“माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे”

 

बस इतना ही कहना है मुझे
माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे
नहीं चाहिए माल-ओ-दौलत
ऊँचा नाम और झूठी शोहरत
किसी से मेरी यारी नहीं
मुझको तो है तुझसे मोहब्बत
बिन कहे, यहीं कहना है मुझे
माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे ।

तेरा आँचल ही मेरा साया है
जो है, सब तेरा सरमाया है
तेरी ही दुआओं का असर है ये
जो आज मैंने खुद को पाया है
हर दफ़ा, यहीं कहना है मुझे
माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे ।

भूल से भी तेरा दिल ना दुखाऊ
तेरे लिए, सारी दुनिया भुलाऊ
तोड़कर सब ख़्वाहिशों के बंधन
पुकारे जब भी दौड़ा चला आऊ
रो रोकर, यहीं कहना है मुझे
माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे
बस इतना ही कहना है मुझे
माँ, तेरे ही पास रहना है मुझे ।।

#RockShayar

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“Dear PaPa”

न कोई गन्दी आदत हैं मुझ में, न कोई बुरी लत
हर बार की तरह आपको, लिख रहा हूँ यह ख़त

उम्र में हम से बड़े है, बेशक तज़ुर्बे आपको बड़े हैं
परिवार की खातिर हमेशा, तान के सीना खड़े है

फ़ासले हैं दरमियाँ कम्युनिकेशन गैप की वजह से
रास्ते अलग सोच जुदा, जेनरेशन गैप की वजह से

अपने दिल की सुनना चाहता हूँ, तो क्या गलत है
गर ख़्वाब नये बुनना चाहता हूँ, तो क्या गलत है

गलती करने पर तो आप मुझे, फौरन टोक देते हो
कुछ अच्छा करने पर मगर, शाबाशी क्यों नहीं देते हो

आप ही नहीं समझोगे तो और कौन समझेगा मुझे
गर आप ही नहीं जानोगे तो और कौन जानेगा मुझे

ज़िंदगी में आपको कोई टेंशन नहीं देना चाहता हूँ
इसीलिए तो हर बात यूँ खुलकर कहना चाहता हूँ

न कोई नाज़ायज हठ है मेरी, न कोई बुरी संगत
हर बार की तरह आपको, लिख रहा हूँ यह ख़त ।

– Your Son

@राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान

DreamGirl…

गालों पर जब जब तुम्हारे डिम्पल पड़ते हैं
दिल में तो बेशक हमारे कई अरमां मचलते हैं

तुम्हारे आगोश में समाने को जी चाहता है
चाँद के पार तुम्हें ले जाने को जी चाहता है

इन कातिल अदाओं से हमें क़त्ल न किया करो
इतनी खूबसूरती से हमारी नक्ल न किया करो

तुम्हारे लरज़ते हुए लबों को जब कभी चूमता हूँ
सुरूर में यूँ होकर चूर, कई दिनों तक झूमता हूँ

घने गेसुओं के साये में, खुद को न छुपाओ जानाँ
इतनी दूर क्यूँ बैठी हो हमसे, ज़रा पास तो आना

सीने से मेरे लग जाओ, इन बाहों में सिमट जाओ
खुद को यूँ भुलाकर, आओ मुझ से लिपट जाओ

ख़्वाब में तो हर रोज तुम, मिलने आती हो मुझसे
फिर रूबरू होने पर, नज़रें क्यूँ चुराती हो मुझसे

पलकों पर जब जब तुम्हारे हया झलकती है
दिल की तो बेशक हमारी धड़कन मचलती है ।।

#RockShayar

Late Haji Suleman Khan, Late Hajjan Saabra Khan…Memories never die…

fufa ji memory.jpg

Ye aapne achha nahi kiya fufaji
Yoon bina bataye hi chale gaye
Thoda intezar to kiya hota
Fufi ji ne bhi aise hi kiya tha
Ek roj bina bataye hi
Woh bhi es duniya se rookhsat ho gayi.

Thik se kabhi aapko bata bhi na saka
Ke mujhe aap dono ki
kitni yaad aati hai
Jab bhi khud ko
tanha aur akela pata hoon
Aap dono ki
woh mohabbat yaad aa jati hai
Jiske aage mujhe har mohabbat fiqi lagti hai.

