“Shahar Gulabi Jaipuriyon”

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“दिल को नये बहाने और लिखने को मौज़ू देती है”

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दिल को नये बहाने और लिखने को मौज़ू देती है
वो कौन है जो आरज़ू बनकर मेरे दिल में रहती है।

उसके बारे में क्या कहूँ, मैं बिन कहे कैसे रहूँ
वो जो होंठो से नहीं, आँखों से हर बात कहती है।

दिल से धड़कन का रिश्ता, कुछ ऐसा है हमारा रिश्ता
दिल के हर इक हिस्से में आजकल वही रहती है।

जब भी वो आती है, मेरी दुनिया महका जाती है
एक खुशबू है वो एक खुशबू, जो रूह में बसती है।

इक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, हम साथ होकर ही पूरे हैं
मैं ठहरा आवारा बादल, वो हवाओं सी बहती है।

दिल चाहता है उसकी बातें, करता रहूँ बस करता रहूँ
वो जो ख़ामोश रहकर भी, अनकही हर बात कहती है।

ज़िंदगी में ज़िंदगी बनकर, जब से वो आयी इरफ़ान
सोहबत में उसकी यह ज़िंदगी, फूलों सी महकती है।।

मौज़ू – topic

“तो लिखता हूँ मैं”

जब मन नहीं करता है कुछ करने का, तो लिखता हूँ मैं
जब मन करता है मन को छूने का, तो लिखता हूँ मैं।

ज़िंदगी से लड़ते-लड़ते, ज़िंदगी गुज़र जाती है
जब मन करता है कभी जीने का, तो लिखता हूँ मैं।

कोशिश करता हूँ लफ़्ज़ों से,
जज़्बात जता सकूँ, जज़्बात छुपा सकूँ
जब मन करता है तुझे याद करने का, तो लिखता हूँ मैं।

बिन बादल बरसात,
देखी है कभी, सुनी है कभी
जब मन करता है कभी भीगने का, तो लिखता हूँ मैं।

मन की गहराई,
जितनी गहरी है, उतनी सुनहरी है
जब मन करता है इसमें उतरने का, तो लिखता हूँ मैं।

आसमान में उड़ने की ख़्वाहिश,
हर परिंदे की बस यही ख़्वाहिश
जब मन करता है कभी उड़ने का, तो लिखता हूँ मैं।

हँसते हुये कैसे रोया जाये,
सोचा है कभी, किया है कभी
जब मन करता है ऐसा करने का, तो लिखता हूँ मैं।।

#RockShayar

“मैं तेरी नज़र में हूँ”

लहू में हूँ, जिगर में हूँ, साँसों की हर लहर में हूँ
ज़रा आईना तो देखो जानाँ, मैं तेरी नज़र में हूँ।

पैरों को ठहराव अब भाता नहीं, भाये भी कैसे
जब से होश संभाला है, तब से ही सफ़र में हूँ।

इत्तेफ़ाक़न ही मिल जाओ, किसी मोड़ पे तुम
कितने बरसों के बाद, मैं आया तेरे शहर में हूँ।

ज़िंदगी को हमेशा, यही शिकायत रही मुझसे
सुकून से मैं घर पे नहीं, जीता भी सफ़र में हूँ।

सवाल पूछा जब दिलबर से, बोली वह माशूक शायर से
मैं तुम्हारी महबूब ग़ज़ल, जो कि बहर में हूँ।

एक ख़्वाब से जब बात हुई, तो उसने ये कहा
अँधेरी रात गुज़ारकर, मैं सुकूंभरी सहर में हूँ।

शीशा-ए-दिल हर रोज़ यह याद दिलाता है इरफ़ान
के मैं खुद को भूलकर किसी और के असर में हूँ।।

“निशाना मेरा चूका है मगर दूर तक जायेगा”

एक ना एक दिन तो ये राज़ भी खुल जायेगा
दिल की आह सुनकर ये दिल पिघल जायेगा।

ख़ुदा को ढूँढ़ने वाले, इतना तो ख़ुद पे यक़ीन रख
ख़ुदा को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते तू ख़ुद से मिल जायेगा।

ज़िन्दगी की शाम का, सूरज जब ढलने लगेगा
लौटकर हर एक परिन्दा अपने घर पर जायेगा।

जीतने की आदत, हर एक ज़ुनूनी की है यही आदत
हर बार जो गिरेगा उठेगा और फिर संभल जायेगा।

वक़्त की बिसात पे, कौन चलेगा अगली चाल
वक़्त आने पर तुम्हें सब पता चल जायेगा।

आग लगाकर तमाशा देखने वालों, अब ज़रा ये भी सुन लो
आग से जो खेलेगा वो ख़ुद भी जल जायेगा।

इतना भी ना इतराओ, अपनी नज़रों पे तुम
निशाना मेरा चूका है मगर दूर तक जायेगा।।

“डर के घर की दहलीज़ लांघकर जो ख़ुशी होती है”

डर के घर की दहलीज़ लांघकर जो ख़ुशी होती है
यक़ीन मानिये ऐसी ख़ुशी और कहीं नहीं होती है।

सोच के सागर को पार करना, महज एक दीवानगी है
ये दीवानगी तो अक्सर सोच से परे जाकर ही होती है।

बचपन से जो कहते आये, तुमसे ये ना हो पायेगा
वही जब ये कहे, “सच में ये तूने किया है !” तो ख़ुशी होती है।

सरहद के दोनों तरफ, एक उम्मीद बराबर बँटी है
बारूद से ढकी ज़मीं पे जो अमन के बीज बोती है।

तारों से दिल की बात करती है, अँधेरे से नहीं डरती है
सब सो जाते हैं लेकिन ये रात कभी नहीं सोती है।

बस एक यही सच तो बाक़ी रह गया है ज़िंदगी में
के कुछ पाने के लिये ज़िंदगी बहुत कुछ खोती है।

पत्थर के टुकड़ों को कीमती समझने वाले इंसान
सबसे कीमती इस जहान में तेरे मन का मोती है।।

“ज़िंदगी से ज्यादा कुछ नहीं, बस थोड़ी ज़िंदगी चाहिये”

ज़िंदगी से ज्यादा कुछ नहीं, बस थोड़ी ज़िंदगी चाहिये
जीने के लिये जो काफी हो, बस उतनी ज़िंदगी चाहिये

किश्तों में हर रोज़ यूँ, घुट-घुटकर जीना भी कोई जीना है
मौत से मुलाक़ात हो जिसमें, हमें नहीं ऐसी ज़िंदगी चाहिये

जो करना चाहे वो कर पाये, सपने वो सब सच कर दिखाये
ग़मों से कोसों दूर, फ़क़त हँसी-खुशी वाली ज़िंदगी चाहिये

बादलों के पार रहती है जो, हवाओं पर सवार रहती है वो
ख़्वाबों में रोज़ आती है जो, हक़ीक़त में वैसी ज़िंदगी चाहिये

इश्क़ बिना ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं, इश्क़ बिना बंदगी बंदगी नहीं
हर शख़्स को मोहब्बत के गुलाब से सजी हुई ज़िंदगी चाहिये

चाँद की रोशन चाँदनी है जो, माशाअल्लाह मरहबा आफ़रीं है वो
जो देखे वही कहे रश्क़-ए-क़मर, ऐसी हसीं ज़िंदगी चाहिये

अब और क्या कहूँ इरफ़ान, हाल-ए-दिल अपना करू बयान
जिसकी चाहत पाल रखी है दिल ने, हाँ वही ज़िंदगी चाहिये।

फ़क़त – केवल
आफ़रीं – जिसकी तारीफ़ मुमकिन नहीं
रश्क़-ए-क़मर – चाँद को भी जिससे ईर्ष्या हो

“राख को आग से क्या खतरा”

राख को आग से क्या खतरा, जिसे जलना था वो जल चुका
अब तो बस एक आस बची है, अंदर कहीं कोई फाँस चुभी है
आँसू बहाने से क्या फ़ायदा, दिल टूटना था सो टूट चुका
अब तो बस एक आह बची है, भीतर कहीं कोई चाह दबी है

फूट-फूटकर रोने से क्या होगा, घर जलना था सो जल चुका
अब तो बस एक दुआ बची है, ये ज़िंदगी जिसे भूल चुकी है

बेकुसूर साबित होने से क्या होगा, सज़ा मिलनी थी सो मिल चुकी
अब तो बस एक बात बची है, जज़्बात की याद खो चुकी है

ज़िंदगी को मौत से क्या खतरा, जिसे मरना था वो मर चुका
अब तो बस यही आस बची है, राख में कहीं कोई आग बची है।

