“यह उन दिनों की बात है, जब मैं एक टीचर हुआ करता था”

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद जीना सीख रहा था

हरवक़्त बच्चों पर अपना रौब जमाया करता था
अपने स्टूडेंट्स में अपने आप को ढूँढा करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं खुद को तलाशा करता था

पढ़ाई के साथ-साथ, हँसी मज़ाक भी किया करता था
लेक्चर पूरा होने पर ही मगर, अटेंडेंस लिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद से ही नाराज़ रहता था

टॉपिक हो चाहे कोई भी, उसे मजेदार बना दिया करता था
प्रिंसिपल प्रॉक्टर या हो एचओडी, किसी से नहीं डरता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा था

स्टूडेंट्स पर फाइलों का बोझ लाद दिया करता था
और अपने काॅलेज के वो दिन याद किया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त की याद हैं
जब मैं खुद से सवाल किया करता था

एजुकेशनल ट्यूर को बहुत इंजॉय किया करता था
बच्चों के साथ मिलकर उनके जैसे जिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के लम्हात हैं
जब मैं खुद में ही उलझा रहता था

गुस्सा होने पर रेगुलर लंबी क्लास लिया करता था
ज़रा-ज़रा सी बात पर, बहुत डाँट दिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं अपने वज़ूद के लिये लड़ रहा था

अब ना वो पहले जैसे हालात हैं
ना वो पहले जैसे जज़्बात
ना वो पहले जैसे मोमेंट हैं
ना वो पहले जैसे स्टूडेंट।

@Irfan Ali Khan⁠⁠⁠⁠

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