ख़ामोशी कायम होने वाली है

तुमने कभी बताया नहीं, कि कौन हो तुम
तफ़्तीश करता रहा, मैं ज़िन्दगी भर यही

इस बार जब मुलाक़ात होगी, तो पूछूँगा
इस मुलाक़ात में कितने अलविदा छुपे हैं

हर बार यह अलविदा मेरी जान ही ले लेता है
पता नहीं कब इसके मुँह, मेरा खून लग गया

तेरी तस्वीर संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि याददाश्त जाने वाली है।।

#RockShayar

“जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है”

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन कहीं दूर चला जाता है।

जहाँ से फिर लौटकर आना मुमकिन नहीं होता है
और जिसे भूल जाना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ उन यादों को याद रखना
मुमकिन होता है तो सिर्फ उन यादों को याद करना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये दिल कहीं पर खो जाता है।

जहाँ से फिर खुद को ढूँढ लाना मुमकिन नहीं होता है
और जिसे छोड़कर जाना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ उस दर्द को महसूस करना
मुमकिन होता है तो सिर्फ उस दर्द को महफ़ूज़ रखना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन मेरा बंजारा हो जाता है।

जहाँ पे फिर मन पर काबू रखना मुमकिन नहीं होता है
और मन को मना कर देना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ अपने मन की आह सुनना
मुमकिन होता है तो सिर्फ अपने मन की राह चुनना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन कहीं दूर चला जाता है।

RockShayar.wordpress.com

“चाहत का चिकन (Poetic Recipe)”

CYMERA_20150823_174102.jpg

चाहत का चिकन
मन के मसालों में
यादों की धीमी आँच पर जब पकता है
तब कहीं जाकर इस रूह का पेट भरता है।

हालाँकि इसे लज़्ज़तदार बनाने के लिये
अरमानों की अदरक
यक़ीन के लहसुन
और प्यारभरे प्याज का पेस्ट भी ज़रूरी है।

साथ में हो अगर
थोड़ी ख़्वाहिशों की तीखी हरी मिर्च
और गुज़रे हुये पलों का गरम मसाला।

बस फिर क्या कहना
फिर तो बस इंतज़ार करना
उस खुशबू का
जो उड़ा दे होश
तन और मन दोनों का।

आखिर में दिलबर मेरे 
दही डालना मत भूलना।

जब पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाये
तब रिश्तों की रोटी
और सपनों की सलाद के साथ सर्व करे
चाहे तो साथ में 
चैन की एक चिल्डवाली पेप्सी भी ले ले।

चाहत का चिकन
मन के मसालों में
यादों की धीमी आँच पर जब पकता है
तब कहीं जाकर इस रूह का पेट भरता है।।

“Henna (मेंहदी/हिना)”

खुद को मिटाकर हमेशा दूसरों को खुशियाँ देती है
हिना तो हर महफ़िल को दिल के रंग में रंग देती है।

हिना की क़िस्मत है पिसना
हिना की फ़ितरत है रंगना
हिना की हसरत है खिलना
हिना की क़ुदरत है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

दुल्हन के हाथों में लगने वाली मेंहदी भी यही है
हर औरत की ज़ेबोज़ीनत संवारती भी यही है।

बिना इसके ना कोई शगुन है
ना कोई फागुन
बिना इसके ना कोई मिलन है
ना कोई साजन।

मेंहदी लगे हाथों को खुद पर नाज़ होता है 
मेंहदी रचे हाथों में रुमानी एहसास होता है।

अपने अरमान दबाकर दिल में अरमान जगाती है
हिना तो पिसते-पिसते खुशी से लाल हो जाती है।

हिना का नसीब है पिसना
हिना को हबीब है जचना
हिना की तक़्दीर है रंगना
हिना को अज़ीज़ है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

हिना की तासीर बहुत ही ठंडी होती है
जलन और तपिश को ये दूर कर देती है।

सब्ज़ पत्तियों की तरह, हिना के जज़्बात भी सब्ज़ होते हैं
हिना पर कोई कैसे लिखे, लिखने को लफ़्ज़ नहीं होते हैं।।

#RockShayar

हिना – मेंहदी
ज़ेबोज़ीनत – Beauty 
रुमानी – Romantic
हबीब/अज़ीज़ – Dear 
तासीर – Nature
सब्ज़ – Green
जज़्बात – Emotions
लफ़्ज़ – Word

“ये कैसी आहट है, जो कभी सुनाई नहीं देती”

ये कैसी आहट है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की सरसराहट है, ये बस महसूस होती।

धड़कने की आदत को, दिल कभी छोड़ता नहीं
जो छोड़ता कभी, तो दिल ये लाखों तोड़ता कहीं।

ये कैसी ख़ामोशी है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की सरगोशी है, जो सुकूंभरे कुछ पल देती।

बदलने की आदत को, वक़्त कभी बदलता नहीं
जो बदलता कभी, तो यादें वो पीछे छोड़ता कई।

ये कैसी ख़्वाहिश है, जो कभी पूरी नहीं होती 
रूह की गुज़ारिश है, जो कभी अधूरी नहीं होती।

महकने की फ़ितरत को, ख़ुशबू कभी छोड़ती नहीं
जो छोड़ती कभी, तो ख़ुशबू वो अपनी छोड़ती कहीं।

ये कैसी आवाज़ है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की परवाज़ है, जो कभी दिखाई नहीं देती।

बरसने की आदत को, बादल कभी बदलते नहीं
जो गरज़ते हैं ज्यादा, वो बादल कभी बरसते नहीं।

ये कैसी ज़िन्दगी है, जो कभी जीने नहीं देती
जो जी उठे एक बार, तो फिर मरने नहीं देती।।

RockShayar.wordpress.com

“तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं सितारों का जहां”

नील समंदर कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं नीला आसमां
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं सितारों का जहां।

तेरी साँसें मेरी साँसों में समाई हैं
तेरी यादें मैंने डायरी में छुपाई हैं।

तेरी आँखें मेरी आँखों का तारा हैं
तेरी बातें मेरे जीने का सहारा हैं।

बहती नदी कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं हवाओं की सदा
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं वादियों का जहां।

तेरी खुशबू मेरी रूह में समाई है
तेरी आरज़ू मैंने दिल में जगाई है।

तेरी तलब ही मेरी तड़प की असल ख़ुराक है
तेरी कसम ओ सनम, तू जीने की इक आस है।

उड़ता पंछी कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं लहरों की ज़बां
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं ख़्वाबों का जहां।

तेरी तस्वीर मेरी आँखों में समाई है
तेरी तस्वीर मैंने आँखों से बनाई है।

तेरी आँखें मेरे सुकून का पिटारा हैं
तेरी यादें मेरे जीने का सहारा हैं।

पहली बारिश कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं ज़मीं की दुआ
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं जादूगरी का जहां।।

“बिन तेरे ख़यालों का क्या करूँ”

मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूँ
बिन तेरे ख़यालों का क्या करूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या कहूँ
बिन तेरे लफ़्ज़ों को कैसे लिखूँ।

मुझे नहीं पता कि तुम किस गली में रहती हो
मुझे इतना पता है कि तुम मुझमें ही रहती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मुझे कितना चाहती हो
मुझे इतना पता है कि तुम उड़ना चाहती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो
मुझे इतना पता है कि तुम कुछ अच्छा सोचती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मेरे मन की डायरी पढ़ती हो 
मुझे इतना पता है कि तुम मेरी हर शायरी पढ़ती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम्हें सच कैसे पता चलेगा
मुझे इतना पता है कि तुम्हें जल्द पता चलेगा।

जिस रोज़ पता चल जाये, दौड़ी चली आना
उस रोज़ ना चलेगा जानाँ, फिर कोई बहाना।

तब मुझे पता चलेगा कि मैं क्या हूँ
तब मुझे पता चलेगा कि मैं तेरा हूँ।

तब मुझे पता चलेगा कि मैं क्या कहूँ
लफ़्ज़ों के लबों पे नाम तुम्हारा लिखूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूँ
बिन तेरे अब अपना क्या करूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या कहूँ
बिन तेरे एक लम्हा कैसे जिऊँ।।

“इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी”

खुली-खुली वो तेरी गीली जुल्फ़ें
झुकी-झुकी वो तेरी नीली पलकें
मीठी-मीठी वो तेरी प्यारी बातें
याद करके जिन्हें गुज़री मेरी रातें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

तुझे देखा तो बस देखता ही रह गया
तेरी लहर के संग-संग मैं भी बह गया
क़तरा भी ना बाक़ी मुझमें मैं रह गया 
एहसास हुआ के तुमसे इश्क़ हो गया
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

दिलनशीं वो तेरी शोख़ अदाये
दिलकशीं वो तेरी होश उड़ाये
खुशबू वो तेरी मुझको महकाये
देखना चाहे तुझको मेरी निगाहें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

जादूभरी वो तेरी मनपसंद बातें 
जादूगरी वो तेरी मुहरबंद यादें
जादू जैसी वो तेरी नज़रबंद आँखें
देखकर जिन्हें जी उठती मेरी साँसें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।।

“तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की”

