“इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (IGNP)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

सदियों से मरुभूमि की, प्यास बुझा रही हर पहर
राजस्थान की जीवनरेखा, ये है इंदिरा गाँधी नहर

विश्व की सबसे बड़ी, यह बहुउद्देशीय परियोजना है
आठ जिलों में सिंचाई एवं, पेयजल की यह योजना है

इंजीनियर कँवरसेन ने, सर्वप्रथम रूपरेखा बनाई
1961 में उद्घाटन हुआ, शुरू हुई आखिर सिंचाई

सतलज और व्यास के संगम पर, हरिके बैराज से निकली है
राजस्थान फीडर से होती हुई, यह बाड़मेर तक जा पहुंची है

मसीतावाली हैड से लेकर, गडरा रोड़ तक फैली हुई है
नौ शाखाएं 1 उपशाखा, 7 लिफ्ट नहरें निकाली गई हैं

प्रथम फेज में 204, द्वितीय में 445 किमी बनी है
कुल मिलाकर लंबाई इसकी, 649 किमी हुई है

सर्वाधिक कमांड क्षेत्र, जैसलमेर व बीकानेर का है
रेगिस्तान में खुशहाली लाने में, योगदान इसका है

रावी जल विवाद पर, इराडी आयोग गठित हुआ
88 % जल उपयोग, इसी के द्वारा आदेशित हुआ

बरसों से थार की ज़मीन को, तर कर रही हर पहर
राजस्थान की मरुगंगा, कहलाए इंदिरा गाँधी नहर।

©RockShayar

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“Tum mere Shahar aayi ho”

कई दिनों के बाद तुम मेरे शहर आई हो

हाँ, ये वहीं शहर है 

जो कभी हमारा हुआ करता था।
याद है वो पार्क 

जहाँ अक्सर हम मिला करते थे

आजकल मैं वहां से गुज़रता तक नहीं हूं

क्या पता तुम्हारी खुशबू 

अब भी वहीं रहती हो

महसूस कर जिसे 

मैं फिर से बैचैन हो जाऊं।
तुमने तो बड़ी आसानी से

रोज़गार के सिलसिले में

अपना शहर बदल लिया था

मगर मैं आज भी 

यादों के इस शहर में

अकेला ही रहता हूं।
आज जब तुम्हारा फोन आया 

कि मैं आई हुई हूं

तो यूं लगा मानो वो दौर 

फिर से ज़िन्दा हो गया है

यादों की बरसती हुई बारिश में।
पता नहीं ! हमारा मिलना होगा भी या नहीं

पर इतना ज़रूर मालूम है मुझे 

कि आज मैं पार्क की उस बेंच पर 

थोड़ा वक्त ज़रूर गुज़ारूंगा

जहाँ अक्सर हम अपना 

वक्त से चुराया हुआ वक्त गुज़ारा करते थे

क्या पता तुम्हारे साथ 

वो एहसास भी फिर लौट आया हो

दूर रहा जिससे मैं इतने दिनों तक।
क्या तुम सच में लौट आई हो

या यह वहम है मेरे दिल का

अगर महसूस कर पाओ इसे

तो बस इतना ही कहूंगा

जाने से पहले 

एक बार मिलते हुए जाना।
कई दिनों के बाद 

तुम मेरे शहर आई हो

हाँ, ये वहीं शहर है 

जो कभी हमारा हुआ करता था।।

“Bestest Buddy ko Govt. Job mil gayi”

कोशिश करता रहा वह, अब जाकर कामयाबी मिली हैएक अर्से के बाद, दोस्त को खुशियों की चाबी मिली है
सुनी जब मैंने यह खुशखबरी, दिल को बहुत अच्छा लगा

दिल से निकला एहसास यह, दिल को बहुत सच्चा लगा
अच्छे बुरे कई दौर देखे, उसने खुद में शख़्स कई और देखे

