“अपने अंदर खुद रहा ही ना मैं”

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अपने अंदर उस शख़्स को, बहुत पहले मार चुका हूँ मैं
जिस शख़्स की वज़ह से एक दिन, बहुत रोया था मैं।

मौत के एहसास की तरह था वो एहसास
जिस एहसास ने महीनों तक तड़पाया मुझे।

खुद से इस क़दर नफ़रत हो गयी थी
के कोई और बनकर जीना आदत हो गयी थी।

गुमनामी के अंधेरे से बचने के लिये
अपना नाम तक बदल लिया था मैंने।

मगर सितमगर माज़ी की परछाई, साथ कहां छोड़ती है
जिस तरफ न जाना हो, कदम यह उसी तरफ मोड़ती है।

बरसों लग गये मुझे, खुद को यह समझाने में
के कोई कसर न छोड़ी मैंने, खुद को आज़्माने में।

दर्द था जितना भी दिल में, काग़ज़ पर सब उड़ेल दिया
बद्दुआओं की बुनियाद पर, खड़ा यादों का महल किया।

खुद से भागते-भागते, आ पहुँचा उसी मोड़ पर
जिस मोड़ पर छोड़कर गया था, एक दिन मैं लाश अपनी।

अब किसे दफ़्नाऊं
और किसे जलाऊं
जब अपने अंदर खुद रहा ही ना मैं।

अब किसे सताऊं
और किसे रुलाऊं
जब अपने अंदर कुछ बचा ही ना मैं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

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“Faded पुरानी Jeans की तरह होती हैं यादें”

किसी Faded सी पुरानी Jeans की तरह होती हैं यादें
वक़्त के Rear Mirror में खुद को देखकर रोती हैं यादें।

दिनभर सोचते-सोचते, ख़याली Work out से चूर होकर
ख़्वाबों के आगोश में सुकूनभरी Sleep सोती हैं यादें।

Pain की बरसती Rain में, धीरे-धीरे Dissolve होना है
पलकों के साथ Sometimes Soul भी भिगोती हैं यादें।

खोना और पाना, Lifetime यही Cycle चलता रहता है
Tiny-Tiny आँखों में Triple XL सपने संजोती हैं यादें।

I have never understood, किस तलाश में हूँ यहाँ मैं
Real में कहूं तो समंदर के जितना Deep डुबोती हैं यादें।

Life की यह Philosophy, लगे जो किसी Race की Trophy
कुछ पाने की खातिर Always बहुत कुछ खोती हैं यादें।

Flashback में जाकर जो, गुज़रा हुआ कल दिखाये
दिल की Film के उस Scene की तरह होती हैं यादें।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“लौटकर तो सिर्फ यादें आती हैं, कभी वो वक़्त नहीं”

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लौटकर तो सिर्फ यादें आती हैं, कभी वो वक़्त नहीं
उसकी कही बातें याद आती हैं, अब वो शख़्स नहीं।

सिर्फ पढ़ने से ही जिसे, जग उठे वो एहसास फिर से
ज़िंदगी सब कुछ लिख देती हैं, मगर वो लफ़्ज़ नहीं।

कह गये वो शायर सयाने, इश्क़ के जो थे दीवाने
मिल जाये जो बड़ी आसानी से, असल वो इश्क़ नहीं।

शिद्दत और मेहनत, शर्त यही के दोनों साथ हो
फिर पूरी न की जा सके जो, ऐसी तो कोई शर्त नहीं।

साये की किस्मत है, सुबह से शाम चलना और ढ़लना
धूप का तिलिस्म है ये तो, साये का अपना कोई अक्स नहीं।

ज़ईफ़ जिस्म का नहीं, जवां रूह का हुस्न है मोहब्बत
देखकर जिसे खुद नैन कहे, कभी देखा ऐसा नक्श नहीं।

वक़्त की बेवक़्त ख़ामोशी का, बयान है यह तो इरफ़ान
एक वक़्त के बाद सब लौट आते हैं, मगर वो वक़्त नहीं।।

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“The Story of A Toilet”

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Hello friends….This is The Story of A Toilet
Set करेगा जो, आज हम सबका एक Clean Mindset.