“बेचैनियों को फिर से जगाने का वक़्त आ गया है”

जिन बेचैनियों को तूने अपने अंदर कहीं सुला रखा है
उन बेचैनियों को फिर से जगाने का वक़्त आ गया है।

अब जो कोई उड़ने से रोके, तो और ज्यादा उड़
इतना उड़ इतना उड़, के जाकर आसमां से जुड़।

बहुत जी ली तूने महफूज़ ज़िंदगी
अब है तेरी बारी कुछ कर दिखाने की।

इस बार ऐसी तरक़ीब लगा, ऐसा कोई दाव चल
के मुश्किल के लिये खुद, खड़ी हो जाये मुश्किल।

अब जो कोई रस्ता रोके, रस्ता नहीं खुद को बदल
अब जो कोई तुझको टोके, मंज़िल नहीं मंज़र बदल।

जिन आँसुओं को तूने अपनी आँखों में बचाये रखा है
उन आँसुओं को शोलों में बदलने का वक़्त आ गया है।

अब जो कोई जीने से रोके, तो और ज्यादा जी
इतना जी इतना जी, के पहले जैसे ज़िंदगी न जी।

बहुत कर ली तूने ग़ैरों की ग़ुलामी
अब है तेरी बारी तुझको हराने की।।

“नज़रों से जो दिल में घर कर ले, हाँ वही साहिर हूँ मैं”

सीने में संभालकर रखना, दिल चुराने में माहिर हूँ मैं
नज़रों से जो दिल में घर कर ले, हाँ वही साहिर हूँ मैं।

सफ़र में कई हमसफ़र मिले, अपने अंदर जो छुपे थे
ज़िंदगी के लंबे सफ़र का, बंजारा एक मुसाफ़िर हूँ मैं।

अपनी ही तलाश में उसे, कई बार लाश बनना पड़ा
जब से राह भटकी है रूह, तब से ही मुहाज़िर हूँ मैं।

निगाहों में जब क़ैद करता हूँ, रिहा नहीं होने देता हूँ
अपने मोहब्बत करने के अंदाज़ से मुताहसिर हूँ मैं।

एक जादू ही तो है ये ज़िंदगी, इससे ज्यादा और क्या है
सामने होकर भी ना दिखे जो, हाँ वही ज़ाहिर हूँ मैं।

ख़यालों के पंखों से, पलभर में सदियाँ नाप लेता हूँ
हुक्म कीजिये हुज़ूरे आला, ख़िदमत में हाज़िर हूँ मैं।

खेल चाहे लफ़्ज़ों का हो, या दिलजले इस दिल का
यकीन मानिये इरफ़ान, इन दोनों में माहिर हूँ मैं।।

साहिर – Magician
मुहाज़िर – Refugee
मुताहसिर – Affected
ज़ाहिर – Direct/In front of
ख़िदमत – Service
[12:56 AM, 10/23/2017] +91 77377 13079:

“परिंदे को कब तक पिंजरे में रखोगे”

परिंदे को कब तक पिंजरे में रखोगे
एक न एक दिन तो वो उड़ जायेगा।

ऐसी उड़ान भरेगा के फिर
आसमान उसका घर बन जायेगा।

परिंदे को कब तक पिंजरे में रखोगे
एक न एक दिन तो वो उड़ जायेगा।

पलभर में पंखों से जो, नापे ये सारा जहान
बादलों से बातें करे, और चूमे गगन के गाल।

परिंदों को अपनी जान से ज्यादा, प्यारी अपनी आज़ादी हैं
परिंदों के लिये तो ये आकाश ही, सुनहरे सपनों की वादी है।

परिंदे को कब तक क़ैद में रखोगे
एक न एक दिन तो वो उड़ जायेगा।

ऐसी परवाज़ लेगा के फिर
नील अंबर उसका घर बन जायेगा।

परिंदे को कब तक पिंजरे में रखोगे
एक न एक दिन तो वो उड़ जायेगा।।

“वक़्त और मोहब्बत दोनों के दरमियाँ कोई सांठ-गांठ है”

वक़्त और मोहब्बत
दोनों के दरमियाँ कोई सांठ-गांठ है।

दोनों पास तो हसीं है ज़िंदगी
दोनों दूर तो नहीं है ज़िंदगी।

जाने कहाँ है, इस दिल का वो दिल
जाने कौन हैं, इस दिल की वो मंज़िल।

बिना इस दिल के, भला कौन जी सका है आज तक
यह बात उस आशिक से पूछो, जो जला है रात भर।

ख़ता नज़रों ने की, पर सज़ा दिल को मिली
तस्वीर नज़रों में थी, पर आग दिल में लगी।

खुशी और ग़म
दोनों के दरमियाँ कोई सांठ-गांठ है।

दोनों पास तो सही है ज़िंदगी
दोनों दूर तो नहीं है ज़िंदगी।

जाने कहाँ है, इस दिल का वो साहिल
जाने कौन हैं, इस दिल का वो क़ातिल।।

“शर्त यही है मोहब्बत के इम्तिहान की”

ना तुम्हें याद कर सकता हूँ, ना तुम्हें भूल सकता हूँ
शर्त यही है मोहब्बत के इम्तिहान की।

जिस पल में साँस लेता हूँ, उस पल में याद आती हो
जिस पल में याद आती है, उस पल के साथ आती हो।

चाहत के समंदर में जब भी गोता लगाया
मन का हर एक मोती चमकता हुआ पाया
लेकिन जब मन के अंदर गोता लगाया
तो मन के समंदर को सूखा ही पाया
मीलों गहराई तक, काई तक नहीं जमी थी वहाँ
पानी तो बहुत था मगर, था सब आँखों में जमा।

वही पानी, जिसे बेवज़ह बहने की इज़ाज़त नहीं
हाँ गर जज़्बात अश्क़ों की शक़्ल अख़्तियार कर सके
तो इज़ाज़त है बहने की।

इज़ाज़त मिलते ही आँसुओं का सैलाब उमड़ने लगता है
आँखों से अश्क़ों की रिहाई का
यह मंज़र बड़ा ही गीला है।

ना तुम्हें महसूस कर सकता हूँ, ना तुम्हें छू सकता हूँ
शर्त यही है इश्क़ के इम्तिहान की।।

“ये ज़रूरी नहीं के डरे हुये लोग अक्सर अल्फ़ाज़ों के पीछे छुपते हैं”

ये ज़रूरी नहीं के डरे हुये लोग अक्सर अल्फ़ाज़ों के पीछे छुपते हैं
कभी-कभी चंद अल्फ़ाज़ भी काग़ज़ पर खुद बखुद उतर आते हैं।

इश्क़ में हँसते हुये जल जाना,
एक अंगारे और सूफ़ी की है यही अदा
अपनी ही भड़कायी आग में, ये दोनों मुस्कुराते हुये जलते हैं।

ख़यालों की ख़याली दुनिया, दरअसल एक हक़ीक़त है
तभी तो गहरे ख़याल, कमी या जज़्बात की नमी में पनपते हैं।

अनकहा जो होता है, उसे कहने का ज़रिया क़लम है
गर शिद्दत की स्याही हो क़लम में तो अल्फ़ाज़ महकते हैं।

एहसास की मीठी ज़ुबाँ, सबकी समझ में ना आये
जिसकी समझ में आ जाये, उसे ज़िंदगी के कई रूप दिखते हैं।

मोहब्बत में इंतज़ार बहुत है, मोहब्बत इंतज़ार की हद है
मोहब्बत के इंतज़ार में, दिल के जज़्बात और भी निखरते हैं।

ये ज़रूरी नहीं के टूटे दिलवाले हमेशा लफ़्ज़ों का सहारा लेते हैं
कभी-कभी कुछ एहसास भी डायरी में खुद बखुद उतर आते हैं।।

“लिखना तो मैंने सीख लिया, पर जज़्बात से दूर हो गया”

लिखना तो मैंने सीख लिया, पर जज़्बात से दूर हो गया
पता नहीं ऐसा क्या हुआ के अपने आप से दूर हो गया।

यारों ने बहुत समझाया, पर मुझे यह एहसास नहीं था
बाद में यह एहसास हुआ के मैं एहसास से दूर हो गया।

ख़ामोशी की चादर ओढ़े, एक लम्हे ने जब आवाज़ लगाई
तब मुझे यह पता चला मैं अपनी आवाज़ से दूर हो गया।

हर अंदाज़ का अपना एक अंदाज़ होता है, राज़ होता है
इतने अंदाज़ बदले के खुद अपने अंदाज़ से दूर हो गया।