Yaad hai naa, jab bhi aap log lodiyana aate the
Ghar mein ek alag sa hi
mahaul chhaa jata
Ham sab bachhe
der raat tak jagte rahte
Aapke aane ka intezar karte rahte
Fir jab thaq kar so jate
Aur subah subah aankh khulti
To sabko apne paas hi paate.

Tofan Dadi maan
us waqt kitni chiddh jati thi
Jab aap apne magge ka aadha doodh
khud pite aur aadha fufi ji ko
pilate the, Apne hathon se.

Apne wallet mein aapne fufi ji ki kayi tasweere sahejkar rakhi thi
Jis tarah aapne poore pariwar ko sahej kar rakha
Wallah…! Kya mohabbat thi woh
Aaj ke jamane mein
Charag lekar talasho to naa mile.

Aap dono ne hi
mera naam IRFAN rakha
Jab main char mahine ka aapke paas aaya tha
Ammi-Abbu ke sath.
Sab mujhe pyar se IFFY bulate
Aur fufi ji SHERU kahkar bulati thi.

Pichhli dafaa february 2014 mein
Jab aap aaye the
Tab main Zindagi ki ek uljhan mein
Uljha hua tha
Sab mujhe haalaat se samjhauta karne ke liye kah rahe the
Bas ek aap hi the
Jinki palkon se
bina ruke ashq bah rahe the.

Fir aapne mujhe apne paas
bithakar samjhaya
Ke yeh Zindagi ek baar hi mili hai
Isiliye wahi karo
Jo tumhara dil kahta hai
Apne dil ke alawa kisi ki mat suno
Bas usi din se maine
Zindagi jina sikh liya.

Aapke kahe mutabiq
Apne liye ek khushhaal
Zindagi banane mein
Din raat laga hua hoon, main aajkal.

Aapki dua se Ammi-Abbu ka Haj bhi
InshaALLAH.. isi saal ho jayega

Shukriya aap dono ka
Mere Fufu ji-Fufi ji banne ke liye
Aur mujhe Zindagi bhar ke liye
Itni khoobsurat yaaden dene ke liye.

ALLAH aapko jannat bakhshe
Magfirat ataa farmaye…

Aameen….

– Aapka Iffy (Irfan)

ये आपने अच्छा नहीं किया फूफाजी
यूँ बिना बताए ही चले गए
थोड़ा इंतज़ार तो किया होता
फूफीजी ने भी ऐसे ही किया था
एक रोज बिना बताए ही
वो भी इस दुनिया से रूख़सत हो गयी ।

ठीक से कभी आपको बता भी न सका
कि मुझे आप दोनों की, कितनी याद आती है
जब भी खुद को तन्हा और अकेला पाता हूँ
आप दोनों की वो मोहब्बत याद आ जाती है
जिसके आगे मुझे हर मोहब्बत फ़ीकी लगती है ।

याद है ना, जब भी आप लोग लोडियाना आते थे
घर में एक अलग सा ही माहौल छा जाता
हम सब बच्चे देर रात तक जागते रहते
आपके आने का इंतज़ार करते रहते
फिर जब थक कर सो जाते
और सुबह सुबह आँख खुलती
तो सबको अपने पास ही पाते ।

तोफन दादी माँ, उस वक्त कितनी चिढ़ जाती थी
जब आप अपने मग्गे का आधा दूध खुद पीते
और आधा फूफीजी को पिलाते थे,
अपने हाथों से ।

अपने बटुए में आपने
फूफीजी की कई तस्वीरें सहेजकर रखी थी
जिस तरह आपने पूरे परिवार को सहेज कर रखा
वल्लाह…! क्या मोहब्बत थी वो
आज के जमाने में
चराग लेकर ढूँढ़ो तो ना मिले ।

आप दोनों ने ही मेरा नाम “इरफ़ान” रखा
जब मैं चार महीने का आपके पास आया था
अम्मी-अब्बू के साथ ।
सब मुझे प्यार से इफ़्फी बुलाते
और फूफीजी शेरू कहकर बुलाती थी ।

