“मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना”

मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना
मोहब्बत को दिल से मिटाने की साज़िश न करना।

कौन छुपा सका हैं, जज़्बात अपने अंदर यहाँ
ख़ामोशी से मोहब्बत छुपाने की कोशिश न करना।

बिखर जायेगी ज़िंदगी, पलभर में तुम्हारी
मोहब्बत में खुद को आज़्माने की कोशिश न करना।

होती है तो शिद्दत से होती है, वरना नहीं होती है
मोहब्बत से कभी दिल बहलाने की कोशिश न करना।

आग से दूर रहने में ही भलाई है, ये बात तुम्हें कितनी बार समझाई है
दिलजलों के दिल जलाने की नाकाम कोशिश न करना।

कौन इतना बेवकूफ है, जो आँखों का अनकहा न समझे
अश्क़ों की आड़ में जज़्बात छुपाने की कोशिश न करना।

हम पहले ही बहुत पास आ चुके हैं, खुद को ये एहसास करा चुके हैं
अब इससे ज्यादा और पास आने की कोशिश न करना।

मोहब्बत का क्या है, पलभर में हो या सदियों तक न हो
शोहरत के लिये मोहब्बत करने की कोशिश न करना।।

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