बदलते हुए वक़्त के साथ साथ, बदलते हुए कई दौर देखे
गिरा वह चाहे सौ बारी, हिम्मत नहीं उसने हारी

हर दर्द को गले लगाकर, निभायी अपनी जिम्मेदारी
एक अच्छे दोस्त के साथ, एक अच्छा इंसान भी है

तक़दीर के तिलिस्म से, पर कभी कभी हैरान भी है
अभी तो बस शुरुआत हुई है, रहमत की बरसात हुई है

अभी जाना है दूर बहुत, अभी तो खुद से मुलाकात हुई है
सेलिब्रेशन कुछ ऐसा करना है, कि अब तो बस आगे बढ़ना है

अपने आप को पहचानकर फिर, इतिहास एक नया रचना है
ट्राय करता रहा वह, आज जाकर सक्सेस मिली है

एक अर्से के बाद, साड्डे यार को हैप्पीनेस मिली है।

“Ashmayra: Little Angel”

मासूम एक परी की, जिस पल आमद हुईयह ज़िन्दगी तब, खुद बखुद खुशामद हुई
बेटियाँ ही तो, खुदा की रहमत का ज़रिया होती हैं

मोहब्बत और जज़्बातों का, नूरानी दरिया होती हैं
आशु मामू ने जो इसका, नाम रखा है अश्मायरा

यूं लग रही है मानो, चाँद से उतरी कोई शायरा
रब से यही दुआ है, यह जल्दी से तंदुरुस्त हो जाएं

ममता के आंचल तले, फिर सुकून से अपने घर जाएं

 

अब्बू-अम्मी, दादा-दादी, और नानी का दुलार मिलेगा

नानू की गोद में ही तो इसको बेइन्तहा प्यार मिलेगा
ज़ोया अप्पी और ज़ोहैर भाई, इसका वेट कर रहे हैं

पूरे घर को नन्हे मेहमान के अकाॅर्डिंग सेट कर रहे हैं
इंशाअल्लाह, जल्द ही यह खेलने कूदने लगेगी

इंतज़ार है उस लम्हें का, जब मुझे मामू बोलेगी।
-: Sipu Mamu

“My Blog”

 “My Blog”
A place where I’m feeling like at home

It’s my blog, rockshayar.wordpress.com
Type करोगे Google पर, जब लफ़्ज़ RockShayar को

पाओगे सदा तुम तो वहां, एक अलहदा से शायर को
Create हुए 3 साल हो गए, इसे भी और मुझे भी

कोई मगर समझ नहीं पाया, इसे भी और मुझे भी
December 2013 में, जब अल्फ़ाज़ों में नुमायां मेरा वज़ूद हुआ

दोस्त devendra poonia ने, blog बनाने का idea दिया
तब से ये जो सिलसिला शुरू हुआ, वो फिर कभी रूका नहीं

Destiny के उन कमरतोड़, फैसलों के आगे कभी झुका नहीं
कहीं भी जाऊं, कुछ भी करू, या रहूं चाहे किसी भी हाल में

ज्योंही poetry पेपर पर उतरी, post करनी हैं हर हाल में
Different styles and fonts भी, available हैं यहां पर

Various themes as per mood, changeable हैं यहां पर
हर reader के लिए यहां पर, literature categorized हैं

Older post देखने के लिए, sorting month wized हैं
अपने email के जरिए, आप भी इसे follow कर सकते हैं

दिल को छूने वाले एहसास, जब चाहे तब पढ़ सकते हैं
A space where I’m living like at home

It’s my blog, rockshayar.wordpress.com
@RockShayar
#ObjectOrientedPoems(OOPs)

एचटीटीपीएस://राॅकशायर.वर्डप्रेस.काॅम

“बेनज़ीर”

हूर जैसी लगती थी वो, बेनज़ीर था नाम उसका
बर्फ़ सी सुफ़ेद, वादी-ए-कश्मीर मुक़ाम उसका

