हर शय मुझको शायरी लगती है

आसमां लगे है वज़्नी हर्फ़ सा
ज़मीन अपनी डायरी लगती है

फ़ितूर ना जाने कैसा चढ़ा है ये
हर शय मुझको शायरी लगती है

***इस्तिखारा की दुआ***

Istikhara Ki Dua


अल्लाहुम म इन्नी अस्तख़ी रू-क बि अिल्म-क व अस्तकि़्दरू-क बि क़ुद्रति-क व अस्अलु-क मिन फ़ज़ि्ल-कल अजी़मि फ़ इन-न-क तकि्दरू व ला अकि़्दरू व तअ़लमु व ला अअ्लमु व अन-त अल्लामुल ग़ुयूबि अल्लाहुम-म इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र(…………………….)खै़रूल्ली फी़ दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़क़ि्दरहु ली व यस्सिरहु ली सुम-म बारिक ली फ़ीहि व।
इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र शर्रूल-ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अमरी फ़स् -रिफ़हु अन्नी वसि्रफ़्नी अन्हु वकि्दर लि-यल खै-र हैसु का-नर सुम अर्जिनी बिही।

***तर्जुमा***

ऐ अल्लाह, मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझ से भलाई मांगता हूं और तेरी क़ुद्रत के जरिए तुझसे क़ुद्रत तलब करता हूं और तेरे बड़े फज़ल का तुमसे सवाल करता हूं, क्योंकि बेशक तुझे क़ुद्रत है और मुझे क़ुद्रत नहीं है और तू जानता है, और मैं नहीं जानता और तू ग़ैबों का खूब मानने वाला है।
ऐ अल्लाह, अगर तेरे इल्म में मेरे लिए यह काम(……………..)तेरी दुनिया और आख़िरत में बेहतर है, तू उसको मेरे लिए मुक़द्दर फ़रमा, फिर मेरे लिए उसमें बरकत फ़रमा और अगर तेरे इल्म में मेरे लिए यह काम मेरी दुनिया व आख़िरत में बुरा है, तो उसको मुझ से और मुझको उसे दूर फ़रमा और मेरे लिए भलाई मुक़द्दर फ़रमा, जहां कहीं भी हो फिर उस पर मुझे राज़ी फ़रमा।

At the beginning of the Dua and at the end, pray Sureh Fathiha and Durood Sharif.

The Dua is as follows:

“Allahumma innee astakheeroka be-ilmeka wa astaqderoka be-qudrateka wa as-aluka min fadleka al-Azeeme fa-innaka taqderu wa laa aqderu wa ta-lamu wa laa aa-lamu wa anta allamu al-guyoob. Allahumma in kunta ta-lamu anna haza al-amra khairun lee fee deenee wa ma-aashee wa aa-qebate amree faqdurhu lee wa yasserhu lee summa barek lee feehe wa in kunta ta-lamu anna haza al-amra sharrun lee fee deenee wa ma-aashee wa aa-qebate amree fasrifhu annee wasrifnee anhu waqdur leya al-khaira haysu kaana summa ardhinee behe.”

In this supplication instead of the words “haza al-amra” mention your need or just think about it. It is better to perform Istikharah seven times, for it is mentioned in one Hadith: “O Anas !! When you intend any matter, seek to know its suitability from your Lord seven times – then reflect upon what transpires in your heart, indeed that only is better.”

The time for Istkharah lasts up to the time one’s heart gets convinced upon one decision.

***इंग्लिश ट्रांसलेशन***

(O Allah, I seek Your guidance (in making a choice) by virtue of Your knowledge, and I seek ability by virtue of Your power, and I ask You of Your great bounty. You have power, I have none. And You know, I know not. You are the Knower of hidden things. O Allah, if in Your knowledge, this matter (then it should be mentioned by name) is good for me in my religion, my livelihood and my affairs (or: both in this world and in the Hereafter), then ordain it for me, make it easy for me, and bless it for me. And if in Your knowledge it is bad for me and for my religion, my livelihood and my affairs (or: for me both in this world and the next), then turn it away from me and turn me away from it, and ordain for me the good wherever it may be and make me pleased with it.

SaPhar e Hayaat

सफ़र-ए-हयात में तन्हा नहीं हूँ मेरा हाफ़िज़ है ख़ुदा
सुन ले ऐ दुश्मन मेरी तक़्दीर का कातिब है ख़ुदा

पर्वरदिगारे आलम की मोहताज हैं ये दुनिया सारी
हर शै हो चाहे ज़िंदा मुर्दा सबका हाकिम है ख़ुदा

कि जिसको याद करने से अकेलापन नहीं खलता

बिना सोचे बिना समझे भरोसा कर लिया मैंने
यक़ीं उस पर न जाने क्यूँ दुबारा कर लिया मैंने

कि जिसको याद करने से अकेलापन नहीं खलता
उसी की याद में ख़ुद को अकेला कर लिया मैंने

“मैं हिंद का मुसलमान हूँ”

“मैं हिंद का मुसलमान हूँ”

1. मीर हूँ कबीर हूँ
मैं मिट रहा ज़मीर हूँ
था बादशाह जो कभी
क्यूँ आजकल हक़ीर हूँ
तारीख़ हूँ तहरीर हूँ
एक दौर का अमीर हूँ
दुश्मन सारा जहाँ मेरा
तरकश में रखा तीर हूँ
मिटाना मुझे आसां नहीं
मैं सुलेमानी शमशीर हूँ
मेरे बिना कैसी तरक्की
मैं भारत की तस्वीर हूँ
मेरे बिना कैसा विकास
मैं भारत की तक़्दीर हूँ
मेरे बिना कैसी जन्नत
मैं वादी ए कश्मीर हूँ।

2. हुनर की मैं खान हूँ
क्यूँ फिर भी परेशान हूँ
हाँ ख़ुद से अनजान हूँ
वतन पे क़ुर्बान हूँ
सवाल उठ रहे हैं आज
क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
तो जवाब सब सुने ये आज
मैं कैसे इस देश की शान हूँ
एक ऐसे देश का अभिमान हूँ
जहाँ बेफ़िक्र हो देता अज़ान हूँ
पहचान बस इतनी मेरी
मैं हिंद का मुसलमान हूँ
मैं हिंद का मुसलमान हूँ।

3. ग़ालिब हूँ साहिर हूँ
मुहब्बत में माहिर हूँ
ख़ुसरो हूँ रसख़ान हूँ
जायसी और निज़ाम हूँ
हसरत हूँ फ़राज़ हूँ
राहत मुनव्वर दाग़ हूँ
वसीम हूँ बशीर हूँ
मैं निदा ए रहीम हूँ
कुमार हूँ फ़िराक़ हूँ
कैफ़ी जां निसार हूँ
जिगर हूँ ज़ौक़ हूँ
शायर दरअसल रॉक हूँ
फैज़ हूँ जॉन हूँ
सदियों से मौन हूँ
जो कहते डॉन हूँ
वो सुने मैं कौन हूँ
वो सुने मैं कौन हूँ।

4. इक़बाल हूँ आज़ाद हूँ
सर सैयद मैं अश्फ़ाक़ हूँ
ज़ाकिर अमज़द ख़य्याम हूँ
मैं मोमिन अब्दुल कलाम हूँ 
शहीद हूँ हमीद हूँ
संग दीवाली मैं ईद हूँ
हिदायतुल्लाह की परछाई
मैं बिस्मिल्लाह की शहनाई
लोग कहते बाहरी मुझे
सौतेला नहीं मैं सगा भाई।

5. रफ़ी हूँ रहमान हूँ
शाहरुख़ आमिर सलमान हूँ
संगीत सूना मेरे बिना
मैं सलीम सुलेमान हूँ
ज़हीर शमी पठान हूँ
मैं हाशमी इमरान हूँ
क़िरदार चाहे हो कोई
हर रोल में इरफ़ान हूँ
पहचान पूछने वालो सुनो
मैं हिंद का मुसलमान हूँ।

6. नसीर हूँ नवाज़ हूँ
सिनेमाई सरताज हूँ
नौशाद हूँ इरशाद हूँ
के आसिफ इम्तियाज़ हूँ
बोल सईद कादरी के
मैं जावेद की आवाज़ हूँ
लालकिले का सुर्ख़ लहू
यमुना किनारे ताज हूँ
जॉनी जगदीप महमूद हूँ 
कादर अजित महबूब हूँ
सलीम जावेद मज़रूह हूँ
इस मुल्क़ की मैं रूह हूँ।

7. नरगिस सुरैया सायरा हूँ
ज़ीनत शबाना ज़ायरा हूँ
परवीन जुबैदा फरीदा हूँ
मधुबाला और वहीदा हूँ
सरोज सना फराह हूँ
तब्बू हुमा साराह हूँ
आलिया मीना ज़रीना हूँ
मैं हेलन और कटरीना हूँ
सानिया हूँ सैफ हूँ
अज़हर और कैफ़ हूँ
मेरी फ़िक्र छोड़ो पड़ोसी
मुल्क़ में अपने सैफ हूँ

8. सरहद पे खड़ा जवान हूँ
सीने में रखता क़ुर्आन हूँ
नबी पर रखता ईमान हूँ
गरीब नवाज़ की शान हूँ
शहद सी मीठी ज़बान हूँ
मैं अदब का पासबान हूँ
प्रश्न उठते हैं फिर भी
क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
पर बुरा नहीं मानूंगा मैं
बड़े फ़ख्र से कहूंगा ये
मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
पहचान बस इतनी मेरी
मैं हिंद का मुसलमान हूँ
शनाख़्त बस इतनी मेरी
मैं हिंद का मुसलमान हूँ .

