Shame Shame

वज़ीर के भेष में आला अदाकार है आप
रियाया जान चुकी हैं, रियाकार है आप

सियासत हो या तिजारत
कोई आपसे सीखे
मानना पडे़गा कमाल के कलाकार है आप

रियाया – प्रजा
रियाकार – पाखंडी
तिजारत – व्यापार

Hungama

हंगामा है हर तरफ़, कौन सही और कौन गलत
अंदर आग बाहर बरफ़, कौन सही और कौन गलत।

ये लिखू के वो लिखू, समझ नहीं आता कुछ भी
सहमे हुए सारे हरफ़, कौन सही और कौन गलत।

किस किस से बचेगी भला अब इंसानियत यहां
ये भेड़िया वो जरख, कौन सही और कौन गलत।

वसीयत सौंपी थी जिसे, वही जलाने लगा है घर
सदमे में है सारा शहर, कौन सही और कौन गलत।

इंसानियत की मौत

सड़ चुकी है सोच यहां, हर ख़याल ख़मीर बन गया
देखो कैसा दौर आया है, इंसान का ज़मीर मर गया

उम्मीद भला क्या कीजे, मुंसिफ़ से अब इंसाफ़ की
अब तो बस दुआ कीजे, ज़ालिम जो मीर बन गया