पहली दफ़ा जब देखा, नज़रों ने यूं सलाम किया
संभालकर रखा है मैंने, आज तक सलाम उसका

हिज़ाब में छुपी वो आँखें, रुख़सार, लब, वो बातें
दिल को याद है आज भी, चेहरा तमाम उसका

मोहब्बत थी उसे, मेरे मोहब्बत करने के अंदाज़ से
वो ज़िन्दा है लफ़्ज़ों में, यहीं तो है इनाम उसका
 
नींद जब नहीं आती है, तन्हाई बड़ा सताती है
तकिये के नीचे रखता हूं, हर शब पयाम उसका

वो लौटकर आई नहीं, शायद उसको ख़बर नहीं 
मैं इंतज़ार करता रहा, हर घड़ी हर शाम उसका

जिस्म से लेकर जान तक, दिल के जहान तक
ज़िन्दगी की ग़ज़ल में, क़ाफ़िया है नाम उसका।

“हर इम्तिहान के हमेशा दो ही नतीजे होते हैं”

हर इम्तिहान के हमेशा दो ही नतीजे होते हैंया तो हम पास होते हैं या फिर फेल होते हैं

इसके अलावा यहाँ पर कोई तीसरा पक्ष नहीं है

नाकाम न हुआ कभी जो ऐसा कोई शख़्स नहीं हैं

    

इसीलिए नतीजों की परवाह किए बगैर बस आगे बढ़ो 

बिना किसी की मदद लिए तुम खुद अपनी कहानी गढ़ो
मेहनत और इबादत बेशक दोनों ही बेहद ज़रूरी हैं

जो चाहोगे मिलेगा वहीं अगर तैयारी आपकी पूरी है
जो कामयाब हो गए अगर तुम फिर तो बहुत ही बढ़िया है

जो न हुए तो दोबारा कोशिश करना ही सफलता की पुड़िया है
हँसने वालों पर ध्यान न देना वो तो हमेशा हँसते ही रहेंगे

कुछ भी कर लो चाहे तुम फब्तियां तुम पर कसते ही रहेंगे
उनको अगर जवाब देना है तो बातों से नहीं अपने काम से दो

कामयाब होकर फिर हर हिसाब मुस्कुराकर बड़े आराम से दो
ज़िन्दगी के इम्तिहान से बड़ा कोई इम्तिहान नहीं

बिना नाकाम हुए तो यहाँ बनता कोई महान नहीं।
-RockShayar

“HIV+ :The Real Positive”

एचआईवी पॉजिटिव में भी पॉजिटिव छुपा है
क्या अलग हैं इनमें, ये भी तो हमारी तरह हैं

सिर्फ एक बिन बुलाई बीमारी की वज़ह से
कितना कुछ सहते हैं, हर घड़ी हर जगह पे

बस एक रोग ही तो है यह, किसी को भी हो सकता है
अगर हिम्मत रखे तो, इसका इलाज भी हो सकता है

संक्रमित सूई के अलावा, और भी हैं कई इसके कारण
देश में हर साल हजारों लोग, मर जाते हैं इसके कारण

एड्स इज वेरी डेंजरस, एंड सीरियस मर्ज़
खून हो जाता है जिसमें खतरनाक खुदगर्ज़

हर बार एक नयी सिरिंज, एवं नया काॅन्डोम यूज करे
वाइरस के इस विषवाले खेल में, ज़िन्दगी को चूज करे

सही समय पर सही, एजुकेशन देना ज़रूरी है
सोसाइटी में ना रहे अब, एड्सरोगी से दूरी ये

बंदर से इंसानों तक, आ पहुंची यह डेडली डिजीज
किसी से भेदभाव ना करे, रिक्वेस्ट है यह मेरी प्लीज।

@RockShayar

“जाएंगे जब इस दुनिया से तब लोग हमें याद करेंगे”

जाएंगे जब इस दुनिया से तब लोग हमें याद करेंगे
देकर वो मिट्टी क़ब्र पर हाँ शेर कुछ इरशाद करेंगे

