“Boyfriend”

छोरियां जिन छोरों से, दिल को अपने बहलाती है
एक्चुअल में वहीं प्रजाति तो, बॉयफ्रेंड कहलाती है

लड़की के सामने खुद को हमेशा, ये शाहरुख ख़ान समझते हैं
पिक्चर दिखाते हैं, शाॅपिंग कराते हैं, और गुंडों से भी उलझते हैं

यारों से लेकर उधार, पूरी करे जानू की हर फरमाइश
उसी के लिए जीते हैं अब, भुला चुके अपनी हर ख़्वाहिश

खुद का तो पता नहीं है, पर फंटी का मोबाइल रिचार्ज करवाएंगे
सिक्स पैक एब्स बनाकर, फिर टैटू उसके नाम का ही गुदवाएंगे

वाहियात बातें सुनकर भी, ये लाॅजिक नहीं लगाते कभी
बेबी की हाँ में हाँ मिलाते हैं बस, बहाने नहीं बनाते कभी

सबसे तुम क्यूट बोलकर ये झूठ, चुटकी में कर लेती है काबू
ऐसी गर्लफ्रेंड के लिए सब कुर्बान, कहती है वो शोना बाबू

दोस्त जो जिगरी थे पहले, वहीं अब जंगली लगते हैं
हर बात पर आजकल वो, इतनी क्यों उंगली करते हैं

ब्रेकअप के बाद कुछ रोज तो, अश्क़ों का दरिया बहता है
और थोड़े दिनों के बाद, खुद को वह माचोमैन कहता है

बुराई नहीं ये किसी की, ना कोई शुभकामनाएं है
ये तो बस एक युवक के, दिल में दबी भावनाएं है

गर्ल एंड फ्रेंड, बोथ आर लाइफ के दो महत्वपूर्ण पार्ट
जब दोनों सही मिल जाए तो, जीने लगता है यह हार्ट।

@RockShayar

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“Jai Government Job”

हाल तो कुछ इस कदर, बदतर हो चला है यूथ का
टेस्ट बड़ा ही कड़वा है, इस बेरोज़गारी के घूँट का

गर्वनमेंट जाॅब की खातिर, क्या क्या नहीं करते हैं
सिर पर जितने बाल नहीं हैं, उतने ये फाॅर्म भरते हैं

डिपार्टमेंट कोई भी हो चाहे, वेकेंसी कम ही निकलती हैं
रिजर्वेशन तो तय है, ये पॉलिसी कभी नहीं बदलती हैं

फाॅर्म भरना भी तो आजकल, एक युद्ध के समान है
मोटी फीस व ऑनलाइन प्रोसेस में अटकी जान है

मार्केट में हर तरह की, बुक्स व गाइड उपलब्ध हैं
देखकर कोचिंग का क्राउड, कैंडिडेट भी स्तब्ध हैं

पहले तो रिक्रूटमेंट एग्जाम, टाइम पर होता नहीं है
गलती से हो जाए तो, रिजल्ट उसका आता नहीं है

नकल करने वाले तो, मुन्नाभाई के भी बाप होते हैं
पेपर खुद आउट करवा के, घड़ियाली आंसू रोते हैं

कुछ अभ्यर्थी हाईकोर्ट में, याचिका दायर करते हैं
अटकी रहे भर्ती, इसलिए तो महंगा लाॅयर करते हैं

इंटरव्यू के बारे में तो आजकल, सबको ही मालूम हैं
जान पहचान कैश और, करप्शन की जहाँ पर धूम है

पैरेंट्स पड़ोसी रिश्तेदार, चाहते हैं सब स्योर सिलेक्शन
ज्योंही रिजल्ट आयेगा, रखेंगे तुरंत शादी का ऑप्शन

इतनी आसानी से, नहीं मिलती है सरकारी नौकरी
जिस दिन मिल गई तो, लगेगा जैसे लगी है लाॅटरी

एक बार मेहनत कर के, झाड़ेंगे पूरी ज़िन्दगी रौब
यूथ की तो एक ही होप, बोलो जय गवर्नमेंट जाॅब

@RockShayar

“जलजलों के डर से घर बनाना छोड़ दिया”

जलजलों के डर से घर बनाना छोड़ दिया
दर्द से इतना टूटे के मुस्कुराना छोड़ दिया

ज़िन्दगी ने जब से खेली है बाजी जान की
ज़िन्दगी से तब से शर्त लगाना छोड़ दिया

वादों की दुनिया के तजुर्बे जब देखे हमने
वादा करके फिर वादा निभाना छोड़ दिया

दिल के इशारों पर नाचते रहे यूँही सदा हम
दिल ने जब कहा तो दिल लगाना छोड़ दिया

तरसते रहे यूं तो प्यार के लिए ताउम्र यहां
प्यार ना मिला तो प्यार जताना छोड़ दिया

खिलखिलाते भी थे, कभी मुस्कुराते भी थे
जमाने हो चले हमने वो जमाना छोड़ दिया

एक नादानी की सज़ा बहुत ही शदीद मिली
खुद से यूं रूठे के खुद से नज़र मिलाना छोड़ दिया।