– Rockshayar Irfan Ali Khan
Lodiyana, Bijainagar, Ajmer
rockshayar.wordpress.com

एक अटल व्यक्तित्व थे वो… Late Shree Atal Bihari Wajpayee Ji

एक अटल व्यक्तित्व थे वो
विचारों का अस्तित्व थे वो

सत्ता के अंधेर गलियारों में
उज्ज्वल और प्रदीप्त थे वो

शख़्सियत ऋतु बसंत जैसी
सियासत में छवि संत जैसी

सत्य पथ पर अडिग खड़े
प्रबुद्ध प्रखर साधुत्व थे वो

संवेदनाओं से मन मीत ले
कविताओं से दिल जीत ले

जीवन शिखर पर आरोहित
सम्पूर्ण विश्व बंधुत्व थे वो

समय की झंकार से बने
एक अटल व्यक्तित्व थे वो।

– रॉकशायर इरफ़ान अली ख़ान
शुभ 24 न्यूज़
http://www.rockshayar.wordpress.com

भारत के नास्त्रेदमस दिलीप जी नाहटा

*भारत के नास्त्रेदमस दिलीप नाहटा, जिनकी भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं*

(*बिजयनगर, इरफ़ान अली ख़ान, शुभ 24 न्यूज़*)
*राजस्थान के हृदय अजमेर* जिले के *ब्यावर शहर के मशहूर ज्योतिषी और भविष्यवक्ता दिलीप नाहटा को भारत का नास्त्रेदमस* यूँही नहीं कहा जाता है. सुप्रसिद्ध *एस्ट्रोलॉजर एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ दिलीप नाहटा* को भारत के उन चुनिंदा ज्योतिषियों में शामिल किया जाता है जो पिछले *10 वर्षों के भीतर कई बड़ी-बड़ी भविष्यवाणियां* लिख चुके हैं. और ये सभी भविष्यवाणियां सत्य साबित होने से पहले कई न्यूज़ पेपरों में प्रकाशित हो चुकी थी. ज्योतिषी दिलीप नाहटा की *2019 में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की 80 भविष्यवाणियां सत्य साबित होने पर भारतवर्ष से ”नास्त्रेदमस अवार्ड” के लिए चुना जा* चुका है. *दुनिया की पहली पोर्टेबल साइंटिफिक हस्तरेखा मशीन यानी पालमिस्ट्री बनाने पर नाहटा जी को ”बेस्ट पालमिस्ट ऑफ राजस्थान” का अवार्ड भी दिया* गया है.

ग़ौरतलब है कि *400 साल पहले नास्त्रेदमस फ्रांस के एक बहुत बड़े ज्योतिषी* हुए है जिनकी आज तक कई बड़ी-बड़ी भविष्यवाणीयां सटीक साबित हो चुकी है. यह अवार्ड ब्यावर शहर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया है. नाहटा इस अवार्ड को अपनी *माता कंचन बाई नाहटा एवं पिता चेतन मल जी नाहटा के चरणो में अर्पित करते हैं*. एवं *अपने गुरु आचार्य श्री 1008 हस्ती मल जी महाराज साहब, परम श्रदेय आचार्य सम्राट 1008 श्री अभय मुनि जी मसा का आशीर्वाद और प्रेरणा का फल* बताते है.

इतना ही नहीं, नाहटा को ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 5 दिसंबर 2020 को *मुंबई में आयोजित बॉलीवुड फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स के सम्मान समारोह में लीजेंड दादा साहब फाल्के अवार्ड्स* से सम्मानित किया गया है। हाल ही में *अभय जैन साधना केंद्र बिजयनगर बरल द्वितीय अभयनगरी में नाहटा द्वारा निशुल्क सेवाएं प्रदान* की गई. इस *कार्यक्रम का आयोजन अभय जैन साधना केंद्र अध्यक्ष अशोक टिकलिया, मंत्री धन्नालाल बोहरा, कोषाध्यक्ष हेमचंद्र रांका, एवं प्रचार मंत्री महावीर लोढ़ा* सहित पदाधिकारियों व सदस्यों* द्वारा किया गया.

*हमारे युवा पत्रकार इरफ़ान अली ख़ान* से हुई ख़ास मुलाक़ात के दौरान दिलीप नाहटा ने बताया है कि उन्होंने ज्योतिष के क्षेत्र में *हस्तरेखा विद्या पर *विश्व की पहली हस्तरेखा मशीन* बनाई है जो इंसान की भूत, वर्तमान एवं भविष्य की सटीक बातें बताने में सक्षम मानी गई* है. *माज़ी (Past), इमरोज़ (Present) और मुस्तक़बिल (Future) पर सटीक जानकारी* देने के कारण ही नाहटा का नाम देश विदेश में भी काफी प्रसिद्ध है.

नाहटा को इस मशीन के कारण देश भर से *सैकड़ों सम्मान एवं अवार्ड्स भी मिल चुके हैं एवं उनकी सैकड़ों भविष्यवाणियां भी सत्य साबित* हो चुकी है जैसे *2012 में बराक ओबामा का अमेरिकी राष्ट्रपति बनना एवं 2013 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनना, पाकिस्तान में पीएमएल की सरकार बनना एवं 2014 में लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना, लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को अधिकतम 05 से ज्यादा सीटें नहीं मिलना, राजस्थान में कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट का लोकसभा चुनाव हारना एवं 2015 में फ्रांस में विमान दुर्घटना का होना*

*क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत का बाहर होना, इंडोनेशिया में विमान दुर्घटना का होना एवं 2016 में ताइवान इक्वाडोर में भूकंप आना एवं 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनना, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनना, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनना, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बनना एवं 2019 में लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का दुबारा प्रधानमंत्री बनना, धारा 370 का हटना, राम मंदिर बनने का रास्ता साफ होना एवं 2020 में वायरस या बुखार से महामारी फैलने से जन हानि के योग बनना, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल का दोबारा मुख्यमंत्री बनना, मुंबई में चक्रवाती तूफान आना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हार जाना, बिहार चुनाव में भाजपा गठबंधन की सरकार बनना, चेन्नई में चक्रवाती तूफान आना, बंगाल में तीसरी बार ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री बनना* इत्यादि.

नाहटा ने जनहितार्थ हेतु दी गई ऐसी उत्कृष्ट सेवा के कार्य से मिलें प्रत्येक सम्मान को अपने *इष्ट गुरु जैन आचार्य 1008 श्री हस्ती मल जी महाराज साहब के चरण कमलों में एवं उनके निमाज गांव स्थित समाधि-स्थल पर समर्पित* किया है. साथ ही *परम श्रदेय आचार्य सम्राट 1008 श्री अभय मुनि जी मसा के आशीर्वाद* से भविष्य में और भी कई लोककल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करने का निश्चय किया है.

*शुभ 24 मीडिया ऐसी बेमिसाल शख़्सियत की अद्वितीय प्रतिभा और ज्ञान को सलाम* करता है और *सरकार से ज्योतिष शास्त्र को उचित मान सम्मान देने और सदियों पुराने ऋषि मुनियों के इस वैज्ञानिक ज्ञान को संरक्षित करने की अपील* करता है. साथ ही *सबके भविष्य बताने वाले लोकप्रिय ज्योतिषी दिलीप नाहटा के उज्ज्वल भविष्य की भी कामना* करता है.