पूरा होगा बेशक होगा, जब कभी इन्तक़ाम हमारा
दिल के इस वीरान घर को तभी हम आबाद करेंगे

वतनपरस्ती पर यहीं कहूंगा, ऐ मेरे वतन के लोगों
वतन को हम अपने सब मिलकर दिलशाद करेंगे

न गिड़गिड़ाएंगे, न हाथ फैलाएंगे किसी के आगे
फ़क़त अल्लाह की बारगाह में ही फरियाद करेंगे

आज़ादी हक़ है जब तो, हमको भी मिलकर रहेगी
दर्द की इन बेड़ियों से रूह को अब आज़ाद करेंगे

बहाएंगे दरिया जुनून का, निभाएंगे रिश्ता ख़ून का
अपने अंदर की बुराई को, इस क़दर बर्बाद करेंगे

याद रखना यह बात, दिल में अपने ऐ दुनियावालों
एक दिन हम फिर से, खुद में खुद को ईजाद करेंगे

@RockShayar

“लफ़्ज़ों में नुमायां दर्द को हाल-ए-दिल न समझना”

लफ़्ज़ों में नुमायां दर्द को हाल-ए-दिल न समझना
ज़िन्दगी के काग़ज़ पर खुशी लिखना सीख चुके है

हालाँकि वक़्त बहुत लगा है, इस फ़न को पाने में
और एक उम्र गुज़र गयी है, खुद को आज़माने में

पहले हम हैरान होते थे, अब वो हैरान होते हैं
देखकर यह तलब अब, लफ़्ज़ परेशान होते हैं

ख़्वाब सब महताब हुए, ख़्वाहिशों ने लिखे हैं ख़त
रूह को भी आजकल इन सबकी, लग गयी है लत

हयात के तन्हा सफ़र में, साथ चली हरघड़ी क़लम
इंसानी रिश्तों से परे, कुछ ख़ास है यह मेरी क़लम

कहीं भी, कभी भी, कुछ भी, कैसा भी हो लिखना
ख़याल मज़बूत हो वो, याद बस इतना ही रखना

हद न हो जिसकी कोई, उस मुकाम तक पहुँचना है
बाज़ार की ज़ीनत और तकब्बुर से हमेशा बचना है

नज़्मों में बयां दर्द को हाल-ए-दिल न समझना
ज़िन्दगी के हाथ पर खुशी लिखना सीख चुके है।

@RockShayar

“इंजीनियरिंग (Engineering)”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

करने के बाद जिसको, घूमती है मन की स्टीयरिंग
ज़िंदगी का फाउंडेशन कोर्स, देट इज इंजीनियरिंग

प्रौद्योगिकी में स्नातक डिग्री, कहते जिसे हम सब बी.टेक.
और कुछ हो न हो भय्या, सुनने में तो एकदम नंबर एक

हाई पैकेज सेलेरी का वादा, प्रैक्टिकल कम थ्योरी हैं ज्यादा
रियलिटी से कोसों दूर, असल में फिल्मी स्टोरी हैं ज्यादा

प्रवेश लेते ही जिसमें स्वयं, होने लगता है सत्य का ज्ञान
प्रति वर्ष प्रति सेमेस्टर, रहने लगता हैं बैकलॉग का ध्यान

यारों के वो यार साड्डे दिलदार सब यहीं मिलते हैं
लाइफ के तजुर्बे रफ़ एन टफ़ गुलज़ार सब यहीं मिलते हैं

हर फील्ड में इंजीनियर्स आगे, फिर भी जग को अनाड़ी लागे
लक्ष्य के पीछे भागे यूँ, जैसे कोई ओलिंपिक खिलाड़ी भागे

क्वालिटी शिक्षा नहीं होने से, लोग आजकल हँसते हैं इस पर
बी.ए. से ईजी बताकर, मनचाही फब्तियां कसते हैं इस पर