@RockShayar

“मैं लौटकर फिर आऊंगा”

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कहीं नहीं गया हूँ मैं, वादा वो अपना निभाऊंगा
याद रखना ऐ ज़िन्दगी, मैं लौटकर फिर आऊंगा
साथ गुज़ारे जो पल तेरे, उनको ना भूल पाऊंगा
याद रखना ऐ ज़िन्दगी, मैं लौटकर फिर आऊंगा।

कुछ दिनों की बात है, ये वक्त भी गुज़र जाएगा
बाद इसके तुम देखना, अपना वक्त भी आएगा
नूर की पहली बारिश में, संग तुम्हारे भीग जाऊंगा
दिल में क्या है राज़ मेरे, सिर्फ तुमको बतलाऊंगा

कहीं नहीं गया हूँ मैं…

हर दौर का यहां, अपना ही एक अलग मज़ा है
कभी नेअमत है ज़िन्दगी तो कभी एक सज़ा है
दिल के पन्ने पलटकर देखो तो पता चलेगा कि
खुशियां और ग़म दोनो ही उस रब की रज़ा है
गोदी में तेरी रखकर सर, ख़्वाबों में खो जाऊंगा
सीने में जो दबे हैं वो एहसास मैं सब जताऊंगा

कहीं नहीं गया हूँ मैं…

हर इम्तिहान देना है तुझे, नतीजा चाहे जो भी हो
फ़क़त चलते रहना है तुझे, रास्ता चाहे जो भी हो
मन्ज़िल को तो मिलना है, एक ना एक दिन यहां
रुकना नहीं है कभी तुझे, फिर पता चाहे जो भी हो
यूँही नहीं कहता हूँ मैं, अलहदा कुछ कर जाऊंगा
देख लेना हाँ एक दिन मैं, खुद में खुद को पाऊंगा

कहीं नहीं गया हूँ मैं, वादा वो अपना निभाऊंगा
याद रखना ऐ ज़िन्दगी, मैं लौटकर फिर आऊंगा
साथ गुज़ारे जो पल तेरे, उनको ना भूल पाऊंगा
याद रखना ऐ ज़िन्दगी, मैं लौटकर फिर आऊंगा
राह तकना ऐ ज़िन्दगी, मैं लौटकर फिर आऊंगा।

@RockShayar

“RockStar (Bollywood Movie 2011)”

11.11.11
Five years of RockStar Movie…
Thanks Imtiaz Sir for making RockStar…
Sadda emotional attachment hai…

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ऐंवई कोई फिल्म नहीं, हर रूह की पुकार है वो
ऑलटाइम सबकी फेवरेट मूवी, राॅकस्टार है वो

डायरेक्टर इम्तियाज़ अली का एंटीक ये कमाल है
रिलीज हुए जिसको आज, हो गए पूरे पाँच साल है

राॅकिंग रनबीर कपूर ने, रोल में फिर ऐसी जान डाली
के कंट्री के हर यूथ ने, साड्डा हक़ की तान लगा ली

हीर के किरदार में, नरगिस भी कुछ कम नहीं थी
जॉर्डन से मिलने के बाद ही, ज़िन्दगी उसने जी थी

खटाना भाई का भी यहां, किरदार बहुत अहम था
जनार्दन के साथ हमेशा, एक वहीं तो हर कदम था
लिरिसिस्ट इरशाद कामिल ने, काग़ज़ के हवाले जुनून किया
लिखकर वो रूहानी गीत, सुनने वालों को सुकून दिया

म्यूजिक के बिना यहां मगर, हर अल्फ़ाज़ अधूरा है
रहमान साहब की ताल पर तो, मौसिकी खुद जवां है

मैजिकल मोहित चौहान ने, जब अपनी आवाज़ का जादू चलाया
तुम हो..पास मेरे साथ मेरे, गुनगुनाते हुए हर लम्हें को पाया

उस्ताद साहब ने हीरो को, जब शिद्दत से गाते हुए देखा
अपने मैनेजर ढ़ींगरा को, उस पर दांव लगाने को बोला

यंग सी एक रिपोर्टर ने, लास्ट में कहानी उसकी सबको सुनाई
माॅरल ऑफ द स्टोरी है कि, यहीं राॅकस्टार मूवी कहलाई।

-RockShayar Irfan Ali Khan

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“दर्द अब मुझको उतना नहीं तड़पाता है”