तो लीजिये जनाब, पेश-ए-ख़िदमत है सुपरस्टार संडास की कहानी
उम्मीद है यह आपको ज़रूर पसंद आयेगी, खुद उसी की जुबानी।

अब अगली आवाज़ आपको, Technically Toilet की सुनाई देगी
Welcome to Flashback, जहाँ Flush की Photo दिखाई देगी।

पहले तो तुम्हे मेरा नाम लेने में भी बहुत शर्म आती थी
जहाँ देखो जिधर देखो, Public मुझे गंदा कर जाती।

किसी C-grade Picture की तरह था हाल मेरा
सिर्फ एक Sweeper ही समझता था हाल मेरा।

सवेरे-सवेरे उठते ही, तुम लोग मेरे पास दौड़े चले आते
Motion और Emotion, दोनों से ही Free होकर जाते।

बरसों की वो मेहनत मेरी, समझ आ रही तुमको अभी
फिर भी गर न समझे तो, समझ जाओगे कभी न कभी।

संसद में उठने लगा है, अब तो सवाल मेरा
बदल रहा है आजकल, सूरत-ए-हाल मेरा।

किसी Celebrity की तरह चर्चित हूँ मैं
नहीं वो अब, पहले की तरह वर्जित हूँ मैं।

किसी खुशबूदार Toilet Cleaner से नहीं
बल्कि बदलती हुयी सोच से परिमार्जित हूँ मैं।

मुझको लेकर बड़े-बड़े सितारें
आजकल बड़ी-बड़ी फिल्में बना रहे।

नेता अभिनेता Comedian खिलाड़ी
मुझको अपना Twitter Trend बना रहे।

पहले जो लोटा लेकर खेतों में जाते थे
अब वो मुझको अपने घर में बनवा रहे।

खुले में शौच से ऐ लोगों, तुम नफ़रत क्यों नहीं करते हो
एक आवाज़ में इस कुरीति को गलत क्यों नहीं कहते हो।

जब तरक्की के नाम पर, हर बदलाव मंजूर हैं तुम्हे
तो फिर अपनी सोच को, तुम क्यों नहीं बदलते हो।

चलो अब तुम लोग सब ज़रा मेरी भी सुन लो
एक Toilet की आज यह खरी-खरी सुन लो।

मुझसे ज्यादा गंदे हो तुम
मेरे नाम पर करते धंधे हो तुम।

कितना भी Drama कर लो चाहे
मेरे सामने तो सब नंगे हो तुम।

एक ओर तो तुम लोगों ने शारीरिक स्वच्छता पर, बड़े-बड़े अभियान चला रखे हैं
वहीं दूसरी ओर मानसिक मैले के पिटारे, दकियानूसी सोच के नीचे दबा रखे हैं।

अभी भी वक़्त है, वक़्त रहते सब संभल जाओ
Nature की कद्र करो, इंसानों अब सुधर जाओ।

अपने आस-पास सफाई रखना, और सफाई करना अच्छी बात है
लेकिन, साथ में अपने दिमाग की सफाई करना भी तो सच्ची बात है।

So My friends….This is The Story of A Toilet
कोशिश यह उसकी, कि वो बदल पाये हमारा Mindset.

© RockShayar Irfan Ali Khan

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#ObjectOrientedPoems(OOPs)⁠⁠⁠⁠

“बहती हुयी हवाएँ, बारिश में गीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं”

दिल से निकली दुआएँ,
बारिश की बूँदें बनकर ज़मीं पर उतर आती हैं
सुबह की उजली सदाएँ,
सूरज की किरनें बनकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

बहती हुयी हवाएँ,
बारिश में गीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं
काली घनी घटाएँ,
सावन में सीली होकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

एहसास की निगाहें,
अश्क़ों की आरामगाह बनने ज़मीं पर उतर आती हैं
दिल में दबी वो आहें,
रंजो-ग़म की पनाहगाह बनने ज़मीं पर उतर आती हैं।

बादल की खुली बाहें,
आसमान की पेशानी चूमने ज़मीं पर उतर आती हैं
शायर की सभी आहें,
क़लम से रोज कहानी सुनने ज़मीं पर उतर आती हैं।