Aazadi Mubarak

*वंदे मातरम*     *जय हिंद*    *जय जवान जय किसान*

*जश्ने आज़ादी कुछ ऐसे मनाये हम, सरफ़रोशी की शमां दिल में जलाये हम, अपना फ़र्ज़ ईमान से अदा करते हुए, हिंद को दुनिया का सरताज बनाये हम*

*हम है शुभ 24 न्यूज़ नेटवर्क, जहाँ पर सच दिखाया जाता है. हमारा लक्ष्य, आप तक पहुँचे हर ख़बर, ख़बर वही, जो करे सीधा दिल पर असर*

*स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2021 के इस शुभ अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ*

इरफ़ान अली ख़ान
क्रिएटिव हैड
शुभ 24 मीडिया
जयपुर

Aazadi Mubarak 15/08/1947

ग़ालिब हूँ साहिर हूँ
मुहब्बत में माहिर हूँ
ख़ुसरो हूँ रसख़ान हूँ
मैं जायसी और निज़ाम हूँ
हसरत हूँ फ़राज़ हूँ
राहत मुनव्वर दाग़ हूँ
वसीम हूँ बशीर हूँ
मैं निदा ए रहीम हूँ
कुमार हूँ फ़िराक़ हूँ
कैफ़ी जां निसार हूँ
जिगर हूँ ज़ौक़ हूँ
शायर दरअसल रॉक हूँ

जश्न-ए-आज़ादी कुछ ऐसे मनाये हम
सरफ़रोशी की शमां दिल में जलाये हम

अपना फ़र्ज़ ईमान से अदा करते हुए
हिंद को दुनिया का सरताज बनाये हम

मुल्क़ में फैली बुराइयों के ख़िलाफ
इन्क़िलाब का बिगुल फिर से बजाये हम

शहीदों की क़ुर्बानी याद करते हुए
मुक़द्दस तिरंगा शान से फहराये हम

वतन की मोहब्बत का जज़्बा लिए
अपनी प्रतिभा जमाने को दिखाये हम

सरहद की हिफ़ाजत में डटें हुए है जो
उन रणबाँकुरों को सर आँखों पर बिठाये हम

देश के लिए जानो तन लुटाकर
मिट्टी का क़र्ज़ अब लहू से चुकाये हम

हँसते हँसते जां निसार कर गए वो
शहादत के किस्से फ़ख्र से सुनाये हम

सबको बराबरी का हक़ दिलाते हुए
आज़ादी के सही मायने सिखलाये हम

मेहनत और लगन से आगे बढ़ते हुए
हर सूबे में अपना परचम लहराये हम

मज़हब, ज़ुबां, नस्ल से ऊपर उठकर
तराना-ए-हिंद आज गुनगुनाये हम

यौम-ए-आज़ादी कुछ ऐसे मनाये हम
गुल है हिंदोस्ताँ आओ इसे सजाये हम ।।

**** राॅकशायर ‘इरफ़ान’ अली ख़ान ***































Musafir

कभी आंधी कभी तूफ़ां, मुसाफ़िर के मुक़द्दर में
ख़ुदाया और क्या क्या हैं, मुहाजिर के मुक़द्दर में

सदा दर दर भटकना यूँ, सुकूँ है के नहीं मिलता
यही सच है नहीं है घर, मुसाफ़िर के मुक़द्दर में.

मुहाजिर – शरणार्थी, Refugee, Emigrant

Benazir

सूरत तो ढ़क लेती है सीरत नहीं ढ़क पाती है
वह नज़्म पढ़ते-पढ़ते ही हर ज़ख़्म सहलाती है

दरअसल एक लड़की है जो कहानियां सुनाती है
मुस्कुराहट के ज़रिये हर ओर ख़ुशियां फैलाती है

सलवटें माथे की पढ़ न ले कोई
हिजाब में कुछ इस तरह खुद को छुपाती है

ख़ाली वक़्त में औरों के लिए ख़त लिखती है
वो नफ़रत के इस दौर में मोहब्बत लिखती है

दिखने में वादी-ए-दिल की बहार लगती है
वो ज़र्द लिबास में दरख़्त-ए-चनार लगती है

उड़ने की चाहत हरहाल में ज़िंदा रखती है
मुझको तो वो लड़की नहीं परिंदा लगती है

कहती है कुछ तो बात ज़रूर है तुम में
दूर कर सको अँधेरा, इतना नूर है तुम में

सूरत तो ढ़क लेती है सीरत नहीं ढ़क पाती है
वह नज़्म पढ़ते-पढ़ते अक्सर हमदर्द बन जाती है

दरअसल एक लड़की है जो कहानियां सुनाती है
रंज-ओ-ग़म को रब की मेहरबानियां बताती है

उलझने मन की पढ़ न ले कोई
हिजाब में कुछ इस तरह ख़ुद को छुपाती है

Safar e Hayat

सफ़रे हयात में तन्हा नहीं हूँ मेरा हाफ़िज़ है ख़ुदा
सुन ले ऐ दुश्मन मेरी तक़दीर का कातिब है ख़ुदा

पर्वरदिगारे आलम की मोहताज हैं ये दुनिया सारी
हर शै हो चाहे ज़िंदा मुर्दा सबका हाकिम है ख़ुदा

तारीफ सब उसके लिए, बनाया है जिसने दो जहां
सबसे बङा और मेहरबान यक़ीनन वाहिद है ख़ुदा

जहाँ तक जाये नज़र, रात दिन शाम-ओ-सहर
ज़मीन-ओ-आसमां यूँ हर जगह ग़ालिब है ख़ुदा

वैवाहिक इश्तिहार

*वैवाहिक जीवन वृतांत* *Matrimonial BioData*

*अस्सलामु अलैयकुम वा रहमतुल्लाही व बरक़ातहू*

नाम – *इरफ़ान अली ख़ान* *रॉकशायर* *उम्र 36 साल*
जन्म तिथि – *25 अगस्त, 1985*
अब्बू – *चाँद मोहम्मद ख़ान साहब*
*रिटायर्ड टीचर, 9602693846*
अम्मी – *रईसा बेगम*, हाउस वाइफ

परिवार – *दो बड़े भाई एवं दो बड़ी बहनें*

1. *मोहम्मद अली ख़ान* *किराना दुकान*
2. *रेहाना सुल्ताना* *सरकारी अध्यापिका*
3. *रुख़साना ख़ान* *निजी ब्यूटीशियन*
4. *डॉ. शौक़त अली देशवाली* *राजकीय प्रधानाचार्य*

*शिक्षा* – *इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन*
*एमटेक* *जगन्नाथ यूनिवर्सिटी जयपुर 2013*
*बीई* *राजस्थान यूनिवर्सिटी 2009*
*डिप्लोमा* *अजमेर पॉलिटेक्निक 2006*

*पेशा* – *मुख्य संपादक*, *शुभ 24 न्यूज़ चैनल, वैभव कॉम्प्लेक्स, आम्रपाली सर्किल, वैशाली नगर, जयपुर*

*तज़्रबा* – *ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में 16 साल का कार्य अनुभव*

अभिरुचि – *शायरी पोएट्री*, *वीडियो एडिटिंग*, *क्रिएटिव राइटिंग*

*पता – ग्राम – लोडियाना, वाया – जालिया-II, तहसील – बिजयनगर, जिला – अजमेर – 305625 राजस्थान*

*शादी* – *29, अक्टूबर 2011*
*पूर्व पत्नी* – *रजिया पुत्री अब्दुल लतीफ* (भिनाय-अजमेर)*
*संतान* – *जनवरी 2013, प्रीमैच्योर मृत*
*तलाक* – *23, दिसंबर 2015*

मोबाइल – *07737713079*
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*तआरुफ़* *Introduction*

*इरफ़ान अली ख़ान* बेसिकली *बिजयनगर अजमेर राजस्थान* से है। फिलहाल *पिंकसिटी जयपुर* में रहते है। *इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में एम.टेक.* किया है । बचपन से ही आपको *किताबें और कहानियां पढ़ने का शौक* रहा था। *2005 में पाॅलिटेक्निक काॅलेज* के वक़्त *अख़बार में छपी साहित्यिक रचनाएँ* इकठ्ठी करते पढ़ते रहते थे। *हमेशा लिखना चाहते थे मगर न जाने क्यों लिखने से कतराते थे*।

आखिरकार *फरवरी 2013* में लिखना शुरू किया, जब इनके सबसे *अज़ीज़ दोस्त आशिफ़ ने इन्हें एक डायरी गिफ्ट की और लिखने का हौसला बढ़ाया*

*और इस राॅकशायर नाम के पीछे भी एक पूरी एक दास्तान है*

*ज़िंदगी के इक बेदर्द हादसे ने इनकी ज़िंदगी बदल कर रख दी*

*उस दिन के बाद इन्होंने फैसला किया, कि मैं मुश्किलों के आगे कभी हार नहीं मानूंगा, उस दिन इन्होंने खुद को “राॅकशायर” नाम दिया*

“दर्द से कभी नही बिखरने वाला, चट्टानों की तरह मजबूत शख्सियत राॅकशायर, जिसका वज़ूद अल्फ़ाज़ में नुमायाँ है”*

*अब तक 5000 से भी ज्यादा कविताएँ, नज़्म, ग़ज़ल, शेर आप लिख चुके हैं*

लफ़्ज़ जो हमेशा ज़ेहन में चलते रहते हैं

*मैं रहूँ न रहूँ मेरे अल्फ़ाज़ जाविदा हैं, कल मिलू न मिलू ये अंदाज़ अलहदा है*

*बहुत शुक्रिया हज़रात* आप सबका, जो आपने मेरा *हयातनामा* पढ़ने में अपना *क़ीमती वक़्त ज़ाया किया*

