Tribute to Kalpana Chawla…

Tribute to Kalpana Chawla…
(July 1st,1961-February 1st, 2003)

तुम कभी मर नहीं सकती हो !
तुम तो खुद एक कल्पना हो

अनंत अंतरिक्ष में तैर रही हो तब से
आँखें खोली जिस रोज तुमने जब से

पैदाइश हुई एक जुलाई 1961 को, करनाल में
मन में दृढ संकल्प लिए, पाना था जिसे हर हाल में

हिंद को ही नहीं, समूचे विश्व को है नाज़ तुम पर
खो गए उस कोलंबिया को, गर्व है आज तुम पर

सात थे वो एस्ट्रोनॉट, हो जैसे कोई सात सितारें
बन गए हमेशा के लिए, दुनिया की आँखों के तारें

टेक्सास के ऊपर आज भी एसटीएस मंडरा रहा है
तुम्हारी बहादुरी के किस्से वो, सबको सुना रहा है

विदेश जाकर भी, नहीं भूली तुम अपनी संस्कृति
नासा ने आज भी, सहेज रखी है तुम्हारी संस्मृति

तुम कभी मर नहीं सकती हो !
तुम तो स्वयं एक कल्पना हो

इस अंतरिक्ष में बह रही हो जब से
आँखें मूंदी जिस रोज तुमने तब से।।

-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान
rockshayar.wordpress.com
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‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

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“हिमनदी हो तुम”

हिमालय की हिमनदी हो तुम
थार का बंजर रेगिस्तान हूं मैं
संगम हुआ जब इक दिन तो
मुझ में यूं समा गई फिर तुम
हौले हौले यह महसूस हुआ
तुम्हारा सब कुछ मेरा हुआ ।

वो एहसास
इस तरह लगा
कि जैसे
अंधेरे में उजाला हो
अधरों पर हाला हो
ज़िंदगी का बयां हो
पलकों पर हया हो
बरसता सावन हो
लरज़ता यौवन हो
अधूरी प्यास हो
जीने की आस हो ।

आत्मा सी ठंडी सफ़ेद हो तुम
गुनाहों का सियाह देवता हूं मैं
संगम हुआ जब इक दिन तो
मुझ में यूं समा गई फिर तुम
के शरतचंद्र ने लिखी हो जैसे
प्रेम की वहीं पावन परिभाषा ।।

“वो भी मेरी तरह ही शहर में तन्हा होगा”

वो भी मेरी तरह ही शहर में तन्हा होगा,
बस्ती से गुज़रता हुआ कोई रस्ता होगा।

बङा मग़रूर है ये नौजवां, और जिद्दी भी
मेरे बारे में दुश्मन सदा यहीं कहता होगा।

गर दहशतगर्द है वो तो ! कंधों पर उसके,
खूं में तर बतर ख़्वाहिशों का बस्ता होगा।

हो शायर ! गर आपका महबूब कोई तो,
गुफ़्तगू करने का अलग ही लहज़ा होगा।

बचपन में देखा था जिसे, मिट्टी में खेलते हुए
वो बच्चा आज भी मेरे भीतर रहता होगा।

बिक गए जो इंसान, चंद रुपयों में इरफ़ान
सोचिए उनका ज़मीर कितना सस्ता होगा।।

“कट जाएँ मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या”

कट जाएँ मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या
उजङ जाएँ उम्मीदों के घर, तुमको इससे क्या ।

इज्ज़त देने की बातें, बकवास दोगली सौगातें
गिर जाएँ चाहे पैरों में सर, तुमको इससे क्या ।

इश्क़ है ये कहते हो, फिर भी तुम चुप रहते हो
कट जाएँ गर तन्हा सफ़र, तुमको इससे क्या ।

न देखों टकटकी बांधे, पलकों के परदों से तुम
लग जाएगी हम को नज़र, तुमको इससे क्या ।

हिज़्र में जल रही हैं रातें, मिलने क्यूं नहीं आते
हो जाएँ इस शब भी सहर, तुमको इससे क्या ।

कहते हो यूं तो खुद को पङोसी तुम इरफ़ान,
जल जाएँ गर ये मेरा घर, तुमको इससे क्या ।।

“लक्ष्य हो जो भी तेरा, हर हाल में पाना है तुझे”