वो छुप-छुपकर तुम्हें देखना मेरा
वो नज़रों के ख़त तुम्हें लिखना मेरा
वो हद से ज्यादा तुम्हें चाहना मेरा
वो तुमसे ज्यादा तुम्हें सोचना मेरा
मुझे ख़बर है बेख़बर मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो हर चेहरे में तुमको ही देखना मेरा
वो नज़र आने तक पीछा करना मेरा
वो रब से हमेशा तुमको मांगना मेरा
वो तुमसे ज्यादा तुमको जानना मेरा
मुझे ख़बर है इस क़दर मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो कुछ ना कहकर सब कहना मेरा
वो लहरों की तरह साथ बहना मेरा
वो लफ़्ज़ों में तुम्हें ज़िंदा रखना मेरा
वो यादों में तुमको बयां करना मेरा
मुझे ख़बर है हमसफ़र मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो ना चाहकर भी तुमसे दूर होना मेरा
दर्द के दरिया में पल-पल डूबना मेरा
वो हद से ज्यादा खुद को सताना मेरा
अपने हाथों से यादों को जलाना मेरा
मुझे ख़बर है बेसबर मेरे संसार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की।।

“हम जान बूझकर जाने जाँ तुमसे हार जाते है”

किसी से नहीं बस अपने दिल से हार जाते है
हम जान बूझकर जाने जाँ तुमसे हार जाते है।

जब भी तुमको देखते है, बड़ी हसरत से देखते है
दिलबर मेरे उसी पल, दिल ये तुम पे हार जाते है।

पहले तो मिलती नहीं, मिले तो फिर हटती नहीं
हम किसी से नहीं बस तेरी नज़र से हार जाते है।

तेरी शोख़ हसीन अदायें, मेरे दिल का चैन चुराये
अपने दिल का चैन हम बड़े आराम से हार जाते है।

खुशी का क्या है, पलभर में मिले सदियों तक ना मिले
तेरी खुशी के लिये हर खुशी हम, खुशी से हार जाते है।

हारी बाज़ी जीतने की, जब भी बारी आती है
किसी से नहीं बस अपने आप से हार जाते है।

ज़िंदगी की यह जंग भी, कैसी जंग है इरफ़ान
सब कुछ जीतकर भी आखिर में हार जाते है।।

RockShayar.wordpress.com

“मैं हर रोज़ तुम पर एक ग़ज़ल लिखना चाहता हूँ”

कई दिनों से तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ
मैं हर रोज़ तुम पर एक ग़ज़ल लिखना चाहता हूँ।

हालाँकि ज्यादा वक़्त नहीं हुआ है हमें मिले हुये
मैं फिर भी तुम्हारे बारे में सब जानना चाहता हूँ।

आँखों ने आँखों को चुन लिया, ओ रे पिया मोरे पिया
आँखों से आँखों के अनकहे अल्फ़ाज़ पढ़ना चाहता हूँ।

अब और क्या सोचना, बस यही अब सोचना
मैं तुम से ज्यादा तुमको अब सोचना चाहता हूँ।

चेहरों के घने जंगल में, चेहरा तेरा नूरानी है
मैं हर चेहरे में बस तेरा, चेहरा देखना चाहता हूँ।

दिल मेरा सहम जाता है,
जब भी दूर जाने का वक़्त पास आता है
मैं दूरियों का नहीं बस तुम्हारा होना चाहता हूँ।

दिलबर मेरे, दिल की खुशबू है तू, आरज़ू है तू
मैं रोज़ तुम्हें ज़िंदगी की तरह जीना चाहता हूँ।।

RockShayar.wordpress.com

“इश्क़ के हिसाब में थोड़ा सिफ़र हूँ मैं”

तेरी नज़रों के सफ़र से नहीं बेख़बर हूँ मैं
बस इश्क़ के हिसाब में थोड़ा सिफ़र हूँ मैं। 

जब से तुझको देखा है, खुद को नहीं देखा मैंने
मालूम नहीं जाने जहां, कहाँ और किधर हूँ मैं।

धीरे से दरवाज़ा खोलना, और धूल मत उड़ने देना
कई दिनों से बंद पड़ा, यादों का यतीमघर हूँ मैं। 

तेरे साये में सुकून मिला, मुझको यह जुनून मिला
के तपती हुई दोपहर में, शान से खड़ा शजर हूँ मैं।

ये उस दिन की बात है, जिस दिन सब कुछ बदल गया
बस उस दिन से दरबदर, सफ़र में इस क़दर हूँ मैं।

ख़यालों के झोंके जब भी आते हैं, मुझको ये बताते हैं
के सिर्फ एक झोंका नहीं, ख़यालों का बवंडर हूँ मैं।

वक़्त की साज़िश, और दर्द की आतिश ने सब कुछ जला दिया इरफ़ान
पर जलकर भी ना जला जो कभी दिल का वो घर हूँ मैं।

#RockShayar

सफ़र – यात्रा
सिफ़र – शून्य, ज़ीरो
यतीमघर – अनाथालय
शजर – पेड़, वृक्ष
आतिश – आग

“दरअसल मेरा घर था”

तुम लोगों ने जिसे ठूंठ समझकर जला दिया था
ख़्वाबों का वो ऊँचा शजर, दरअसल मेरा घर था।

बरसों लगे थे मुझको, जिसे बसाने में, सजाने में
यादो का वो पुराना शहर, दरअसल मेरा घर था।

दिल के शहर में, बंजारे की तरह दर-दर भटकना 
ख़यालों का वो तन्हा सफ़र, दरअसल मेरा घर था।

मुस्कुराते हुये जलता रहा, वो मुरझाकर भी खिलता रहा
ख़ताओं से था जो बेख़बर, दरअसल मेरा घर था।

कहानी से तो कर ली, पर पानी से ना कर पाये दोस्ती
डूब जाने का वही पुराना डर, दरअसल मेरा घर था।

मोहब्बत ने ऐसा सिला दिया, के नफ़रत से नाता जोड़ लिया
दर्द-ए-दिल से अमीर वो दर, दरअसल मेरा घर था।

ज्यादा समझ नहीं है मुझे दुनियादारी की इरफ़ान
जो मिल गया वही मुकद्दर, दरअसल मेरा घर था।।

“मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना”

मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना
मोहब्बत को दिल से मिटाने की साज़िश न करना।

कौन छुपा सका हैं, जज़्बात अपने अंदर यहाँ
ख़ामोशी से मोहब्बत छुपाने की कोशिश न करना।

बिखर जायेगी ज़िंदगी, पलभर में तुम्हारी
मोहब्बत में खुद को आज़्माने की कोशिश न करना।

होती है तो शिद्दत से होती है, वरना नहीं होती है
मोहब्बत से कभी दिल बहलाने की कोशिश न करना।

आग से दूर रहने में ही भलाई है, ये बात तुम्हें कितनी बार समझाई है
दिलजलों के दिल जलाने की नाकाम कोशिश न करना।

कौन इतना बेवकूफ है, जो आँखों का अनकहा न समझे
अश्क़ों की आड़ में जज़्बात छुपाने की कोशिश न करना।

हम पहले ही बहुत पास आ चुके हैं, खुद को ये एहसास करा चुके हैं
अब इससे ज्यादा और पास आने की कोशिश न करना।

मोहब्बत का क्या है, पलभर में हो या सदियों तक न हो
शोहरत के लिये मोहब्बत करने की कोशिश न करना।।

“ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है”

ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है
यूँ समझ लीजिये के दर-ब-दर भटकना लिखा है।

मोहब्बत तो दिल से की, पर कह न पाये उसे कभी
ताउम्र अब तो मोहब्बत के लिये तरसना लिखा है।

जहाँ कहीं भी है तू, सुन मेरे दिल की आवाज़ तू
तुझे भुलाने की कोशिश में तुझे याद करना लिखा है।

हादसों पर हादसे मिले, तभी तो बने हम दिलजले
सौ बार गिरकर आखिर में खुद संभलना लिखा है।

अभी कहाँ रुकने की बात, अभी कहाँ वो चैन की रात
अभी तो दोपहर में दूर तक, नंगे पाँव चलना लिखा है।

अपने होने का एहसास हुआ, कुछ तो है जो ख़ास हुआ
ख़्वाबों के गुलशन में खुशबू बनकर महकना लिखा है।

कम उम्र में बड़ी पहचान, इत्तेफाकन नहीं है इरफ़ान
इतना तो है कि किस्मत में कुछ अलहदा लिखा है।।

“तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे”

तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे
तेरे-मेरे साथ से मोहब्बत है मुझे।

तुझसे मिला तो यूँ लगा, जैसे खुद से मुलाक़ात हो गई
तेरी हर मुलाक़ात से मोहब्बत है मुझे।

बिनकहे सब सुन लेना, मन ही मन मन की बात कहना
तेरे हर जज़्बात से मोहब्बत है मुझे।

पलभर को मिले जो, उम्रभर को जले वो
उन चंद लम्हात से मोहब्बत है मुझे।

मुझे मेरा पता देते हैं, जीने की वज़ह देते हैं
तेरे हर एहसास से मोहब्बत है मुझे।

पहली नज़र में प्यार, नज़रों से दिल पर वार
तेरे हर अंदाज़ से मोहब्बत है मुझे।

जो ख़ामोशी छाई तो पता यह चला इरफ़ान
तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे।।