नौकरी उपलब्ध है

*हिंदुस्तान के उभरते हुए मीडिया हाउस शुभ 24 न्यूज़ में आपका स्वागत है*

*अगर आप में है कुछ कर गुज़रने का जज़्बा और जुनून, तो शुभ 24 टीम का हिस्सा बनने के लिए हो जाइए तैयार*

*निम्नलिखित रिक्तियों पर वर्क फ्रॉम जयपुर दफ्तर के लिए योग्य उम्मीदवार आवेदन करे*

1. हिंदी कंटेंट राइटर
2. वीडियो एडिटर
3. एंकर
4. ऑफिस एग्जीक्यूटिव
5. एचआर एग्जीक्यूटिव

*दिये गये पते पर मिले*:

*617, शुभ 24 न्यूज़, वैभव कॉम्पलेक्स, आम्रपाली सर्किल, वैशाली नगर, जयपुर (राजस्थान)*

*दिये गये नंबर पर सीवी व्हाट्सएप करे*:

*इरफ़ान अली ख़ान, कंटेंट हैड, 7737713079*

*नोट:- वर्क फ्रॉम होम की सुविधा उपलब्ध नहीं है*

Dosti Ka Din

दोस्ती का दिन कोई, न कोई वार होता है
दोस्तों के साथ तो, हर वार ही शनिवार होता है।

चाहे माइंड की मिस्ट्री हो, या हसरतों की हिस्ट्री
दोस्तों के दरमियाँ होती हैं, कमाल की कैमिस्ट्री।

सेटिंग चाहे मोबाइल की हो, या फिर दिल की
दोस्तों ने तो इन पर, पूरी पीएचडी हासिल की।

हुस्न देखकर फँस जाते हैं, रोज उसकी गली तक जाते हैं
दोस्तों के बिना दोस्त, ज़िंदगी के सफ़र में भटक जाते हैं।

यारों दा ठिकाना कोई, न कोई घरबार होता हैं
यारों के साथ तो हरलम्हा ही यादगार होता हैं।

मुसीबत हो या मोहब्बत, या हो कोई फड्डा
हर थड़ी पर होता हैं, साड्डे यारों दा अड्डा।

घरवाले जब इन्हें डाँटते हैं, बुरा नहीं ये मानते हैं
दोस्त लोग तो हमेशा, दोस्तों में खुशियाँ बाँटते हैं।

ज़िंदगी ने एक रोज मुझसे मेरी खुशियों का पता पूछ लिया
मुस्कुराकर मैंने भी दिल के काग़ज़ पर दोस्ती लिख दिया।
















































Yaar mere

एक एक करके वो, यार सब चले गए
बीच सफ़र में कुछ यार अब मिले नए

अपने अपने दौर में सबने अपना साथ दिया
बिखरा मैं जब कभी तो सबने अपना हाथ दिया

किसी ने नखरे झेले मेरे, तो किसी ने झेली नादानी
यारों के संग बीते लम्हों की, है बस इतनी सी कहानी

शिकायतें हो वो कितनी भी, ना हुई नाराज़गी कभी
देखकर हाँ बेरुख़ी मेरी, ना हुई उन्हें हैरानगी कभी

हो चाय की वहीं वाली थड़ी, या हो ग़मों की झड़ी
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर, साथ है अपने यारी खड़ी

दर्द के वो सख़्त पल, या हो खुशी के हसीं लम्हें
गुज़र गया पर आज भी, याद आते हैं वहीं लम्हें

अपनी अपनी ज़िन्दगियों में, हैं सब मशगूल अब
रूठना मनाना मस्ती तकरार, हैं सब मक़्बूल अब

धीरे धीरे फिर, यार वो सब चले गए
बीच सफ़र में कुछ यार अब मिले नए ।










Sadda Yaar…. साड्डा यार

Sadda Yaar

ज़िंदगी में जब-जब फेल होता है कोई प्यार
याद आये तभी वो, सबसे पहले साड्डा यार

दोस्ती का ये रिश्ता, यूँ तो है टोटली डिफरेंट
फाॅर्मेलिटीज हैं ज़ीरो, एंड इमोशन सौ परसेंट

पॉकिट हो चाहे ख़ाली, आँखों में सपने हज़ार
प्रवचन हो चाहे गाली, बातों में अपने ही यार

नो शुक्रिया, नो हिसाब किताब, नो थैंक वैंक
दोस्तों की दोस्ती का, है कुछ अलग ही रैंक

हो वो एग्जाम्स की तैयारी, या कटने की बारी
यार अपने हैं ना जी, कर्मो पर फेर देंगे बुहारी

ना इनमें कोई राज़दारी, ना इनमें कोई दुनियादारी
फंडा ऑनली देट के, नेवर नकद ऑलवेज उधारी

ऑवरऑल खुल के बोल, है टोटल निष्कर्ष यही
खोखले रिश्तों से बढ़कर, रिश्ता है उत्कर्ष यही

ज़िंदगी में जब-जब, दुःखी हुआ कोई बेशुमार
याद आये तभी वो, सबसे पहले साड्डा यार.

©RockShayar


पत्रकारिता ज़िंदाबाद

*पत्रकारिता आजकल मात्र एक समाज सेवा बनकर रह गई है, तो जानिए कैसे एक निष्पक्ष पत्रकार यह समाजसेवा करता है*?
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*किसी सरकारी दफ्तर में काम अटका तो पत्रकार को फोन*

*पुलिस नहीं सुन रही हैं तो पत्रकार को फोन*

*ट्रैफिक पुलिस ने वाहन पकड़ लिया तो मित्रों व सगे संबंधियों द्वारा किसी पत्रकार को फोन*

*किसी को इलाज में मदद चाहिए तो पत्रकार को फोन*

*किसी बच्चे को स्कूल में एडमिशन नहीं मिले या स्कूल की व्यवस्था संतोषजनक ना हो तो पत्रकार को फोन*

*बिजली गुल हुई तो पत्रकार को फोन*

*बिजली बिल औसत से ज्यादा आया तो पत्रकार को फोन*

*अस्पताल के बिल में छूट चाहिए तो पत्रकार को फोन*

*घर का कोई सदस्य बिन बताये कहीं चला जाये तो पत्रकार को फोन*

*डॉक्टर द्वारा मरीजों के उपचार से सन्तुष्टि ना मिले तो पत्रकारों को फोन*

*किसी के साथ धोखाधड़ी हुई है तो पत्रकारों को फोन*

*किसी और की ज़मीन पर कब्जा हो गया तो पत्रकार को फोन*

*कोई उधारी लौटाने से इन्कार कर रहा हो तो पत्रकार को फोन*

*किसी के मोहल्ले में सफाई व्यवस्था ठप्प हो तो पत्रकार को फोन*

*कोई शासकीय, सार्वजनिक, सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम हो तो पत्रकार को फोन*

*और भी बहुत से प्रकरणों एवं समस्याओं पर एक पत्रकार का फोन अनवरत बजता ही रहता है*

*सभी पत्रकार, रिपोर्टर, संवाददाता बन्धु इस तरह की सेवा देने के लिए हर पल तैयार भी रहते है*

*लेकिन क्या कभी आप लोगों ने सोचा है कि उन्हें इसके बदले आखिर मिलता क्या है*?

*पत्रकारों के भी घर परिवार होते हैं*

*बीवी बच्चे होते हैं*

*बीमार बुजुर्ग माता-पिता होते हैं*

*इन सबका खर्च वो कैसे उठाता होगा*?

*कभी सोचा है आपने*?