अल्फ़ाज़ों में वज़ूद अपना, नुमायाँ करने चला इक शख़्स
अपना कल बनाते-बनाते वो अपने आज से दूर हो गया।

एकतरफा इश्क़ की बीमारी, बड़ी ही लाइलाज बीमारी
जान बूझकर दिल इस बीमारी के इलाज से दूर हो गया।

काग़ज़ और क़लम से दूरी ऐसे लगती है इरफ़ान
जैसे कोई परिन्दा अपनी परवाज़ से दूर हो गया।।

“कुछ बातें अनकही”

तेरे-मेरे दरमियान कुछ बातें अनकही रह गयी
आँखों में छुपी वो ख़ामोशी बहुत कुछ कह गयी

बहुत कुछ कहकर भी, कुछ नहीं कहा हमने
जो कुछ कहा हमने, वो सब कहीं था दिल में

जो आवाज़ हमने सुनी, वो आवाज़ हमारे दिल की थी
वो आवाज़ हमारे दिल की, अपनी आँखों से हमने सुनी

एक-दूसरे को चाहकर भी ना भुला पाये हम
एक-दूसरे को चाहकर भी ना बता पाये हम

के एक-दूसरे को कितना चाहते हैं हम
एक-दूजे से कितना झूठ बोलते हैं हम

झूठ भी ऐसा, के जो झट से पकड़ में आ जाये वैसा
प्यार भी ऐसा, के ना किया हो कभी किसी ने जैसा

तेरे-मेरे बीच कुछ अल्फ़ाज़ अनकहे रह गये
आँखों में छुपे वो जज़्बात बहुत कुछ कह गये

जो अल्फ़ाज़ हमने पढ़े, वो अल्फ़ाज़ हमारे दिल के थे
वो अल्फ़ाज़ हमारे दिल के, अपनी आँखों से हमने पढ़े।

RockShayar⁠⁠⁠⁠

“जीवन है तो संघर्ष है”

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जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है।

राग-द्वेष प्रेम-घृणा, मनोस्थिति हो चाहे जैसी भी
भूत भविष्य वर्तमान, परिस्थिति हो चाहे कैसी भी
उस परिस्थिति के अनुसार ढ़ल जाना ही तो हर्ष है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है।

वृद्ध हो या समृद्ध, यह जीवन हो चाहे जैसा भी
धावक हो या पावक, यह मन हो चाहे कैसा भी
इस मन को छू लेना ही तो आत्मा का स्पर्श है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है।

पृथ्वीलोक मृत्युलोक, संसार हो चाहे कोई भी
वीर रस षोडश श्रृंगार, विचार हो चाहे कोई भी
उन विचारों को गति देना ही तो जीवन का अर्थ है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है
संघर्ष को सहर्ष स्वीकारना ही जीवन की पहली शर्त है
जीवन है तो संघर्ष है, बिन संघर्ष सब व्यर्थ है।।

RockShayar

“समय ने फिर हुंकार भरी है, रणभूमि तुझे पुकार रही है”

समय ने फिर हुंकार भरी है, रणभूमि तुझे पुकार रही है
रक्त की लाल बूँदें नहीं, अब हृदय में तेरे ज्वाला भरी है।

तू स्वयं अपनी सृष्टि का, एक नया सृजन आरंभ कर
तू स्वयं मन की दृष्टि से, एक नया जीवन प्रारंभ कर।

आहुतियाँ जितनी भी दी तूने, वो व्यर्थ नहीं जायेगी
वो आहुतियाँ सब तेरे संग, तेरी जीत के गीत गायेगी।

काल के विशाल चक्र का, तू मात्र एक अंश है
सदियों से सोया हुआ, स्वाभिमान का वंश है।

बुराई के असुर से, तुझे हर समय लड़ना होगा
भयरूपी लहर से, तुझे हर समय भिड़ना होगा।

संकल्प जितने भी लिये तूने, वो संपूर्ण होंगे एक दिन
स्वप्न जितने भी देखे तूने, वो सब पूर्ण होंगे एक दिन।

तमस के घोर विनाश का, कारण बनेगा तू एक दिन 
सूर्य के जैसी प्रचंड आभा, धारण करेगा तू एक दिन।

समय ने फिर बिगुल बजाया, समर में वो ध्वज लहराया
रक्त का कोई कण नहीं, अब हृदय में प्रतिशोध को पाया।

RockShayar

“मेघ की तरह हैं केश तुम्हारे, मृग की तरह हैं नयन”

मेघ की तरह हैं केश तुम्हारे, मृग की तरह हैं नयन
जब भी तुम चलती हो, बस तब ही चलती है पवन।

मौन के अनंत अंतरिक्ष में, गूँज रही है तुम्हारी वाणी
तारों की तरणी है तू, मन-मरुस्थल की हरित ढ़ाणी।

नेत्र तुम्हारे हैं अचूक धनुर्धर, हृदयभेदी बाण चलाते हैं
अधर तुम्हारे हैं मधु-सरोवर, नीर की प्यास बुझाते हैं।

मुखमंडल की आभा, अहर्निश सूर्य के जैसी लगती है
कंठ में एक स्वरमाला, सदैव संगीत बनकर बहती है।

आभूषण तुम्हारे नक्षत्र, यह वसुंधरा है वस्त्र
गगन तुम्हारा शस्त्र, एवं पवन अमोघ अस्त्र।

स्वप्नलोक में प्रतिदिन तुमसे भेंट होती है
प्रतीत होता है मानो स्वयं से भेंट होती है।

मन-कानन में बरसती हुई, प्रेम की पावन पावस हो तुम
निर्बल को जो बल देता है, मन में छुपा वो साहस हो तुम।

चपला कहूँ कि चंचला, या फिर कहूँ तुम्हें मैं कादंबिनी
दामिनी के सौदामिनी, या फिर चंद्रसुशोभित यामिनी।

कौन हो तुम, कोरी कल्पना हो, या हो कोई सुंदरी
अनामिका में धारण की मैंने, तुम्हारे नाम की मुँदरी।।⁠⁠⁠⁠

“चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम”

चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।

वैसे भी क़दमों को रुकने की आदत कहाँ
ये तो वहीँ चले जाये, रास्ते ले जाये जहाँ।

जहाँ रास्तेभर रास्तों का सफ़र हो
और मंज़िल से दिल ये बेख़बर हो।

चलते-चलते इतनी दूर आ गये हैं हम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।

वैसे भी हमको अब लौटने की चाहत कहाँ
हम तो वहीँ बस जाये, ज़िंदगी रहती जहाँ।

जहाँ ज़िंदगीभर ज़िंदगी बस एक सफ़र हो
फिर चाहे सामने मौत हो या मंज़िल, ना कोई डर हो। 

चलते-चलते इतनी दूर आ गये क़दम
के लौटना जहाँ से नामुमकिन है अब।।

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“तो तस्वीर कुछ और ही होती”

हमारा मिलना-बिछुड़ना तो तक़दीर का लिखा है
जो हम साथ रह पाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

सालों से तुम्हारा इंतज़ार, और उस पर दिल ये बेक़रार
गर हम एक हो जाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

एक दूसरे को बहुत चाहते थे, हम कमियां और ख़ूबियां जानते थे
जो जज़्बात जताते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

अपने हिस्से का दर्द हमने, ना बताया कभी, ना जताया कभी
गर ग़म ना छुपाते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

बिन पूछे सब जान लेना, एक दूसरे को मान देना
जो नज़रें मिला लेते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

जमाने की दीवार खड़ी थी, और ज़िंदगी ज़िद पर अड़ी थी
गर बंदिशें तोड़ जाते हम, तो तस्वीर कुछ और ही होती।

अफ़साना अपनी मोहब्बत का, कुछ यूँ लिखा हमने इरफ़ान
जो हम पहले मिल जाते, तो तस्वीर कुछ और ही होती।।

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“ज़िद क्या होती है, ये ज़िद को अब तू बता दे”

हद क्या होती है, ये हद को अब तू समझा दे
ज़िद क्या होती है, ये ज़िद को अब तू बता दे।

खुद को हैरान करने का यही सही वक़्त है
बेचैनी खुद में छुपाने का नहीं अब वक़्त है।

अब और इंतज़ार करने का कोई मतलब नहीं
छू न सके जिसे तू, जहां में ऐसा कोई कद नहीं।

गर कद ही बढ़ाना है तो पहले अपने आप को जगा
ना किया हो किसी ने, ऐसा कोई काम करके दिखा।