“आज़ादी क्या होती है”

उड़ते हुये परिंदों से पूछो, आज़ादी क्या होती है
शहर के बाशिंदों से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

अंधेरे में साँस घुटती है, ज़िंदगी की लौ बुझती है
कभी किसी क़ैदी से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

जब कोई गाँव मरता है, उसकी क़ब्र पर शहर बसता है
कभी किसी घर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

चाँद के पार चले जाना, सूरज को गले से लगाना
कभी किसी सहर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

दिल में तूफ़ान जगाये, कश्ती किनारे सब भूल जाये
कभी किसी लहर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

रास्तों से गुज़रते हुये, खुद अपना रस्ता ढूँढ़ते हुये 
कभी किसी सफ़र से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

हर रोज खुद से लड़ते हो, हर रोज खुद से डरते हो
कभी अपने उस डर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।।

“जिस रिश्ते में यकीन न हो वो रिश्ता हमने तोड़ दिया है”

परवाह करना छोड़ दिया है
अपने हाल पर उन्हें छोड़ दिया है।

जिस रिश्ते में यकीन न हो
वो रिश्ता हमने तोड़ दिया है।

पथरीली राहों पर चलते-चलते
ज़िंदगी को नया मोड़ दिया है।

वक़्त ने मरहम लगा लगाकर
दिल को फिर से जोड़ दिया है।

नहीं भूले उस हादसे को अब तक
रूह को जिसने निचोड़ दिया है।

नफ़रत के काबिल है वो तो 
यक़ीन को जिसने तोड़ दिया है।

मेरे सवालों का जवाब दे ऐ ज़िंदगी
तूने मुझे अधमरा क्यों छोड़ दिया है।।

“एहसास के धारे”

तेरी साँसों में बहते हैं एहसास के धारे
धारे भी वो जो लगते हैं मन को प्यारे।

तेरी आँखों में रहते हैं आसमान के तारे
नीले आसमान की तरह हैं नैना तुम्हारे।

नैना जो के समझते हैं सिर्फ नैनों के इशारे
इशारे भी वो जो बन गये हैं जीने के सहारे।

सहारे भी ऐसे के जैसे बारिश की फुहारें
बस एक नील समंदर हैं, ना कोई किनारे।

साथ चलते हैं पर कभी नहीं मिलते किनारे
साथ होते हैं ये हरक़दम लहरों को निहारे।

जीने लगा हूँ मैं अब तेरी यादों के सहारे
बेशक तुम हो हमारे, और हम है तुम्हारे।

तेरी यादों से लिपटे हैं ख़यालों के सितारे
सितारों भी वो जो चमकते हैं रातों में सारे।

इस बात पर जज़्बात जग गये हैं सारे
आओ ना कुछ देर यूँही हम एक दूसरे को निहारे।

तेरी आँखों में रहते हैं आसमान के तारे
नीले आसमान की तरह हैं नैना तुम्हारे।

तेरी साँसों में बहते हैं एहसास के धारे
धारे भी वो जो लगते हैं मन को प्यारे। ।

#RockShayar

“इश्क़ जब होता है”

इश्क़ जब होता है पता नहीं चलता है
इश्क़ जब होता है छुपा नहीं रहता है
इश्क़ जब होता है दिल नहीं भरता है
इश्क़ जब होता है दिल नहीं डरता है
इश्क़ जब होता है कुछ और नहीं होता है
इश्क़ जब होता है सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।

इश्क़ की राहों में इम्तिहान लिखा होता है
इश्क़ की बाहों में इत्मिनान छुपा होता है
इश्क़ की आँखों में इक़रार बयां होता है
इश्क़ की यादों में इंतज़ार बड़ा होता है
इश्क़ की बातों में कोई लफ़्ज़ नहीं होता है
इश्क़ की बातों में सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है। 

इश्क़ का अंदाज़ बहुत अच्छा होता है
इश्क़ में एहसास बहुत सच्चा होता है
इश्क़ का किरदार मासूम बच्चा होता है
इश्क़ पर ऐतबार मालूम सच्चा होता है
इश्क़ का हमयार कोई शख़्स नहीं होता है
इश्क़ का हमयार सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।

इश्क़ जब होता है तब नींद उड़ जाती है
इश्क़ जब होता है इक डोर जुड़ जाती है
इश्क़ जब होता है अड़चन बहुत आती है
इश्क़ जब होता है धड़कन बढ़ जाती है
इश्क़ जब होता है कुछ और नहीं होता है
इश्क़ जब होता है सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।।

#RockShayar

“ना कोई उसूल, ना कोई तरीका चलता है मोहब्बत में”

A-Walk-To-Remember-HD-Wallpapers4

ना कोई उसूल, ना कोई तरीका चलता है मोहब्बत में
सोचने-समझने का सलीक़ा कहाँ होता है मोहब्बत में

बाक़ी रिश्ते सब एक तरफ़, बाक़ी बातें सब एक तरफ़
दिल से दिल का दिलशाद रिश्ता जुड़ता है मोहब्बत में

अपनी-अपनी फिक़्रों में, सब मशगूल हैं, मसरूफ़ हैं
कोई नहीं जानता ये दिल कितना तड़पता है मोहब्बत में

दिल के जिस हिस्से में हम बचाकर रखते हैं यादें अपनी
दिल का वो हिस्सा थोड़ा ज्यादा धड़कता है मोहब्बत में

नींद को गहरी नींद सुलाना, अपने यार की नींद उड़ाना
ये जगना-जगाना आँखों को अच्छा लगता है मोहब्बत में

सदियों से चला आ रहा है, दिल की वादी में कोई गा रहा है
के हर इंसां यहाँ दिल से एक इंसां बनता है मोहब्बत में।

अब और क्या कहें इरफ़ान, चाहे तू ये मान या ना मान
शायर अपने माशूक पर बेइंतहा लिखता है मोहब्बत में।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“सब अल्फ़ाज़ ख़त्म हो गये”

सब एहसास ख़त्म हो गये
सब जज़्बात ख़त्म हो गये।

ये किस दौर में आ गये हम
सब अल्फ़ाज़ ख़त्म हो गये।

ज़िन्दगी मजाक बनकर रह गयी
मजाक भी वो जिसपे न आये हंसी।

ख़ुशी के नाम से ही चिढ होती है
चिढ भी वो जो कम न होती कभी।

हद से ज्यादा बहुत गुस्सा आता है
गुस्सा भी वो जो खुद को जलाता है।

वफ़ा के नाम से ही ख़फ़ा हो जाते है
ख़फ़ा भी ऐसे के जैसे ज़फ़ा हो जाते है।

सब उम्मीदें ख़त्म हो गयी
सब हसरतें भस्म हो गयी।

अब उस दौर में आ गये हम
जहाँ मोहब्बतें रस्म हो गयी।।⁠⁠⁠⁠

“तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया”

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये सलीक़ा ग़ज़ल ने बताया

शोख़ियों के सुर्ख़ जोड़े में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
मन के मोतियों की माला पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो चैन से रहती हो, और बेचैनियाँ हमको देती हो
उनींदी आँखों में रातभर तुम ख़्वाब की तरह जगती हो

बड़ी ख़ूबसूरती से बुना गया है, तुम्हारी साँसों का ये ताना-बाना
पहली नज़र में तुम किसी शायर का ख़याल लगती हो

मेरे अलहदा अंदाज़ ने तुमको, इस क़दर दीवाना किया
कि ये अंदाज़ अच्छा लगता है मुझे, ये बार-बार कहती हो

तेरी आवाज़ के आगे हर आवाज़ बेआवाज़ हैं, क्योंकि
कानों में तुम खनकती हुई आवाज़ के झुमके पहनती हो

हुस्न की सुर्ख़ ज़री में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
हया के हीरों का हार पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो सुकून से सोती हो, और रतजगे हमको देती हो
रात की आँखों में दीप जलाकर, नींद को तुम ठगती हो

पहली बार देखो, चाहे दूसरी बार, या फिर बार-बार
जब भी देखो तुम तो बस क़ुदरत का कमाल लगती हो

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये तरीका ग़ज़ल ने बताया।।

@RockShayar

“वक़्त”

लोगों से सुना था कि वक़्त बदलता है
पर वक़्त ने बताया कि लोग बदलते हैं।

बदलते-बदलते आखिरकार, वो इतना बदल जाते हैं
के खुद पहचान ना सके खुद को, इतना बदल जाते हैं।

वक़्त पर तोहमत लगायी जाती है बदलने की
वक़्त को तो आदत है, हरवक़्त बस चलने की।

चलते-चलते आखिरकार, वक़्त इतना तेज़ चलता है
के वक़्त को भी सोचने का, फिर वक़्त नहीं मिलता है।

वक़्त पर इल्ज़ाम लगाया जाता है, गुज़र जाने का
वक़्त को कहाँ वक़्त है, अपने रंज़ो ग़म सुनाने का।