फ़ुर्कत भरी फ़िज़ाएँ,
अल्हड़ सी अंगड़ाई लेकर ज़मीं पर उतर आती हैं
चाँद की रौशन अदाएँ,
संग रात की तन्हाई लेकर ज़मीं पर उतर आती हैं।

आँसुओं से नम निगाहें,
पलकों के गीले पर्दे को छूने ज़मीं पर उतर आती हैं
राह चलती वो राहें,
खुद से किये वादे पूरे करने ज़मीं पर उतर आती हैं।

दर्द-ए-दिल की सज़ाएँ,
अपने रब की बंदगी करने ज़मीं पर उतर आती हैं
और बदले में नेक वफ़ाएँ,
ज़िंदगी की तस्वीर बदलने ज़मीं पर उतर आती हैं।

बेज़ुबान सी बेनज़ीर ये निगाहें,
जब किसी को याद करे तो इनमें नमी उतर आती हैं
ठीक उसी वक़्त, वक़्त की हवाएँ,
ओस की बूँदें बनकर दिल की ज़मीं पर उतर जाती हैं।।

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“आज तुम्हे मैं जादू दिखाऊँगा”

मन की आँखों से, आज तुम्हे मैं जादू दिखाऊँगा
दिल की बातों से, आज तुम्हे मैं जादू सिखाऊँगा।

जो तुम सोच रहे हो, यक़ीनन आज वही होने वाला हैं
अपनी आँखों पर तुम्हे, आज यक़ीन नहीं होने वाला हैं।

दिल थामकर बैठना, ऐ मुझको देखने वालों
कहीं दिल दे न बैठना, ऐ मुझको चाहने वालों।

कब तुम्हे तुमसे चुरा लूंगा, पता भी नहीं चलेगा
कब तुम्हे खुद में छुपा लूंगा, पता भी नहीं चलेगा।

अपनी अलग एक दुनिया में, आज तुम्हे मैं लेकर जाऊँगा
क्या है मेरी उस दुनिया का सच, आज तुम्हे मैं ये बताऊँगा।

वहाँ न कोई झूठ-कपट है, वहाँ न कोई डाँट-डपट है
वहाँ तो बस अपना घर है, पड़ोस में जिसके नील समंदर है।

फिक्रे अपनी भुला दो आज, नज़रें अपनी जमा लो आज
भरने दो खुद को तुम आज, ख़्वाबों ख़यालों की परवाज़।

तो अब बताइये हुज़ूर, मेरा ये जादू आपको कैसा लगा
कुछ हटकर नया लगा, या फिर वही पहले जैसा लगा।।

@RockShayar

“पहली नज़र का वो असर, अब तक याद है”

पहली नज़र का वो असर, अब तक याद है
नज़रों से नज़रों का सफ़र, अब तक याद है।

इक़रार इंकार तक़रार ऐतबार, और फिर प्यार
जज़्बातों का वो जादुई सफ़र, अब तक याद है।

ख़यालों की एक नदी, यादों के जंगल में बहती थी
एहसास की वो ऊँची लहर, अब तक याद है।

ख़्वाबों का घर लगता था, नहीं जहाँ पर डर लगता था
उम्मीदों का वो उम्दा शहर, अब तक याद है।

कई चेहरे देख लिये, सब रंग सुनहरे देख लिये
पर वो एक चेहरा शाम-ओ-सहर, अब तक याद है।

यादें हैं कि मिटती नहीं, रातें हैं कि कटती नहीं
ज़िंदगी की वो कड़ी दोपहर, अब तक याद है।

नफ़रत जिसके सामने, ज्यादा देर टिक न पाये
मोहब्बत तेरी वो इस क़दर, अब तक याद है।।

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“आओ चलें फिर इरफ़ान की गली”

 

लफ़्ज़ों को हँसते मुस्कुराते ग़मगीन हो आंसू बहाते 
किसी ने देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

समंदर से वसीह दिल में लहरों की तरह जज़्बात उठते 
उन लहरों से उठते जज़्बातों को] लफ़्ज़ों में तब्दील करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

