No Tobacco Day

आँसू को भी आँख तक आना पड़ता है
ना जाना हो जिधर वहीं जाना पड़ता है

अजीब आदत है सिगरेट पीना भी
हर बात पर सीना जलाना पड़ता है

Nazar nahin aata

कहीं कोई दस्तगीर अब नज़र नहीं आता
शख़्स वो बेनज़ीर अब नज़र नहीं आता।

मंजिल की ओर चला था जो एक मुसाफ़िर कभी
खो गया वो राहग़ीर अब नज़र नहीं आता।

था जिसकी दुआओं में असर भी शिद्दत भी
कहाँ गया वो फ़क़ीर अब नज़र नहीं आता।

बिक जाते हैं लोग आजकल कौड़ियों के भाव में
पहले जैसा ज़मीर अब नज़र नहीं आता।

Nazar nahin aata

कहीं कोई दस्तगीर अब नज़र नहीं आता
शख़्स वो बेनज़ीर अब नज़र नहीं आता।

मंजिल की ओर चला था जो एक मुसाफ़िर कभी
खो गया वो राहग़ीर अब नज़र नहीं आता।

था जिसकी दुआओं में असर भी शिद्दत भी
कहाँ गया वो फ़क़ीर अब नज़र नहीं आता।

बिक जाते हैं लोग आजकल कौड़ियों के भाव में
पहले जैसा ज़मीर अब नज़र नहीं आता।

ख़िलाफ़त जो करेगा अब, उसी की जान जायेगी

नहीं मानी अभी तक जो, ये दुनिया मान जायेगी
चुना हम ने गलत बंदा, ये अब के जान जायेगी

पहन चोला शराफ़त का, हुकूमत ने किया ऐलान
ख़िलाफ़त जो करेगा अब, उसी की जान जायेगी

Alwada Mah e Ramzan

अलविदा ना कहो माह-ए-रमज़ान को
यूं ज़ुदा ना करो जिस्म से जान को।

कोई तो रोक लो, थाम लो वक़्त ये
रोकते है यूं जैसे कि मेहमान को।।

Nurses Day

बचाते हैं सभी की जां, मुक़द्दस काम करते हैं
डटे रहते हैं ड्यूटी पे, नहीं आराम करते हैं

बड़ी ईमानदारी से, करे तीमारदारी जो
दुआएं दो ज़रा इनको, बड़ा ये काम करते हैं

ठिकाना है शिफ़ाखाना, बचाना है सभी की जां
दवा देना दुआ लेना, यही सब काम करते हैं

चुने जो फ़र्ज़ को पहले, असल में नर्स है वो ही
नहीं थकते नहीं थमते, हमेशा काम करते हैं

Baitul Muqaddas

सुनो आवाज़ देती है, ज़मीं बैतुल मुक़द्दस की
हिफ़ाज़त तो करेगा वो, वही सबसे बड़ा ग़ाज़ी

क़यामत की निशानी है, वबा ये तो ख़ता ये तो
गवाही रोज़ देती है, फ़ज़ा बैतुल मुक़द्दस की

नबी ने पांव जब रक्खे, ज़मीं वो झूमकर बोली
हुई मक़्बूल अब जाकर, दुआ बैतुल मुक़द्दस की

भले फ़ित्ना बढ़े जितना, थमेगी ज़ुल्म की आंधी
बिखरकर टूट जाएगी, सभी शाखें यूँ बातिल की

लिखा है जो ज़माने ने, उसे तुम भूल ही जाओ
जहां में फिर से गूंजेगी, अज़ां बैतुल मुक़द्दस की

@irfan

Be A Bahubali in Covid

महासेना क्या है कोरोना?

हमारी कम्युनिटी से वायरस की इम्युनिटी ज्यादा है
ये सोचना है कोरोना

बिना काम के बिना बात के
बाज़ार में इधर उधर टहलना है कोरोना

जिस वायरस को हमने मार भगाया था
वो दोबारा हमारे आसपास तेजी से फैल रहा है

उसका सर कुचलकर मेडिकोज का हौसला बढ़ाने के बजाय
वैक्सीन के लिए उन्हें परेशान करना है कोरोना

उस वायरस को रोकने जा रहा हूं मैं
मेरी फैमिली और शहर को वह छू भी नहीं सकता
उसको फिर से मात देने के लिए
कुछ दिन घर पर ठहरने जा रहा हूं मैं

मेरे साथ घर पर रुकेगा कौन?
हर वक़्त गरम पानी पियेगा कौन?
एक दूसरे की हिम्मत बढ़ायेगा कौन?

जय मनुष्य मति

Itfar

अब्र की आँखों से दर्द टपकने को है
सब्र कर ऐ ज़मीं, बारिश होने को है

अभी प्यास लगना लाज़िम है तुझे
बस थोड़ी देर और, इफ़्तार होने को है

Maula Tu

सभी के दिल में मौला तू,
अली के दिल में मौला तू
कि सबको चाहता है तू,
सभी के दिल में मौला तू

फ़लक से चाँद है उतरा,
गवाही जो कि देता है
ये सब कुछ है नबी से और,
नबी के दिल में मौला तू

Chalo na

चलो न नया एक नशेमन बनाते हैं
एक दूसरे के और पास आ जाते हैं।

नज़दीक आने में अभी वक़्त लगेगा
चलो न दूर से ही दूरियां मिटाते हैं।

ख़यालात में खून की कमी चल रही है
चलो न खुद को जी भरके हँसाते हैं।

हक़ीक़त को सच मान चुकी हैं आँखें
चलो न इन्हें कुछ ख़्वाब दिखाते हैं।

बहुत दिन हो गए हैं दर्द सहते-सहते
चलो न आज जी भरके मुस्कुराते हैं।

Hippocrate Wazir

चेहरा छुपाने के बजाय अपनी नाकामी छुपा रहा है
जनता जान चुकी हैं, वज़ीर अपनी ख़ामी छुपा रहा है

अंधों की भीड़ जमा करके, उनको गूंगा बना दिया
करके सबको गुमनाम अपनी बदनामी छुपा रहा है


























Naye Zamane Yaar Purane

बंजर में बारिश के फ़साने ढूंढते हैं
वो हँसने के भी बहाने ढूंढते हैं

खो जाते हैं जो किसी दौर के दौरान
खुद को लिखने के बहाने ढूंढते हैं

दुःखी होते हैं जब लोग अक्सर
नए जमाने में यार पुराने ढूंढते हैं

Haq bolenge

हक़ बोलेंगे,
लाज़िम है के लब भी खोलेंगे
हर तदबीर अब हम
इंसाफ़ के तराज़ू में तोलेंगे

ज़ुल्म करने वालों
सुनो ज़रा फ़र्माने इलाही
ज़ुल्म बढ़ने पे
तख़्त तुम्हारे ख़ुद बख़ुद डोलेंगे