मादक कविता

होंठो पे अपने होंठ रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

साँसों में साँसें घुल जाने दे
बाँहों में बाहें मिल जाने दे। 

दो जिस्म मगर जान एक है
इरादे मेरे नहीं आज नेक है।

आग लग रही है, तन-बदन में
जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में।

लबों पे अपने लब रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

एक दूसरे में खो जाने दे
मुझको तेरा हो जाने दे। 

चलो ना आज पूरी तरह से बहक जाते हैं
ताक़त हम अपनी इक दूजे पे आज़्माते हैं।

आग लग रही है, तन और मन में
सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।।

Erotic poem (new try) Kamzor dilwale na padhe😜😉

भीगी हुई साड़ी का पल्लू तो गिराओ ज़रा
दूर जाने से पहले नज़दीक तो आओ ज़रा

लिपट जाएं मुझसे तू, किसी अमरबेल की तरह
उतर जाऊं तुझमें मैं, रिसते हुये तेल की तरह

सीने की कसावट को, हाथों में भर लेने दे
साँसों की गर्माहट को, साँसों में भर लेने दे

नाभि की नशीली गहराई में, जी भरकर गोते लगाने दे
चाहत को राहत में बदलने का, हुनर तू आज दिखाने दे

जो थामता हूँ, तो मछली की माफिक फिसलती है कमर
जो चूमता हूँ, तो मछली की माफिक उछलती है कमर

कसमसाती हुई हथेलियों को, धीरे-धीरे ऐंठने तो दो
थरथराती हुई उँगलियों को, हर जगह फेरने तो दो

तेरी बढ़ती हुई सिसकारियाँ, मेरा हौसला बढ़ा रही हैं
तेरी पिघलती हुई पिचकारियाँ, मेरा बदन भिगा रही हैं

सुलगते हुए तन पर, दहकता हुआ लावा बहने तो दे
हर एक पल में जैसा हो रहा है, बस वैसा होने तो दे

भीगी हुई साड़ी का पल्लू तो गिराओ ज़रा
तर करने से पहले आग तो भड़काओ ज़रा।

















Ishq bhi ajib he

बिना मक़्सद मैं उसके शहर से अक्सर गुज़रता हूँ
नहीं करनी हो जो गलती वहीं क्यों कर गुज़रता हूँ

अभी तक याद है मुझको गली उसकी पता उसका
नहीं जब काम फिर भी क्यूँ वहीं होकर गुज़रता हूँ

Seductive lines

सीने पे तेरे उभरी हुई हैं, मेरी छुअन की वो सलवटें
सितारों के पार ले जाती हैं, तेरे बदन की वो करवटें

मदहोश करे खुशबू तेरी, रातभर जलाएं आरज़ू तेरी
कैसा असर है वस्ल का, आबरू तेरी है आबरू मेरी

महके-महके से लगते हैं, मोहब्बत भरे मुख़्तसर लम्हे
बहके-बहके से लगते हैं, शरारत भरे ये बेसबर लम्हे

बलखाती कमर पर, बारिश की बेईमान बूँदें जब गिरती हैं
लरज़ते लबों की तिश्नगी, थरथराता मंज़र देखते ही बढ़ती हैं

“मैं हिंद का मुसलमान हूँ”

