“ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है”

ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है
यूँ समझ लीजिये के दर-ब-दर भटकना लिखा है।

मोहब्बत तो दिल से की, पर कह न पाये उसे कभी
ताउम्र अब तो मोहब्बत के लिये तरसना लिखा है।

जहाँ कहीं भी है तू, सुन मेरे दिल की आवाज़ तू
तुझे भुलाने की कोशिश में तुझे याद करना लिखा है।

हादसों पर हादसे मिले, तभी तो बने हम दिलजले
सौ बार गिरकर आखिर में खुद संभलना लिखा है।

अभी कहाँ रुकने की बात, अभी कहाँ वो चैन की रात
अभी तो दोपहर में दूर तक, नंगे पाँव चलना लिखा है।

अपने होने का एहसास हुआ, कुछ तो है जो ख़ास हुआ
ख़्वाबों के गुलशन में खुशबू बनकर महकना लिखा है।

कम उम्र में बड़ी पहचान, इत्तेफाकन नहीं है इरफ़ान
इतना तो है कि किस्मत में कुछ अलहदा लिखा है।।

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