“पता था”

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तेरी परछाई संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि अंधेरा घना होने वाला है।

तुझे ख़बर नहीं थी मेरे आने की
मगर मुझे ख़बर थी तेरे जाने की।

वो पल, जो पल भर के लिए हम को मिले थे
न उनमें कोई शिकवे थे, न उनमें कोई गिले थे।

तेरी आवाज़ सहेज कर रखी है मैंने
पता था कि ख़ामोशी कायम होने वाली है।

तुमने कभी बताया नहीं, कि कौन हो तुम
तफ़्तीश करता रहा, मैं ज़िन्दगी भर यही।

इस बार जब मुलाक़ात होगी, तो पूछूँगा
इस मुलाक़ात में कितने अलविदा छुपे हैं।

हर बार यह अलविदा मेरी जान ही ले लेता है
पता नहीं इसके मुँह, कब मेरा खून लग गया।

तेरी तस्वीर संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि याददाश्त जाने वाली है।।

RockShayar

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“बहुत सोचने के बाद भी जब कोई नतीजा न निकला”

बहुत सोचने के बाद भी जब कोई नतीजा न निकला
अजनबी राहों पर तब एक राही फिर अकेला ही निकला।

सफ़र की मुश्किलों से वह कभी घबराया नहीं
एक बार क्या गिरा, फिर कभी लड़खड़ाया नहीं।

परेशानियों को इनायत समझता रहा वह
खुद से ही हर घड़ी, खुद उलझता रहा वह।

ख़ामोश होकर वो बेसबर, खुद में सबर तलाशता रहा
ज़िन्दगी की डायरी में, लिखने का हुनर तराशता रहा।

जैसे जैसे मोड़ आते गए, रास्ता खुद-ब-खुद मुड़ता गया
रास्तों के इस तन्हा सफ़र में, हमसफ़र नया जुड़ता गया।

ज़ख्मी होने के बावजूद उसने चलना जारी रखा
नमी होने के बावजूद उसने जलना जारी रखा।

छटपटाने की वो आदत भी फिर धीरे-धीरे छूट गयी
और दर्द की थैली भी हिम्मत के शरारों से फूट गयी।

तमाम कोशिशों के बाद भी जब कोई नतीजा न निकला
अनजान राहों पर तब एक अजनबी फिर अकेला ही निकला।।

#RockShayar

“कुछ तो बता ऐ ज़िन्दगी”

मेरे साथ-साथ मुझ में, उस बच्चे की भी मौत हो गई
कुछ तो बता ऐ ज़िन्दगी, तू इतनी बेरहम क्यों हो गई।

हर बार हर दफा, जो तूने चाहा वही मैंने किया
एक तेरी खुशी के लिए, ज़हर भी हँसकर पिया।

फिर भी एक अर्से से नाराज़ हुए बैठी है
खुशी में भी आजकल, तू उदास रहती है।

मेरे साथ-साथ मुझ में, उस अच्छाई की भी मौत हो गई
कुछ तो बता ऐ ज़िन्दगी, तू इतनी बेरहम क्यों हो गई।

हुई मुझसे ऐसी कौनसी ख़ता, बोल तो सही, कुछ तो बता
मुँह फेर ले तू चाहे मुझसे, मगर पहले थोड़ा हक़ तो जता।

तुझे भी तो मेरी याद आती होगी न, कभी न कभी
तुझे भी तो दर्द महसूस होता होगा न, कहीं न कहीं।

मेरे साथ-साथ मुझ में, उस इंसान की भी मौत हो गई
कुछ तो बता ऐ ज़िन्दगी, तू इतनी बेरहम क्यों हो गई।

खुद को पाने की ज़िद में, सब कुछ कितना बदल गया
अंधेरे से लड़ते लड़ते, वो सूरज भी एक दिन ढ़ल गया।

एक तेरे ही तो इंतज़ार में, मैं अब तक वहीं ठहरा हुआ हूँ
यादों का सब्ज़ जंगल जलाकर, वीरान एक सहरा हुआ हूँ।

मेरे साथ-साथ मुझ में, उस शख़्स की भी मौत हो गई
कुछ तो बता ऐ ज़िन्दगी, तू इतनी बेरहम क्यों हो गई।।

RockShayar