“तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया”

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये सलीक़ा ग़ज़ल ने बताया

शोख़ियों के सुर्ख़ जोड़े में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
मन के मोतियों की माला पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो चैन से रहती हो, और बेचैनियाँ हमको देती हो
उनींदी आँखों में रातभर तुम ख़्वाब की तरह जगती हो

बड़ी ख़ूबसूरती से बुना गया है, तुम्हारी साँसों का ये ताना-बाना
पहली नज़र में तुम किसी शायर का ख़याल लगती हो

मेरे अलहदा अंदाज़ ने तुमको, इस क़दर दीवाना किया
कि ये अंदाज़ अच्छा लगता है मुझे, ये बार-बार कहती हो

तेरी आवाज़ के आगे हर आवाज़ बेआवाज़ हैं, क्योंकि
कानों में तुम खनकती हुई आवाज़ के झुमके पहनती हो

हुस्न की सुर्ख़ ज़री में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
हया के हीरों का हार पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो सुकून से सोती हो, और रतजगे हमको देती हो
रात की आँखों में दीप जलाकर, नींद को तुम ठगती हो

पहली बार देखो, चाहे दूसरी बार, या फिर बार-बार
जब भी देखो तुम तो बस क़ुदरत का कमाल लगती हो

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये तरीका ग़ज़ल ने बताया।।

@RockShayar

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