3 years of writing…The RockShayar…
It’s all about passion…
Abhi likhna hai sara jahan falaq par tujhe…This for me…

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लक्ष्य हो जो भी तेरा, हर हाल में पाना है तुझे
बेसुरे हर गीत को, सुर ताल में गाना है तुझे

मुश्किलों से ना घबरा, सौ बार इनसे टकरा
औरों से नहीं यहां पर, है तुझे खुद से ख़तरा

नज़र हो तेरी मंज़िल पर, अपने बादशाह दिल पर
परवर दिगार के प्यारे बंदे, खुद को तू काबिल कर

उठकर अलसुबह तू मुस्कुरा, ज़िंदगी की तरह खिलखिला
जी उठे रोम रोम तेरा, कुछ इस तरह तू लहलहा

मन के भीतर आग है, आशाओं का अनंत पराग है
हर घङी जलता तुझ में, माँ की दुआओं का चराग है

एक बार और कोशिश, हर मर्ज़ की यही दवा है
निकल चल तू अकेला, राहें तेरी खुद हमनवा है

बंदिश ना कोई रोक सके, रंज़िश ना कोई टोक सके
अग्निपथ पर ऐसे चल, के साज़िश ना कोई रोक सके

लक्ष्य हो जो भी तेरा, हर हाल में पाना है तुझे
बेसुरे हर गीत को, लय ताल में गाना है तुझे ।।

‪#‎RockShayar‬ Irfan Ali Khan

“बस यही कामना है मेरी”

तुम तो शायद मुझे पहचानती भी नहीं होगी,
पर मैं तुम्हें आज भी हर पल याद करता हूं।

तुम्हें पता भी कैसे होगा मेरे बारे में ?
मैंने कभी इज़हार भी तो नहीं किया था
तुमसे अपनी मोहब्बत का।

तुम्हें तो ये भी नहीं पता होगा
कि मेरा नाम क्या है ?
मैं कौनसी ब्रांच में था ?

चलो तो फिर !
आज तुम्हें अपने बारे में बता ही देता हूं ।

याद है ! वो पाॅलिटेक्निक का दौर
जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था
फर्स्ट ईयर की कम्बाइंड क्लास में।

जैसे कल ही की बात लगती है,
मैं तुम्हें यूं घूरता ही जा रहा था।
दोस्तों से तफ़्तीश में पता चला कि,
गर्ल्स पाॅलिटेक्निक की
इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच की
क्लासेज भी
हमारे साथ ही लगेगी,
दो साल तक
फर्स्ट ईयर और फाइनल ईयर में।

ये सुनकर मुझे जितनी खुशी मिली थी
आज तक वैसी दुबारा नहीं मिली कभी।

चुपके चुपके यूं देखना तुम्हें, मेरी आदत बन गई,
मासूम चेहरे की मुस्कान, रूह की राहत बन गई।

वक़्त के साथ साथ, चाहत भी बढ़ती चली गयी
तेरे मेरे इश्क़ की, ये कहानी भी गढ़ती चली गयी

आज तक यह मालूम नहीं चला,
कि मैं तुम्हें क्यों पसंद करता था ?

मोहब्बत यूं कभी एकतरफ़ा नहीं होती है,
ये वो नींद है, जो सोकर भी नहीं सोती है।

फिर न जाने क्या हुआ, इक रोज यूंही तुम्हें
दूर चली गई कहीं, उदास हो गए वो सब लम्हें।

मैंने दिल को जितना समझाया,
दिल ने मुझ को उतना तङपाया।

आज जब तुम्हारी डीपी देखी
सोशल मीडिया पर
तो जज़्बात खुद बखुद ही उतर आए
अल्फ़ाज़ की शक्ल लिए
एहसास के काग़ज़ पर
दिल-ए-नादान की दास्तान समेटे हुए।

अब तो पता चल गया न !
मैं कौन हूं ?