रूहानियत की क़लम में स्याही शिद्दत की भरकर
इक कोरे काग़ज़ को अनमोल बनाते 
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

एक शख़्स में छुपी हज़ार शख्सियतें
एक इंसां को एलियन में तब्दील होते
उम्र गुज़ार खुद में अंदाज़ अलहदा पाते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

गर्दिशों के सियाह अंधेरों में चश्मा-ए-नूर बहाते 
हादसों में खुद ही को खुद का हौसला बढ़ाते
हर ग़म की खुशी मनाकर ग़म को कन्फ्यूज करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।।

“ख़ामोशी के क़तरे”

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ख़ामोशी के क़तरे
आज़ाद होकर
यहाँ-वहाँ
बस अपना
अधूरापन लिए
हवाओ में बह रहे हैं।

कभी खुद से बहुत दूर चले जाते हैं
तो कभी खुद के बहुत पास आ जाते हैं।

लेकिन जब भी तुम और मैं
हम दोनों साथ होते हैं
तो ये हमारी ओर खिंचे चले आते हैं
एक अनजान कशिश इन्हें अपने पास बुलाती हैं।

जितनी जल्दी
ये हमारी निगाहों में दाखिल होते हैं
उतनी ही जल्दी
ये एक खूबसूरत गुफ़्तगू में शामिल होते हैं।

ख़लाओं के क़तरे
आज़ाद होकर
यहाँ-वहाँ
बस अपना
बंजारापन लिए
फ़िज़ाओ में बह रहे हैं।

कभी खुद से बहुत नाराज़ हो जाते हैं
तो कभी खुद के बहुत पास सो जाते हैं।।⁠⁠⁠⁠

“तुझे भुलाना ही नहीं चाहता हूं मैं”

तुझे अब तक नहीं भुला पाया मैं
तुझे भुलाना ही नहीं चाहता हूं मैं।

हररोज मुझको तेरी याद आती है
तुझे रोज याद करना चाहता हूं मैं।

बात चाहे कोई भी हो कैसी भी हो
एक तेरी ही बात करना चाहता हूं मैं।

ज़िंदगी के सुहाने सफ़र में हमसफ़र
ज़िंदगीभर तेरे साथ रहना चाहता हूं मैं।

तेरे बिन जीना जानाँ मुमकिन नहीं मेरा
तुझसे मिलकर यह कहना चाहता हूं मैं।

दरिया हो तुम, जीने का ज़रिया हो तुम
किनारा बनकर संग बहना चाहता हूं मैं।

ज़िंदगी की धूप में ज़िंदगी जल गयी मेरी
तेरे आँगन की छाँव में सोना चाहता हूं मैं।।

“सुबह-सुबह नंगे पाँव घास पर चलकर ऐसा लगा”

सुबह-सुबह नंगे पाँव
घास पर चलकर ऐसा लगा
मानो कई दिनों के बाद
आज खुलकर साँस ली है।

पैरों ने बड़ी राहत महसूस की
मगर घास थोड़ी घबरायी हुयी सी लग रही है।

शायद ! इसे अपने कुचल दिये जाने का डर है।

कभी-कभी लगता है कि
ये ज़िन्दगी भी कुछ ऐसी ही है।

कुचल दिये जाने के डर से
खुद को ज्यादा ख़्वाब नहीं देखने देती है।

पता नहीं !
कब कौन आकर कुचल दे
इसके नाजुक ख़्वाबों को
अपनी राहत के लिये।

कुछ चीजे कभी समझ नहीं आती
शायद ! इसीलिए ज़िन्दगी को ज़िन्दगी कहते है।

क्योंकि यह एक पल में पूरी सदी है
और सदियों में सिर्फ एक पल।।

“तेरा मुझ से दूर होना”

तेरा मुझ से दूर होना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद से दूर होना।

तेरा मुझ में शामिल होना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद में शामिल होना।

तेरा मुझ पे ऐतबार होना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद पे इख़्तियार होना।

तेरा मुझ को खुशियाँ देना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद को पा लेना।