पहले तो काम से नाम बनेगा, फिर नाम से काम चलेगा
काम से ही तू आगे बढ़ेगा, काम से ही तेरा काम चलेगा।

तलब क्या होती है, ये तलब को तू अब बता दे
तड़प क्या होती है, ये तड़प को तू अब समझा दे।

दुश्मन को हैरान करने का यही सही वक़्त है
अगन को मन में दबाने का नहीं अब वक़्त है।

अब और खुद से भागने का कोई मतलब नहीं
पा न सके जिसे तू, ऐसी तो कोई हसरत नहीं।।

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“मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली”

मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली
कल मैंने तुमसे थोड़ी नींद मांगी थी।

नींद तो नहीं दी तुमने
पर अपना तकिया दे दिया मुझे।

दिनभर मैं जिसका सिरहाना लगाता हूँ
और रात को उसी सिरहाने के नीचे तुम्हारी तस्वीर रखता हूँ।

वही तस्वीर जिस पर ग़ज़ल लिखने की ख़्वाहिश रखता हूँ
वही तस्वीर जिसकी आँखें पढ़ने की कोशिश करता हूँ।

वही गुज़ारिश जिसे सुनकर भी तुम नहीं सुनती हो
हाँ वही बारिश जिसमें भीगकर भी ख़ुश्क़ रहती हो।

इस तकिये से तुम्हारी खुशबू आती है
तुम्हारी खुशबू, जो मुझे दीवाना बनाती है।

दीवाना भी ऐसा, जो कभी किसी ने ना देखा
गर देखा भी हो तो कभी किसी ने ना जाना।

मेरी रातों की नींद उड़ाने वाली
कल मैंने तुमसे थोड़ी नींद मांगी थी।

नींद तो नहीं दी तुमने
पर अपना तकिया दे दिया मुझे।

आज जब मैं उस तकिये से लिपटकर सोया
तो पता चला, के नींद क्या होती है, चैन क्या होता है।

शुक्रिया मुझे मेरी नींद से मिलवाने के लिये
शुक्रिया रोज़ाना मेरे ख़्वाबों में आने के लिये।।

RockShayar.wordpress.com

“फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी”

फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी
जहाँ ना आने की कसम थी खायी।

हालाँकि यह एहसास होने में बहुत वक़्त लगा
हर एक एहसास को खोने में बहुत वक़्त लगा।

एक शाम साहिल से बहुत दूर निकल गया समंदर
लौटा जब तक वो, ढ़ह चुका था उसका रेत का घर।

लहरों से कई दिनों तक नाराज़ रहा वो
गुमसुम सा महीनों बेआवाज़ रहा वो।

कितनी ही कश्तियाँ उसके ऊपर से गुज़र गयी 
वो फिर भी ख़ामोश सा एक जगह ठहरा रहा।

आखिरकार एक नदी ने अपना रुख़ मोड़ा
मुश्किल से दिल का रिश्ता जोड़ा।

फिर से वहीं ले आयी ज़िन्दगी
जहाँ ना आने की कसम थी खायी।

हालाँकि यह समझने में बहुत वक़्त लगा
हर एक याद को मिटने में बहुत वक़्त लगा।।

#राॅकशायर

“तेरी परछाई संभाल कर रखी है मैंने”

तेरी परछाई संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि अंधेरा घना होने वाला है

तुम्हे ख़बर नहीं थी मेरे आने की
मगर मुझे ख़बर थी तेरे जाने की

वो पल, जो पल भर के लिए हम को मिले थे
न उनमें कोई शिकवे थे, न उनमें कोई गिले थे

तेरी आवाज़ सहेज कर रखी है मैंने
पता था कि ख़ामोशी कायम होने वाली है

तुमने कभी बताया नहीं, कि कौन हो तुम
तफ़्तीश करता रहा, मैं ज़िन्दगी भर यही

इस बार जब मुलाक़ात होगी, तो पूछूँगा
इस मुलाक़ात में कितने अलविदा छुपे हैं

हर बार यह अलविदा मेरी जान ही ले लेता है
पता नहीं कब इसके मुँह, मेरा खून लग गया

तेरी तस्वीर संभाल कर रखी है मैंने
पता था कि याददाश्त जाने वाली है।।

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“जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है”

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन कहीं दूर चला जाता है।

जहाँ से फिर लौटकर आना मुमकिन नहीं होता है
और जिसे भूल जाना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ उन यादों को याद रखना
मुमकिन होता है तो सिर्फ उन यादों को याद करना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये दिल कहीं पर खो जाता है।

जहाँ से फिर खुद को ढूँढ लाना मुमकिन नहीं होता है
और जिसे छोड़कर जाना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ उस दर्द को महसूस करना
मुमकिन होता है तो सिर्फ उस दर्द को महफ़ूज़ रखना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन मेरा बंजारा हो जाता है।

जहाँ पे फिर मन पर काबू रखना मुमकिन नहीं होता है
और मन को मना कर देना इतना आसान नहीं होता है।

आसान होता है तो सिर्फ अपने मन की आह सुनना
मुमकिन होता है तो सिर्फ अपने मन की राह चुनना।

जब भी मुझे तुम्हारी याद आती है, तब ये याद आता है
के तुम्हें याद करते-करते, ये मन कहीं दूर चला जाता है।

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“चाहत का चिकन (Poetic Recipe)”

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चाहत का चिकन
मन के मसालों में
यादों की धीमी आँच पर जब पकता है
तब कहीं जाकर इस रूह का पेट भरता है।

हालाँकि इसे लज़्ज़तदार बनाने के लिये
अरमानों की अदरक
यक़ीन के लहसुन
और प्यारभरे प्याज का पेस्ट भी ज़रूरी है।

साथ में हो अगर
थोड़ी ख़्वाहिशों की तीखी हरी मिर्च
और गुज़रे हुये पलों का गरम मसाला।

बस फिर क्या कहना
फिर तो बस इंतज़ार करना
उस खुशबू का
जो उड़ा दे होश
तन और मन दोनों का।

आखिर में दिलबर मेरे 
दही डालना मत भूलना।

जब पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाये
तब रिश्तों की रोटी
और सपनों की सलाद के साथ सर्व करे
चाहे तो साथ में 
चैन की एक चिल्डवाली पेप्सी भी ले ले।

चाहत का चिकन
मन के मसालों में
यादों की धीमी आँच पर जब पकता है
तब कहीं जाकर इस रूह का पेट भरता है।।

“Henna (मेंहदी/हिना)”

खुद को मिटाकर हमेशा दूसरों को खुशियाँ देती है
हिना तो हर महफ़िल को दिल के रंग में रंग देती है।

हिना की क़िस्मत है पिसना
हिना की फ़ितरत है रंगना
हिना की हसरत है खिलना
हिना की क़ुदरत है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

दुल्हन के हाथों में लगने वाली मेंहदी भी यही है
हर औरत की ज़ेबोज़ीनत संवारती भी यही है।

बिना इसके ना कोई शगुन है
ना कोई फागुन
बिना इसके ना कोई मिलन है
ना कोई साजन।

मेंहदी लगे हाथों को खुद पर नाज़ होता है 
मेंहदी रचे हाथों में रुमानी एहसास होता है।

अपने अरमान दबाकर दिल में अरमान जगाती है
हिना तो पिसते-पिसते खुशी से लाल हो जाती है।

हिना का नसीब है पिसना
हिना को हबीब है जचना
हिना की तक़्दीर है रंगना
हिना को अज़ीज़ है रचना।

हिना की कहानी भी कितनी बेमानी है 
ये जितना पिसती है उतना निखरती है।

हिना की तासीर बहुत ही ठंडी होती है
जलन और तपिश को ये दूर कर देती है।

सब्ज़ पत्तियों की तरह, हिना के जज़्बात भी सब्ज़ होते हैं
हिना पर कोई कैसे लिखे, लिखने को लफ़्ज़ नहीं होते हैं।।

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हिना – मेंहदी
ज़ेबोज़ीनत – Beauty 
रुमानी – Romantic
हबीब/अज़ीज़ – Dear 
तासीर – Nature
सब्ज़ – Green
जज़्बात – Emotions
लफ़्ज़ – Word

“ये कैसी आहट है, जो कभी सुनाई नहीं देती”

ये कैसी आहट है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की सरसराहट है, ये बस महसूस होती।

धड़कने की आदत को, दिल कभी छोड़ता नहीं
जो छोड़ता कभी, तो दिल ये लाखों तोड़ता कहीं।

ये कैसी ख़ामोशी है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की सरगोशी है, जो सुकूंभरे कुछ पल देती।