गुज़रते-गुज़रते आखिर में, वक़्त इतना बूढ़ा हो जाता है
के खुद वक़्त के पास फिर ज्यादा वक़्त नहीं रह पाता है।

वक़्त पर तंज कसा जाता है, हमेशा कम होने का
वक़्त को कहाँ वक़्त मिलता है, ज़रा भी सोने का।

सोते-सोते आखिरकार, ये गहरी नींद में चला जाता है
के जहाँ से ना आये कोई दोबारा, ये वहाँ चला जाता है।

लोगों से सुना था कि वक़्त बदलता है
पर वक़्त ने बताया कि लोग बदलते हैं।

बदलते-बदलते आखिरकार, वो इतना बदल जाते हैं
के कोई पहचान ना सके उनको, इतना बदल जाते हैं।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा”

कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा
कि जैसे हूबहू मुझ जैसा लगा
कोई है जो मुझे कुछ ऐसे मिला
कि जैसे कई बरसों के बाद मिला
कोई है जो मेरी आँखों में बसता है
कोई है जो मेरी बातों पे हँसता है
कोई है जो मुझमें अब हरपल रहता है
कोई है जो मुझमें अब हरघड़ी बहता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जिसे मैं तलाश रहा था कब से
कोई है जिसे मैं माँग रहा था रब से
कोई है जो मेरी चाहतों में पलता है
कोई है जो मेरी आदतों में ढ़लता है
कोई है जो मेरे अश्क़ों में बहता है
कोई है जो मेरे लफ़्ज़ों में रहता है
कोई है जो मुझे अब अपना सा लगता है
कोई है जो मुझे अब सपना सा लगता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जिसे मैं शिद्दत से चाहता हूँ
कोई है जिसे मैं हसरत से देखता हूँ
कोई है जो मेरी नज़र में हरदम है
कोई है जो मेरी क़लम में हरदम है
कोई है जो मेरी हर डायरी में रहता है
कोई है जो मेरी हर शायरी में होता है
कोई है जो हरजगह अब मेरे साथ चलता है
कोई है जो हरलम्हा अब मेरे पास ही रहता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा
कि जैसे रूबरू मुझ जैसा लगा
कोई है जो मुझे कुछ ऐसे मिला
कि जैसे कई दुआओं के बाद मिला
कोई है जो मेरी बातों में होता है
कोई है जो मेरी नींदों में सोता है
कोई है जिससे बहुत मोहब्बत करता हूँ
कोई है जिसपे मैं अब बेइंतहा मरता हूँ
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“वो तो लौटकर फिर एक बार दोबारा वहीँ आना चाहते थे”

वो तो लौटकर फिर एक बार दोबारा वहीँ आना चाहते थे
मगर हम थे के फिर एक बार धोखा नहीं खाना चाहते थे

उसकी हर इक याद को, हमें मिटाने में बहुत वक़्त लगा
बहुत मुश्किल था वो दौर, जब हम नहीं जीना चाहते थे

अँधेरे ने इस क़दर जकड़ लिया था, के गिरफ़्त में पकड़ लिया था
अपने आस-पास ज़रा भी उजाला नहीं देखना चाहते थे

किसी अपने ने जब सपने तोड़े, मुश्किल से जो थे बस थोड़े
अपनी मर्ज़ी से तो हम कोई रिश्ता नहीं तोड़ना चाहते थे

ज़ख्म अपने हम छुपाते गये, खुद मरहम उन पर लगाते गये
अपनी वजह से कभी किसी को तकलीफ़ नहीं देना चाहते थे

मालूम नहीं एक रोज़ क्या हुआ था, मगर कुछ तो हुआ था
बस जो हुआ था उस पर कभी यक़ीन नहीं करना चाहते थे

सब कहते थे अच्छा लिखते हो, तुम बहुत सच्चा लिखते हो
हमने सब लिखा, बस अपनी कहानी नहीं लिखना चाहते थे

उसने तो बहुत कोशिश की, एक अर्से तक ‘इरफ़ान’
मगर हम थे के फिर एक बार दिल अपना नहीं तोड़ना चाहते थे।

#RockShayar

“तसव्वुर में मेरे आजकल तुम्हारी तस्वीर चलती है”

तसव्वुर में मेरे आजकल तुम्हारी तस्वीर चलती है
काग़ज़ पर अल्फ़ाज़ नहीं बल्कि तस्वीर उभरती है।

तेरी तस्वीर जब भी देखता हूँ, ख़यालों में खो जाता हूँ
मैं कुछ नहीं लिखता हूँ, तेरी तस्वीर मुझसे लिखवाती है।

तेरी रूह, तेरा नक़्श, तेरा नाम, सब चाँदी जैसे सफ़ेद हैं
दिल के अंधेरे कमरे में, तू रौशन कोई खिड़की लगती है।

तेरी खुशबू का अंदाज़ा तो इस बात से मालूम चलता है
कि जिस गली से गुज़रे तू, वो गली फूलों सी महकती है।

तेरे आने से मेरी ज़िंदगी का अधूरापन अब खत्म हुआ
ज़िंदगी पहले के बजाय इन दिनों ज्यादा मुस्कुराती है।

मुझे ये ख़बर है कि तुम्हें मेरे फ़ितूर की कोई ख़बर नहीं
सुन ओ बेख़बर, तेरी तस्वीर तो मेरी आँखों में बसती है।

दुआओं की दरख़्वास्त है, ये जुदाई नाकाबिले बर्दाश्त है
सुना है कि दुआओं से तक़्दीर की तस्वीर बदल जाती है।।⁠⁠⁠⁠

“अगर मैं तुमसे ये कहूँ”

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है।

रहने को या कहने को तो हम दोनों तन्हा हैं
फिर भी साथ-साथ हर जगह हर लम्हा हैं
मेरा हर लफ़्ज़ तुम्हारी खुशबू से वाकिफ़ हैं
तुम्हारा हर लम्स मेरी आरज़ू के काबिल हैं।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत सच्ची लगती हो
तो इस बात पर तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो रोज़ आता तुम्हारा ही सपना है।

सपने में तुम और भी हसीन लगती हो
चाँदनी में नहाई हुई नाज़नीन लगती हो
ख़ामोशी की चादर ओढ़े हुये हैं लब तुम्हारे
नैनों के वो ढ़ेरों ख़त पढ़े हुये हैं सब तुम्हारे।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत प्यारी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम साथ तुम्हारा ही देना है।

साथ देने और साथ रहने में बहुत फर्क़ है
ज़िंदगी का क्या है, ये ज़िंदगी तो बेदर्द है
एहसास को तलाश के तराजू में ना तोलो
गर महसूस करो तो एहसास ही हमदर्द है।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो बेबाक संग तुम्हारे ही बहना है।

बहते-बहते जाने जहां, कहाँ आ गये हैं हम
नील समंदर फैला जहाँ, वहाँ आ गये हैं हम
एक आहट है जो सुकून-ओ-राहत देती है
दिल ने दस्तक देकर सब मिटा दिये हैं ग़म।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है
मेरे दिल का फ़क़त तुमसे यह कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही जीना है।।

http://www.rockshayar.wordpress.com⁠⁠⁠⁠

“मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ”

बेशक ये सच है कि तुमसे जुड़ी हर चीज देखता हूँ
मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

ख़्वाब आये तो सिर्फ तुम्हारा आये, वरना ना आये
इसलिये तो तकिये के नीचे रखी तस्वीर देखता हूँ।

ये वक़्त वो वक़्त, पता नहीं कौन ज्यादा सख़्त
हर वक़्त बेवक़्त बस वक़्त की तस्वीर देखता हूँ।

जब भी तेरी याद सताये, रूह मेरी यह फड़फड़ाये
दिल के बंद कमरे में टंगी तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

नज़रों से क्या छुपा हैं, नज़रों में तो सब छुपा हैं
नज़रों के सफ़र में हमसफ़र तेरी तस्वीर देखता हूँ।

वैसे तो कई तस्वीरें हैं, देखने को इस जहान में
पर ना जाने क्यों मैं तुम्हारी ही तस्वीर देखता हूँ।

जब नींद ना आये इरफ़ान, बेचैनी करने लगे परेशान
तब तसव्वुर की आँखों से तेरी तस्वीर देखता हूँ।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“बदहवास ब्लू व्हेल”

जिस ज़िंदगी ने तकनीक को नई एक ज़िंदगी दी
वही तकनीक आज हमसे यह ज़िंदगी छीन रही।

ये तरक्कीपसंद इंसान न जाने किसे तरक्की कह रहा हैं
तमाशाई बनकर बस अपनी मौत का तमाशा देख रहा हैं।

कौन बुजदिल नामुराद है जो ऐसा जाल फेंक रहा है
ये कैसा खेल है जो मासूम बच्चों की जान ले रहा है।

बेचारी ब्लू व्हेल को तो पता तक नहीं
कि वो इतनी ज्यादा बदनाम हो गयी।

वर्चुअल टास्क को पूरा करने के चक्कर में
ज़िंदगी के बेहद ज़रूरी टास्क थम जाते हैं।