ख़ैर ! जो भी हो
मुझे जो कहना था
कह दिया मैंने आज सब कुछ
अब दिल पर कोई बोझ नहीं है मेरे।

तुम तो शायद मुझे पहचानती भी नहीं होगी,
पर मैं तुम्हें आज भी हर लम्हा याद करता हूं।

बस यही कामना है मेरी,
जहाँ भी रहो,
हमेशा खुश रहो तुम।।

“ख़्वाहिशें वो जब से मेरी बेहिसाब हो गई”

ख़्वाहिशें वो जब से मेरी बेहिसाब हो गई,
ज़िंदगी ये तब से मेरी इक अज़ाब हो गई ।

इरादों की धूल, बन गयी जिस रोज बवंडर
वक़्त की वो साज़िशें सब बेनक़ाब हो गई ।

खुद को पाने की, लगी है जब से तलब यहां
आदत की वो तब से आदत ख़राब हो गई ।

सवालों के सफ़र में, क्या करे उस नज़र का
जवाब ढूँढते ढूँढते जो लाजवाब हो गई ।

ये इश्क़ की बाज़ी है, कोई खेल नहीं मियाँ
यूं हारकर भी जीतने में कामयाब हो गई ।

मन की मनगढंत बातें, तन्हा रातें मुलाक़ातें
लिख नहीं पाया जिसे मैं वो किताब हो गई ।

मौत जब आई तो, पता यही चला इरफ़ान
ज़िंदगी की तलाश में ज़िंदगी ख़्वाब हो गई ।।

‪#‎RockShayar

“तेरा एहसास”

लबों पर तेरे रखे थे जो, नूर के हसीं क़तरे पी गया
उस एक लम्हें में, जाने कितनी ज़िंदगियां जी गया

तूने छुआ तो यूं लगा, जैसे बारिश हुई हो बंजर में
खिल गई मुरझाई कली, उस खुशनुमा से मंज़र में

सीने में जो सांसें जमी थी, लोबान सी जलने लगी फिर
जीने में जो इतनी कमी थी, एक एक कर मिलने लगी फिर

कानों के झुमके तेरे, जैसे धुन कोई गुनगुना रहे हैं
ज़ुल्फों के बादल घने, यूं मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं

चाँद से उतरी है चाँदनी, बन के हया रूख़सार पर
लबों से लरज़ती हुई वो, बन के दुआ दिलदार पर

आँखों से जब आँखें मिली, बात हुई मुलाक़ात हुई
धीरे से जब ये पलकें झुकी, लगा के जैसे रात हुई

भर लिया है मैंने तुम्हें, अपनी बाहों की गिरफ़्त में
तस्वीर तेरी यूं उभर आई, खुद बख़ुद इस नज़्म में

रूह ने तेरी चखे थे जो, नूर के हसीं क़तरे पी गया
उस एक लम्हें में, जाने कितनी ज़िंदगियां जी गया
।।

‪#‎RockShayar‬

“न मंज़िल पहचानती है न रास्ते पहचानते हैं”

न मंज़िल पहचानती है, न रास्ते पहचानते हैं
मुझको दोस्त मेरे किसी और नाम से पहचानते हैं

ये सियाह तज़ुर्बे हैं, इन्हें रख लो सम्भालकर
वो अंधेरे ही हैं जो उजालों की शक़्ल पहचानते हैं

चेहरे पर हैं जो चेहरे, राज़ इनमें कितने गहरे
जानते तो सब हैं, पर बात कोई नहीं मानते हैं

दावे करता रहा जो, ताउम्र मेरी तरबियत के
मुझको उस घर के अलावा यहां सब जानते हैं

कोई सही वक्त नहीं आता, कोई सही माहौल नहीं होता
दर्द की जब बारिश हुई, मन के नाले तभी उफ़ानते हैं

लाख कहे दुनिया चाहे, फर्क़ नहीं पङता कुछ भी
जो दिल चाहता है, करने की हम बस वहीं ठानते हैं

गर लिख नहीं पाता, तो क्या होता इरफ़ान मैं
मुझको लोग आजकल मेरे कलाम से पहचानते हैं ।।

© RockShayar

For my bestest buddy n his passion…

दिल दा ऐ गिटार, सीणे विच छुपा के रख्या तू
इश्क़ा दी धुन कोई, फिर से गुनगुना वे बंदया तू

मन दी स्ट्रिंग्स जे सब, हो गयी वे ढ़ीली ढ़ाली
दर्द दे विंग्स ते नाळ, खो गयी ऐ ज़िंदङी साली

कदे तो तू बेवजह ही, खुशी दा कोई गीत बजा
मिट्टी दे घरौंदे विच, रुह दा कोई संगीत सजा

ख़यालां दे सब काॅर्ड, अक्खा विच क्लिक कर ले
ख़ाहिशां दी गड्डी फोर्ड, हत्था विच पिक कर ले

