“मैं दवा हूं, धीरे-धीरे असर करता हूं”

लहरों के दरमियाँ सफ़र करता हूं
मैं दवा हूं, धीरे-धीरे असर करता हूं।

जो कुछ कमाया है, जो कुछ पाया है
कदमों में आपके वो नज़र करता हूं।

तेरा याद आना लाज़िम है मेरे लिए
तेरी यादों के सहारे गुज़र-बसर करता हूं।

लबों से निकलकर जो आसमाँ तक जा पहुँचे
मैं दुआ हूं, तेरे दिल में घर करता हूं।

बता नहीं सकता तुझे इस क़दर करता हूं
मैं प्यार तुझसे इस क़दर करता हूं।

मेरी नज़रों में रहने वाले, ऐ मेरे हमसफ़र
तेरा इंतज़ार मैं हरपहर करता हूं।

चाहे तू मुझको सज़ा दे, चाहे तू अपना बना ले
कदमों में हाज़िर अपना ये सर करता हूं।।

rockshayar.wordpress.com⁠⁠⁠⁠

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