कोई हाथ पर ब्लेड से कट मार रहा हैं
तो कोई सुसाइड नोट तैयार कर रहा हैं
कोई रेल के आगे आ रहा हैं
तो कोई फिनाइल पी रहा हैं।

कोई फाँसी का फंदा चूम रहा हैं
तो कोई नशे में धुत झूम रहा हैं
कोई कलाई की नस काट रहा हैं
तो कोई अपना गला काट रहा हैं।

आज स्मार्टफोन चलाने वाले करोड़ों स्मार्ट यूजर्स को
ऐबदार एप्स और गड़बड़ गेम्स ने ग़ुलाम बना रखा हैं।

लानत है ऐसे तकनीकपरस्त समाज पर
जिसे डिजिटल नशे की बुरी लत लग गई।

राष्ट्रीयता का रोना रोने वालों
ज़रा इस पर भी तुम ग़ौर करो
इस ई-ग़ुलामी से आज़ादी का
अब ठोस प्रबंध कोई और करो।

जिस लाइफ ने टेक्नोलॉजी को एक न्यू लाइफ दी
वही टेक्नोलॉजी आज हमसे यह लाइफ छीन रही।।⁠⁠⁠⁠

“चट्टानों की तरह है वुज़ूद मेरा, लहरों की तरह है वुज़ूद तेरा”

चट्टानों की तरह है वुज़ूद मेरा
लहरों की तरह है वुज़ूद तेरा।

खुश्क़ सहराओं से कोसों दूर
समंदर किनारे अपना बसेरा।

चट्टानों पर खड़ी होकर खुद को निहारती हो
पानी को आईना बनाकर जुल्फ़ें संवारती हो।

चट्टानों की फ़ितरत हैं पथरीला बन जाना
लहरों की तो आदत हैं सब बहा ले जाना।

चट्टानों पर खड़ी होकर दरिया-ए-दिल देखती हो
पानी को स्याही समझकर हाल-ए-दिल लिखती हो।

चट्टानों की किस्मत हैं लहरों के मुस्लसल थपेड़ें सहना
लहरों की तो हसरत हैं चट्टानों के माथे पर बोसा लेना।

चट्टानों के पास आती हो और फिर दूर निकल जाती हो
पानी को हथेलियों में भरकर खुद को महसूस करती हो।

चट्टानों की चाहत हैं लहरों को ठहरना सिखाना
लहरों की तो आदत हैं चट्टानों से रोज टकराना।

चट्टानों पर खड़ी होकर जाने क्या सोचती हो
पानी को ख़त समझकर गीले पन्ने पलटती हो।

चट्टानों की फ़ितरत हैं लहरों को साहिल पर ही रोक देना
लहरों की तो आदत हैं चट्टानों को छूकर फिर लौट जाना।

चट्टानों की मोहब्बत हैं लहरें
लहरों की तो चाहत हैं चट्टानें।

एक दूसरे के बिना, किसी समंदर को न जाने ये दोनों
एक दूसरे से मिलकर, लगे हैं समंदर को पाने ये दोनों।

चट्टानों की तरह है वज़ूद मेरा
लहरों की तरह है वज़ूद तेरा।

इस बार जब मुलाक़ात होगी
दिल के साहिल पर होगा सवेरा।।

-राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“मुझको रोकने की कभी हिम्मत न करना”

मुझको रोकने की कभी हिम्मत न करना
गलती से भी टोकने की हिम्मत न करना।

दहकती आग हूँ मैं, मासूम मोम हो तुम
पास आने की कभी ज़ुर्रत न करना।

माफ़ कर देना, दिल को साफ़ कर लेना
रब से किसी की शिकायत न करना।

औरों के लिये, कोई और बनकर
खुद से कभी तुम बग़ावत न करना।

महसूस न कर पाओ जिसे खुद में तुम
उस शख़्स से कभी मोहब्बत न करना।

मौत भी तो एक मुकम्मल ज़िंदगी है
फिर ऐसी ज़िंदगी की चाहत क्या करना।

मरकर हमने तो इतना ही जाना इरफ़ान
के खुद से कभी तुम नफ़रत न करना।।

“हिन्दी केवल एक भाषा नहीं”

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल एक गाना नहीं
जीवन की जयगाथा है।

हिन्दी केवल एक वर्ग नहीं
विविधताओं का भंडार है
हिन्दी केवल एक तर्क नहीं
समीक्षाओं का संसार है।

हिन्दी बहुत सरल है
प्रकृति जिसकी तरल है
संवेदनाओं की भूमि में
यह परिपक्व फसल है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
संवैधानिक एक पर्व है
हिन्दी केवल राजभाषा नहीं
गणतांत्रिक यह गर्व है।

हिन्दी केवल एक बोली नहीं
चिंतन की यह उपमा है
हिन्दी केवल एक मोती नहीं
मंथन की यह महिमा है।

अभिव्यक्ति का अंश है
यह न कोई अपभ्रंश है
आदिकाल से भी आदि
सभ्यताओं का वंश है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की यह ज्वाला है
हिन्दी केवल परिभाषा नहीं
सृजन का यह प्याला है।

हिन्दी केवल एक संकाय नहीं
ज्ञान की यह दृष्टि है
हिन्दी केवल एक पर्याय नहीं
सम्मान की यह सृष्टि है।

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं
के साहित्यिक पतन रोकती यही
पठन-पाठन अतिसुंदर लेखन
लोक-लुभावनी लोकोक्ति यही।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिज्ञासा है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
मन की महत्वाकांक्षा है।

हिन्दी केवल एक मंत्र नहीं
आध्यात्मिक अनुनाद है
हिन्दी केवल एक छंद नहीं
यह आत्मिक अनुवाद है।

अनुदार नहीं बहुत उदार है यह
उद्वेलित मन का उपहार है यह
वैचारिक व्याकरण से सुसज्जित
हृदय का उद्दीप्त उद्गार है यह।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिजीविषा है
हिन्दी केवल अभिलाषा नहीं
सृजन की सही दिशा है।

हिन्दी केवल एक मुक्तक नहीं
मर्म की मधुशाला है
हिन्दी केवल एक पुस्तक नहीं
कर्म की पाठशाला है।

राष्ट्रीय गौरव है यह
शासकीय सौरव है यह
क्लिष्ट और कर्कश नहीं
मधुर कलरव है यह।

हिन्दी केवल एक पथ नहीं
चिंतन की उपमा है
हिन्दी केवल एक रथ नहीं
मंथन की महिमा है।

हिन्दी केवल चलचित्र नहीं
अभिव्यक्ति का संगीत है
हिन्दी केवल एक क्षेत्र नहीं
अनुभूति का यह गीत है।

हिन्दी केवल एक प्रदेश नहीं
बल्कि संपूर्ण भारत है
हिन्दी केवल राजआदेश नहीं
बौद्धिक अभिभावक है।

हिन्दी केवल शब्दकोश नहीं
विधाओं का विस्तार है
हिन्दी केवल ज्ञानकोश नहीं
मेधाओं का मल्हार है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
कवि की कविता है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
रवि की सविता है।

हिन्दी केवल एक अक्षर नहीं
यह विशिष्ट योग्य वर्ण है
हिन्दी केवल हस्ताक्षर नहीं
अपितु हृदय का दर्पण है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल राष्ट्रभाषा नहीं
जीवन की महागाथा है।।

-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान⁠⁠⁠⁠

“काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली”

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी बातों के बिना मेरी बातें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

उठते-बैठते हर वक़्त तुम्हारी तस्वीर से बात करता हूँ
जागते-सोते हर वक़्त तुम्हें याद रखकर याद करता हूँ।

हालाँकि बेपनाह चाहता हूँ तुम्हें, लेकिन कभी नहीं बताता हूँ तुम्हें
गुस्से में और भी हसीन लगती हो, इसीलिये तो सताता हूँ तुम्हें।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी आँखों के बिना मेरी आँखें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

पता ही नहीं चला कब तुमसे मोहब्बत हो गई
पता ही नहीं चला कब तुम्हारी आदत हो गई।

तुम्हें तो शायद ये भी पता नहीं कि तुम्हें सोचता हूँ मैं
तुम्हें तो शायद ये भी मालूम नहीं कि तुम्हें लिखता हूँ मैं।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी साँसों के बिना मेरी साँसें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

तुम्हें मुझसे ही मोहब्बत करने की कोई बंदिश नहीं
तुम्हें मेरा ही साथ देने की मैं करता गुज़ारिश नहीं।

एक दिन तुम यह जान जाओगी कि तुम्हारा आशिक कौन था
एक दिन तुम यह मान जाओगी कि तुम्हारा साहिल कौन था।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी यादों के बिना मेरी यादें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।।⁠⁠⁠⁠

“गुच्छे की आखिरी चाबी भी कभी-कभी ताला खोल देती हैं”

गुच्छे की आखिरी चाबी भी कभी-कभी ताला खोल देती हैं
ये सच है कि निगाहें दिल की अनकही हर बात बोल देती हैं।

नज़रों की बेनज़ीर शमशीर, जब किसी पर चलती है तो
कुछ बोलने से पहले नज़रों में छुपा हर डर खोल देती हैं।