  1. मीर हूँ कबीर हूँ
    मैं मिट रहा ज़मीर हूँ
    था बादशाह जो कभी
    क्यूँ आजकल हक़ीर हूँ
    तारीख़ हूँ तहरीर हूँ
    एक दौर का अमीर हूँ
    दुश्मन सारा जहाँ मेरा
    तरकश में रखा तीर हूँ
    मिटाना मुझे आसां नहीं
    मैं सुलेमानी शमशीर हूँ
    मेरे बिना कैसी तरक्की
    मैं भारत की तस्वीर हूँ
    मेरे बिना कैसा विकास
    मैं भारत की तक़्दीर हूँ
    मेरे बिना कैसी जन्नत
    मैं वादी ए कश्मीर हूँ।
  2. हुनर की मैं खान हूँ
    क्यूँ फिर भी परेशान हूँ
    हाँ ख़ुद से अनजान हूँ
    वतन पे क़ुर्बान हूँ
    सवाल उठ रहे हैं आज
    क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
    तो जवाब सब सुने ये आज
    मैं कैसे इस देश की शान हूँ
    एक ऐसे देश का अभिमान हूँ
    जहाँ बेफ़िक्र हो देता अज़ान हूँ
    पहचान बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।
  3. ग़ालिब हूँ साहिर हूँ
    मुहब्बत में माहिर हूँ
    ख़ुसरो हूँ रसख़ान हूँ
    मैं जायसी और निज़ाम हूँ
    हसरत हूँ फ़राज़ हूँ
    राहत मुनव्वर दाग़ हूँ
    वसीम हूँ बशीर हूँ
    मैं निदा ए रहीम हूँ
    कुमार हूँ फ़िराक़ हूँ
    कैफ़ी जां निसार हूँ
    जिगर हूँ ज़ौक़ हूँ
    शायर दरअसल रॉक हूँ
    फैज़ हूँ जॉन हूँ
    सदियों से मौन हूँ
    जो कहते डॉन हूँ
    वो सुने मैं कौन हूँ
    वो सुने मैं कौन हूँ।
  4. इक़बाल हूँ आज़ाद हूँ
    सर सैयद मैं अश्फ़ाक़ हूँ
    ज़ाकिर अमज़द ख़य्याम हूँ
    मैं मोमिन अब्दुल कलाम हूँ
    शहीद हूँ हमीद हूँ
    संग दीवाली मैं ईद हूँ
    हिदायतुल्लाह की परछाई
    मैं बिस्मिल्लाह की शहनाई
    लोग कहते बाहरी मुझे
    सौतेला नहीं मैं सगा भाई।
  5. रफ़ी हूँ रहमान हूँ
    शाहरुख़ आमिर सलमान हूँ
    संगीत सूना मेरे बिना
    मैं सलीम सुलेमान हूँ
    ज़हीर शमी पठान हूँ
    मैं हाशमी इमरान हूँ
    क़िरदार चाहे हो कोई
    हर रोल में इरफ़ान हूँ
    पहचान पूछने वालो सुनो
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।
  6. नसीर हूँ नवाज़ हूँ
    सिनेमाई सरताज हूँ
    नौशाद हूँ इरशाद हूँ
    के आसिफ इम्तियाज़ हूँ
    बोल सईद कादरी के
    मैं जावेद की आवाज़ हूँ
    लालकिले का सुर्ख़ लहू
    यमुना किनारे ताज हूँ
    जॉनी जगदीप महमूद हूँ
    कादर अजित महबूब हूँ
    सलीम जावेद मज़रूह हूँ
    इस मुल्क़ की मैं रूह हूँ।
  7. नरगिस सुरैया सायरा हूँ
    ज़ीनत शबाना ज़ायरा हूँ
    परवीन जुबैदा फरीदा हूँ
    मधुबाला और वहीदा हूँ
    सरोज सना फराह हूँ
    तब्बू हुमा साराह हूँ
    आलिया मीना ज़रीना हूँ
    मैं हेलन और कटरीना हूँ
    सानिया हूँ सैफ हूँ
    अज़हर और कैफ़ हूँ
    मेरी फ़िक्र छोड़ो पड़ोसी
    मुल्क़ में अपने सैफ हूँ
  8. सरहद पे खड़ा जवान हूँ
    सीने में रखता क़ुर्आन हूँ
    नबी पर रखता ईमान हूँ
    गरीब नवाज़ की शान हूँ
    शहद सी मीठी ज़बान हूँ
    मैं अदब का पासबान हूँ
    प्रश्न उठते हैं फिर भी
    क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
    पर बुरा नहीं मानूंगा मैं
    बड़े फ़ख्र से कहूंगा ये
    मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
    मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
    पहचान बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ
    शनाख़्त बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।

@Rockshayar irfan

कभी तूफ़ान था मैं भी

अभी मिस्कीन हूँ लेकिन, कभी सुल्तान था मैं भी
कोई कह दो हवाओं से, कभी तूफ़ान था मैं भी

लगाओ ख़ूब तोहमत तुम, मगर ये तो नहीं भूलो
बुरा है वक़्त लेकिन हां, कभी इर्फ़ान था मैं भी

Abhi Miskin Hoon Lekin
Kabhi Sultan Tha Main Bhi

Koi Keh Do Hawaon Se
Kabhi Toofan Tha Main Bhi

Ibadat Ka Maqsad

अगर सच को लिखने की ताकत नहीं है
तो लिखने की तुझको ज़रूरत नहीं है

इबादत का बदला तो जन्नत है यारो
इबादत का मकसद तो जन्नत नहीं है

ये दौलत ये शोहरत ज़मीं की ये हसरत
हूँ दरवेश मेरी ये ज़रूरत नहीं है…

Watch full video at
👇👇👆
https://youtu.be/SUc3eOKkEWY

गर मुहम्मद से निभाई, तो वफ़ा है काम की

गर मुहम्मद से निभाई, तो वफ़ा है काम की
याद रक्खो आप के बिन, ज़िंदगी बस नाम की

कामयाबी चाहते हो, राज़ फिर ये जान लो
ज़िक्र जिसमें हो ख़ुदा का, रात है वो काम की

Dil Se

किसी ने दिल से लिक्खा है किसी ने दिल पे लिक्खा है
कि हमने नाम उसका फिर किसी साहिल पे लिक्खा है।

यहाँ सब लोग तन्हा हैं सभी की रूह प्यासी है
जलेगा कौन कब कितना सभी के दिल पे लिक्खा है।

©इरफ़ान अली ख़ान