*नहीं सोचा तो आज से ही सोचने लग जाइए*

*अगली बार आपको कोई पत्रकार मिले या दिखे, तो उसके साथ दो मीठे बोल बोलकर उसका हालचाल भी पूछिए*

*हर वक़्त बस यही, कि मेरी ख़बर कब आएगी का राग अलापना ठीक नहीं है*

*इसलिए आपसे हाथ जोड़कर सविनय विनम्र निवेदन है कि*
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””
*आप अपने सम्पर्क के पत्रकार बन्धुओ को किसी आयोजन या त्यौहार के अवसर पर विज्ञापन अवश्य दे*

*यदि सम्भव हो तो प्रतिमाह एक विज्ञापन अवश्य दे*

*साथ ही अखबार और विज्ञापन बिल का भुगतान भी समय पर करें*

*ताकि पत्रकार बन्धु भी अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाते हुए, आपकी सेवा में आपके साथ सदैव बेबाक और बेख़ौफ़ खड़ा रह सके*

*एक उभरते हुए युवा पत्रकार, संवेदनशील संवाददाता और खोजी मनमौजी बाइक रिपोर्टर रॉकशायर इरफ़ान अली देशवाली की कलम से निकले हृदयभेदी शब्द, जो समाज में बदलाव की उम्मीद रखते हैं*

*आशा करते हैं आप पत्रकार बंधुओं को कभी निराश नहीं करेंगे, और दिए गए सुझावों पर आज से ही अमल करेंगे*

*जय हिंद* *जय भारत* *जय जवान* *जय किसान*
*वंदे मातरम* *पत्रकारिता ज़िंदाबाद* *पत्रकार रहे आबाद*

*पूर्व यूडीएच मंत्री राजपाल सिंह शेखावत का झोटवाड़ा के वार्ड नं. 48 में किया गया शानदार स्वागत*

*गुलाबी नगरी जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र* के *वार्ड संख्या 48* में कल *पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री राजपाल सिंह जी शेखावत* का जोरदार स्वागत किया गया. मंत्री जी ने *गौतम सिंह जी* के प्रतिष्ठान *विंगमेड फार्मा* का फीता काटकर उद्घाटन* किया. मौके पर मौजूद पांच्यावाला क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए शेखावत साहब ने इस तरह के *नवाचार की तारीफ* करते हुए कहा कि *सरकारी नौकरी की होड़* के बजाय आजकल *उद्यमिता* पर ध्यान देना चाहिए. इस अवसर पर *पूर्व नगरीय विकास मंत्री* ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे *जॉब ढूंढने की जगह औरों को जॉब देने* का वातावरण उत्पन्न करें. *भाजपा के कद्दावर नेता श्री राजपाल सिंह शेखावत* ने राज्य में चल रहे *राजनैतिक उथलपुथल* पर भी अपना दृष्टिकोण रखा.

उल्लेखनीय है कि *झोटवाड़ा* क्षेत्र में *विधायक राजपाल सिंह शेखावत जी* द्वारा सक्रिय रुप से *विकास कार्य* करवाए जाते रहे हैं. वार्ड संख्या 48 से *पार्षद श्रीमती कुमकुम शक्तावत* की अद्वितीय अगुवाई में कई *जन कल्याण और विकास कार्य* करवाए गए हैं, जिनकी शेखावत साहब ने दिल से तारीफ़ की है.

*शुभ 24 न्यूज़* से हमारे *युवा पत्रकार इरफ़ान अली ख़ान* ने बताया है कि कार्यक्रम में वार्ड नं 48 से जुझारू पार्षद श्रीमती कुमकुम शक्तावत, क्षेत्र के *सक्रिय, कर्मठ और युवा कार्यकर्ता शक्ति सिंह मानपुरा*, पूर्व पार्षद निर्मला कंवर, दीपा ग्रेवाल, *पूर्व चेयरमैन महान पंडित*, प्रभारी गोवर्धन शर्मा, पार्षद सुरेश रेगर, श्रवण सिंह, सौदानाराम कुमावत, सीताराम सिंह, दिवराला मदन सिंह बेरी, *नरेंद्र सिंह आकोदा*, नरेंद्र सिंह नेवरी, नंद सिंह राणावत, रामवतार यादव, गिरधारी सिंह, बहादुर सिंह, जगदीश सिंह, महेंद्र सिंह, विनोद महला, शंकर लाल शर्मा, *वीरेंद्र सिंह चावरा*, *अजीत सिंह कवरासर*, अजय सिंह चौहान, अमित शर्मा, मोनू, गुड्डा, जय सिंह बासड़ी सहित *सैकड़ों कार्यकर्ता* उपस्थित रहे. *वार्ड नं 48* की समूची टीम द्वारा पूर्व *यूडीएच मंत्री* *श्री राजपाल सिंह जी शेखावत* का ढोल ढमाकों के साथ जबरदस्त स्वागत किया गया.

*पूर्व मंत्री महोदय* ने इस शुभ अवसर पर कार्यक्रम का एक्सक्लूसिव कवरेज कर रहे *शुभ 24 न्यूज़ चैनल* को बधाई देते हुए कहा कि *लोकतंत्र का चौथा स्तंभ* कही जाने वाली *पत्रकारिता* आम आदमी के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है. *शुभ 24 न्यूज़* अपनी *तटस्थ पत्रकारिता और ईमानदार ग्राउंड रिपोर्टिंग* के ज़रिए *इलेक्ट्रॉनिक मीडिया* के क्षेत्र में नित नए आयाम पेश कर रहा है.

*कलाम साहब आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं*

देश के पूर्व राष्ट्रपति *डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब* की आज *छठी पुण्यतिथि* है। भारत के *11वें राष्ट्रपति* एपीजे अब्दुल कलाम को *मिसाइल मैन* भी कहा जाता है। इनका पूरा नाम *अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम* था। एपीजे अब्दुल कलाम का नाम महान वैज्ञानिक और विचारक में गिना जाता है।

*15 अक्टू्बर 1931* को तमिलनाडु के *रामेश्वरम* में जन्मे कलाम साहब का पूरा जीवन देश सेवा और मानवता को समर्पित रहा। *गरीबी में जन्में* अब्दुल कलाम रेलवे स्टेशन पर अखबार बेचा करते थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। यही कारण है कि वह अपने सपनों को पूरा करने में सफल रहे। आज भी *डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब* लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का 27 जुलाई, 2015 को शिलांग में निधन हो गया था वे आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर देने गए थे, इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा भी की गई थी।

“डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब”



कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम थे
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम ये

जुनून था जिनकी पहचान, अग्निपंख से भरी उड़ान
विज्ञान और कला की मूरत, हिंद की निराली शान

सीखने का जज़्बा ऐसा, कि परिंदों से खुद उड़ना सीखा
समंदर की मचलती हुई, उन लहरों से खुद मुड़ना सीखा

ख़्वाब देखे ख़याल बुने, मेहनत से साकार किया उन्हें
विस्तृत वृहत् लक्ष्य चुने, हिम्मत से आकार दिया उन्हें

अग्नि त्रिशूल पृथ्वी नाग, आकाश उन्हें नाम दिया
रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा, सबसे अनूठा काम किया

भारत को महाशक्ति बनाने की उम्दा सोच रखते थे
चेहरे पर हमेशा वह अपने, ज्ञान का ओज रखते थे

छात्रों से जितना लगाव, आध्यात्म से उतना जुड़ाव
जीवन के रहस्यों से, आत्मा जैसा आत्मिक जुड़ाव

विकसित भारत के वह दृष्टा, दिया जिन्होंने एक विजन
दो हजार बीस तक हो पूरा, अपना आत्मनिर्भरता मिशन

कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम थे
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम ये.

© RockShayar Irfan Ali Khan
#ObjectOrientedPoems(OOPs)

नौकरी उपलब्ध है

हिंदुस्तान के उभरते हुए मीडिया हाउस
शुभ 24 न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है

अगर आप में है कुछ कर गुज़रने का जज़्बा और जुनून
तो शुभ 24 टीम का हिस्सा बनने के लिए हो जाएं तैयार

निम्नलिखित रिक्तियों पर जयपुर कार्यालय
के लिए योग्य उम्मीदवार तुरंत आवेदन करे:-

1. हिंदी कंटेंट राइटर
2. वीडियो एडिटर
3. एंकर
4. बैक ऑफिस एग्जीक्यूटिव
5. एचआर एग्जीक्यूटिव

दिये गये पते पर मिले:

617, शुभ 24 न्यूज़ चैनल, 6 फ्लोर
वैभव कॉम्पलेक्स, आम्रपाली सर्किल
वैशाली नगर, जयपुर (राजस्थान)

दिये गये नंबर पर सीवी व्हाट्सएप करे:

7737713079
इरफ़ान अली ख़ान
कंटेंट हैड

नोट:- वर्क फ्रॉम होम सुविधा उपलब्ध नहीं है

Dainik Bhaskar Mein Aa Gaye Hum Bhi😍

*दैनिक भास्कर ने उभरते हुए न्यूज़ चैनल शुभ 24 की तारीफ़ की*
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*दैनिक भास्कर 24 जुलाई 2021 जयपुर संस्करण पृष्ठ 8*
—————————————————–
*देश के नंबर वन समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने उभरते हुए न्यूज़ चैनल शुभ 24 की जमकर तारीफ की है. भास्कर के 24 जुलाई 2021 के जयपुर अंक में पृष्ठ संख्या 8 पर छपी खबर के अनुसार बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शुभ 24 न्यूज़ समूह ने हिन्दुस्तान के हर कोने में अपनी धाक जमा ली है. सेल्स एंड मार्केटिंग हैड पीयूष शर्मा की अगुवाई में चैनल बहुत ही शानदार तरीके से आगे बढ़ रहा है. एंकर और राजस्थान सेल्स हैड गरिमा रितेश, कंटेंट हैड इरफ़ान अली और एडिटिंग हैड अंकित कौशिक की करिश्माई तिकड़ी ने शुभ 24 न्यूज़ की कमान संभाल रखी है. फिलहाल शुभ 24 यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफार्म पर देश दुनिया की बाक़ी तमाम ख़बरों से रूबरू करवा रहे हैं. शुभ 24 जल्द ही आपको डीटीएच पर भी देखने को मिलेगा*

*क्या सच्ची पत्रकारिता से डर गई है सरकार?*



देश में कोरोना काल के बीच एक बड़ी ख़बर सामने आई है.
आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने दैनिक भास्कर समूह के कई कार्यालय पर छापे की कार्रवाई की है. ग़ौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दैनिक भास्कर समूह ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का कर्तव्य निभाते हुए जनता के सामने लाने की भरपूर कोशिश की थी.