गुनगुनाते हुये गीत की तरह, मुस्कुराते हुये संगीत की तरह
इतनी गहरी है तुम्हारी आँखें कि मेरा मन टटोल लेती हैं।

वैसे तो बेज़ुबां आँखें बोलती नहीं, राज़ कभी कोई खोलती नहीं
पर हो यक़ीं जिस पर, अपना हर राज़ उसे बोल देती हैं।

पढ़ने वाली और लिखने वाली, एक ही नज़र के कई हुनर
बिना तराजू और बाट के फट से वज़्नी हर्फ़ तोल देती हैं।

पहली नज़र का वो असर, नज़रों से कभी नज़र मिलाकर तो पूछो
बिना सोचे-समझे बिना पूछे-ताछे बस हाँ बोल देती हैं।

सारी ज़िंदगी गुज़र गयी, बस यही बात नज़र आयी
कि रोते वक़्त अमूमन आँखें अपना दिल खोल देती हैं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कश्मीर”

ख़ुदा ने जिस कश्मीर को जन्नत जैसा खूबसूरत बनाया
इंसान ने उसी कश्मीर को आज दोज़ख जैसा बना दिया।

एक अर्से से वादी में आज़ादी का खेल चल रहा है
कई बरसों से नफ़रत की आग में दिल जल रहा है।

ज़िहाद के नाम पर फ़साद करने वालों सुनो ज़रा
खुद अपने ही घरों को तुमने अपने हाथों जलाया।

जिन लोगों पर पागल होकर पत्थर फेंक रहे हो तुम
जब बाढ़ आई तब इन्हीं लोगों ने था तुमको बचाया।

सियासत के नाम पर हर जगह जो तिजारत हो रही हैं
मादर-ए-वतन से आज क्यों इतनी बग़ावत हो रही हैं।

नेता तो यही चाहते हैं ये बर्बादी यूँही चलती रहे
दहशतगर्दी के साये में यह वादी यूँही जलती रहे।

मज़हब के ठेकेदारों ने ख़ूब मोर्चा संभाल रखा है
मासूमियत के दिल में हैवानियत को पाल रखा है।

खिलौनों की जगह हाथों में बंदूक थमा दी जाती हैं
ज़ेहन में ज़हर भरकर मौत मंज़ूर करा ली जाती हैं।

अब तो ये पहाड़ भी कुछ बोलते नहीं
ख़ून के दाग़ धब्बे खुद पर टटोलते नहीं।

अब तो ये नदियाँ भी कुछ कहती नहीं
बहता ख़ून देखकर बहना बंद करती नहीं।

अब तो ये धुंध भी ज्यादा देर रुकती नहीं
सूरज की रौशनी से आजकल डरती नहीं।

अब तो झील पर शिकारे भी ख़ामोश चलते हैं
पानी पर चलते हैं, फिर भी जाने क्यों जलते हैं।

कोई कुछ नहीं बोलता अब, सबने जीना सीख लिया हैं
झूठी आज़ादी के लिये, समझौता करना सीख लिया हैं।

सब समझ चुके हैं यहाँ, जिसने भी अपना मुँह खोला
पहना दिया जाता हैं उसे, उसी पल फांसी का चोला।

ख़ुदा ने जिस कश्मीर को जन्नत जैसा हसीन बनाया
इंसान ने उसी कश्मीर को आज जहन्नुम बना दिया।

मुद्दत से वादी में आज़ादी का खेल चल रहा है
शिद्दत से नफ़रत की आग में दिल जल रहा है।

अफ़सोस, के अब तक कोई न समझ सका इस दर्द को
अफ़सोस, के अब तक कोई न पकड़ सका इस मर्ज़ को।

अपनी बदहाली पर कई बरसों से रो रहा है कश्मीर
अपने गुनाहों का बोझ सदियों से ढ़ो रहा है कश्मीर।।

@राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“बदलते-बदलते आखिरकार पूरी तरह बदल गयी”

बदलते-बदलते आखिरकार पूरी तरह बदल गयी
गिरते-पड़ते चलते-चलते ज़िंदगी खुद संभल गयी।

कल को आज समझ बैठे, पल में कई सदियाँ समेटे
ये उम्र भी आखिर उम्र निकली, एक रोज़ ढ़ल गयी।

पकड़ने की बहुत कोशिश की, पर नतीजा यह निकला
के ज़िंदगी की मछली वक़्त के हाथों फिसल गयी।

पता ही नहीं चला कभी, कब दिन ढ़ला कब रात हुई
चुपके-चुपके दबे पाँव, तन्हाई मुझको निगल गयी।

सुना है कि पत्थरदिल पिघलते नहीं, गलत सुना है
मरते-मरते मौत भी खुद मौत देखकर पिघल गयी।

जो चाहा वो पाया, जो सोचा वो कर दिखाया
और कुछ नहीं बस मेरी तन्हाई मुझको खल गयी।

अब भी महसूस करता हूँ, वो तपिश अपने अंदर
ऐसी आग लगाई उसने कि रूह तक जल गयी।।

@राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“वो हुस्न ही क्या जो सही सलामत छोड़ दे”

वो हुस्न ही क्या जो सही सलामत छोड़ दे
वो इश्क़ ही क्या जो बग़ावत करना छोड़ दे।

इंतक़ाम की हसरत, बड़ी क़ातिल और हसीन हसरत
वो नफ़रत ही क्या जो नफ़रत करना छोड़ दे।

मुहाफ़िज़ बन बैठे हैं सब मुज़रिम आजकल
वो अदालत ही क्या जो खुद अपना क़ानून तोड़ दे।

गुनाहों से सौ बार डरना, फिर भी हर बार गुनाह करना
वो शरीफ़ ही क्या जो शराफ़त का दामन छोड़ दे।

खेल-खेल में रेल चलाना, हर बात को खेल समझना
वो बचपन ही क्या जो शरारत करना छोड़ दे।

अंदर ही अंदर रहती है, सोच में कहीं बहती है
वो हसरत ही क्या जो अपनी हसरत करना छोड़ दे।

नसीब का यह अजीब पहिया, नसीब ही जाने भय्या
वो किस्मत ही क्या जो पल-पल बदलना छोड़ दे।

ज़िंदगी से मोहब्बत, क्या खाक़ मोहब्बत
वो मोहब्बत ही क्या जो हमें ज़िन्दा छोड़ दे।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम”

हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम
हर बार की तरह इस बार भी बहुत मज़बूर हैं हम।

दूर जाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
पास न आने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

कोशिश ने भी अब तो कोशिश करना छोड़ दिया है
दिल के बेइरादा इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारा मन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही गलती दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

गलती सुधारने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
गलती न करने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

उम्मीद ने भी अब तो उम्मीद का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेपरवाह इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही भूल दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

यादों से मिटाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
दोबारा न मिलने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

किस्मत ने भी अब तो किस्मत का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेमिसाल बहाने समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
बंजारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

मगर इस हर बार की तरह नहीं कुछ अलग होगा
मोहब्बत हो गयी है, सो दुश्मन ये सारा जग होगा।

अब जुदा-जुदा जीने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
मोहब्बत में न लुटने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

ज़िंदगी ने भी अब तो ज़िंदगी का हाथ थाम लिया है
दिल के बेपनाह इरादे समझ चुकी है वो।

इसीलिए तो अब हम बहुत दूर रहने को तैयार नहीं
इसीलिए तो अब हम यह दूरी सहने को तैयार नहीं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था”

ज़ेहन के पुराने हिस्से में
कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था।

सोचा इसे आज पूरा कर दूँ
तुम कहो तो इसे तुम्हारे नाम कर दूँ।

इसी बहाने तुम्हारा ज़िक़्र भी हो जायेगा
ज़िक़्र के दरमियाँ कहीं ये दिल खो जायेगा।

याद है तुम्हे !
तुम्हारी यादों से पुराना रिश्ता है मेरा।

एक ऐसा रिश्ता जिसका कोई नाम नहीं
एक ऐसी सुबह जिसकी कोई शाम नहीं।

एक ऐसा शख़्स जिसका कोई मकसद नहीं
एक ऐसा लफ़्ज़ जिसका कोई मतलब नहीं।

एक ऐसी लहर जिसका कोई शोर नहीं
एक ऐसी नज़र जिसका कोई छोर नहीं।

ज़ेहन के पुराने हिस्से में
कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था।

सोचा इसे आज पूरा कर दूँ
तुम कहो तो इस दिल पे तुम्हारा नाम लिख दूँ।

इसी बहाने तुम्हारा एहसास भी हो जायेगा
एहसास करते-करते कहीं ये दिल खो जायेगा।

याद है तुम्हे !
तुम्हारी बातों में अपना हिस्सा है मेरा।

जो यक़ीन न आये मेरी बात पर
तो खुद से बात करके देख लेना
जवाब मिल जायेगा तुम्हे
और जवाब के साथ-साथ
मेरी साँसों का हिसाब भी मिल जायेगा तुम्हे।