बदलने की आदत को, वक़्त कभी बदलता नहीं
जो बदलता कभी, तो यादें वो पीछे छोड़ता कई।

ये कैसी ख़्वाहिश है, जो कभी पूरी नहीं होती 
रूह की गुज़ारिश है, जो कभी अधूरी नहीं होती।

महकने की फ़ितरत को, ख़ुशबू कभी छोड़ती नहीं
जो छोड़ती कभी, तो ख़ुशबू वो अपनी छोड़ती कहीं।

ये कैसी आवाज़ है, जो कभी सुनाई नहीं देती
रूह की परवाज़ है, जो कभी दिखाई नहीं देती।

बरसने की आदत को, बादल कभी बदलते नहीं
जो गरज़ते हैं ज्यादा, वो बादल कभी बरसते नहीं।

ये कैसी ज़िन्दगी है, जो कभी जीने नहीं देती
जो जी उठे एक बार, तो फिर मरने नहीं देती।।

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“तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं सितारों का जहां”

नील समंदर कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं नीला आसमां
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं सितारों का जहां।

तेरी साँसें मेरी साँसों में समाई हैं
तेरी यादें मैंने डायरी में छुपाई हैं।

तेरी आँखें मेरी आँखों का तारा हैं
तेरी बातें मेरे जीने का सहारा हैं।

बहती नदी कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं हवाओं की सदा
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं वादियों का जहां।

तेरी खुशबू मेरी रूह में समाई है
तेरी आरज़ू मैंने दिल में जगाई है।

तेरी तलब ही मेरी तड़प की असल ख़ुराक है
तेरी कसम ओ सनम, तू जीने की इक आस है।

उड़ता पंछी कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं लहरों की ज़बां
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं ख़्वाबों का जहां।

तेरी तस्वीर मेरी आँखों में समाई है
तेरी तस्वीर मैंने आँखों से बनाई है।

तेरी आँखें मेरे सुकून का पिटारा हैं
तेरी यादें मेरे जीने का सहारा हैं।

पहली बारिश कहूँ तुम्हें, या कहूँ मैं ज़मीं की दुआ
तेरी आँखें आँखें नहीं, ये तो हैं जादूगरी का जहां।।

“बिन तेरे ख़यालों का क्या करूँ”

मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूँ
बिन तेरे ख़यालों का क्या करूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या कहूँ
बिन तेरे लफ़्ज़ों को कैसे लिखूँ।

मुझे नहीं पता कि तुम किस गली में रहती हो
मुझे इतना पता है कि तुम मुझमें ही रहती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मुझे कितना चाहती हो
मुझे इतना पता है कि तुम उड़ना चाहती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो
मुझे इतना पता है कि तुम कुछ अच्छा सोचती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम मेरे मन की डायरी पढ़ती हो 
मुझे इतना पता है कि तुम मेरी हर शायरी पढ़ती हो।

मुझे नहीं पता कि तुम्हें सच कैसे पता चलेगा
मुझे इतना पता है कि तुम्हें जल्द पता चलेगा।

जिस रोज़ पता चल जाये, दौड़ी चली आना
उस रोज़ ना चलेगा जानाँ, फिर कोई बहाना।

तब मुझे पता चलेगा कि मैं क्या हूँ
तब मुझे पता चलेगा कि मैं तेरा हूँ।

तब मुझे पता चलेगा कि मैं क्या कहूँ
लफ़्ज़ों के लबों पे नाम तुम्हारा लिखूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूँ
बिन तेरे अब अपना क्या करूँ।

मुझे नहीं पता कि मैं क्या कहूँ
बिन तेरे एक लम्हा कैसे जिऊँ।।

“इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी”

खुली-खुली वो तेरी गीली जुल्फ़ें
झुकी-झुकी वो तेरी नीली पलकें
मीठी-मीठी वो तेरी प्यारी बातें
याद करके जिन्हें गुज़री मेरी रातें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

तुझे देखा तो बस देखता ही रह गया
तेरी लहर के संग-संग मैं भी बह गया
क़तरा भी ना बाक़ी मुझमें मैं रह गया 
एहसास हुआ के तुमसे इश्क़ हो गया
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

दिलनशीं वो तेरी शोख़ अदाये
दिलकशीं वो तेरी होश उड़ाये
खुशबू वो तेरी मुझको महकाये
देखना चाहे तुझको मेरी निगाहें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।

जादूभरी वो तेरी मनपसंद बातें 
जादूगरी वो तेरी मुहरबंद यादें
जादू जैसी वो तेरी नज़रबंद आँखें
देखकर जिन्हें जी उठती मेरी साँसें
दिल पूछता है बार-बार यही सवाल
के इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी
दिल से दिल की सीधी बात कब होगी
इस बार फिर मुलाक़ात कब होगी।।

“तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की”

वो छुप-छुपकर तुम्हें देखना मेरा
वो नज़रों के ख़त तुम्हें लिखना मेरा
वो हद से ज्यादा तुम्हें चाहना मेरा
वो तुमसे ज्यादा तुम्हें सोचना मेरा
मुझे ख़बर है बेख़बर मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो हर चेहरे में तुमको ही देखना मेरा
वो नज़र आने तक पीछा करना मेरा
वो रब से हमेशा तुमको मांगना मेरा
वो तुमसे ज्यादा तुमको जानना मेरा
मुझे ख़बर है इस क़दर मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो कुछ ना कहकर सब कहना मेरा
वो लहरों की तरह साथ बहना मेरा
वो लफ़्ज़ों में तुम्हें ज़िंदा रखना मेरा
वो यादों में तुमको बयां करना मेरा
मुझे ख़बर है हमसफ़र मेरे यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की। 

वो ना चाहकर भी तुमसे दूर होना मेरा
दर्द के दरिया में पल-पल डूबना मेरा
वो हद से ज्यादा खुद को सताना मेरा
अपने हाथों से यादों को जलाना मेरा
मुझे ख़बर है बेसबर मेरे संसार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की
तुम्हें ख़बर तक नहीं मेरे प्यार की।।

“हम जान बूझकर जाने जाँ तुमसे हार जाते है”

किसी से नहीं बस अपने दिल से हार जाते है
हम जान बूझकर जाने जाँ तुमसे हार जाते है।

जब भी तुमको देखते है, बड़ी हसरत से देखते है
दिलबर मेरे उसी पल, दिल ये तुम पे हार जाते है।

पहले तो मिलती नहीं, मिले तो फिर हटती नहीं
हम किसी से नहीं बस तेरी नज़र से हार जाते है।

तेरी शोख़ हसीन अदायें, मेरे दिल का चैन चुराये
अपने दिल का चैन हम बड़े आराम से हार जाते है।

खुशी का क्या है, पलभर में मिले सदियों तक ना मिले
तेरी खुशी के लिये हर खुशी हम, खुशी से हार जाते है।

हारी बाज़ी जीतने की, जब भी बारी आती है
किसी से नहीं बस अपने आप से हार जाते है।

ज़िंदगी की यह जंग भी, कैसी जंग है इरफ़ान
सब कुछ जीतकर भी आखिर में हार जाते है।।

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“मैं हर रोज़ तुम पर एक ग़ज़ल लिखना चाहता हूँ”

कई दिनों से तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ
मैं हर रोज़ तुम पर एक ग़ज़ल लिखना चाहता हूँ।

हालाँकि ज्यादा वक़्त नहीं हुआ है हमें मिले हुये
मैं फिर भी तुम्हारे बारे में सब जानना चाहता हूँ।

आँखों ने आँखों को चुन लिया, ओ रे पिया मोरे पिया
आँखों से आँखों के अनकहे अल्फ़ाज़ पढ़ना चाहता हूँ।

अब और क्या सोचना, बस यही अब सोचना
मैं तुम से ज्यादा तुमको अब सोचना चाहता हूँ।

चेहरों के घने जंगल में, चेहरा तेरा नूरानी है
मैं हर चेहरे में बस तेरा, चेहरा देखना चाहता हूँ।

दिल मेरा सहम जाता है,
जब भी दूर जाने का वक़्त पास आता है
मैं दूरियों का नहीं बस तुम्हारा होना चाहता हूँ।

दिलबर मेरे, दिल की खुशबू है तू, आरज़ू है तू
मैं रोज़ तुम्हें ज़िंदगी की तरह जीना चाहता हूँ।।

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“इश्क़ के हिसाब में थोड़ा सिफ़र हूँ मैं”