फिर चाहे बात गंगा में मिली लाशों की हो या वैक्सीन घोटाले की हो या रेमडेसीविर नकली इंजेक्शन की हो या ऑक्सीजन संकट की हो, इस आपदा काल में दैनिक भास्कर ने सब तरह की खबरों को प्रमुखता दी. और गोदी मीडिया की तरह अपने ज़मीर का सौदा नहीं करते हुए जनता की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाया.

शायद यही वजह रही है कि बीते गुरुवार भास्कर समूह के प्रमुख कार्यालयों पर इनकम टैक्स और ईडी ने छापेमारी की कार्रवाई की है. देश के प्रमुख राजनेताओं और समाचार पत्रों ने इसकी कड़ी निंदा की है. भास्कर समूह का एक अपना नाम है, रुतबा है, स्वच्छ छवि है, स्वतंत्र पहचान है. इस तरह की कार्रवाई कुछ अलग ही संदेश दे रही है.

क्या सरकार वाकई में डर गई है?
क्या सरकार को डर है कि जनता के सामने सच आ जाएगा?
क्या सरकार आगामी चुनाव की वजह से यह सब कर रही है?
ऐसे कई सवाल हैं जो जनता के मन में उभर रहे हैं.

सच्ची पत्रकारिता की आवाज़ दबाने की जो असंवैधानिक कोशिश की जा रही है, उसकी मैं खोजी मनमौजी बाइक रिपोर्टर कड़ी निंदा करता हूँ. और अपनी लिखी एक पंक्ति से जवाब देता हूँ.

“हक़ बोलेंगे, लाज़िम है के लब भी खोलेंगे
हर तदबीर अब हम इंसाफ़ के तराज़ू में तोलेंगे

ज़ुल्म करने वालों, सुनो ज़रा फ़र्माने इलाही
ज़ुल्म बढ़ने पर, तख़्त तुम्हारे ख़ुद बख़ुद डोलेंगे”




The RockShayar

With the attitude of a dreamer and the calmness of a writer, Irfan Ali Khan has rich experience in different fields. His technical ability and creative thought process makes smart decision making.

Irfan says, advertising is not only about promotion but also is about something you can relate. He also adds that emotions are an important part of our life. So through advertising we can also promote moral values to society.

*गाँव के युवा पत्रकार की ज़मीनी रिपोर्टिंग का असर, कलक्टर ने की तारीफ*

अजमेर जिले की मसूदा पंचायत समिति का बहुचर्चित गाँव लोडियाना इन दिनों अपनी समस्याओं के लिए सरकारी महकमों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

सोशल मीडिया पर एक्टिव हमारे खोजी मनमौजी दबंग बाइक रिपोर्टर रॉकशायर इरफ़ान अली ख़ान देशवाली चौहान के प्रयासों के चलते अजमेर जिला कलक्टर ने ग्राम पंचायत लोडियाना की शुभ 24 द्वारा की गई ज़मीनी रिपोर्टिंग की तारीफ की है, साथ ही अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए हैं.

दरअसल हमारे युवा पत्रकार ने ट्विटर पर गाँव की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत को ट्वीट किया था. मुख्यमंत्री कार्यालय ने फौरन अजमेर जिला कलक्टर को ग्राम पंचायत लोडियाना में मौजूद समस्याओं पर एक्शन लेने के आदेश दिये हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हमारे युवा रिपोर्टर इंजीनियरिंग में स्नाकोत्तर के साथ ही साहित्य क्षेत्र में भी रॉकशायर के नाम से इंटरनेट पर काफी मशहूर है.

Raah e Haque

कामिल   है    ईमान    हमारा
राह-ए-हक़    मीज़ान  हमारा।

हम   को   झूठा  कहने  वाले
मक़्सद  तो  तू  जान  हमारा।

दिल में रहकर क्या ही करोगे
दिल   तो   है  वीरान  हमारा।

यादें  उसकी  सारी मिटाकर
जीना   कर   आसान  हमारा।

लौटा  ना   वो  शख़्स  दुबारा
वो  जो  था  इरफ़ान   हमारा।

मीज़ान – तराज़ू

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1. कंटेंट राइटर
2. विजुअल एडिटर
3. वीडियो एडिटर

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इरफ़ान – 7737713079

Seduce

अंग से मोहे तोरा अंग लगा दे
अंग पे मोहे तोरा रंग लगा दे

मैं बावरियाँ सब कुछ भूली
तोरे संग रासरंग सब झूली

सुर ताल स्वर लय छंद से
नाचू तोरे मन की सुगंध से

कारे कारे तोरे नैना दो कारे
दिल पर तीखी छुरियाँ वारे

मैं बावरियाँ सब कुछ भूली
तोरे संग प्रीतरंग सब झूली

अंग से मोहे तोरा अंग लगा दे
अंग पे मोहे तोरा रंग लगा दे ।।

मुझको दिल की ये तज्वीज़ बड़ी अच्छी लगती है

मुझको दिल की ये तज्वीज़ बड़ी अच्छी लगती है
उसके शहर की हर चीज़ बड़ी अच्छी लगती है

ज़िंदा है जिसमें इंतज़ार का वो इक तन्हा लम्हा
हसरत से तकती दहलीज़ बड़ी अच्छी लगती है

तज्वीज़ – Planning

Navel Ishq

देवर से दीवाने दिल का, न जाने किस भाभी पर दिल आ गया है

सब कुछ छोड़कर आजकल बस उनकी नाभि पर दिल आ गया है

Erotic

सुर्ख़ जोड़े में सजी हुई, घूँघट की आड़ में ढकी हुई
पिया मिलन की आस में, पलंग पर बैठी एक दुल्हन

डरी हुई सी सहमी हुई सी, बर्फ़ की तरह जमी हुई सी
भँवरे की राह तकती हुई, हो जैसे वो नाजुक कली सी।

दिल में कई अरमां सजा रखे हैं आँखों में दीप जला रखे हैं
गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ, मदिरा के प्याले छलका रहे हैं।

पिया ने जब उसको छुआ, छुईमुई सी वो सिमट गई
पहले थोड़ा लज्जाई, बाद में अमरबेल सी लिपट गई।

उस पल जो हुआ उसे यहाँ पर लिखा नहीं जा सकता है
उस पल जो हुआ, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है

दूर कहीं झरना बह रहा था, पास में जिसके एक अँधेरी गुफा थी
एक दूसरे का हाथ पकड़कर, दोनों ने यह अनोखी यात्रा पूरी की

समापन के पश्चात स्वेद रक्त से लथपथ हो गये वो दोनों
विसर्जन के पश्चात कुछ देर तक निशक्त हो गये वो दोनों

सुहाग से जब हुआ मिलन, दुल्हन बन गई सुहागन
मन मरुस्थल में देखो आज, बरसने लगा है सावन।।













Khoji Manmauji Bike Reporter Irfan Ali Khan

**बिजयनगर पुलिस ने 28990 लीटर हथकढ शराब को नष्ट किया**

बिजयनगर थाना पुलिस ने अवैध शराब माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. हमारे दबंग पत्रकार इरफ़ान अली खान की रिपोर्ट के अनुसार आबकारी अधिनियम के 7 प्रकरणों में जप्त शुदा माल लगभग 28990 लीटर शराब को बिजयनगर थाना पुलिस की गठित कमेटी द्वारा नष्ट किया गया.