जो दूर जाना चाहो
तो शौक से चले जाना
मोहब्बत का कर्ज़ उतारने
करके खुद से नये बहाने
दिल को फिर आज़्माने
ख़ताएं फिर से दोहराने
यादों को फिर से मिटाने
सीने के दरमियाँ समाने।

जो पास आना चाहो
तो दिल से चले आना
जहां कहीं भी हो तुम
लौटकर चले आना।।⁠⁠⁠⁠

“यह उन दिनों की बात है, जब मैं एक टीचर हुआ करता था”

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद जीना सीख रहा था

हरवक़्त बच्चों पर अपना रौब जमाया करता था
अपने स्टूडेंट्स में अपने आप को ढूँढा करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं खुद को तलाशा करता था

पढ़ाई के साथ-साथ, हँसी मज़ाक भी किया करता था
लेक्चर पूरा होने पर ही मगर, अटेंडेंस लिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद से ही नाराज़ रहता था

टॉपिक हो चाहे कोई भी, उसे मजेदार बना दिया करता था
प्रिंसिपल प्रॉक्टर या हो एचओडी, किसी से नहीं डरता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा था

स्टूडेंट्स पर फाइलों का बोझ लाद दिया करता था
और अपने काॅलेज के वो दिन याद किया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त की याद हैं
जब मैं खुद से सवाल किया करता था

एजुकेशनल ट्यूर को बहुत इंजॉय किया करता था
बच्चों के साथ मिलकर उनके जैसे जिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के लम्हात हैं
जब मैं खुद में ही उलझा रहता था

गुस्सा होने पर रेगुलर लंबी क्लास लिया करता था
ज़रा-ज़रा सी बात पर, बहुत डाँट दिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं अपने वज़ूद के लिये लड़ रहा था

अब ना वो पहले जैसे हालात हैं
ना वो पहले जैसे जज़्बात
ना वो पहले जैसे मोमेंट हैं
ना वो पहले जैसे स्टूडेंट।

@Irfan Ali Khan⁠⁠⁠⁠

“ज़िंदगी बहुत हसीं है अभी”

जहाँ रखी थी वहीं है अभी
ज़िंदगी बहुत हसीं है अभी।

सवाल पूछकर क्या करोगे
जवाब हमारा नहीं है अभी।

कौन हूँ मैं, क्या कर सकता हूँ
ये एहसास तुम्हे नहीं है अभी।

वक़्त रहते जी लो ज़रा
वक़्त बहुत सही है अभी।

मुलाकात में अब वो बात कहाँ
ये मुलाकात अधूरी है अभी।

तुझसे मिलकर, मैं मैं न रहा
जानाँ तू मुझमें कहीं है अभी।

क्यों मानते हो हार इरफ़ान
पूरी ज़िंदगी बाक़ी है अभी।।

@राॅकशायर

“मेरी राह मत देखना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा”

मेरी राह मत देखना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा
जो लौटकर आयेगा इस पार, वो कोई और ही होगा।

चलते-चलते ये कदम बड़ी दूर निकल आये
वापिस लौटना तो इन्हें बिल्कुल भी न भाये।

दूरियाँ दिल को अच्छी लगने लगी हैं
नज़दीकियाँ दिल को खटकने लगी हैं।

तन्हाई से मोहब्बत हो गई है
तन्हा रहने की आदत हो गई है।

दर्द से दोस्तोंवाली दोस्ती हो गई है
ज़िंदगी ज़िंदगी के शोर में सो गई है।

चाहतों के काले-घने बादल बरसते रहते हैं
हसरतों के झीने-झीने आँचल उड़ते रहते हैं।

हरपल हरघड़ी हरवक़्त याद करता हूँ तुझे
ज्यादा नहीं बस इतना प्यार करता हूँ तुझे।

मेरा इंतज़ार मत करना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा
जो लौटकर आयेगा इस बार, वो तेरा इंतज़ार ही होगा।

@राॅकशायर

“मैं अब भी तुझको चाहता हूँ”

सबसे अब ख़फ़ा होकर
खुद से खुद ज़ुदा होकर
इश्क़ में तेरे फ़ना होकर
आवारा इक हवा होकर
संग तेरे ही अब बहना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

रब की रहमत अता होकर
अपने घर का पता खोकर
दिल से निकली दुआ होकर
दर्द की तदबीर दवा होकर
संग तेरे ही अब जीना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

ख़्वाब में तुझको देखकर
ख़याल में तुझको सोचकर
दिल में हसरतें पालकर
आँखों में आँखें डालकर
जाम तेरा ही अब पीना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

खुद में खुद को खोकर
तुझमें खुद को पाकर
नहीं है दिल ये बेघर
तुझको दिल ये देकर
तुझमें ही अब धड़कना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“तारों की दुनिया”

jesus-ultra-hd-ii-taringa-1738600.jpg

तारों की दुनिया देखी है कभी !
तारों की दुनिया देखना चाहोगे !

तो चलो फिर आज हम, तारों की उस दुनिया में चले
हैं जहाँ पे तारें ही तारें, अपनी अलग एक दुनिया लिये।

तारों का अपना एक वज़ूद होता हैं
इन्हें सूरज की ज़रूरत नहीं
सूरज तो खुद इनकी बिरादरी का
एक छोटा सा हिस्सा है।

सूरज की ज़रूरत तो चाँद को है
सूरज से मोहब्बत तो चाँद को है।

सूरज दिनभर खुद को ऐसे जलाता है
जैसे कोई आशिक इश्क़ में खुद को मिटाता है।

और फिर ये रश्क़-ए-क़मर
जिसे चाँद कहो या माहताब
रातभर सूरज की दिनभर की तपिश को
ठंडक में कुछ इस तरह तब्दील करता है
जैसे कोई महबूबा अपने थकेहारे महबूब को
नर्म बाहों के दरमियाँ सुकून और राहत देती है।

सुना है कि तारें ज़मीन से बहुत दूर होते हैं
इतनी दूर
के खुद दूरी को भी अपने पास होने का एहसास होता है।

तारों का अपना कोई घर नहीं
इसलिये तो आँखों में बसते हैं।

चाँद को तो ज़रूर इनसे जलन होती होगी ना!
तभी तो अंदर ही अंदर बस कुढ़ता रहता है
सोच सोचकर देखो !
पेशानी पर कितने गड्ढे पड़ गये हैं।

तारों में मद्धम रौशनी की सरसराहट होती है
कभी टिमटिमाहट तो कभी जगमगाहट होती है।

लोग कहते हैं कि लोग मरकर एक तारा बन जाते हैं
यानी फिर कभी नहीं मरने लोग ही तारा कहलाते हैं।

तारें वो हैं जो खुद रौशनी बिखेरते हैं
तारें वो हैं जो तन्हा स्पेस में तैरते हैं।

तारों का अपना एक वज़ूद होता हैं
इन्हें सूरज की ज़रूरत नहीं
सूरज तो खुद इनकी फैमिली का
एक छोटा सा हिस्सा है।

हालाँकि सूरज ने बहुत कोशिश की
खुद को जलाने की
लेकिन आखिर में वो भी बस एक तारा ही निकला
खुद से दूर, सबसे दूर
इस जहां से मीलों दूर
पूरी कायनात की आँखों का तारा।

तो बताओ फिर
कैसी लगी तारों की दुनिया
अपने जैसी
या कोई और ही दुनिया।।

@राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान⁠⁠⁠⁠

“अपने अंदर खुद रहा ही ना मैं”

RockShayar official cover page

अपने अंदर उस शख़्स को, बहुत पहले मार चुका हूँ मैं
जिस शख़्स की वज़ह से एक दिन, बहुत रोया था मैं।

मौत के एहसास की तरह था वो एहसास
जिस एहसास ने महीनों तक तड़पाया मुझे।

खुद से इस क़दर नफ़रत हो गयी थी
के कोई और बनकर जीना आदत हो गयी थी।

गुमनामी के अंधेरे से बचने के लिये
अपना नाम तक बदल लिया था मैंने।

मगर सितमगर माज़ी की परछाई, साथ कहां छोड़ती है
जिस तरफ न जाना हो, कदम यह उसी तरफ मोड़ती है।

बरसों लग गये मुझे, खुद को यह समझाने में
के कोई कसर न छोड़ी मैंने, खुद को आज़्माने में।

दर्द था जितना भी दिल में, काग़ज़ पर सब उड़ेल दिया
बद्दुआओं की बुनियाद पर, खड़ा यादों का महल किया।

खुद से भागते-भागते, आ पहुँचा उसी मोड़ पर
जिस मोड़ पर छोड़कर गया था, एक दिन मैं लाश अपनी।

अब किसे दफ़्नाऊं
और किसे जलाऊं
जब अपने अंदर खुद रहा ही ना मैं।

अब किसे सताऊं
और किसे रुलाऊं
जब अपने अंदर कुछ बचा ही ना मैं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“Faded पुरानी Jeans की तरह होती हैं यादें”

किसी Faded सी पुरानी Jeans की तरह होती हैं यादें
वक़्त के Rear Mirror में खुद को देखकर रोती हैं यादें।

दिनभर सोचते-सोचते, ख़याली Work out से चूर होकर
ख़्वाबों के आगोश में सुकूनभरी Sleep सोती हैं यादें।

