“Henna (मेंहदी/हिना)”

खुद को मिटाकर हमेशा दूसरों को खुशियाँ देती है
हिना तो हर महफ़िल को दिल के रंग में रंग देती है।

हिना की क़िस्मत है पिसना
हिना की फ़ितरत है रंगना
हिना की हसरत है खिलना
हिना की क़ुदरत है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

दुल्हन के हाथों में लगने वाली मेंहदी भी यही है
हर औरत की ज़ेबोज़ीनत संवारती भी यही है।

बिना इसके ना कोई शगुन है
ना कोई फागुन
बिना इसके ना कोई मिलन है
ना कोई साजन।

मेंहदी लगे हाथों को खुद पर नाज़ होता है 
मेंहदी रचे हाथों में रुमानी एहसास होता है।

अपने अरमान दबाकर दिल में अरमान जगाती है
हिना तो पिसते-पिसते खुशी से लाल हो जाती है।

हिना का नसीब है पिसना
हिना को हबीब है जचना
हिना की तक़्दीर है रंगना
हिना को अज़ीज़ है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

हिना की तासीर बहुत ही ठंडी होती है
जलन और तपिश को ये दूर कर देती है।

सब्ज़ पत्तियों की तरह, हिना के जज़्बात भी सब्ज़ होते हैं
हिना पर कोई कैसे लिखे, लिखने को लफ़्ज़ नहीं होते हैं।।

#RockShayar

हिना – मेंहदी
ज़ेबोज़ीनत – Beauty 
रुमानी – Romantic
हबीब/अज़ीज़ – Dear 
तासीर – Nature
सब्ज़ – Green
जज़्बात – Emotions
लफ़्ज़ – Word

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