“दिल दे घार विच, बता इन्ना अंधेरा क्यूं है”

दिल दे घार विच, बता इन्ना अंधेरा क्यूं है
दर्द देवे जे तेनू, उण यादां दा बसेरा क्यूं है

सोचण दी बात है, कदे ते बंदया ग़ौर कर
एहसास दी ज़मीनां पर, डर दा डेरा क्यूं है

सफ़र दे हमसफ़र, ज़िन्दड़ी नु ऐंवई छडकर
कल्ला लबदा फिरे, ऐसा साया तेरा क्यूं है

खुद ने पाण दी, ऐत्थे होड़ मची है हर तरफ
ग़म दी चादर ओढ़ के, सो रहा सवेरा क्यूं है

होर कुछ नहीं, बस इक गल्ला दसो मेनू वी
मुझ पर मुझसे ज्यादा, बता हक़ तेरा क्यूँ है

लिख चावे सौ हरफ़, देख अपणी वी तरफ
तू खुद अपणे दिल दे, सुकूं दा लुटेरा क्यूं है

ग़ज़ल लिखदा ही रवा, पता न कभी जे चला
सुफ़ेद रूहा दे नाल, ऐ परछाई दा घेरा क्यूं है ।।
‪#‎RockShayar‬

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“डॉ. शौकत अली देशवाली” My Brother…

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

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तरक्की पर जिनकी सदा, बजाएं ये दुनिया ताली
शख़्सियत जुदा है वो, डॉ. शौकत अली देशवाली

यूँ तो बङे भय्या है पर, दोस्त की तरह समझते है
ज़िंदगी के रोङ पर हमेशा, साये की तरह चलते है

अल्पभाषायी एसटीसी में, भूगोल के यह लेक्चरर
छात्रों को दिखाते हमेशा ज्ञान का प्रेक्टिकल मिरर

काम है जिनकी पहचान, अहले खानदान की यह शान
घर में श्रीमतीजी प्यार से इन्हें, कहती है सुनते हो शान

ज्योग्राफी के एक्सपर्ट शानदार टीचर माने जाते है
अपने फील्ड के यह मास्टर ब्लास्टर जाने जाते है

एमए बीएड एमफिल पीएचडी, हाइली क्वालिफाइड है
जीवन पथ पर सतत् अग्रसर, आशाओं के यह गाइड है

स्वीट से इस परिवार का, क्यूट सदस्य है छोटा शान
नाम है मिस्टर ज़ौहेर कामिल, मम्मी पापा की वो जान

पैरेंट्स को यह मन ही मन, बेपनाह प्यार करते है
पापा की तरह पर कभी नहीं, खुद इक़रार करते है

मेहनत से जिन्होंने यहाँ अपनी हर मंज़िल हैं पाली
पर्सनैलिटी यूनीक है वो डॉ.शौकत अली देशवाली

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RockShayar Irfan Ali Khan
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