Pain की बरसती Rain में, धीरे-धीरे Dissolve होना है
पलकों के साथ Sometimes Soul भी भिगोती हैं यादें।

खोना और पाना, Lifetime यही Cycle चलता रहता है
Tiny-Tiny आँखों में Triple XL सपने संजोती हैं यादें।

I have never understood, किस तलाश में हूँ यहाँ मैं
Real में कहूं तो समंदर के जितना Deep डुबोती हैं यादें।

Life की यह Philosophy, लगे जो किसी Race की Trophy
कुछ पाने की खातिर Always बहुत कुछ खोती हैं यादें।

Flashback में जाकर जो, गुज़रा हुआ कल दिखाये
दिल की Film के उस Scene की तरह होती हैं यादें।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“लौटकर तो सिर्फ यादें आती हैं, कभी वो वक़्त नहीं”

1014167_152440558282239_589204630_n.jpg

लौटकर तो सिर्फ यादें आती हैं, कभी वो वक़्त नहीं
उसकी कही बातें याद आती हैं, अब वो शख़्स नहीं।

सिर्फ पढ़ने से ही जिसे, जग उठे वो एहसास फिर से
ज़िंदगी सब कुछ लिख देती हैं, मगर वो लफ़्ज़ नहीं।

कह गये वो शायर सयाने, इश्क़ के जो थे दीवाने
मिल जाये जो बड़ी आसानी से, असल वो इश्क़ नहीं।

शिद्दत और मेहनत, शर्त यही के दोनों साथ हो
फिर पूरी न की जा सके जो, ऐसी तो कोई शर्त नहीं।

साये की किस्मत है, सुबह से शाम चलना और ढ़लना
धूप का तिलिस्म है ये तो, साये का अपना कोई अक्स नहीं।

ज़ईफ़ जिस्म का नहीं, जवां रूह का हुस्न है मोहब्बत
देखकर जिसे खुद नैन कहे, कभी देखा ऐसा नक्श नहीं।

वक़्त की बेवक़्त ख़ामोशी का, बयान है यह तो इरफ़ान
एक वक़्त के बाद सब लौट आते हैं, मगर वो वक़्त नहीं।।

http://www.rockshayar.wordpress.com⁠⁠⁠⁠

“The Story of A Toilet”

maxresdefault.jpg

Hello friends….This is The Story of A Toilet
Set करेगा जो, आज हम सबका एक Clean Mindset.

तो लीजिये जनाब, पेश-ए-ख़िदमत है सुपरस्टार संडास की कहानी
उम्मीद है यह आपको ज़रूर पसंद आयेगी, खुद उसी की जुबानी।

अब अगली आवाज़ आपको, Technically Toilet की सुनाई देगी
Welcome to Flashback, जहाँ Flush की Photo दिखाई देगी।

पहले तो तुम्हे मेरा नाम लेने में भी बहुत शर्म आती थी
जहाँ देखो जिधर देखो, Public मुझे गंदा कर जाती।

किसी C-grade Picture की तरह था हाल मेरा
सिर्फ एक Sweeper ही समझता था हाल मेरा।

सवेरे-सवेरे उठते ही, तुम लोग मेरे पास दौड़े चले आते
Motion और Emotion, दोनों से ही Free होकर जाते।

बरसों की वो मेहनत मेरी, समझ आ रही तुमको अभी
फिर भी गर न समझे तो, समझ जाओगे कभी न कभी।

संसद में उठने लगा है, अब तो सवाल मेरा
बदल रहा है आजकल, सूरत-ए-हाल मेरा।

किसी Celebrity की तरह चर्चित हूँ मैं
नहीं वो अब, पहले की तरह वर्जित हूँ मैं।

किसी खुशबूदार Toilet Cleaner से नहीं
बल्कि बदलती हुयी सोच से परिमार्जित हूँ मैं।

मुझको लेकर बड़े-बड़े सितारें
आजकल बड़ी-बड़ी फिल्में बना रहे।

नेता अभिनेता Comedian खिलाड़ी
मुझको अपना Twitter Trend बना रहे।

पहले जो लोटा लेकर खेतों में जाते थे
अब वो मुझको अपने घर में बनवा रहे।

खुले में शौच से ऐ लोगों, तुम नफ़रत क्यों नहीं करते हो
एक आवाज़ में इस कुरीति को गलत क्यों नहीं कहते हो।

जब तरक्की के नाम पर, हर बदलाव मंजूर हैं तुम्हे
तो फिर अपनी सोच को, तुम क्यों नहीं बदलते हो।

चलो अब तुम लोग सब ज़रा मेरी भी सुन लो
एक Toilet की आज यह खरी-खरी सुन लो।

मुझसे ज्यादा गंदे हो तुम
मेरे नाम पर करते धंधे हो तुम।

कितना भी Drama कर लो चाहे
मेरे सामने तो सब नंगे हो तुम।

एक ओर तो तुम लोगों ने शारीरिक स्वच्छता पर, बड़े-बड़े अभियान चला रखे हैं
वहीं दूसरी ओर मानसिक मैले के पिटारे, दकियानूसी सोच के नीचे दबा रखे हैं।

अभी भी वक़्त है, वक़्त रहते सब संभल जाओ
Nature की कद्र करो, इंसानों अब सुधर जाओ।

अपने आस-पास सफाई रखना, और सफाई करना अच्छी बात है
लेकिन, साथ में अपने दिमाग की सफाई करना भी तो सच्ची बात है।

So My friends….This is The Story of A Toilet
कोशिश यह उसकी, कि वो बदल पाये हमारा Mindset.

© RockShayar Irfan Ali Khan

http://www.rockshayar.wordpress.com
#ObjectOrientedPoems(OOPs)⁠⁠⁠⁠

“बहती हुयी हवाएँ, बारिश में गीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं”

दिल से निकली दुआएँ,
बारिश की बूँदें बनकर ज़मीं पर उतर आती हैं
सुबह की उजली सदाएँ,
सूरज की किरनें बनकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

बहती हुयी हवाएँ,
बारिश में गीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं
काली घनी घटाएँ,
सावन में सीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

एहसास की निगाहें,
अश्क़ों की आरामगाह बनने ज़मीं पर उतर आती हैं
दिल में दबी वो आहें,
रंजो-ग़म की पनाहगाह बनने ज़मीं पर उतर आती हैं।

बादल की खुली बाहें,
आसमान की पेशानी चूमने ज़मीं पर उतर आती हैं
शायर की सभी आहें,
क़लम से रोज कहानी सुनने ज़मीं पर उतर आती हैं।

फ़ुर्कत भरी फ़िज़ाएँ,
अल्हड़ सी अंगड़ाई लेकर ज़मीं पर उतर आती हैं
चाँद की रौशन अदाएँ,
संग रात की तन्हाई लेकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

आँसुओं से नम निगाहें,
पलकों के गीले पर्दे को छूने ज़मीं पर उतर आती हैं
राह चलती वो राहें,
खुद से किये वादे पूरे करने ज़मीं पर उतर आती हैं।

दर्द-ए-दिल की सज़ाएँ,
अपने रब की बंदगी करने ज़मीं पर उतर आती हैं
और बदले में नेक वफ़ाएँ,
ज़िंदगी की तस्वीर बदलने ज़मीं पर उतर आती हैं।

बेज़ुबान सी बेनज़ीर ये निगाहें,
जब किसी को याद करे तो इनमें नमी उतर आती हैं
ठीक उसी वक़्त, वक़्त की हवाएँ,
ओस की बूँदें बनकर दिल की ज़मीं पर उतर जाती हैं।।

http://www.rockshayar.wordpress.com⁠⁠⁠⁠

“आज तुम्हे मैं जादू दिखाऊँगा”

मन की आँखों से, आज तुम्हे मैं जादू दिखाऊँगा
दिल की बातों से, आज तुम्हे मैं जादू सिखाऊँगा।

जो तुम सोच रहे हो, यक़ीनन आज वही होने वाला हैं
अपनी आँखों पर तुम्हे, आज यक़ीन नहीं होने वाला हैं।

दिल थामकर बैठना, ऐ मुझको देखने वालों
कहीं दिल दे न बैठना, ऐ मुझको चाहने वालों।

कब तुम्हे तुमसे चुरा लूंगा, पता भी नहीं चलेगा
कब तुम्हे खुद में छुपा लूंगा, पता भी नहीं चलेगा।

अपनी अलग एक दुनिया में, आज तुम्हे मैं लेकर जाऊँगा
क्या है मेरी उस दुनिया का सच, आज तुम्हे मैं ये बताऊँगा।

वहाँ न कोई झूठ-कपट है, वहाँ न कोई डाँट-डपट है
वहाँ तो बस अपना घर है, पड़ोस में जिसके नील समंदर है।

फिक्रे अपनी भुला दो आज, नज़रें अपनी जमा लो आज
भरने दो खुद को तुम आज, ख़्वाबों ख़यालों की परवाज़।

तो अब बताइये हुज़ूर, मेरा ये जादू आपको कैसा लगा
कुछ हटकर नया लगा, या फिर वही पहले जैसा लगा।।

@RockShayar