तेरी नज़रों के सफ़र से नहीं बेख़बर हूँ मैं
बस इश्क़ के हिसाब में थोड़ा सिफ़र हूँ मैं। 

जब से तुझको देखा है, खुद को नहीं देखा मैंने
मालूम नहीं जाने जहां, कहाँ और किधर हूँ मैं।

धीरे से दरवाज़ा खोलना, और धूल मत उड़ने देना
कई दिनों से बंद पड़ा, यादों का यतीमघर हूँ मैं। 

तेरे साये में सुकून मिला, मुझको यह जुनून मिला
के तपती हुई दोपहर में, शान से खड़ा शजर हूँ मैं।

ये उस दिन की बात है, जिस दिन सब कुछ बदल गया
बस उस दिन से दरबदर, सफ़र में इस क़दर हूँ मैं।

ख़यालों के झोंके जब भी आते हैं, मुझको ये बताते हैं
के सिर्फ एक झोंका नहीं, ख़यालों का बवंडर हूँ मैं।

वक़्त की साज़िश, और दर्द की आतिश ने सब कुछ जला दिया इरफ़ान
पर जलकर भी ना जला जो कभी दिल का वो घर हूँ मैं।

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सफ़र – यात्रा
सिफ़र – शून्य, ज़ीरो
यतीमघर – अनाथालय
शजर – पेड़, वृक्ष
आतिश – आग

“दरअसल मेरा घर था”

तुम लोगों ने जिसे ठूंठ समझकर जला दिया था
ख़्वाबों का वो ऊँचा शजर, दरअसल मेरा घर था।

बरसों लगे थे मुझको, जिसे बसाने में, सजाने में
यादो का वो पुराना शहर, दरअसल मेरा घर था।

दिल के शहर में, बंजारे की तरह दर-दर भटकना 
ख़यालों का वो तन्हा सफ़र, दरअसल मेरा घर था।

मुस्कुराते हुये जलता रहा, वो मुरझाकर भी खिलता रहा
ख़ताओं से था जो बेख़बर, दरअसल मेरा घर था।

कहानी से तो कर ली, पर पानी से ना कर पाये दोस्ती
डूब जाने का वही पुराना डर, दरअसल मेरा घर था।

मोहब्बत ने ऐसा सिला दिया, के नफ़रत से नाता जोड़ लिया
दर्द-ए-दिल से अमीर वो दर, दरअसल मेरा घर था।

ज्यादा समझ नहीं है मुझे दुनियादारी की इरफ़ान
जो मिल गया वही मुकद्दर, दरअसल मेरा घर था।।

“मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना”

मोहब्बत को कभी समझने की कोशिश न करना
मोहब्बत को दिल से मिटाने की साज़िश न करना।

कौन छुपा सका हैं, जज़्बात अपने अंदर यहाँ
ख़ामोशी से मोहब्बत छुपाने की कोशिश न करना।

बिखर जायेगी ज़िंदगी, पलभर में तुम्हारी
मोहब्बत में खुद को आज़्माने की कोशिश न करना।

होती है तो शिद्दत से होती है, वरना नहीं होती है
मोहब्बत से कभी दिल बहलाने की कोशिश न करना।

आग से दूर रहने में ही भलाई है, ये बात तुम्हें कितनी बार समझाई है
दिलजलों के दिल जलाने की नाकाम कोशिश न करना।

कौन इतना बेवकूफ है, जो आँखों का अनकहा न समझे
अश्क़ों की आड़ में जज़्बात छुपाने की कोशिश न करना।

हम पहले ही बहुत पास आ चुके हैं, खुद को ये एहसास करा चुके हैं
अब इससे ज्यादा और पास आने की कोशिश न करना।

मोहब्बत का क्या है, पलभर में हो या सदियों तक न हो
शोहरत के लिये मोहब्बत करने की कोशिश न करना।।

“ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है”

ना जाने तक़दीर में अभी और क्या-क्या लिखा है
यूँ समझ लीजिये के दर-ब-दर भटकना लिखा है।

मोहब्बत तो दिल से की, पर कह न पाये उसे कभी
ताउम्र अब तो मोहब्बत के लिये तरसना लिखा है।

जहाँ कहीं भी है तू, सुन मेरे दिल की आवाज़ तू
तुझे भुलाने की कोशिश में तुझे याद करना लिखा है।

हादसों पर हादसे मिले, तभी तो बने हम दिलजले
सौ बार गिरकर आखिर में खुद संभलना लिखा है।

अभी कहाँ रुकने की बात, अभी कहाँ वो चैन की रात
अभी तो दोपहर में दूर तक, नंगे पाँव चलना लिखा है।

अपने होने का एहसास हुआ, कुछ तो है जो ख़ास हुआ
ख़्वाबों के गुलशन में खुशबू बनकर महकना लिखा है।

कम उम्र में बड़ी पहचान, इत्तेफाकन नहीं है इरफ़ान
इतना तो है कि किस्मत में कुछ अलहदा लिखा है।।

“तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे”

तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे
तेरे-मेरे साथ से मोहब्बत है मुझे।

तुझसे मिला तो यूँ लगा, जैसे खुद से मुलाक़ात हो गई
तेरी हर मुलाक़ात से मोहब्बत है मुझे।

बिनकहे सब सुन लेना, मन ही मन मन की बात कहना
तेरे हर जज़्बात से मोहब्बत है मुझे।

पलभर को मिले जो, उम्रभर को जले वो
उन चंद लम्हात से मोहब्बत है मुझे।

मुझे मेरा पता देते हैं, जीने की वज़ह देते हैं
तेरे हर एहसास से मोहब्बत है मुझे।

पहली नज़र में प्यार, नज़रों से दिल पर वार
तेरे हर अंदाज़ से मोहब्बत है मुझे।

जो ख़ामोशी छाई तो पता यह चला इरफ़ान
तेरी हर बात से मोहब्बत है मुझे।।

“आज़ादी क्या होती है”

उड़ते हुये परिंदों से पूछो, आज़ादी क्या होती है
शहर के बाशिंदों से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

अंधेरे में साँस घुटती है, ज़िंदगी की लौ बुझती है
कभी किसी क़ैदी से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

जब कोई गाँव मरता है, उसकी क़ब्र पर शहर बसता है
कभी किसी घर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

चाँद के पार चले जाना, सूरज को गले से लगाना
कभी किसी सहर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

दिल में तूफ़ान जगाये, कश्ती किनारे सब भूल जाये
कभी किसी लहर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

रास्तों से गुज़रते हुये, खुद अपना रस्ता ढूँढ़ते हुये 
कभी किसी सफ़र से पूछो, आज़ादी क्या होती है।

हर रोज खुद से लड़ते हो, हर रोज खुद से डरते हो
कभी अपने उस डर से पूछो, आज़ादी क्या होती है।।

“जिस रिश्ते में यकीन न हो वो रिश्ता हमने तोड़ दिया है”

परवाह करना छोड़ दिया है
अपने हाल पर उन्हें छोड़ दिया है।

जिस रिश्ते में यकीन न हो
वो रिश्ता हमने तोड़ दिया है।

पथरीली राहों पर चलते-चलते
ज़िंदगी को नया मोड़ दिया है।

वक़्त ने मरहम लगा लगाकर
दिल को फिर से जोड़ दिया है।

नहीं भूले उस हादसे को अब तक
रूह को जिसने निचोड़ दिया है।

नफ़रत के काबिल है वो तो 
यक़ीन को जिसने तोड़ दिया है।

मेरे सवालों का जवाब दे ऐ ज़िंदगी
तूने मुझे अधमरा क्यों छोड़ दिया है।।

“एहसास के धारे”

तेरी साँसों में बहते हैं एहसास के धारे
धारे भी वो जो लगते हैं मन को प्यारे।

तेरी आँखों में रहते हैं आसमान के तारे
नीले आसमान की तरह हैं नैना तुम्हारे।

नैना जो के समझते हैं सिर्फ नैनों के इशारे
इशारे भी वो जो बन गये हैं जीने के सहारे।

सहारे भी ऐसे के जैसे बारिश की फुहारें
बस एक नील समंदर हैं, ना कोई किनारे।

साथ चलते हैं पर कभी नहीं मिलते किनारे
साथ होते हैं ये हरक़दम लहरों को निहारे।

जीने लगा हूँ मैं अब तेरी यादों के सहारे
बेशक तुम हो हमारे, और हम है तुम्हारे।

तेरी यादों से लिपटे हैं ख़यालों के सितारे
सितारों भी वो जो चमकते हैं रातों में सारे।