मादक कविता

होंठो पे अपने होंठ रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

साँसों में साँसें घुल जाने दे
बाँहों में बाहें मिल जाने दे। 

दो जिस्म मगर जान एक है
इरादे मेरे नहीं आज नेक है।

आग लग रही है, तन-बदन में
जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में।

लबों पे अपने लब रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।

एक दूसरे में खो जाने दे
मुझको तेरा हो जाने दे। 

चलो ना आज पूरी तरह से बहक जाते हैं
ताक़त हम अपनी इक दूजे पे आज़्माते हैं।

आग लग रही है, तन और मन में
सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।।

Erotic poem (new try) Kamzor dilwale na padhe😜😉

भीगी हुई साड़ी का पल्लू तो गिराओ ज़रा
दूर जाने से पहले नज़दीक तो आओ ज़रा

लिपट जाएं मुझसे तू, किसी अमरबेल की तरह
उतर जाऊं तुझमें मैं, रिसते हुये तेल की तरह

सीने की कसावट को, हाथों में भर लेने दे
साँसों की गर्माहट को, साँसों में भर लेने दे

नाभि की नशीली गहराई में, जी भरकर गोते लगाने दे
चाहत को राहत में बदलने का, हुनर तू आज दिखाने दे

जो थामता हूँ, तो मछली की माफिक फिसलती है कमर
जो चूमता हूँ, तो मछली की माफिक उछलती है कमर

कसमसाती हुई हथेलियों को, धीरे-धीरे ऐंठने तो दो
थरथराती हुई उँगलियों को, हर जगह फेरने तो दो

तेरी बढ़ती हुई सिसकारियाँ, मेरा हौसला बढ़ा रही हैं
तेरी पिघलती हुई पिचकारियाँ, मेरा बदन भिगा रही हैं

सुलगते हुए तन पर, दहकता हुआ लावा बहने तो दे
हर एक पल में जैसा हो रहा है, बस वैसा होने तो दे

भीगी हुई साड़ी का पल्लू तो गिराओ ज़रा
तर करने से पहले आग तो भड़काओ ज़रा।

















Ishq bhi ajib he

बिना मक़्सद मैं उसके शहर से अक्सर गुज़रता हूँ
नहीं करनी हो जो गलती वहीं क्यों कर गुज़रता हूँ

अभी तक याद है मुझको गली उसकी पता उसका
नहीं जब काम फिर भी क्यूँ वहीं होकर गुज़रता हूँ

Seductive lines

सीने पे तेरे उभरी हुई हैं, मेरी छुअन की वो सलवटें
सितारों के पार ले जाती हैं, तेरे बदन की वो करवटें

मदहोश करे खुशबू तेरी, रातभर जलाएं आरज़ू तेरी
कैसा असर है वस्ल का, आबरू तेरी है आबरू मेरी

महके-महके से लगते हैं, मोहब्बत भरे मुख़्तसर लम्हे
बहके-बहके से लगते हैं, शरारत भरे ये बेसबर लम्हे

बलखाती कमर पर, बारिश की बेईमान बूँदें जब गिरती हैं
लरज़ते लबों की तिश्नगी, थरथराता मंज़र देखते ही बढ़ती हैं

“मैं हिंद का मुसलमान हूँ”

  1. मीर हूँ कबीर हूँ
    मैं मिट रहा ज़मीर हूँ
    था बादशाह जो कभी
    क्यूँ आजकल हक़ीर हूँ
    तारीख़ हूँ तहरीर हूँ
    एक दौर का अमीर हूँ
    दुश्मन सारा जहाँ मेरा
    तरकश में रखा तीर हूँ
    मिटाना मुझे आसां नहीं
    मैं सुलेमानी शमशीर हूँ
    मेरे बिना कैसी तरक्की
    मैं भारत की तस्वीर हूँ
    मेरे बिना कैसा विकास
    मैं भारत की तक़्दीर हूँ
    मेरे बिना कैसी जन्नत
    मैं वादी ए कश्मीर हूँ।
  2. हुनर की मैं खान हूँ
    क्यूँ फिर भी परेशान हूँ
    हाँ ख़ुद से अनजान हूँ
    वतन पे क़ुर्बान हूँ
    सवाल उठ रहे हैं आज
    क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
    तो जवाब सब सुने ये आज
    मैं कैसे इस देश की शान हूँ
    एक ऐसे देश का अभिमान हूँ
    जहाँ बेफ़िक्र हो देता अज़ान हूँ
    पहचान बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।
  3. ग़ालिब हूँ साहिर हूँ
    मुहब्बत में माहिर हूँ
    ख़ुसरो हूँ रसख़ान हूँ
    मैं जायसी और निज़ाम हूँ
    हसरत हूँ फ़राज़ हूँ
    राहत मुनव्वर दाग़ हूँ
    वसीम हूँ बशीर हूँ
    मैं निदा ए रहीम हूँ
    कुमार हूँ फ़िराक़ हूँ
    कैफ़ी जां निसार हूँ
    जिगर हूँ ज़ौक़ हूँ
    शायर दरअसल रॉक हूँ
    फैज़ हूँ जॉन हूँ
    सदियों से मौन हूँ
    जो कहते डॉन हूँ
    वो सुने मैं कौन हूँ
    वो सुने मैं कौन हूँ।
  4. इक़बाल हूँ आज़ाद हूँ
    सर सैयद मैं अश्फ़ाक़ हूँ
    ज़ाकिर अमज़द ख़य्याम हूँ
    मैं मोमिन अब्दुल कलाम हूँ
    शहीद हूँ हमीद हूँ
    संग दीवाली मैं ईद हूँ
    हिदायतुल्लाह की परछाई
    मैं बिस्मिल्लाह की शहनाई
    लोग कहते बाहरी मुझे
    सौतेला नहीं मैं सगा भाई।
  5. रफ़ी हूँ रहमान हूँ
    शाहरुख़ आमिर सलमान हूँ
    संगीत सूना मेरे बिना
    मैं सलीम सुलेमान हूँ
    ज़हीर शमी पठान हूँ
    मैं हाशमी इमरान हूँ
    क़िरदार चाहे हो कोई
    हर रोल में इरफ़ान हूँ
    पहचान पूछने वालो सुनो
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।
  6. नसीर हूँ नवाज़ हूँ
    सिनेमाई सरताज हूँ
    नौशाद हूँ इरशाद हूँ
    के आसिफ इम्तियाज़ हूँ
    बोल सईद कादरी के
    मैं जावेद की आवाज़ हूँ
    लालकिले का सुर्ख़ लहू
    यमुना किनारे ताज हूँ
    जॉनी जगदीप महमूद हूँ
    कादर अजित महबूब हूँ
    सलीम जावेद मज़रूह हूँ
    इस मुल्क़ की मैं रूह हूँ।
  7. नरगिस सुरैया सायरा हूँ
    ज़ीनत शबाना ज़ायरा हूँ
    परवीन जुबैदा फरीदा हूँ
    मधुबाला और वहीदा हूँ
    सरोज सना फराह हूँ
    तब्बू हुमा साराह हूँ
    आलिया मीना ज़रीना हूँ
    मैं हेलन और कटरीना हूँ
    सानिया हूँ सैफ हूँ
    अज़हर और कैफ़ हूँ
    मेरी फ़िक्र छोड़ो पड़ोसी
    मुल्क़ में अपने सैफ हूँ
  8. सरहद पे खड़ा जवान हूँ
    सीने में रखता क़ुर्आन हूँ
    नबी पर रखता ईमान हूँ
    गरीब नवाज़ की शान हूँ
    शहद सी मीठी ज़बान हूँ
    मैं अदब का पासबान हूँ
    प्रश्न उठते हैं फिर भी
    क्यूँ अली क्यूँ ख़ान हूँ
    पर बुरा नहीं मानूंगा मैं
    बड़े फ़ख्र से कहूंगा ये
    मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
    मुक़म्मल हिंदोस्तान हूँ
    पहचान बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ
    शनाख़्त बस इतनी मेरी
    मैं हिंद का मुसलमान हूँ।

@Rockshayar irfan

कभी तूफ़ान था मैं भी

अभी मिस्कीन हूँ लेकिन, कभी सुल्तान था मैं भी
कोई कह दो हवाओं से, कभी तूफ़ान था मैं भी

लगाओ ख़ूब तोहमत तुम, मगर ये तो नहीं भूलो
बुरा है वक़्त लेकिन हां, कभी इर्फ़ान था मैं भी

Abhi Miskin Hoon Lekin
Kabhi Sultan Tha Main Bhi

Koi Keh Do Hawaon Se
Kabhi Toofan Tha Main Bhi

Ibadat Ka Maqsad

अगर सच को लिखने की ताकत नहीं है
तो लिखने की तुझको ज़रूरत नहीं है

इबादत का बदला तो जन्नत है यारो
इबादत का मकसद तो जन्नत नहीं है

ये दौलत ये शोहरत ज़मीं की ये हसरत
हूँ दरवेश मेरी ये ज़रूरत नहीं है…

Watch full video at
👇👇👆
https://youtu.be/SUc3eOKkEWY

गर मुहम्मद से निभाई, तो वफ़ा है काम की

गर मुहम्मद से निभाई, तो वफ़ा है काम की
याद रक्खो आप के बिन, ज़िंदगी बस नाम की

कामयाबी चाहते हो, राज़ फिर ये जान लो
ज़िक्र जिसमें हो ख़ुदा का, रात है वो काम की

Dil Se

किसी ने दिल से लिक्खा है किसी ने दिल पे लिक्खा है
कि हमने नाम उसका फिर किसी साहिल पे लिक्खा है।

