“इस दुनिया से अलग एक दुनिया है मेरी”

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इस दुनिया से अलग
एक दुनिया है मेरी।

जब भी डर लगता है
वहाँ चला जाता हूं।

वहाँ डर नहीं है, सिर्फ खुशी है
वहाँ घर नहीं है, सिर्फ खुशी है।

वहाँ अपने नहीं हैं, सिर्फ खुशी है
वहाँ सपने नहीं हैं, सिर्फ खुशी है।

वहाँ मक़सद नहीं है, सिर्फ खुशी है
वहाँ हसरत नहीं है, सिर्फ खुशी है।

वहाँ दीवारें नहीं हैं, सिर्फ खुशी है
वहाँ किनारे नहीं हैं, सिर्फ खुशी है।

वहाँ होड़ नहीं है, सिर्फ खुशी है
वहाँ दौड़ नहीं है, सिर्फ खुशी है।

वहाँ तड़पना नहीं है, सिर्फ खुशी है
वहाँ तरसना नहीं है, सिर्फ खुशी है।

वहाँ उम्मीद नहीं है, सिर्फ खुशी है
वहाँ ईद नहीं है, फिर भी खुशी है।

वहाँ हँसी है, सिर्फ हँसी है
वहाँ खुशी है, सिर्फ खुशी है।।

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“The Scissor Sound Unisex Saloon”

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उम्मीद की वो किरण तो हर जगह मौजूद है
खूबसूरती में ही तो इस ज़िंदगी का वज़ूद है।

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© RockShayar

rockshayar.wordpress.com

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“मेरा हरसफ़र मुझको फिर से तेरे शहर ले आता है”

तेरे साथ बिताया वक़्त बड़ी जल्दी गुज़र जाता है
मेरा हरसफ़र मुझको फिर से तेरे शहर ले आता है।

रास्तेभर यही सोचता हूं कि अब आगे क्या?
ज़िंदगी से कुछ लम्हे चुराकर भागे क्या?

याद न करने के बहाने से तुम्हे याद कर लेता हूं
मैं नज़रों से दिल की बेचैनी आज़ाद कर देता हूं।

वक़्त के साथ-साथ वक़्त की सिफ़त बदल जाती हैं
बदलते-बदलते इसकी हरएक आदत बदल जाती हैं।

दूरियों के दरवाज़े अक्सर बड़ी देर से खुलते हैं
पर मज़बूरियों के मकान बड़ी जल्दी बन जाते हैं।

ज़ेहन की परछाई से परे होते हैं जज़्बात
दिल की गहराई से जुड़े होते हैं जज़्बात।

अगर एहसास है धागा तो यह मन अपना चरखा हैं
उम्मीद की उँगलियों से हमने दिल को थाम रखा हैं।

तेरे साथ गुज़ारा वक़्त बहुत जल्दी गुज़र जाता है
मेरा हरसफ़र मुझको फिर से तेरे शहर ले आता है।।⁠⁠⁠⁠

“पहले तो तेरा ख़याल ही काफ़ी था, जीने के लिये”

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पहले तो तेरा ख़याल ही काफ़ी था, जीने के लिये
और अब तेरा ख़याल भी नाकाफ़ी है, जीने के लिये।

वो गुज़ारिश जो थी मेरी, वो अब भी अधूरी है
वो नवाज़िश जो थी तेरी, वो अब भी ज़रूरी है।

जो दिल से दिल मिल जाते, तो क्या बात होती
जो हमारे दिल मिल जाते, तो क्या बात होती।

पहले तो तुम तसव्वुर पर खूब बंदिशें लगाती थी
और अब तुम हो कि तसव्वुर में भी नहीं आती हो।

वो सवाल जो था मेरा, वो अब भी वही है
वो जवाब जो था तेरा, वो अब भी नहीं है।

जो लब से लब मिल जाते, तो क्या बात होती
जो हमारे चेहरे खिल जाते, तो क्या बात होती।

पहले तो तुम बेनज़ीर सी बहुत वो बातें करती थी
और अब तुम हो कि ज़रा भी नहीं याद करती हो।

वो अंदाज़ जो था मेरा, वो अब भी वही है
वो एहसास जो था तेरा, वो अब भी वही है।

जो मन से मन मिल जाते, तो क्या बात होती
जो हम दोनों खिल जाते, तो क्या बात होती।।⁠⁠⁠⁠