दर्द से रिश्ता कुछ अपना सा हो चला है
दर्द अब मुझको उतना नहीं तड़पाता है

परवाह करता हूँ मैं इसकी और यह मेरी
दोस्ती है आख़िर इतने दिनों की गहरी

एक दूसरे का साथ भला लगने लगा है
दिल में वो एहसास फिर जगने लगा है

कलम की स्याही रिसते लहू सी है
दर्द की वो तहरीर उबलते खूं सी है

ज़ख्मों की कहानी, वैसे तो है नादानी
सीने में दबी है जो, किसी ने ना जानी

यादों की वो परछाई संग मेरे अब चलती नहीं
दिल को भी तो तन्हाई अब अपनी खलती नहीं

कितनी शिद्दत से ज़िन्दगी ने निभाया है साथ सदा
तब कहीं जाकर बन सका है यह किरदार अलहदा

ग़मों से रिश्ता कुछ गहरा सा हो चला है
ग़म अब मुझ को उतना नहीं सताते हैं।

“या अल्लाह रहम फरमा दे”

सख़्त मुश्किल में हूँ, या अल्लाह रहम फरमा दे
अपने इस बंदे पर, मौला अपना क़रम फरमा दे

ज़िन्दगी का कहीं भी कोई छोर नज़र नहीं आता है
हर तरफ अंधेरा है फैला उजाला क्यों नहीं भाता है

कई बार कत्ल होकर भी ना जाने क्यों ज़िन्दा हूँ
बेशुमार गुनाहों के लिए इलाही बेहद शर्मिन्दा हूँ

अगर आप ही नहीं सुनोगे तो कौन सुनेगा यहां
हर तरह से बर्बाद हो चुका है मेरे दिल का जहां

किस्मत की भी किस्मत वो, सोई हुई है कब से
कायनात भी ये सारी, रूठी हुई है मानो मुझ से

ऐ मालिकुल मुल्क, सुन लो ना मेरी भी पुकार
तूफानों में फंसा हूँ मैं, कश्ती लगा दो मेरी पार

दुआ है मेरी, इस ज़िन्दगी को ज़िन्दगी अता कीजिए
कौन हूँ मैं ! ऐ रब्बे कायनात, बस इतना बता दीजिए

शदीद ग़मों में डूबा हूँ, या अल्लाह रहम फरमा दे
अपने इस बंदे पर, मौला अपना क़रम फरमा दे।

“तब्दील होती टेक्नोलॉजी”

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

वो दौर ही कुछ और था
जब मशीने थी कम और जज़्बात थे ज्यादा

ग्रामोफोन टेप रिकॉर्डर वीसीआर टीवी व रेडियो
मन के भी दो मोड होते थे, ऑडियो एंड विडियो

धीमे धीमे चलता रहता था, वो ग्रामोफोन पर रिकॉर्ड
सदियों तक कहलाया जो, संगीत का स्पाइनल काॅर्ड

ये आकाशवाणी है, घर घर में जो रेडियो बजता था
विविध भारती के प्रोगाम से ही तो पूरा दिन गुज़रता था

एक कैसेट में हद से ज्यादा, आठ नौ गाने आते थे
कई दफा रिवाइंड करके, जिनको हम गुनगुनाते थे

सिनेमाहाॅल कहाँ थे इतने, सो वीसीआर ज़िंदाबाद
तीन घंटे की पूरी पिक्चर, झट से हो जाती थी याद

बड़े से घर की बड़ी शान, होता था एक बड़ा टीवी
बुद्दू बक्से से चिपके रहते, साहब बच्चे और बीवी

फिर आया जो वाॅकमैन, पाॅकिट जितने साइज का
नया इक दौर शुरु हुआ, म्यूजिक के सनराइज का

कैसेट्स भी फिर धीरे धीरे, सीडी में तब्दील हुई
वक़्त के हाथों से ही ये, टेक्नोलॉजी की डील हुई

याद रहती थी डाइरेक्टरी, झट से नंबर लगा लेते थे
टेलिफोन की ट्रिंग ट्रिंग पर, कान अपना लगा देते थे

अब नया दौर आ गया है, मन को बाज़ार भा गया है
हर शख़्स के दिमाग पर, डिस्पोजल खुमार छा गया है

मोबाइल ने ही अब तो, आधी से ज्यादा चीजों की छुट्टी कर दी
इलेक्ट्रॉनिक्स के पुराने गढ़ पर, स्मार्टनेस की व्हाइट पुट्टी कर दी

एक छोटी सी पेन ड्राइव में, अब बहुत कुछ समा जाता है
जीबी टीबी वाली हार्ड डिस्क में, बहुत कुछ आ जाता है

लाखों गाने आज, इंटरनेट और mp3 प्लेयर में मौजूद हैं
मगर उस दौर के टेप रिकॉर्डर का, अपना अलग ही एक वज़ूद है

डीवीडी ब्लूरे टोरेंट पर, आज हर फिल्म मिल जाती है
पर वो फिल्मवाली फीलिंग तो, टाॅकीज में ही आती है

वो दौर ही कुछ और था
जब मशीने थी कम और जज़्बात थे ज्यादा

अब इस नये दौर में गैजेट्स तो बहुत सारे हैं
मगर जज़्बात वो सब यूज एंड थ्रो हो चुके हैं ।

@RockShayar