पिछली दफ़ा फरवरी 2014 में
जब आप आए थे
तब मैं ज़िन्दगी की एक उलझन में
उलझा हुआ था ।
सब मुझे हालात से
समझौता करने के लिए कह रहे थे
बस एक आप ही थे
जिनकी पलकों से बिना रूके अश्क़ बह रहे थे ।

फिर आपने मुझे अपने पास बिठाकर समझाया
कि ये ज़िन्दगी एक बार ही मिली है
इसलिए वहीं करो जो तुम्हारा दिल कहता है
अपने दिल के अलावा किसी की मत सुनो
बस उसी दिन से मैंने ज़िन्दगी जीना सीख लिया ।

आपके कहे मुताबिक
अपने लिए एक खुशहाल ज़िन्दगी बनाने में
दिन रात लगा हुआ हूँ, मैं आजकल ।

आपकी दुआ से अम्मी-अब्बू का हज भी
इंशाअल्लाह…इसी साल हो जाएगा ।

शुक्रिया आप दोनों का
मेरे फूफाजी-फूफीजी बनने के लिए
और मुझे ज़िन्दगी भर के लिए
इतनी खूबसूरत यादें देने के लिए ।

अल्लाह आपको जन्नत बख़्शे,
मग़फिरत अता फरमाएं

आमीन….

– आपका इफ़्फी (Iffy)

“हो सभी की जीत जिसमें ऐसे खेल की तलाश में हूँ”

हो सभी की जीत जिसमें ऐसे खेल की तलाश में हूँ
सौ दफ़ा गिरा हूँ फिर भी, उम्मीदों के आकाश में हूँ

मनमुटाव और नाराज़गी, ज्यादा दिन अच्छी नहीं
इस ज़िन्दगी में आवारगी, ज्यादा दिन अच्छी नहीं

जीने का हक़ सबको हैं, क्यों छीनते हो तुम ये हक़
चंद पलों की है ज़िन्दगी, क्यों करते हो इस पे शक

मन की बात मन में रखने से मन को ही नुकसान है
खुलकर बात नहीं करने से, खुद मन ही परेशान है

ये ज़रूरी तो नहीं, कि सबके ख्यालात एक से हो
ये ज़रूरी तो नहीं, कि सबके हालात एक से हो

आपस में मिल बैठकर, मुश्किलों का हल निकालो
मदद को न पुकारो, खुद को यहाँ खुद ही संभालो

कोई कुछ भी कहता रहे, परवाह नहीं है अब यहाँ
बेशक खुदगर्ज कहता रहे, हमराह है मेरा रब सदा

हमदम की नहीं फ़क़त, खुद अपनी ही तलाश में हूँ
सौ दफ़ा गिरा हूँ फिर भी, उम्मीदों के आकाश में हूँ

“सूरज की तरह बनना है तो”

सूरज की तरह बनना है तो
पहले खुद को इतना जलाओ
कि तुम उस आग को
पालने के क़ाबिल हो जाओ
फिर रौशनी खुद बखुद
तुम्हारे मन की दीवारों को तोड़कर
बाहर निकल आएगी ।

रौशनी बिखेरने वाला सूरज
अपने अंदर कई अंधेरे लिए जलता रहता है
अगर वो एक पल को भी मायूस हो जाए
तो इस दुनिया में अंधेरा छा जाएगा ।

ठीक उसी तरह तुम्हें भी
अगर सूरज बनना है तो
पहले खुद को इतना तपाओ
कि तुम उस तपिश को
पालने के क़ाबिल हो जाओ
फिर रौशनी खुद बखुद
तुम्हारे डर की जंजीरों को तोड़कर
बाहर निकल आएगी ।।

RockShayar

EICwaley…Rocking Bandey…

यूँ तो स्टूडेंट्स कई मिले हैं, पर इनके जैसा कोई नहीं
पासआउट होते ही चले गए, कोई कहीं तो कोई कहीं

इंजीनियरिंग में लिया प्रवेश, काॅलेज था वो जीसीटी
ईआईसी ब्रांच मिली, दुनियादारी उसी से सीखी