“न मुझे इख़्तियार दिया, न मेरा इंतज़ार किया”

न मुझे इख़्तियार दिया, न मेरा इंतज़ार किया
ऐ ज़िंदगी तूने मेरा, क्यों कभी ऐतबार न किया।

मैं मनाता ही रहा, तू रूठती चली गयी
खुद को ढूँढ़ते हुये, बड़ी दूर चली गयी।

वक़्त के वो धारे, जो कि अब धुंधले हो चुके हैं
एहसास की उस नदी में, रेत बनकर जम चुके हैं।

मुसाफ़िर आज भी मिलते हैं, अनजान सफ़र में
हसरतों के आशियाँ लिये हुये, आँखों के घर में।

ऐतबार करना मगर, अब भी बहुत मुश्किल है
तब से लेकर अब तक, सहमा हुआ ये दिल है।

ज़िंदगीभर ऐ ज़िंदगी, मुझको तेरा इंतज़ार ही रहा
मैं जितना पास आता गया, तू उतना दूर होती गयी।

छुप कर बैठी है कहीं, क्यों गर्दिशो में तू अब भी
कभी तो झांक इधर, मैं तन्हा खड़ा हूं अब भी।

सुना है ! कई रंगो से मिलकर बनी है तू
वो सुनहरे सपने तेरे, मुझे कब दिखाएगी तू।

ज़िंदगी तुझसे मेरा, अब वो पहले जैसा रिश्ता न रहा
तू यादें मिटाती चली गयी, मैं फर्यादें लिखता ही रहा।।⁠⁠⁠⁠

“आज फिर से बहुत तेज़ बारिश हो रही है”

आज फिर से बहुत तेज़ बारिश हो रही है
आसमाँ से ज़मीं की सिफ़ारिश हो रही है।

आज फिर से जीने की ख़्वाहिश हो रही है
दिल से दिल की वही गुज़ारिश हो रही है।

आज फिर से ज़िन्दगी मदहोश हो रही है।
हौले-हौले खुद ये अपना होश खो रही है।

आज भी मैं बरसते हुए मौसम का आवारा बादल हूं
आज भी मैं उफनते हुए सागर का बंजारा साहिल हूं।

जब भी तुम मेरे आस-पास होती
बारिश शुरू होने लग जाती।

इशारा था वो कायनात का
फ़साना था वो जज़्बात का।

मैं जिसे बखूबी समझ जाता, मगर तुम बहुत डरती थी
भीगने से, इश्क़ में डूबने से, इसलिए दूर-दूर रहती थी।

आज फिर से वही पहले जैसी बारिश हो रही है
आज फिर से ये कायनात कोई इशारा दे रही है।

आज फिर से बहुत तेज़ बारिश हो रही है
आज फिर से जीने की ख़्वाहिश हो रही है।।

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“मैं दवा हूं, धीरे-धीरे असर करता हूं”

लहरों के दरमियाँ सफ़र करता हूं
मैं दवा हूं, धीरे-धीरे असर करता हूं।

जो कुछ कमाया है, जो कुछ पाया है
कदमों में आपके वो नज़र करता हूं।

तेरा याद आना लाज़िम है मेरे लिए
तेरी यादों के सहारे गुज़र-बसर करता हूं।

लबों से निकलकर जो आसमाँ तक जा पहुँचे
मैं दुआ हूं, तेरे दिल में घर करता हूं।

बता नहीं सकता तुझे इस क़दर करता हूं
मैं प्यार तुझसे इस क़दर करता हूं।

मेरी नज़रों में रहने वाले, ऐ मेरे हमसफ़र
तेरा इंतज़ार मैं हरपहर करता हूं।

चाहे तू मुझको सज़ा दे, चाहे तू अपना बना ले
कदमों में हाज़िर अपना ये सर करता हूं।।

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“Songs”

Without song, this life is तो एकदम ही wrong
No मज़ा bore होने की सज़ा, ज़िन्दगी का सफ़र भी long

Reel हो या real, हमेशा हर film की जान होते हैं गाने
मौसिकी के सुर ताल, rhythm की पहचान होते हैं गाने

सुनने वालों के style बदल गए, पर गाने अब भी वहीं हैं
ज़िन्दगी के vocals पर, गूँज रहे तराने अब भी वहीं हैं