यहाँ सब लोग तन्हा हैं सभी की रूह प्यासी है
जलेगा कौन कब कितना सभी के दिल पे लिक्खा है।

©इरफ़ान अली ख़ान

No Tobacco Day

आँसू को भी आँख तक आना पड़ता है
ना जाना हो जिधर वहीं जाना पड़ता है

अजीब आदत है सिगरेट पीना भी
हर बात पर सीना जलाना पड़ता है

Nazar nahin aata

कहीं कोई दस्तगीर अब नज़र नहीं आता
शख़्स वो बेनज़ीर अब नज़र नहीं आता।

मंजिल की ओर चला था जो एक मुसाफ़िर कभी
खो गया वो राहग़ीर अब नज़र नहीं आता।

था जिसकी दुआओं में असर भी शिद्दत भी
कहाँ गया वो फ़क़ीर अब नज़र नहीं आता।

बिक जाते हैं लोग आजकल कौड़ियों के भाव में
पहले जैसा ज़मीर अब नज़र नहीं आता।

Nazar nahin aata

कहीं कोई दस्तगीर अब नज़र नहीं आता
शख़्स वो बेनज़ीर अब नज़र नहीं आता।

मंजिल की ओर चला था जो एक मुसाफ़िर कभी
खो गया वो राहग़ीर अब नज़र नहीं आता।

था जिसकी दुआओं में असर भी शिद्दत भी
कहाँ गया वो फ़क़ीर अब नज़र नहीं आता।

बिक जाते हैं लोग आजकल कौड़ियों के भाव में
पहले जैसा ज़मीर अब नज़र नहीं आता।

ख़िलाफ़त जो करेगा अब, उसी की जान जायेगी

नहीं मानी अभी तक जो, ये दुनिया मान जायेगी
चुना हम ने गलत बंदा, ये अब के जान जायेगी

पहन चोला शराफ़त का, हुकूमत ने किया ऐलान
ख़िलाफ़त जो करेगा अब, उसी की जान जायेगी

Alwada Mah e Ramzan

अलविदा ना कहो माह-ए-रमज़ान को
यूं ज़ुदा ना करो जिस्म से जान को।

कोई तो रोक लो, थाम लो वक़्त ये
रोकते है यूं जैसे कि मेहमान को।।

Nurses Day

बचाते हैं सभी की जां, मुक़द्दस काम करते हैं
डटे रहते हैं ड्यूटी पे, नहीं आराम करते हैं

बड़ी ईमानदारी से, करे तीमारदारी जो
दुआएं दो ज़रा इनको, बड़ा ये काम करते हैं

ठिकाना है शिफ़ाखाना, बचाना है सभी की जां
दवा देना दुआ लेना, यही सब काम करते हैं

चुने जो फ़र्ज़ को पहले, असल में नर्स है वो ही
नहीं थकते नहीं थमते, हमेशा काम करते हैं

Baitul Muqaddas

सुनो आवाज़ देती है, ज़मीं बैतुल मुक़द्दस की
हिफ़ाज़त तो करेगा वो, वही सबसे बड़ा ग़ाज़ी

क़यामत की निशानी है, वबा ये तो ख़ता ये तो
गवाही रोज़ देती है, फ़ज़ा बैतुल मुक़द्दस की

नबी ने पांव जब रक्खे, ज़मीं वो झूमकर बोली
हुई मक़्बूल अब जाकर, दुआ बैतुल मुक़द्दस की

भले फ़ित्ना बढ़े जितना, थमेगी ज़ुल्म की आंधी
बिखरकर टूट जाएगी, सभी शाखें यूँ बातिल की

लिखा है जो ज़माने ने, उसे तुम भूल ही जाओ
जहां में फिर से गूंजेगी, अज़ां बैतुल मुक़द्दस की

@irfan

Be A Bahubali in Covid

महासेना क्या है कोरोना?

हमारी कम्युनिटी से वायरस की इम्युनिटी ज्यादा है
ये सोचना है कोरोना

बिना काम के बिना बात के
बाज़ार में इधर उधर टहलना है कोरोना

जिस वायरस को हमने मार भगाया था
वो दोबारा हमारे आसपास तेजी से फैल रहा है

उसका सर कुचलकर मेडिकोज का हौसला बढ़ाने के बजाय
वैक्सीन के लिए उन्हें परेशान करना है कोरोना

उस वायरस को रोकने जा रहा हूं मैं
मेरी फैमिली और शहर को वह छू भी नहीं सकता
उसको फिर से मात देने के लिए
कुछ दिन घर पर ठहरने जा रहा हूं मैं

मेरे साथ घर पर रुकेगा कौन?
हर वक़्त गरम पानी पियेगा कौन?
एक दूसरे की हिम्मत बढ़ायेगा कौन?

जय मनुष्य मति

Itfar

अब्र की आँखों से दर्द टपकने को है
सब्र कर ऐ ज़मीं, बारिश होने को है

अभी प्यास लगना लाज़िम है तुझे
बस थोड़ी देर और, इफ़्तार होने को है

Maula Tu

सभी के दिल में मौला तू,
अली के दिल में मौला तू
कि सबको चाहता है तू,
सभी के दिल में मौला तू

फ़लक से चाँद है उतरा,
गवाही जो कि देता है
ये सब कुछ है नबी से और,
नबी के दिल में मौला तू

Chalo na

चलो न नया एक नशेमन बनाते हैं
एक दूसरे के और पास आ जाते हैं।

नज़दीक आने में अभी वक़्त लगेगा
चलो न दूर से ही दूरियां मिटाते हैं।

ख़यालात में खून की कमी चल रही है
चलो न खुद को जी भरके हँसाते हैं।

हक़ीक़त को सच मान चुकी हैं आँखें
चलो न इन्हें कुछ ख़्वाब दिखाते हैं।

बहुत दिन हो गए हैं दर्द सहते-सहते
चलो न आज जी भरके मुस्कुराते हैं।

Hippocrate Wazir

चेहरा छुपाने के बजाय अपनी नाकामी छुपा रहा है
जनता जान चुकी हैं, वज़ीर अपनी ख़ामी छुपा रहा है

अंधों की भीड़ जमा करके, उनको गूंगा बना दिया
करके सबको गुमनाम अपनी बदनामी छुपा रहा है


























Naye Zamane Yaar Purane

बंजर में बारिश के फ़साने ढूंढते हैं
वो हँसने के भी बहाने ढूंढते हैं

खो जाते हैं जो किसी दौर के दौरान
खुद को लिखने के बहाने ढूंढते हैं

दुःखी होते हैं जब लोग अक्सर
नए जमाने में यार पुराने ढूंढते हैं

Haq bolenge

हक़ बोलेंगे,
लाज़िम है के लब भी खोलेंगे
हर तदबीर अब हम
इंसाफ़ के तराज़ू में तोलेंगे

ज़ुल्म करने वालों
सुनो ज़रा फ़र्माने इलाही
ज़ुल्म बढ़ने पे
तख़्त तुम्हारे ख़ुद बख़ुद डोलेंगे

Shame Shame

वज़ीर के भेष में आला अदाकार है आप
रियाया जान चुकी हैं, रियाकार है आप

सियासत हो या तिजारत
कोई आपसे सीखे
मानना पडे़गा कमाल के कलाकार है आप

रियाया – प्रजा
रियाकार – पाखंडी
तिजारत – व्यापार

Hungama

हंगामा है हर तरफ़, कौन सही और कौन गलत
अंदर आग बाहर बरफ़, कौन सही और कौन गलत।

ये लिखू के वो लिखू, समझ नहीं आता कुछ भी
सहमे हुए सारे हरफ़, कौन सही और कौन गलत।

किस किस से बचेगी भला अब इंसानियत यहां
ये भेड़िया वो जरख, कौन सही और कौन गलत।

वसीयत सौंपी थी जिसे, वही जलाने लगा है घर
सदमे में है सारा शहर, कौन सही और कौन गलत।

इंसानियत की मौत

सड़ चुकी है सोच यहां, हर ख़याल ख़मीर बन गया
देखो कैसा दौर आया है, इंसान का ज़मीर मर गया

उम्मीद भला क्या कीजे, मुंसिफ़ से अब इंसाफ़ की
अब तो बस दुआ कीजे, ज़ालिम जो मीर बन गया

Come back

अभी जो हाल है मेरा, सभी को जान लेने दो
कि जैसा मानता है जो, उसे वो मान लेने दो

नहीं है हक़ यहाँ तुमको, किसी की जान लेने का
कि जिसने जान बख़्शी है, उसी को जान लेने दो