मनमौज़ी मितरा तू, मन दी कोई स्ट्रमिंग सीख ले
दिल दी गल्ला सुण के, यादां दी ट्यूनिंग सीख ले

फ्रेट ते नाळ फिंगर दी, यारी इन्नी चंगी हो
के भूलकर सारे ग़म, धुन ही साथी संगी हो

यार साड्डे जे सुण ले, ख़्वाब नए अब तू बुण ले
खुद नु पहचाण कर वे, दिल दी अपणी तू सुण ले

दिल दा ऐ गिटार, सीणे विच छुपा के रख्या तू
यारां दी गल कोई, फिर से गुनगुना वे बंदया तू ।।

‪#‎RockShayar‬

दिल का ये गिटार, सीने में छुपा के रखे है तू
इश्क़ की धुन कोई, फिर से गुनगुना रे बंदे तू

मन की स्ट्रिंग्स ये सब, हो गयी हैं ढ़ीली ढ़ाली
दर्द के विंग्स के साथ, खो गयी है ज़िंदगी साली

कभी तो तू बेवजह ही, खुशी का कोई गीत बजा
मिट्टी के घरौंदे में यूं, रुह का कोई संगीत सजा

ख़यालों के सब काॅर्ड, आँखों में क्लिक कर ले
ख़ाहिशों की गड्डी फोर्ड, हाथों में पिक कर ले

मनमौज़ी मित्र तू, मन की कोई स्ट्रमिंग सीख ले
दिल की बातें सुन के, यादों की ट्यूनिंग सीख ले

फ्रेट के साथ फिंगर की, यारी इतनी चंगी हो
के भूलकर वो सारे ग़म, धुन ही साथी संगी हो

यार मेरे इतना सुन ले, ख़्वाब नए अब तू बुन ले
खुद की पहचान कर, दिल की अपनी तू सुन ले

दिल का ये गिटार, सीने में छुपा के रखे है तू
यारों की बात कोई, फिर से गुनगुना रे बंदे तू ।।

#RockShayar

“कुछ भी न बचा कहने को हर बात हो गई”

कुछ भी न बचा कहने को हर बात हो गई,
मुझसे मेरी न जाने कब मुलाक़ात हो गई ।

ये कुदरत का कमाल है, कुदरत ही जाने
बिन बादल यूं आज कैसे बरसात हो गई ।

दिल ने कहा अलविदा, जिस रोज शोर को
ख़ामोशी से उस रोज मेरी हर बात हो गई ।

बादशाह वज़ीर प्यादा फक़ीर, सब ने ठगा
वक़्त की चाल पर ज़िन्दगी बिसात हो गई ।

ग़ज़ल लिखने का वो, शऊर न आया कभी
आवारगी को मेरी हर्फ़ की सौगात हो गई ।

हमसे क्या पूछते हो, हाल-ए-दिल इरफ़ान
चलो दर्द सहलाए, आज फिर रात हो गई ।।

:-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान

“खूबसूरत है ज़िन्दगी”

गर पलकों का रंग देखना है तो आँखें बंद करो
अंधेरे में छुपे हुए इन उजालों से बातें चंद करो

क्या कह रही है ज़िन्दगी तुमसे ? सुनो तो सही
मनचाहे रंग इसमें, ख़्वाबों ख़याल बुनो तो सही

इतना क्यों सोचते हो ? खुद को खुला छोङो तो कभी
आज़ादी हक़ है तुम्हारा, दिल के रूख को मोङो तो कभी

किसी की ना सुनो तुम, हाँ अपने दिल के अलावा
किसी को ना देखो तुम, अपनी मंज़िल के अलावा

खुशी के बादल तैर रहे हैं, बहती हुई हवाओं पर
प्यार से हाथ फेर रहे हैं, मासूम इन दुआओं पर

दूर कहीं फिर होगी सहर, होगा नया एहसास
खुद को यूं पाएगा तू, महकते हुए मन के पास

इतनी ख़ूबसूरत है ज़िंदगी, के बयां न की जा सके
जन्नत की पाकीज़ा शराब, ये लबों से न पी जा सके

गर जीने का ढंग देखना है तो आँखें बंद करो
यूं मन ही मन इस ख़ामोशी से बातें चंद करो ।।

:-RockShayar