इस बात पर जज़्बात जग गये हैं सारे
आओ ना कुछ देर यूँही हम एक दूसरे को निहारे।

तेरी आँखों में रहते हैं आसमान के तारे
नीले आसमान की तरह हैं नैना तुम्हारे।

तेरी साँसों में बहते हैं एहसास के धारे
धारे भी वो जो लगते हैं मन को प्यारे। ।

#RockShayar

“इश्क़ जब होता है”

इश्क़ जब होता है पता नहीं चलता है
इश्क़ जब होता है छुपा नहीं रहता है
इश्क़ जब होता है दिल नहीं भरता है
इश्क़ जब होता है दिल नहीं डरता है
इश्क़ जब होता है कुछ और नहीं होता है
इश्क़ जब होता है सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।

इश्क़ की राहों में इम्तिहान लिखा होता है
इश्क़ की बाहों में इत्मिनान छुपा होता है
इश्क़ की आँखों में इक़रार बयां होता है
इश्क़ की यादों में इंतज़ार बड़ा होता है
इश्क़ की बातों में कोई लफ़्ज़ नहीं होता है
इश्क़ की बातों में सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है। 

इश्क़ का अंदाज़ बहुत अच्छा होता है
इश्क़ में एहसास बहुत सच्चा होता है
इश्क़ का किरदार मासूम बच्चा होता है
इश्क़ पर ऐतबार मालूम सच्चा होता है
इश्क़ का हमयार कोई शख़्स नहीं होता है
इश्क़ का हमयार सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।

इश्क़ जब होता है तब नींद उड़ जाती है
इश्क़ जब होता है इक डोर जुड़ जाती है
इश्क़ जब होता है अड़चन बहुत आती है
इश्क़ जब होता है धड़कन बढ़ जाती है
इश्क़ जब होता है कुछ और नहीं होता है
इश्क़ जब होता है सिर्फ इश्क़ ही होता है
कोई हमें भी बताये 
ये इश्क़ कैसे होता है
ये इश्क़ कैसे होता है।।

#RockShayar

“ना कोई उसूल, ना कोई तरीका चलता है मोहब्बत में”

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ना कोई उसूल, ना कोई तरीका चलता है मोहब्बत में
सोचने-समझने का सलीक़ा कहाँ होता है मोहब्बत में

बाक़ी रिश्ते सब एक तरफ़, बाक़ी बातें सब एक तरफ़
दिल से दिल का दिलशाद रिश्ता जुड़ता है मोहब्बत में

अपनी-अपनी फिक़्रों में, सब मशगूल हैं, मसरूफ़ हैं
कोई नहीं जानता ये दिल कितना तड़पता है मोहब्बत में

दिल के जिस हिस्से में हम बचाकर रखते हैं यादें अपनी
दिल का वो हिस्सा थोड़ा ज्यादा धड़कता है मोहब्बत में

नींद को गहरी नींद सुलाना, अपने यार की नींद उड़ाना
ये जगना-जगाना आँखों को अच्छा लगता है मोहब्बत में

सदियों से चला आ रहा है, दिल की वादी में कोई गा रहा है
के हर इंसां यहाँ दिल से एक इंसां बनता है मोहब्बत में।

अब और क्या कहें इरफ़ान, चाहे तू ये मान या ना मान
शायर अपने माशूक पर बेइंतहा लिखता है मोहब्बत में।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“सब अल्फ़ाज़ ख़त्म हो गये”

सब एहसास ख़त्म हो गये
सब जज़्बात ख़त्म हो गये।

ये किस दौर में आ गये हम
सब अल्फ़ाज़ ख़त्म हो गये।

ज़िन्दगी मजाक बनकर रह गयी
मजाक भी वो जिसपे न आये हंसी।

ख़ुशी के नाम से ही चिढ होती है
चिढ भी वो जो कम न होती कभी।

हद से ज्यादा बहुत गुस्सा आता है
गुस्सा भी वो जो खुद को जलाता है।

वफ़ा के नाम से ही ख़फ़ा हो जाते है
ख़फ़ा भी ऐसे के जैसे ज़फ़ा हो जाते है।

सब उम्मीदें ख़त्म हो गयी
सब हसरतें भस्म हो गयी।

अब उस दौर में आ गये हम
जहाँ मोहब्बतें रस्म हो गयी।।⁠⁠⁠⁠

“तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया”

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये सलीक़ा ग़ज़ल ने बताया

शोख़ियों के सुर्ख़ जोड़े में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
मन के मोतियों की माला पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो चैन से रहती हो, और बेचैनियाँ हमको देती हो
उनींदी आँखों में रातभर तुम ख़्वाब की तरह जगती हो

बड़ी ख़ूबसूरती से बुना गया है, तुम्हारी साँसों का ये ताना-बाना
पहली नज़र में तुम किसी शायर का ख़याल लगती हो

मेरे अलहदा अंदाज़ ने तुमको, इस क़दर दीवाना किया
कि ये अंदाज़ अच्छा लगता है मुझे, ये बार-बार कहती हो

तेरी आवाज़ के आगे हर आवाज़ बेआवाज़ हैं, क्योंकि
कानों में तुम खनकती हुई आवाज़ के झुमके पहनती हो

हुस्न की सुर्ख़ ज़री में सजी हुई कोई दुल्हन लगती हो
हया के हीरों का हार पहनकर तुम तो ख़ूब जचती हो

खुद तो सुकून से सोती हो, और रतजगे हमको देती हो
रात की आँखों में दीप जलाकर, नींद को तुम ठगती हो

पहली बार देखो, चाहे दूसरी बार, या फिर बार-बार
जब भी देखो तुम तो बस क़ुदरत का कमाल लगती हो

तुम्हारी एक तस्वीर देखी तो दिल में ये ख़याल आया
के तारीफ़ तो लाज़मी है, ये तरीका ग़ज़ल ने बताया।।

@RockShayar

“वक़्त”

लोगों से सुना था कि वक़्त बदलता है
पर वक़्त ने बताया कि लोग बदलते हैं।

बदलते-बदलते आखिरकार, वो इतना बदल जाते हैं
के खुद पहचान ना सके खुद को, इतना बदल जाते हैं।

वक़्त पर तोहमत लगायी जाती है बदलने की
वक़्त को तो आदत है, हरवक़्त बस चलने की।

चलते-चलते आखिरकार, वक़्त इतना तेज़ चलता है
के वक़्त को भी सोचने का, फिर वक़्त नहीं मिलता है।

वक़्त पर इल्ज़ाम लगाया जाता है, गुज़र जाने का
वक़्त को कहाँ वक़्त है, अपने रंज़ो ग़म सुनाने का।

गुज़रते-गुज़रते आखिर में, वक़्त इतना बूढ़ा हो जाता है
के खुद वक़्त के पास फिर ज्यादा वक़्त नहीं रह पाता है।

वक़्त पर तंज कसा जाता है, हमेशा कम होने का
वक़्त को कहाँ वक़्त मिलता है, ज़रा भी सोने का।

सोते-सोते आखिरकार, ये गहरी नींद में चला जाता है
के जहाँ से ना आये कोई दोबारा, ये वहाँ चला जाता है।

लोगों से सुना था कि वक़्त बदलता है
पर वक़्त ने बताया कि लोग बदलते हैं।

बदलते-बदलते आखिरकार, वो इतना बदल जाते हैं
के कोई पहचान ना सके उनको, इतना बदल जाते हैं।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा”

कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा
कि जैसे हूबहू मुझ जैसा लगा
कोई है जो मुझे कुछ ऐसे मिला
कि जैसे कई बरसों के बाद मिला
कोई है जो मेरी आँखों में बसता है
कोई है जो मेरी बातों पे हँसता है
कोई है जो मुझमें अब हरपल रहता है
कोई है जो मुझमें अब हरघड़ी बहता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जिसे मैं तलाश रहा था कब से
कोई है जिसे मैं माँग रहा था रब से
कोई है जो मेरी चाहतों में पलता है
कोई है जो मेरी आदतों में ढ़लता है
कोई है जो मेरे अश्क़ों में बहता है
कोई है जो मेरे लफ़्ज़ों में रहता है
कोई है जो मुझे अब अपना सा लगता है
कोई है जो मुझे अब सपना सा लगता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जिसे मैं शिद्दत से चाहता हूँ
कोई है जिसे मैं हसरत से देखता हूँ
कोई है जो मेरी नज़र में हरदम है
कोई है जो मेरी क़लम में हरदम है
कोई है जो मेरी हर डायरी में रहता है
कोई है जो मेरी हर शायरी में होता है
कोई है जो हरजगह अब मेरे साथ चलता है
कोई है जो हरलम्हा अब मेरे पास ही रहता है
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।