फिफ्थ सेमेस्टर में मुझे, पढ़ाने का अवसर मिला
लाइफ की फिलोसोफी, जानने का अवसर मिला

पूछा करते मुझ से हमेशा, यह कैसी ब्रांच है सर
इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंट्रोल, नाम से ही लगता है डर

लैब में जाने से, पता नहीं क्यूँ इन्हें बहुत ज़ोर आता
लास्ट बैंच वाला ग्रुप, क्लास में हरदम शोर मचाता

कुल्लू मनाली चंडीगढ़, काॅलेज ट्रिप में गए वो जब
बाद उसके एक अलग ही बाॅन्ड में बंध गए वो सब

मिडटर्म हो या प्रेक्टिकल, ऐन वक्त पर जागते सब
फाइल कम्प्लीट करने को, इधर उधर भागते सब

मैनेजमेंट से ऑलवेज ख़फ़ा, अनबन हुई सौ दफ़ा
फैकल्टी का रेस्पेक्ट करते, निभाते थे हरदम वफ़ा

हो चाहे अटेंडेंस का लफड़ा, या डिबार का चक्कर
अपने हर मैटर पर वो, एचओडी से लेते थे टक्कर

शिकवा यहीं रहता, जीआईटी वाले कितने अच्छे हैं
इस बार तो सर जी आपने, नंबर बहुत कम भेजे हैं

मई 2015 में जब अलविदा की घड़ी नज़दीक आई
गुज़रे लम्हों को याद करके आँख सबकी भर आई

उस दौर की वो तमाम बातें, आज बहुत हँसाती हैं
तन्हाई में यूँ कभी कभी, रह रहकर याद आती हैं

यूँ तो स्टूडेंट्स कई देखे हैं, पर उनके जैसा कोई नहीं
ज़िन्दगी में खूब आगे बढ़े, करता हूँ रब से दुआ यहीं

– Irfan Sir

“Late Tofan DaDi Maan” 12th April 2005…

बहुत याद आ रही है दादी, आज आपकी
ग्यारह साल गुज़र गए हैं
आपको गुज़रे हुए ।

अल्लाह आपको जन्नत नसीब करे ।

याद है न, आपको कितनी फिक्र होती थी मेरी
जब मुझे पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ा था ।
छुट्टियों में जब भी घर आता था
तो सबसे पहले आकर
आपको सलाम किया करता था ।
आप प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरती
माथे को चूमती, और ढ़ेरों दुआएं देती ।

दादी आप क्या गयी
घर का नक्शा ही बदल गया ।
पूरा परिवार, अलग अलग टुकड़ों में बँट गया है ।
सब अपनी-अपनी दुनिया में मस्त हैं ।
हक़ीक़त में कोई किसी को जानता तक नहीं
बस बार-त्यौहार, मौत-मय्यत, शादी ब्याह पर
इकठ्ठा होकर
सब एक होने का दिखावा करते हैं।

वो तो मेरे साथ जब एक हादसा हुआ
तब कहीं जाकर, मुझे यह अहसास हुआ
कि मैं एक ऐसे कुनबे का छोटा हिस्सा हूँ
जहाँ सब अजनबी बनकर आराम से रह रहे हैं ।

किसी को किसी की असल खुशी से
कोई मतलब नहीं
सब बस नाम, रूतबा, और ओहदा देखकर ही
बर्ताव करते हैं ।
झूठी सहानुभूति तो इस तरह जताते है
कि जैसे उनसे बड़ा शुभचिंतक तो
और कोई है ही नहीं
मेरे लिए इस दुनिया में ।

दिल बहुत रोता है दादी, ये सब देखकर
आज अगर तुम होती
तो मुझे गले से लगाकर, जी भरकर रोने देती
और इन सबको खूब डाँट लगाती ।

अब मैं काफी बड़ा और समझदार हो गया हूँ
इसलिए, आज आपसे एक वादा करता हूँ दादी

“इस बिखरते हुए परिवार को
फिर से एक करने की
पूरी शिद्दत से कोशिश करूँगा”

बस मुझे आपकी दुआओं की ज़रूरत हैं ।

बहुत याद आ रही है दादी, आज आपकी
ग्यारह साल गुज़र गए हैं
आपको गुज़रे हुए ।
यहाँ आपकी कमी बहुत खलती है ।