जिसका जिसमें इंट्रेस्ट हो, उसे वहीं बनने दिया जाए
जिसको जो पसंद हो, काम उसे वहीं करने दिया जाए

आओ हम सब अभियंतागण, मिलकर एक प्रयास करे
फील्ड में अपने मास्टरी के लिए, बेइंतहा अभ्यास करे

आफ्टर ऑल बदली जिसने, यूथ के मन की गियरिंग
लाइफ का लोचा ऑफकोर्स, देट इज इंजीनियरिंग

@RockShayar

“किसी दिन”

तुम्हारे सवालों के जवाब दूंगा किसी दिन
अपने दिल की किताब लिखूंगा किसी दिन

खुद से इतना दूर हूँ, या के खुद मज़बूर हूँ
खुद को भूलकर खुद को सोचूंगा किसी दिन

दबी हुई है बात जो, दिल के किसी कोने में
दिल किया तो दिल की बात कहूंगा किसी दिन

ठहरते क्यों नहीं हो, हमेशा ही भागते रहते हो
वक़्त मिला तो वक़्त से यह पूछूंगा किसी दिन

अपनो ने जब ठुकराया, मन में तभी ये ख़याल आया
अपना हर एक सपना पूरा करूंगा किसी दिन

एहसास के इन पन्नों पर, रूह ने लिखी है जो
ज़िन्दगी की वो ज़िन्दा ग़ज़ल पढ़ूंगा किसी दिन

छोड़ आया जिसे, एक अर्से पहले कहीं इरफ़ान
इरादा तो है ! अपने उस घर लौटूंगा किसी दिन ।

@RockShayar

“सुना है कि रात को कभी नींद नहीं आती”

सुना है कि रात को कभी नींद नहीं आती
बस यहीं जानने के लिए कभी सोया नहीं

अंदर ही अंदर, बहुत कुछ है जो बदल जाता है
ज़िन्दगी का सूरज भी बिना बताए ढ़ल जाता है

सुकून की तलाश में, ये पलकें खुली रहती हैं
कभी सो जाती है, तो कभी झपकती रहती हैं

चाँद की तरह हर रात, कोई ना कोई तो जलता है
तब कहीं जाकर इस, दिल का दरवाजा खुलता है

करवटें बदल बदल कर, यूं हर शब गुज़र जाती है
गुज़रे हुए लम्हों में, बातें वो बेनज़ीर नज़र आती है

ख़्वाब में सदा जो दिखता है, सच कहाँ वो होता है
एक तसव्वुर की तलाश में, दिल इतना क्यूं रोता है

अंधेरे के आगोश में ही तो, उजाला ये तमाम रहता है
चुपचाप सहता है सितम, किसी से नहीं कुछ कहता है

सुना है कि दर्द में भी मुस्कुराना पड़ता है
बस यहीं जानने के लिए कभी रोया नहीं ।

“न वो बेनज़ीर सी बातें हैं”

न वो बेनज़ीर सी बातें हैं
न वो मखमली मुलाकातें हैं
अब तो बस साथ मेरे
तन्हा सी कुछ यादें हैं।

वो तसव्वुर पर बंदिशें लगाना
बहुत याद आता है अब
तन्हाई में अक्सर साथ तुम्हारा
दिल को बहुत भाता है अब।

बरसों बीत गए हैं लेकिन
आज तक मैं सो नहीं पाया
कोशिश करके देख लिया
किसी का भी हो नहीं पाया।

पता नहीं तुमने मुझ पर
ऐसा क्या जादू किया था
के इश्क़ के शर्बत को मैंने
तुम्हारी आँखों से पिया था।

न वो गुज़ारिश भूला ये दिल
न वो बारिश, न वो साहिल
सफ़र-ए-ज़िन्दगी में मेरा
तू ही पता, तू ही मन्ज़िल।

न वो बेनज़ीर सी बातें हैं
न वो रेशम सी रातें हैं
अब तो बस साथ मेरे
तन्हा सी कुछ यादें हैं।।

@RockShayar