कोई है जो मुझे कुछ ऐसा लगा
कि जैसे रूबरू मुझ जैसा लगा
कोई है जो मुझे कुछ ऐसे मिला
कि जैसे कई दुआओं के बाद मिला
कोई है जो मेरी बातों में होता है
कोई है जो मेरी नींदों में सोता है
कोई है जिससे बहुत मोहब्बत करता हूँ
कोई है जिसपे मैं अब बेइंतहा मरता हूँ
अगर जानना चाहती हो, वो कौन है
तो जवाब यहीं है मेरा, के वो तुम हो
मेरी ज़िंदगी, मेरा सब कुछ
अब तुम ही हो, बस तुम ही हो।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“वो तो लौटकर फिर एक बार दोबारा वहीँ आना चाहते थे”

वो तो लौटकर फिर एक बार दोबारा वहीँ आना चाहते थे
मगर हम थे के फिर एक बार धोखा नहीं खाना चाहते थे

उसकी हर इक याद को, हमें मिटाने में बहुत वक़्त लगा
बहुत मुश्किल था वो दौर, जब हम नहीं जीना चाहते थे

अँधेरे ने इस क़दर जकड़ लिया था, के गिरफ़्त में पकड़ लिया था
अपने आस-पास ज़रा भी उजाला नहीं देखना चाहते थे

किसी अपने ने जब सपने तोड़े, मुश्किल से जो थे बस थोड़े
अपनी मर्ज़ी से तो हम कोई रिश्ता नहीं तोड़ना चाहते थे

ज़ख्म अपने हम छुपाते गये, खुद मरहम उन पर लगाते गये
अपनी वजह से कभी किसी को तकलीफ़ नहीं देना चाहते थे

मालूम नहीं एक रोज़ क्या हुआ था, मगर कुछ तो हुआ था
बस जो हुआ था उस पर कभी यक़ीन नहीं करना चाहते थे

सब कहते थे अच्छा लिखते हो, तुम बहुत सच्चा लिखते हो
हमने सब लिखा, बस अपनी कहानी नहीं लिखना चाहते थे

उसने तो बहुत कोशिश की, एक अर्से तक ‘इरफ़ान’
मगर हम थे के फिर एक बार दिल अपना नहीं तोड़ना चाहते थे।

#RockShayar

“तसव्वुर में मेरे आजकल तुम्हारी तस्वीर चलती है”

तसव्वुर में मेरे आजकल तुम्हारी तस्वीर चलती है
काग़ज़ पर अल्फ़ाज़ नहीं बल्कि तस्वीर उभरती है।

तेरी तस्वीर जब भी देखता हूँ, ख़यालों में खो जाता हूँ
मैं कुछ नहीं लिखता हूँ, तेरी तस्वीर मुझसे लिखवाती है।

तेरी रूह, तेरा नक़्श, तेरा नाम, सब चाँदी जैसे सफ़ेद हैं
दिल के अंधेरे कमरे में, तू रौशन कोई खिड़की लगती है।

तेरी खुशबू का अंदाज़ा तो इस बात से मालूम चलता है
कि जिस गली से गुज़रे तू, वो गली फूलों सी महकती है।

तेरे आने से मेरी ज़िंदगी का अधूरापन अब खत्म हुआ
ज़िंदगी पहले के बजाय इन दिनों ज्यादा मुस्कुराती है।

मुझे ये ख़बर है कि तुम्हें मेरे फ़ितूर की कोई ख़बर नहीं
सुन ओ बेख़बर, तेरी तस्वीर तो मेरी आँखों में बसती है।

दुआओं की दरख़्वास्त है, ये जुदाई नाकाबिले बर्दाश्त है
सुना है कि दुआओं से तक़्दीर की तस्वीर बदल जाती है।।⁠⁠⁠⁠

“अगर मैं तुमसे ये कहूँ”

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है।

रहने को या कहने को तो हम दोनों तन्हा हैं
फिर भी साथ-साथ हर जगह हर लम्हा हैं
मेरा हर लफ़्ज़ तुम्हारी खुशबू से वाकिफ़ हैं
तुम्हारा हर लम्स मेरी आरज़ू के काबिल हैं।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत सच्ची लगती हो
तो इस बात पर तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो रोज़ आता तुम्हारा ही सपना है।

सपने में तुम और भी हसीन लगती हो
चाँदनी में नहाई हुई नाज़नीन लगती हो
ख़ामोशी की चादर ओढ़े हुये हैं लब तुम्हारे
नैनों के वो ढ़ेरों ख़त पढ़े हुये हैं सब तुम्हारे।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत प्यारी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम साथ तुम्हारा ही देना है।

साथ देने और साथ रहने में बहुत फर्क़ है
ज़िंदगी का क्या है, ये ज़िंदगी तो बेदर्द है
एहसास को तलाश के तराजू में ना तोलो
गर महसूस करो तो एहसास ही हमदर्द है।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो बेबाक संग तुम्हारे ही बहना है।

बहते-बहते जाने जहां, कहाँ आ गये हैं हम
नील समंदर फैला जहाँ, वहाँ आ गये हैं हम
एक आहट है जो सुकून-ओ-राहत देती है
दिल ने दस्तक देकर सब मिटा दिये हैं ग़म।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है
मेरे दिल का फ़क़त तुमसे यह कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही जीना है।।

http://www.rockshayar.wordpress.com⁠⁠⁠⁠

“मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ”

बेशक ये सच है कि तुमसे जुड़ी हर चीज देखता हूँ
मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

ख़्वाब आये तो सिर्फ तुम्हारा आये, वरना ना आये
इसलिये तो तकिये के नीचे रखी तस्वीर देखता हूँ।

ये वक़्त वो वक़्त, पता नहीं कौन ज्यादा सख़्त
हर वक़्त बेवक़्त बस वक़्त की तस्वीर देखता हूँ।

जब भी तेरी याद सताये, रूह मेरी यह फड़फड़ाये
दिल के बंद कमरे में टंगी तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

नज़रों से क्या छुपा हैं, नज़रों में तो सब छुपा हैं
नज़रों के सफ़र में हमसफ़र तेरी तस्वीर देखता हूँ।

वैसे तो कई तस्वीरें हैं, देखने को इस जहान में
पर ना जाने क्यों मैं तुम्हारी ही तस्वीर देखता हूँ।

जब नींद ना आये इरफ़ान, बेचैनी करने लगे परेशान
तब तसव्वुर की आँखों से तेरी तस्वीर देखता हूँ।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“बदहवास ब्लू व्हेल”

जिस ज़िंदगी ने तकनीक को नई एक ज़िंदगी दी
वही तकनीक आज हमसे यह ज़िंदगी छीन रही।

ये तरक्कीपसंद इंसान न जाने किसे तरक्की कह रहा हैं
तमाशाई बनकर बस अपनी मौत का तमाशा देख रहा हैं।

कौन बुजदिल नामुराद है जो ऐसा जाल फेंक रहा है
ये कैसा खेल है जो मासूम बच्चों की जान ले रहा है।

बेचारी ब्लू व्हेल को तो पता तक नहीं
कि वो इतनी ज्यादा बदनाम हो गयी।

वर्चुअल टास्क को पूरा करने के चक्कर में
ज़िंदगी के बेहद ज़रूरी टास्क थम जाते हैं।

कोई हाथ पर ब्लेड से कट मार रहा हैं
तो कोई सुसाइड नोट तैयार कर रहा हैं
कोई रेल के आगे आ रहा हैं
तो कोई फिनाइल पी रहा हैं।

कोई फाँसी का फंदा चूम रहा हैं
तो कोई नशे में धुत झूम रहा हैं
कोई कलाई की नस काट रहा हैं
तो कोई अपना गला काट रहा हैं।

आज स्मार्टफोन चलाने वाले करोड़ों स्मार्ट यूजर्स को
ऐबदार एप्स और गड़बड़ गेम्स ने ग़ुलाम बना रखा हैं।

लानत है ऐसे तकनीकपरस्त समाज पर
जिसे डिजिटल नशे की बुरी लत लग गई।

राष्ट्रीयता का रोना रोने वालों
ज़रा इस पर भी तुम ग़ौर करो
इस ई-ग़ुलामी से आज़ादी का
अब ठोस प्रबंध कोई और करो।

जिस लाइफ ने टेक्नोलॉजी को एक न्यू लाइफ दी
वही टेक्नोलॉजी आज हमसे यह लाइफ छीन रही।।⁠⁠⁠⁠