अल्लाह आपको जन्नत नसीब करे
मग़फिरत अता फरमाएं

आमीन…

– आपका इफ़्फी (Iffy)

“आज तुम्हारी याद आ ही गई मुझे”

कई दिनों के बाद आखिरकार
आज तुम्हारी याद आ ही गई मुझे
जब मैंने वो लाल रंग की
छोटी सी डायरी खोली
जो गिफ्ट की थी तुमने मुझे
मेरे पिछले बर्थ डे पर

इसमें केवल ग़ज़ल ही लिखता हूँ
क्योंकि तुम भी तो एक ग़ज़ल ही थी
बलखाती हुई, लहराती हुई, शर्माती हुई

जब तुमने मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया
उस वक्त मैं गुज़रे हुए दौर के
एक दौर से गुज़र रहा था
समझ नहीं पाया कि तुम्हें क्या जवाब दू

इसीलिए मैंने तुम्हें बस यूँही कह दिया
कि मैं तुम्हारे लिए वैसा महसूस नहीं करता हूँ
जैसे कि तुम मेरे लिए महसूस करती हो

ये ज़रूरी भी था मेरे लिए
क्योंकि ज़ख्मी दिल अक्सर सहमा सा रहता है

जो भी वक्त मैंने तुम्हारे साथ गुज़ारा
आज वो एक खूबसूरत याद बन चुका है

अच्छा लगता है सोचकर कि
मैंने तुम्हें सब सच सच बता दिया

क्योंकि दिल टूटने की आवाज़ से
मैं अच्छी तरह वाकिफ़ रहा हूँ

तुम जहाँ भी रहो
खुश रहो
मुस्कुराती रहो
एक ग़ज़ल की तरह
बेशक ज़ुबां से निकली वह नेक दुआ तुम थी
आसमान से उतरी फरिश्तों की सना तुम थी

कई दिनों के बाद आखिरकार
आज तुम्हारी याद आ ही गई मुझे
जब मैंने उस लाल रंग की
छोटी सी डायरी का आखिरी पन्ना खोला
जिस पर कुछ लिखा था तुमने अपना नाम
मेरे पिछले बर्थ डे पर ।।

“Happy Birthday to you PaPa”

हैप्पी बर्थडे टू यू पापा
तिरेसठ साल हो गए हैं
न आपने कभी बताया
न हमने कभी मनाया
पता नहीं हमारे दरमियान
इतने फ़ासले क्यूं हैं ?
जज़्बात दोनों तरफ हैं
मगर पहल कोई नहीं करना चाहता ।

मैं भी बिल्कुल आपकी तरह ही हूँ
मन ही मन सब छुपाकर रखता हूँ
कुछ भी ज़ाहिर नहीं होने देता हूँ ।

पता नहीं पापा हम ऐसे क्यूं हैं ?
सच कहूँ तो हमारे घर में सब ही ऐसे हैं
दिलों में मोहब्बत छुपाए रखते हैं
और बाहर बस दिखावा दुनियादारी
इधर उधर की बातें करते रहते हैं
कोई एक दूसरे से ये नहीं कहता
कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ।

वक़्त आ गया है पापा
हमें अब बदलना चाहिए
नहीं तो हमारा परिवार
यूंही बिखर जाएगा
धीरे धीरे टुकड़ों में ।

कहने को तो सब पास रहते हैं
पर असल में बहुत दूर हो चुके हैं
हालातों के इस जंगल में ।

पापा ! इस बर्थडे पर
मैं आपसे यही विश चाहता हूँ
कि अब से हम अपने जज़्बातों को छुपायेंगे नहीं
बल्कि हर मौज़ूअ पर खुलकर बात करेंगे ।
हम पाँचों भाई बहन आप और अम्मी
कुल मिलाकर हम सातों जनो के बीच में
अब से कुछ भी अजनबी नहीं रहना चाहिए ।

मैंने जो भी महसूस किया है
लिख दिया आज सब यहां
अगेन हैप्पी बर्थडे टू यू पापा
आप जियो हज़ारों साल
साल में दिन हो बेशुमार ।।

-आपका इफ़्फी