Auto रिक्शा bus कैब metro ट्रेन ship या हो aeroplane
यात्रा तभी सुखद होगी, जब play list में हो गाने top ten

Tv tape fm radio, cd dvd Mp3 और I-pod
गाने के अख़बार हैं ये, कम करते हैं काम का load

Earphone से ज्यादा ज़रूरी चीज, सफ़र में कुछ भी नहीं
ज्योंही कान में लगाओ इसे, मूड होगा खुद-ब-खुद सही

एक count down है ज़िन्दगी, हमेशा सबकी बजाती है
जैसे हालात होते हैं हमारे, ठीक वैसे ही गाने सुनाती हैं

Without song, this life is तो एकदम ही ढ़ोंग
No dance No romance, लाइफ की journey भी long.

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“Diploma की वो Dynamic यादें”

Dedicated to all Ajmer Polytechnic Alumni…

Polytechnic Diploma की वो Dynamic यादें
बहुत याद आती हैं, College Time की वो बातें।

Schooling के बाद शुरु हुआ, Life का Brand New एक सफ़र
राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय, माखूपुरा अजमेर शहर।

शुरु-शुरु में तो Ragging के नाम से ही डर लगता था
और बाद में तो फिर Hostel ही अपना घर लगता था।

बात जब Hostel की आ जाए तो उसे याद करते हैं हम
अपने उस कोहिनूर Hostel को कैसे भूल सकते हैं हम।

Advocate अय्यूब भाई साहब का था वो
Students के ख़्वाबों का आशियाँ था वो।

हर शनिवार शाम को ही हम, TV अपने कब्जे में ले लेते थे
और फिर पूरा Sunday, Hollywood Movies देखा करते थे।

सभी शाखाओं के अपने-अपने अलग भवन होते थे
6 के 6 Semester हम फाइलों का वज़न ढ़ोते थे।

क़रीब ही Canteen में चाय-समोसा मिलता था
एक इतवार को ही तो सबका चेहरा खिलता था।

अगर किसी के किसी Subject में Back आ जाती थी
तो ये ज़िंदगी कई दिनों तक उसका मातम मनाती थी।

College में सबकी अपनी, कोई न कोई Setting थी
हम जैसे कुछ तन्हा भी थे, Poor जिनकी Rating थी।

NCC Camp में तो भय्या, हालत ही खराब हो जाती थी
Valentines Day पर ज़िंदगी मानो गुलाब हो जाती थी।

सात Number Tempo हो या साड्डे यार दी Bike
कितनी हसीन थी वो दोस्तों, अपनी College Life.

College के Gate के उस तरफ, ज़िंदगी हमें हँसाती थी
College के Gate के इस तरफ, ज़िंदगी हमें नचाती है।

Engineering Diploma की वो धाकड़ यादें
बहुत याद आती हैं, Campus वाली वो बातें।।

© RockShayar

rockshayar.wordpress.com

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“शर्त यही थी के कोई शर्त न हो”

 

शर्त यही थी के कोई शर्त न हो
रुख़्सत के वक़्त कोई दर्द न हो।

सहेजकर रखी है जिसे दिल में
उस तस्वीर पर कोई गर्द न हो।

नफ़रत की ज़हरीली आँधी में
सब्ज़ पत्तों का रंग ज़र्द न हो।

बड़ा तड़पाता है, बड़ा सताता है
दर्द का मौसम कभी सर्द न हो।

तसव्वुर में तकब्बुर आ जाता है
जज़्बाती जब कोई फ़र्द न हो।

न जीने दे, न मरने दे
ज़िंदगी इतनी भी बेदर्द न हो।

दिल को बहुत बुरा लगता है
हमदर्द ही जब हमदर्द न हो।।

“हमने ख़ुद को ज़ुबान दी है”

हमने ख़ुद को ज़ुबान दी है
अपने लिए ख़ुद जान दी है।

ज्योंही पैर डगमगाने लगे
बन्दूक सिर पर तान दी है।

दो गज ज़मीन के अलावा
अपनी पूरी ज़मीन दान दी है।

गिरवी ख़्वाब छुड़ाने की ख़ातिर
खेत मकान और दुकान दी है।

ज्यादा कुछ नहीं बस अपनी
आन बान और शान दी है।

जिसने भी दिल की सुनी है
दिल ने उसे ज़ुबान दी है।

शहीदों को सलाम करो इरफ़ान
देश के लिए इन्होने जान दी है।।

“गुज़रता नहीं ये लम्हा जाने कैसा लम्हा है”