तेरा मुझ से ज़ुदा होना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद से ज़ुदा होना।

तेरा मुझ में साँस लेना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद में ज़िन्दा रहना।

तेरा मुझ पे यक़ीन होना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद पे यक़ीन होना।

तेरा मुझ को बेपनाह चाहना
मुझे यूँ लगता है
जैसे मेरा खुद को बेपनाह चाहना।।

“ज़िंदगी का बेनज़ीर वो लुत्फ़ हो तुम”

ज़िंदगी की घनेरी कोई जुल्फ़ हो तुम
ज़िंदगी का बेनज़ीर वो लुत्फ़ हो तुम।

जिसे लिखने के बाद, मिले खूब दाद
ग़ज़ल का ऐसा कोई लफ़्ज़ हो तुम।

नज़र से लेकर जिगर तक क्या कहूँ
टूट नहीं सकता वो तिलिस्म हो तुम।

सुनकर जिसे महसूस करने लगे हम
जानाँ गुलज़ार की वो नज़्म हो तुम।

तोड़ने से टूटे ना, छोड़ने से छूटे ना
निभाना लाज़िम जिसे वो रस्म हो तुम।

मैं शायर गुमनाम अंधेरी गलियों का
अदीबों की बाअदब बज़्म हो तुम।

दीदार किया तो पता ये चला इरफ़ान
मोहब्बत का मासूम अक्स हो तुम।।

“दिन और रात के दरमियाँ पूरी ज़िंदगी गुज़र जाती है”

अलसुबह सुबह से जब गले मिलता हूँ
फिर पूरा दिन उसकी बाहों में रहता हूँ।

सूरज की किरणों से मिलती हैं ताकत मुझे
अपने हरकिरदार से है सच्ची मोहब्बत मुझे।

तपती हुई दोपहर हरपहर बस यही कहती है
धूप-छाँव तो यूँही ज़िंदगीभर चलती रहती है।

हरशाम शाम मुझे अक्सर यूँ थाम लेती है
खुशियों को हरबार नया एक नाम देती हैं।

ख़याल भी तभी आते हैं, जब रात हो जाती है
ख़्वाब भी तभी आते हैं, जब रात सो जाती है।

रात के आगोश में टिमटिमाते हैं कई सितारें
रात के आगोश में पास बुलाते हैं कई सितारें।

दिन और रात के दरमियाँ पूरी ज़िंदगी गुज़र जाती है
पास जाकर जो देखो कभी, ये बड़ी दूर नज़र आती है।

हरपल का मज़ा लो, यहाँ तुम हरपल खुलकर जियो
हरसुबह चाहत की अदरक वाली चाय बनाकर पियो।।

#राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“दोस्ती” (Unforgettable Day…2nd August 2015)

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दोस्ती का दिन कोई, न कोई वार होता है
दोस्तों के साथ तो, हर वार ही शनिवार होता है।

चाहे माइंड की मिस्ट्री हो, या हसरतों की हिस्ट्री
दोस्तों के दरमियाँ होती हैं, कमाल की कैमिस्ट्री।

सेटिंग चाहे मोबाइल की हो, या फिर दिल की
दोस्तों ने तो इन पर, पूरी पीएचडी हासिल की।

हुस्न देखकर ये फँस जाते हैं, रोज उसकी गली तक जाते हैं
दोस्ती के बिना दोस्तों, ये ज़िंदगी के सफ़र में भटक जाते हैं।

यारों दा ठिकाना कोई, न कोई घरबार होता हैं
यारों के साथ तो, हर लम्हा ही यादगार होता हैं।

मुसीबत हो या मोहब्बत, या हो कोई फड्डा
हर थड़ी पे होता हैं, साड्डे यारों दा अड्डा।

घरवाले जब इन्हें डाँटते हैं, बुरा नहीं ये मानते हैं
दोस्त लोग तो हमेशा, दोस्तों में खुशियाँ बाँटते हैं।

ज़िंदगी ने एक रोज जब, मुझसे मेरी खुशियों का राज़ पूछ लिया
मुस्कुराकर मैंने भी, अपने दिल के काग़ज़ पर दोस्ती लिख दिया।।

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