ज़ेहन के हर हिस्से पर उसका ही कब्ज़ा है
गुज़रता नहीं ये लम्हा जाने कैसा लम्हा है।

चलता ही चला जाता है, मंज़िलों के पार
ठहरता नहीं ये रस्ता जाने कैसा रस्ता है।

बेजान पड़ा रहता है, अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है
धड़कता नहीं ये हिस्सा जाने कैसा हिस्सा है।

जिस्म की तपिश में भी रूह को पहनता है
पिघलता नहीं ये नुत्फ़ा जाने कैसा नुत्फ़ा है।

जो पैदा हुआ है, उसे मरना है एक रोज
बदलता नहीं ये नुस्ख़ा जाने कैसा नुस्ख़ा है।

मुद्दे की बात करे तो आज़ादी एक मुद्दा है
उछलता नहीं ये मुद्दा जाने कैसा मुद्दा है।

मछली की तरह बार-बार फिसल जाता है
ठहरता नहीं ये लम्हा जाने कैसा लम्हा है।।

“My Mission Institute Jaipur”

प्रतियोगी इस दौर में, कोचिंग सेंटर्स के शोर में
माय मिशन इंस्टीट्यूट की बात ही कुछ और है।

ज्ञान की धरोहर सदा सुरक्षित रहती है जहाँ पर
परिश्रम की पावन पूंजी रक्षित रहती है यहाँ पर।

आदरणीय कुँवर कनक सिंह जी राव के दिशा निर्देशन में
मिशन सदैव सफल रहा, प्रबुद्ध गुरूजनों के मार्गदर्शन में।

आरएएस शिक्षक भर्ती जूनियर अकाउंटेंट सब इंस्पेक्टर पटवार एलडीसी
कॉम्पीटिशन की ऐसी तैयारी कराए, जैसी होनी चाहिए बिल्कुल वैसी।

प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यहाँ, हजारों विद्यार्थी आते हैं
कड़ी मेहनत और रणनीति से, मंज़िल वो अपनी पाते हैं।

क्लास रूम के साथ-साथ, स्टडी मैटेरियल भी स्मार्ट है
कम टाइम में अधिकतम नाॅलेज गेन करना भी एक आर्ट है।

प्रतिस्पर्धा हो चाहे बहुत कठिन, या बह रही हो उल्टी धारा
कर्ण अर्जुन और एकलव्य की तरह, लक्ष्यभेदी है बाण हमारा।

पिछले सोलह वर्षो से सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाला संस्थान है ये
निराशा से ग्रस्त कमजोर स्टूडेंट्स के लिए तो जैसे वरदान है ये।

आपकी सफलता सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है
कोई झूठा दावा नहीं, सिर्फ सच्चाई और ईमानदारी है।।

Irfan Ali
LDC Batch – 02

Happy birthday Manoj Meena…

सुपर है स्पेशियलिटी जिसकी
धाकड़ है पर्सनैलिटी जिसकी
माइंडेड है मेंटिलिटी जिसकी
एडवांस्ड है एबिलिटी जिसकी
मासूम है मैच्योरिटी जिसकी
निश्चित है स्योरिटी जिसकी
क्यूट है क्योरिसिटी जिसकी
स्वीट है सिम्पलीसिटी जिसकी

पहचानो….
पहचानो….
वो कौन है?
नहीं पहचाने!

अरे यार !
एक ही तो है

यारों का यार…
दोस्तों का दोस्त…

धौलपुर की मिट्टी से
पैदा हुआ एक ओज

बर्थडे है जिसका आज
साडडा यार मनोज…

Happy birthday Haseeb…

सबसे जुदा एक शख्सियत है
बहुत नेक जिसकी तर्बियत है
कामिल जिसकी काबलियत है
ख़यालों में जिसके क़ैफ़ियत है
दुआओं में जिसकी ख़ैरियत है
सच्चाई जिसकी असलियत है

बुलंद इरादे हैं, नहीं और कोई तरक़ीब
अपनी मेहनत से बनाया अपना नसीब
न कोई रक़ीब
है खुशनसीब
बताओ ज़रा
वो कौन है
सोचो ज़रा
वो कौन है
सबका हबीब
दिल के क़रीब
वो है हसीब
वो है हसीब।।

…irfan boss